04-01-2026, 12:54 PM
तीन दिन बीत चुके थे अभी तक यूसुफ ने कुछ नहीं बोला था किसी को न ही सदफ को चोदने का प्रयास किया था हम दोनों ही बेफिक्र हो गये थे। पर यूसुफ रोज सदफ की पेंटी पर अपना वीर्य निकाल रहा था। सदफ जानते हुए भी कुछ नहीं बोल रही थी।
जैसे ही सदफ नहा कर आती थी वो उसकी गीली पैंटी को सूंघता और मूठ मारकर सारा पानी निकाल देता था। सदफ जानती थी कि अगर यूसुफ को रोका तो मैटर बड़ा हो सकता है इसलिए मैंने भी सदफ को उसे रोकने के लिए नहीं कहा।
एक हफ्ता बीत चुका था पर उसने सदफ के कपड़ों पर मूठ मारना नहीं छोड़ा , हम दोनों को सेक्स किए एक महीना होने वाला था हम दोनों तड़प रहे थे, मैने उसको अभिनव के घर चलने के लिए बोला पर उसने वहां जाने को फिर से मना कर दिया। वो जानती थी वहां जाने का मतलब थ्रीसम पक्का है। जगह न मिल पाने की वजह से हम दोनों ही जल बिन मछली की तरह तड़प रहे थे। वासना की आग दोनों इतने अंधे हो चुके थे कि हमें कोई भी मिलता उसके साथ ही सेक्स करने को तैयार थे। सदफ यूसुफ से पारिवारिक संबंध की वजह से बच रही थी। हमने डिसाइड किया कि सदफ बाथरूम और अपने कमरे में कैमरा सेट करेगी जब यूसुफ मूठ मारेगा उसको देखकर सदफ अपनी चूत में ऊंगली करेंगी और उसको देखकर में मूठ मारूंगा। मैने सदफ को बल्ब कैमरा दे दिया। और कैमरे का सॉफ्टवेयर हम दोनों के फोन में डाल अटैच कर दिया। सदफ ने जाकर कैमरा लगा दिया।
कहते है न किस्मत मेहरबान तो गधा पहलवान। कैमरा सदफ को नहाते हुए देखने के लिए, यूसुफ के लिए सदफ को ऊंगली करते देखने के लिए लिया था पर,सोचा क्या था हुआ क्या। उसी रात सदफ की बहन साहिबा भी अपने घर रहने आ गई। अगले दिन मैं जब उठा तो ऐसे ही कैमरा ऑन कर देखने लगा बाथरूम खाली था। मैने सदफ को मैसेज किया और बोला आ जा फटा फट बहुत मन है तुझे देखने का। 11 बजे बोलकर वो गायब हो गई। मै भी कैमरा बंद कर जाने ही वाला था कि कुछ खट की आवाज हुई ओर जो हुआ उसे देखकर मेरी आँखें खुली की खुली रह गई, सदफ की बहन अंदर आई और पानी की बाल्टी भरने लगी, उसने गेट बंद किया और अपने कपड़े उतारने लगी उसकी चूचियां मानो तराशा हुआ चमकता हुआ हीरा थी। उसकी शादी को 4 साल हो चुके थे पर जिस्म आज भी किसी कमसिन अप्सरा का ही था। साबुन लगने से उसका जिस्म मोती की तरह चमक रहा था, कब मेरे हाथ मेरे लण्ङ को मसल रहे थे पता ही नहीं चला।
शादी हुए चार साल होने के बाद भी उसकी चूत की फांके ऐसी थी कि अच्छे अच्छों को दीवाना बना दे । उसके जिस्म से गिरता हुआ पानी उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा था, उसके जिस्म पर पानी की बूंदे मोती की तरह चमक रही थी। इधर मेरा हाथ मेरे लण्ङ पर जोर जोर से चल रहा था, करीब पांच मिनट बाद मेरे लन्ड ने पिचकारी छोड़ दी। उसको देखकर जन्नत का अहसास हो गया था।
उसके बाद मैं काम करने में व्यस्त हो गया शाम तीन बजे याद आया सदफ से तो बात करना ही भूल गया, फोन देखा तो दो मिस्ड कॉल पड़ी थी, फटा फट उसको मैसेज किया थोड़ी देर में उसका रिप्लाई आया फ़्री हो तो मैं जाती हूं नहाने। उसको हां बोल फटा फट सारा काम निपटा कर कैमरा ऑन कर उसको देखने लगा। हम दोनों ही घबराए हुए थे आज क्योंकि जो हम करने जा रहे थे वो काफी खतरनाक हो सकता था हमारे लिए पर वासना में हमे कुछ नहीं सूझ रहा था सदफ ने अपनी पेंटी को जानकर चूत के अंदर उंगली से डाला ताकि उस पर चूत की मलाई लग जाए। और हुआ भी ऐसा ही उसने नहाने के बाद जान पूछकर उसको वही छोड़ दिया और कपड़े पहन अपने कमरे में आ गई।
जैसे ही सदफ नहा कर आती थी वो उसकी गीली पैंटी को सूंघता और मूठ मारकर सारा पानी निकाल देता था। सदफ जानती थी कि अगर यूसुफ को रोका तो मैटर बड़ा हो सकता है इसलिए मैंने भी सदफ को उसे रोकने के लिए नहीं कहा।
एक हफ्ता बीत चुका था पर उसने सदफ के कपड़ों पर मूठ मारना नहीं छोड़ा , हम दोनों को सेक्स किए एक महीना होने वाला था हम दोनों तड़प रहे थे, मैने उसको अभिनव के घर चलने के लिए बोला पर उसने वहां जाने को फिर से मना कर दिया। वो जानती थी वहां जाने का मतलब थ्रीसम पक्का है। जगह न मिल पाने की वजह से हम दोनों ही जल बिन मछली की तरह तड़प रहे थे। वासना की आग दोनों इतने अंधे हो चुके थे कि हमें कोई भी मिलता उसके साथ ही सेक्स करने को तैयार थे। सदफ यूसुफ से पारिवारिक संबंध की वजह से बच रही थी। हमने डिसाइड किया कि सदफ बाथरूम और अपने कमरे में कैमरा सेट करेगी जब यूसुफ मूठ मारेगा उसको देखकर सदफ अपनी चूत में ऊंगली करेंगी और उसको देखकर में मूठ मारूंगा। मैने सदफ को बल्ब कैमरा दे दिया। और कैमरे का सॉफ्टवेयर हम दोनों के फोन में डाल अटैच कर दिया। सदफ ने जाकर कैमरा लगा दिया।
कहते है न किस्मत मेहरबान तो गधा पहलवान। कैमरा सदफ को नहाते हुए देखने के लिए, यूसुफ के लिए सदफ को ऊंगली करते देखने के लिए लिया था पर,सोचा क्या था हुआ क्या। उसी रात सदफ की बहन साहिबा भी अपने घर रहने आ गई। अगले दिन मैं जब उठा तो ऐसे ही कैमरा ऑन कर देखने लगा बाथरूम खाली था। मैने सदफ को मैसेज किया और बोला आ जा फटा फट बहुत मन है तुझे देखने का। 11 बजे बोलकर वो गायब हो गई। मै भी कैमरा बंद कर जाने ही वाला था कि कुछ खट की आवाज हुई ओर जो हुआ उसे देखकर मेरी आँखें खुली की खुली रह गई, सदफ की बहन अंदर आई और पानी की बाल्टी भरने लगी, उसने गेट बंद किया और अपने कपड़े उतारने लगी उसकी चूचियां मानो तराशा हुआ चमकता हुआ हीरा थी। उसकी शादी को 4 साल हो चुके थे पर जिस्म आज भी किसी कमसिन अप्सरा का ही था। साबुन लगने से उसका जिस्म मोती की तरह चमक रहा था, कब मेरे हाथ मेरे लण्ङ को मसल रहे थे पता ही नहीं चला।
शादी हुए चार साल होने के बाद भी उसकी चूत की फांके ऐसी थी कि अच्छे अच्छों को दीवाना बना दे । उसके जिस्म से गिरता हुआ पानी उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा था, उसके जिस्म पर पानी की बूंदे मोती की तरह चमक रही थी। इधर मेरा हाथ मेरे लण्ङ पर जोर जोर से चल रहा था, करीब पांच मिनट बाद मेरे लन्ड ने पिचकारी छोड़ दी। उसको देखकर जन्नत का अहसास हो गया था।
उसके बाद मैं काम करने में व्यस्त हो गया शाम तीन बजे याद आया सदफ से तो बात करना ही भूल गया, फोन देखा तो दो मिस्ड कॉल पड़ी थी, फटा फट उसको मैसेज किया थोड़ी देर में उसका रिप्लाई आया फ़्री हो तो मैं जाती हूं नहाने। उसको हां बोल फटा फट सारा काम निपटा कर कैमरा ऑन कर उसको देखने लगा। हम दोनों ही घबराए हुए थे आज क्योंकि जो हम करने जा रहे थे वो काफी खतरनाक हो सकता था हमारे लिए पर वासना में हमे कुछ नहीं सूझ रहा था सदफ ने अपनी पेंटी को जानकर चूत के अंदर उंगली से डाला ताकि उस पर चूत की मलाई लग जाए। और हुआ भी ऐसा ही उसने नहाने के बाद जान पूछकर उसको वही छोड़ दिया और कपड़े पहन अपने कमरे में आ गई।


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