31-12-2025, 12:41 PM
(25-03-2022, 03:14 PM)The_Writer Wrote: “मैं जब बस में चढ़ा उस वक़्त कंडक्टर उस आंटी को, (यानि आयुष की मम्मी को) एक स्लीपर की ओर ले जा रहा था.. लेकिन आंटी को स्लीपर में चढ़ने में दिक्कत हो रही थी; तब मैंने आगे बढ़ कर उसकी हेल्प कर दी. जब वो स्लीपर में चली गई तब अचानक से मुझे एक आईडिया आया --- कंडक्टर वहीँ मेरे बगल में खड़ा था तो मैंने उससे थोड़ी ऊँची आवाज़ में पूछा की क्या मुझे भी कोई स्लीपर मिल सकती है? तो उसने नहीं में जवाब दिया --- बोला की ‘बस यही एक स्लीपर खाली है जिसमें दो जन जा सकते हैं.’ इस पर मैं उससे बोला,
“आंटी तो एक अकेली हैं; मैं चला जाऊँ इस स्लीपर में?”
कंडक्टर मुझे सिर से पैर तक देख कर बोला,
“पर तुम तो इनके परिचित नहीं हो इसलिए मैं तुम्हें इस पर जाने को नहीं बोल सकता.”
उसका जवाब सुन कर मैं मायूस हो गया.. ये देख कर कंडक्टर आगे बोला,
.......
(क्रमशः)
Bahut maja aa raha hai.....aisa lagta hai ki launda mujhe hi chodne ke liye aa raha hai.. .meri to fir se paani aane laga hai sab jagah se....tang apne aap khul gai....


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