03-01-2026, 02:47 PM
(This post was last modified: 03-01-2026, 02:49 PM by maitripatel. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
वो मोबाइल जिसमे बस एक ही नंबर सेव्ड था अचानक बजने लगा। जब्बार चौंक कर उठा, रात के एक2 बज रहे थे। मलिका एकदम नंगी बेसूध उसके बगल मे सोई पड़ी थी। उसके पैर फैले हुए थे और उसकी चूत के पंखुड़िया फैली हुई थी। मैत्री पटेल की रचना[b]।
[/b]
"हम्म", उसने फोन उठाया।
"चिड़िया ने आज दाना चुग लिया।"
"वेरी गुड। उसे जाल मे फँसा कर ही छोड़ना।"
"डोन्ट वरी।"
जब्बार ने फोन काट दिया। कल्लन ने पहली सीधी चढ़ ली थी। अब देखना था आगे क्या होता है।
राजा यशवीर ने महसूस किया कि मेनका के आने के बाद उनका शानदार महल फिर से उन्हे घर लगने लगा था वरना तो पिछले दो सालों से बस वो यहा जैसे बस सोने और खाने के लिए आते थे।
पर अब उन्हे घर पहुँचने का इंतेज़ार रहता था। मेनका से बातें करने के लिए। वो भी उनसे हर मुद्दे पर बात कर लेती थी। उन्हे वो काफ़ी समझदार और सुलझी हुई लड़की लगती थी। राजासाहब उसे कंपनी के बारे मे भी बताते थे और उसके बिज़नेस के बारे मे ओपीनियन्स सुन कर प्रभावित हुए बिना नही रह सके थे। महल की ज़िम्मेदारी तो उसने बखूबी संभाल ली थी।
मेनका को भी अपने ससुर के साथ वक़्त बिताना अच्छा लगता था। उनके पास बताने को इतनी इंट्रेस्टिंग बातें थी और वो कितने नोलेजबल थे। पर सबसे अच्छा लगता था जैसे वो उसके बारे मे केअर करते थे।
धीरे-धीरे करके एक महीना गुज़र गया। जहा राजासाहब और मेनका एक दूसरे से काफ़ी फ्री हो गये थे। वही मेनका महसूस कर रही थी कि उसका पति उससे दूर होता जा रहा है। वैसे तो अपना मन टटोलने पर वो भी पाती थी कि वहा विश्वा के लिए प्यार नही है- होता भी कैसे जिस इंसान ने उसे बस अपनी प्यास बुझाने का ज़रिया समझा हो, उसके लिए प्यार कहा से आता। पर था तो वो उसका पति और उसे हो ना हो मेनका को उसकी फ़िक्र ज़रूर थी।
पिछले एक महीने से वो रात मे देर से आता, पूछने पर काम का बहाना बना देता। मेनका को शक़ हुआ कि कही कोई दूसरी औरत का चक्कर तो नही पर ऐसा नही था कि विश्वा को उसमे दिलचस्पी नही थी। रोज़ रात वो उसे पहले जैसे ही चोद्ता था, पर अब वो और बेचैन और बेसबरा रहने लगा था। उसकी आँखों मे जैसे कोई नशा हर वक़्त दिखता था।
मेनका बिस्तर पर पड़ी हुई यही सब सोच रही थी, बगल मे विश्वा उसे चोदकर अभी-अभी सोया था। उसका ध्यान अपने ससुर की ओर गया, कितना फ़र्क था बाप-बेटे मे। राजासाहब उसकी कितनी चिंता करते थे। अगर विश्वा की जगह उसकी शादी राजासाहब से हुई होती तो? ख़याल आते ही मेनका को अपने बचपने पर हँसी भी आई और थोड़ी शर्म भी। आख़िर वो उसके ससुर थे।। उसने करवट लेकर विश्वा की तरफ पीठ की और सोने लगी।
वही राजासाहब विश्वा के बारे मे सोच रहे थे। उन्हे आजकल वो थोड़ा अजीब लगने लगा था। नयी शादी थी पर बहू मे उसे कोई खास दिलचस्पी नही थी। एक बार उन्होने उसे बहू को घुमाने के लिए शहर ले जाने कहा था पर उसने काम का बहाना कर बात टाल दी। इतनी अच्छी बीवी पाकर तो लोग निहाल हो जाते हैं। उन्होने सोच लिया था कि विश्वा से खुल कर बात करेंगे। मेनका जैसी लड़की किस्मत वालों को मिलती है। उन्हे भी तो ऐसी ही बीवी चाहिए थी जो सिर्फ़ पत्नी ही नही दोस्त भी हो, उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर चलने का हौसला रखती थी। सरिता देवी एक बहुत अच्छी स्त्री, अच्छी मा थी पर राजासाहब की मित्र बनने की कोशिश उन्होने कभी नही की। इसीलिए तो वो शहर मे उन रखेलो को रखने लगे थे, "कितनी पुरानी बात है।", उन्होने सोचा। बेटे की मौत के बाद तो सेक्स की तरफ उनका ध्यान भी नही गया।
और फिर उन्हे भी ख़याल आया, "अगर मेनका हमारी बीवी होती तो? और उनके होटो पे मुस्कान आ गयी। "छी छीए! अपनी बहू के बारे मे ऐसे ख़याल! पर गैर होती तो! शायद अब तक मेरे लंड से खेलती होती"! सोचते हुए वो भी सो गये।
अगले दिन वो सुबह होनी थी जो दोनो की ज़िंदगी का रुख़ बदलने का आगाज़ करने वाली थी।
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आज के लिए बस यही तक[b]।[/b]
आपके कोमेंट्स की प्रतीक्षा में ..............
मैत्री पटेल के ओर से .....
[b]।। जय भारत ।।[/b]
[/b]
"हम्म", उसने फोन उठाया।
"चिड़िया ने आज दाना चुग लिया।"
"वेरी गुड। उसे जाल मे फँसा कर ही छोड़ना।"
"डोन्ट वरी।"
जब्बार ने फोन काट दिया। कल्लन ने पहली सीधी चढ़ ली थी। अब देखना था आगे क्या होता है।
राजा यशवीर ने महसूस किया कि मेनका के आने के बाद उनका शानदार महल फिर से उन्हे घर लगने लगा था वरना तो पिछले दो सालों से बस वो यहा जैसे बस सोने और खाने के लिए आते थे।
पर अब उन्हे घर पहुँचने का इंतेज़ार रहता था। मेनका से बातें करने के लिए। वो भी उनसे हर मुद्दे पर बात कर लेती थी। उन्हे वो काफ़ी समझदार और सुलझी हुई लड़की लगती थी। राजासाहब उसे कंपनी के बारे मे भी बताते थे और उसके बिज़नेस के बारे मे ओपीनियन्स सुन कर प्रभावित हुए बिना नही रह सके थे। महल की ज़िम्मेदारी तो उसने बखूबी संभाल ली थी।
मेनका को भी अपने ससुर के साथ वक़्त बिताना अच्छा लगता था। उनके पास बताने को इतनी इंट्रेस्टिंग बातें थी और वो कितने नोलेजबल थे। पर सबसे अच्छा लगता था जैसे वो उसके बारे मे केअर करते थे।
धीरे-धीरे करके एक महीना गुज़र गया। जहा राजासाहब और मेनका एक दूसरे से काफ़ी फ्री हो गये थे। वही मेनका महसूस कर रही थी कि उसका पति उससे दूर होता जा रहा है। वैसे तो अपना मन टटोलने पर वो भी पाती थी कि वहा विश्वा के लिए प्यार नही है- होता भी कैसे जिस इंसान ने उसे बस अपनी प्यास बुझाने का ज़रिया समझा हो, उसके लिए प्यार कहा से आता। पर था तो वो उसका पति और उसे हो ना हो मेनका को उसकी फ़िक्र ज़रूर थी।
पिछले एक महीने से वो रात मे देर से आता, पूछने पर काम का बहाना बना देता। मेनका को शक़ हुआ कि कही कोई दूसरी औरत का चक्कर तो नही पर ऐसा नही था कि विश्वा को उसमे दिलचस्पी नही थी। रोज़ रात वो उसे पहले जैसे ही चोद्ता था, पर अब वो और बेचैन और बेसबरा रहने लगा था। उसकी आँखों मे जैसे कोई नशा हर वक़्त दिखता था।
मेनका बिस्तर पर पड़ी हुई यही सब सोच रही थी, बगल मे विश्वा उसे चोदकर अभी-अभी सोया था। उसका ध्यान अपने ससुर की ओर गया, कितना फ़र्क था बाप-बेटे मे। राजासाहब उसकी कितनी चिंता करते थे। अगर विश्वा की जगह उसकी शादी राजासाहब से हुई होती तो? ख़याल आते ही मेनका को अपने बचपने पर हँसी भी आई और थोड़ी शर्म भी। आख़िर वो उसके ससुर थे।। उसने करवट लेकर विश्वा की तरफ पीठ की और सोने लगी।
वही राजासाहब विश्वा के बारे मे सोच रहे थे। उन्हे आजकल वो थोड़ा अजीब लगने लगा था। नयी शादी थी पर बहू मे उसे कोई खास दिलचस्पी नही थी। एक बार उन्होने उसे बहू को घुमाने के लिए शहर ले जाने कहा था पर उसने काम का बहाना कर बात टाल दी। इतनी अच्छी बीवी पाकर तो लोग निहाल हो जाते हैं। उन्होने सोच लिया था कि विश्वा से खुल कर बात करेंगे। मेनका जैसी लड़की किस्मत वालों को मिलती है। उन्हे भी तो ऐसी ही बीवी चाहिए थी जो सिर्फ़ पत्नी ही नही दोस्त भी हो, उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर चलने का हौसला रखती थी। सरिता देवी एक बहुत अच्छी स्त्री, अच्छी मा थी पर राजासाहब की मित्र बनने की कोशिश उन्होने कभी नही की। इसीलिए तो वो शहर मे उन रखेलो को रखने लगे थे, "कितनी पुरानी बात है।", उन्होने सोचा। बेटे की मौत के बाद तो सेक्स की तरफ उनका ध्यान भी नही गया।
और फिर उन्हे भी ख़याल आया, "अगर मेनका हमारी बीवी होती तो? और उनके होटो पे मुस्कान आ गयी। "छी छीए! अपनी बहू के बारे मे ऐसे ख़याल! पर गैर होती तो! शायद अब तक मेरे लंड से खेलती होती"! सोचते हुए वो भी सो गये।
अगले दिन वो सुबह होनी थी जो दोनो की ज़िंदगी का रुख़ बदलने का आगाज़ करने वाली थी।
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आज के लिए बस यही तक[b]।[/b]
आपके कोमेंट्स की प्रतीक्षा में ..............
मैत्री पटेल के ओर से .....
[b]।। जय भारत ।।[/b]


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