06-01-2026, 06:10 PM
(This post was last modified: 06-01-2026, 06:11 PM by Dhamakaindia108. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
एक दिन आफिस में छुठी थी तो मैं कमरे में बैठकर लैपटॉप पर ऑफिस का काम कर रही थी तभी मयंक के फोन की घंटी बजी और वह किसी से बात करने लगे थोड़ी देर बात करने के बाद उन्होंने मुझे सारी बात बताई । मुझे कहां - " मेरे चचेरे भाई का लड़का " गोलू " जो इंजीनियरिंग कर रहा हैं उसके किसी परीक्षा का केंद्र कोलकाता में पड़ हैं वह पांच दिन के लिए परीक्षा देने आ रहा है हमारे यहां " यह बोलकर मयंक दुकान के लिए चले गये।
एक शाम जब मैं आफिस से घर आई ही थी तभी मेरे घर का दोरवेल बजा मैं दरवाजा खोला तो सामने एक लड़का खड़ा था वह देखने में काफी हैंडसम था . मैंने उससे पूछा " आप कौन ? " उसने अपना परिचय दिया और कहां " मैं गोलू " इतने में मयंक भी दुकान से आ गये उन्होंने उसे घर अंदर बुलाया । वह दोनों होल में बैठकर बात करने लगे । मैं जल्दी - जल्दी जाकर दो काप कॉफी बना कर लाई और उन दोनों को दिया फिर मयंक ने गोलू को बताया -" यह तेरी खुशबू चाची है तभी उसने मेरे पांव छूकर आशीर्वाद लिया " रात को जल्दी खाना खाकर सब सो गये।
( अब मेरे और गोलू के बीच किया हुआ यह आप गोलू बतायेगा )
मुझे कोलकाता आये हुए दो दिन हो चुके थे यह तीसरा था मयंक चाचा और खुशबू चाची सुबह सो रहे थे। मैं नहा-धोकर सोचा की काम वाली नौकरानी तो आयी नहीं है और खुशबू चाची भी अभी उठी नहीं है तो चाय कौन पिलायेगा। इसलिये मैं खुद ही रसोई में केवल टॉवल लपेट कर चाय बनाने चला गया। जब चाय बन कर तैयार हो गयी तो देखा खुशबू चाची रसोई में खड़ी-खड़ी मुझे देख रही थी।
वह बोली, “गोलू ! मुझे उठा लिया होता तो मैं ही चाय बना देती।”
मैंने कहा, “आप लोगों की नींद खराब ना हो इसलिये मैंने आप को नहीं जगाया और सोचा जब चाय बन जायेगी तो आप लोगों को जगा दुँगा।”
इतने में वह मेरे पास आकर खड़ी हो गयी। तब मैं चाय को छलनी से छान रहा था कि पता नहीं कैसे मेरा टॉवल खुल कर नीचे गिरा और मैं बिल्कुल नंगा हो गया क्योंकि अंदर कुछ भी नहीं पहना था। मुझे नंगा देखकर वह अवाक रह गयी और सिर झुका कर खड़ी हो गयी। मैंने तुरंत चाय का बर्तन नीचे रखा और टॉवल उठा कर लपेट लिया। जब तक मैंने नंगे जिस्म को टॉवल में कैद नहीं किया वो तिरछी नज़र से मेरे मोटे और लंबे लौड़े को घूर रही थी।
मैंने कहा, “सॉरी चाची !”
वो बोली, “कोई बात नहीं… तुमने जानबूझ कर तो नहीं किया… ये सब अचानक हो गया!”
फिर वह चाय की ट्रे लेकर अपने कमरे में चली गयी। मैं भी तैयार होकर परीक्षा केंद्र पर चला गया। शाम को जब सात बजे घर आया । घर आकर फ्रैश होके करीब पौने-नौ बजे चाचा जी और मैं खाना खाने बैठे। मैं बरमुडा और टी-शर्ट पहने हुए थे । तभी खुशबू चाची खाना लेकर आई जो कि आज पारदर्शी नाइटी पहनी थी जिस में से उनकी काली रंग की ब्रा और पैंटी साफ़ दिख रही थी।
अपना खाना खाते हुए चाचा जी बोले, “यार गोलू ! मैं कल की सुबह कोलकाता से बाहर जा रहा हूं दो दिन बाद आऊँगा… तुम चाची का खयाल रखना।”
मैंने कहा, “डोंट वरी चाचा ! ऑय विल टेक केयर!”
हम लोगों ने खाना खाया और अपने कमरों में सोने के लिये चले गये। मुझे नींद नहीं आ रही थी। करीब साढ़े-बारह बजे मैं उठकर पेशाब करने गया और वापस आते हुए देखा कि चाचा जी के कमरे की लाईट जल रही थी। मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि खिड़की से झाँक कर देखूँ कि वो क्या कर रहे हैं। मैंने खिड़की से झाँख कर देखा तो वो दोनों बिल्कुल नंगे थे और चाचा जी खुशबू चाची की चूत चटाई कर रहे थे। खुशबू चाची उनका सिर पकड़ कर उनका चेहरा अपनी चूत में दबा रही थी।
एक शाम जब मैं आफिस से घर आई ही थी तभी मेरे घर का दोरवेल बजा मैं दरवाजा खोला तो सामने एक लड़का खड़ा था वह देखने में काफी हैंडसम था . मैंने उससे पूछा " आप कौन ? " उसने अपना परिचय दिया और कहां " मैं गोलू " इतने में मयंक भी दुकान से आ गये उन्होंने उसे घर अंदर बुलाया । वह दोनों होल में बैठकर बात करने लगे । मैं जल्दी - जल्दी जाकर दो काप कॉफी बना कर लाई और उन दोनों को दिया फिर मयंक ने गोलू को बताया -" यह तेरी खुशबू चाची है तभी उसने मेरे पांव छूकर आशीर्वाद लिया " रात को जल्दी खाना खाकर सब सो गये।
( अब मेरे और गोलू के बीच किया हुआ यह आप गोलू बतायेगा )
मुझे कोलकाता आये हुए दो दिन हो चुके थे यह तीसरा था मयंक चाचा और खुशबू चाची सुबह सो रहे थे। मैं नहा-धोकर सोचा की काम वाली नौकरानी तो आयी नहीं है और खुशबू चाची भी अभी उठी नहीं है तो चाय कौन पिलायेगा। इसलिये मैं खुद ही रसोई में केवल टॉवल लपेट कर चाय बनाने चला गया। जब चाय बन कर तैयार हो गयी तो देखा खुशबू चाची रसोई में खड़ी-खड़ी मुझे देख रही थी।
वह बोली, “गोलू ! मुझे उठा लिया होता तो मैं ही चाय बना देती।”
मैंने कहा, “आप लोगों की नींद खराब ना हो इसलिये मैंने आप को नहीं जगाया और सोचा जब चाय बन जायेगी तो आप लोगों को जगा दुँगा।”
इतने में वह मेरे पास आकर खड़ी हो गयी। तब मैं चाय को छलनी से छान रहा था कि पता नहीं कैसे मेरा टॉवल खुल कर नीचे गिरा और मैं बिल्कुल नंगा हो गया क्योंकि अंदर कुछ भी नहीं पहना था। मुझे नंगा देखकर वह अवाक रह गयी और सिर झुका कर खड़ी हो गयी। मैंने तुरंत चाय का बर्तन नीचे रखा और टॉवल उठा कर लपेट लिया। जब तक मैंने नंगे जिस्म को टॉवल में कैद नहीं किया वो तिरछी नज़र से मेरे मोटे और लंबे लौड़े को घूर रही थी।
मैंने कहा, “सॉरी चाची !”
वो बोली, “कोई बात नहीं… तुमने जानबूझ कर तो नहीं किया… ये सब अचानक हो गया!”
फिर वह चाय की ट्रे लेकर अपने कमरे में चली गयी। मैं भी तैयार होकर परीक्षा केंद्र पर चला गया। शाम को जब सात बजे घर आया । घर आकर फ्रैश होके करीब पौने-नौ बजे चाचा जी और मैं खाना खाने बैठे। मैं बरमुडा और टी-शर्ट पहने हुए थे । तभी खुशबू चाची खाना लेकर आई जो कि आज पारदर्शी नाइटी पहनी थी जिस में से उनकी काली रंग की ब्रा और पैंटी साफ़ दिख रही थी।
अपना खाना खाते हुए चाचा जी बोले, “यार गोलू ! मैं कल की सुबह कोलकाता से बाहर जा रहा हूं दो दिन बाद आऊँगा… तुम चाची का खयाल रखना।”
मैंने कहा, “डोंट वरी चाचा ! ऑय विल टेक केयर!”
हम लोगों ने खाना खाया और अपने कमरों में सोने के लिये चले गये। मुझे नींद नहीं आ रही थी। करीब साढ़े-बारह बजे मैं उठकर पेशाब करने गया और वापस आते हुए देखा कि चाचा जी के कमरे की लाईट जल रही थी। मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि खिड़की से झाँक कर देखूँ कि वो क्या कर रहे हैं। मैंने खिड़की से झाँख कर देखा तो वो दोनों बिल्कुल नंगे थे और चाचा जी खुशबू चाची की चूत चटाई कर रहे थे। खुशबू चाची उनका सिर पकड़ कर उनका चेहरा अपनी चूत में दबा रही थी।


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