30-12-2025, 07:51 PM
(This post was last modified: 30-12-2025, 08:03 PM by Dhamakaindia108. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
अब मैं खुशबू के ऊपर से हट गया और उसको घोड़ी की तरह बन जाने को कहा। खुशबू उठकर ज़मीन पर आ गयी और घोड़ी की तरह हो गयी। मैंने उसकी कमर पकड़कर अपना लण्ड पीछे से खुशबू की चूत में डाल दिया। खुशबू फिर दर्द से कराहने लगी पर कुछ ही देर में खूशबू का दर्द कम हो गया और खुशबू को मज़ा आने लगा। खुशबू अब अपनी गाँड को पीछे ढकेल-ढकेल कर ताल से ताल मिला रही थी। दस-पंद्रह मिनट के बाद मैं खुशबू की चूत में ही झड़ गया और अपना लण्ड खुशबू की चूत से बाहर निकाल कर खुशबू के मुँह में दे दिया। खुशबू ने मेरे लण्ड को चाट-चाट कर साफ़ किया और हम दोनों साथ साथ ही ज़मीन पर ही लेट गये।
फिर हम दोनों ने नंगे ही खाना खाया और खाना खाने के बाद हम फिर शराब पी रहे थे तो मैंने खुशबू से कहा, “खुशबू जी , और मज़ा दोगी?” खुशबू नशे में थी। उसने मुस्कुराते हुए अपना सिर हाँ में हिला दिया और बोली, “मज़ा दूँगी भी और लूटुँगी भी!” फिर खुशबू ने मेरा लण्ड, जोकि फिर खड़ा हो गया था, अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर बाद मैंने अपनी बीच की मोटी उंगली खुशबू की चूत में घुसा दी। “उफ़्फ़....!” खुशबू तड़प उठी। मेरी उंगली खुशबू की चूत में अंदर बाहर होने लगी। खुशबू को भी मज़ा आने लगा और खुशबू मेरा लण्ड चूसते हुए आहें भरने लगी।
फिर मैंने खुशबू के मुँह में से अपना लण्ड निकाला और उसे लेटने को कहा। मैं भी उठा और खुशबू की टाँगों के बीच में आ गया। उसके पैर उठाकर अपने कंधों पर रख लिये। मेरा तना हुआ लण्ड खुशबू की चूत से केवल एक इंच की ही दूरी पर था। फिर मैंने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा, “चोदूँ, मेरी रानी?” खुशबू ने अपना सर हाँ में हिला दिया और अपनी गाँड आगे ढकेलते हुए अपनी चूत मेरे लण्ड से सटा दी और बोली, “धीरे-धीरे चोदना प्लीज़! बहुत दर्द होता है... बहुत ही बड़ा है तुम्हारा!” फिर मैंने उसकी चूची को पकड़ा और निप्पलों को मसलते हुए अपने लण्ड को उसकी चूत में घुसाने लगा। अभी तक मैंने हल्का सा धक्का मारा था लेकिन आधा लण्ड खुशबू की चूत में घुस चुका था। खुशबू की चूचियों को दबाते हुए और दोनों निप्पलों को खींचते हुए मैं बोला, “एक बार में पुरा अंदर लोगी?” खुशबू तो एक दम जोश और नशे में थी और उसने दर्द की परवाह ना करते हुए कहा, “हाँ जानू!” फिर मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। इससे पहले कि खुशबू कुछ समझ पाती कि एक ही धक्के में मैंने अपना पूरा लण्ड वापस खुशबू की चूत में गहराई तक घुसा दिया। खुशबू अपनी चींख बड़ी मुश्किल से रोक पायी।
कुछ देर बाद मैंने खुशबू को तेजी से चोदना शुरू कर दिया। खुशबू के सैंडल मेरे हर धक्के के साथ मेरी गर्दन के पास थपथपाते थे जिससे मुझे और जोश आने लगा और मैं खुशबू को और तेजी के साथ चोदने लगा। मेरे हाथ अभी भी खुशबू की चूचियों और निप्पलों को मसल रहे थे और खुशबू को दर्द हो रहा था लेकिन उसे फिर भी मज़ा आ रहा था क्योंकि आज दो साल बाद कोई उसकी चूत की प्यास को बुझा रहा था वो भी इतने मोटे तगड़े लण्ड से। थोड़ी देर बाद मैंने खुशबू के पैरों को अपने कंधों से उठाया और खुशबू की टाँगें पीछे मोड़कर उसके कंधों की तरफ़ झुका दीं। अब खुशबू एक दम दोहरी हो गयी और खुशबू की चूत और ऊपर उठ आयी। फिर आगे होकर मैंने उसके पैरों के पास उसकी टाँगों को पकड़ कर बहुत ही तेजी के साथ खुशबू की चुदाई करनी शुरू कर दी। मुझे मेरे लण्ड के सुपाड़े पर उसकी बच्चेदानी का मुँह महसूस होने लगा था। खुशबू और भी जोश में आ गयी और अपनी आँखें बंद कर लीं। खुशबू के मुँह से केवल मस्ती भरी आवाज़ें निकल रही थी, “हाय मेरे जानू! ऐसे ही… और कस-कस कर जोर से चोदो... और जोर से चोदो... फाड़ दो मेरी चूत को!”
मेरे चेहरे का पसीना खुशबू की चूचियों पर टपक रहा था लेकिन लण्ड रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। खुशबू अब तक दो-तीन बार झड़ चुकी थी। कुछ ही देर में मेरे लण्ड ने फिर उसकी चूत में पानी छोड़ दिया था। मैं ऐसे ही थोड़ी देर खुशबू के ऊपर पड़ा रहा और खुशबू मुझे चूमती रही। फिर मैं खुशबू के ऊपर से हट कर उसके बगल में लेट गया।
थोड़ी देर बाद खुशबू ने मेरे मुर्झाये हुए लण्ड को अपने हाथों में लिया और अपने होंठों को दाँत से काटते हुए बोली, “अगर बुरा ना मानो तो मैं तुम्हारे लण्ड को फिर से चूसना चाहती हूँ, प्लीज़!!!” मैं बोला, “इसमें इजाज़त की क्या बात है... ये लण्ड तो अब सिर्फ़ तुम्हारा ही है!” खुशबू मेरे पैरों के बीच में आकर बैठ गयी और दोनों हाथों से लण्ड को पकड़कर लण्ड के सुपाड़े पर धीरे से किस किया। खुशबू ने मेरी तरफ़ देखकर आँखमारी और वापस अपने होंठ मेरे लण्ड पर रख दिये। लण्ड को पकड़कर चूसते हुए खुशबू अपने मुँह को ऊपर-नीचे करने लगी और मेरा लण्ड बिल्कुल तन गया। फिर खुशबू उठकर मेरे ऊपर आ गयी और अपने हाथ से लण्ड को पोज़िशन में करके अपनी चूत के बीच में सटा दिया और ऊपर से दबाव डालने लगी पर सिर्फ़ सुपाड़ा ही खुशबू की चूत में घुस पाया। उसने तरसती निगाहों से मेरी तरफ़ देखा। मैं उसका इशारा समझ गया। मैंने उसकी कमर को पकड़कर ज़ोर से नीचे किया तो एक झटके से आधे से ज्यादा लण्ड खुशबू की चूत में घुस गया। अब खुशबू धीरे-धीरे ऊपर नीचे होने लगी और मैं खुशबू की कमर को पकड़े हुए था। खुशबू ने अपनी आँखें बंद कर लीं और चुदाई का मज़ा लेने लगी। उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी और वो इतनी तेज़ हो गयी कि पता ही नहीं लगा कब हम दोनों झड़ गये। फिर हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में लिपटकर लेट गये।
थोड़ी देर बाद खुशबू उठकर बाथरूम में गयी। मैंने देखा कि चलते हुए नशे में खुशबू के कदम बीच-बीच में बहक रहे थे। उसने अभी भी ऊँची हील वाले सेंडल पहने हुए थे और नशे में डगमगाते हुए खुशबू के गुदाज़ चूतड़ बहुत ही कामुक ढंग से हिल रहे थे। ये देखकर मेरा लण्ड फिर तनने लगा था। जब वो बाथरूम से बाहर अयी तो मैं भी बाथरूम में जाकर थोड़ा प्रेश हुआ। बाथरूम से निकला तो खुशबू पैग बना रही थी। मैं अपना ग्लास लेकर सोफे पर बैठ गया और वो मेरी टाँगों के बीच में नीचे बैठ गयी। अचानक उसने मेरा लण्ड पकड़ कर अपने व्हिस्की के ग्लास में डुबा दिया और फिर बाहर निकाल कर अपने मुँह में लिया। खुशबू इसी तरह मेरा लण्ड व्हिस्की में डुबा-डुबा कर चूसने लगी।
मेरा लण्ड फिर से पत्थर की तरह सख्त होकर तन गया था। मैं बोला, “खुशबू , अब तुम फिर से घोड़ी बन जाओ!” खुशबू ने जल्दी से अपना गिलास खाली किया और ज़मीन पर घोड़ी बन गयी। तब मैंने कहा, “खुशबू , अब मैं तुम्हारी गाँड मारुँगा!” खुशबू थोड़ा डरते हुए बोली, “लेकिन तुम्हारा लण्ड तो बहुत मोटा है!” फिर मैं बोला, “तुम घबराओ मत... मैं आराम से करुँगा!” खुशबू अब काफी नशे में थी और मस्ती में चहकते हुए बोली, “ओके, तुम सिर्फ मेरे बॉस ही नहीं बल्कि जानेमन हो, मेरा सब कुछ तुम्हारा ही तो है! चाहे जो करो... आज तुम्हारी खुशबू तुम्हारे लण्ड की ग़ुलाम है! मारो मेरी गाँड को, फाड़ दो इसे भी... मैं कितना भी चिल्लाऊँ... तुम रुकना मत.... अपनी खुशबू की गाँड बेदर्दी से पेलना!”
मैं उठकर उसके पीछे आ गया और खुशबू की गाँड के छेद पर ढेर सारा थूक लगा दिया। मेरा लण्ड तो पहले से ही खुशबू के थूक से सना हुआ था। फिर मैंने खुशबू की गाँड के छेद पर अपने लण्ड की टोपी रखकर खुशबू की कमर को पकड़ लिया और धीरे-धीरे अपने लण्ड को खुशबू की गाँड में घुसाने लगा। खुशबू ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। अभी तक लण्ड का सिर्फ़ सुपाड़ा ही घुस पाया था। फिर मैंने खुशबू की गाँड के छेद को हाथों से फैलाया और फिर से खुशबू की कमर पकड़ कर एक धक्का दिया। खुशबू दर्द से अपना सर कुत्तिया की तरह इधर-उधर हिलाने लगी। मैंने थोड़ा ज़ोर और लगाया तो खुशबू और भी ज़ोर-ज़ोर से चींखने-चिल्लाने लगी। मैं बोला, “खुशबू मेरी जान! अगर तुम ऐसे चिल्लाओगी तो कैसे काम बनेगा? अभी तो ये तीन इंच ही अंदर घुसा है!” खुशबू दर्द से चिल्लाते हुए ही बोली, “मेरे चिल्लाने कि तुम परवाह मत करो! घुसा दो अपने तमाम लण्ड को मेरी गाँड में... फाड़ डालो इसे!”
फिर मैंने खुशबू के मुँह पर एक हाथ रख दिया और उसकी कमर को पकड़ कर धक्के पर धक्का लगाते हुए अपने लण्ड को खुशबू के गाँड में घुसाने लगा। लण्ड खुशबू की गाँड में और गहराई तक घुसने लगा तो खुशबू दर्द के मारे छटपटाने लगी। मैं बोला, “शाबाश खुशबू! मेरा लण्ड अब तुम्हारी गाँड में करीब छः इंच तक घुस चुका है!” दर्द से खुशबु कि हालत अभी भी खराब हो रही थी। मैं पूरी ताकत से खुशबू की गाँड में लंड ठूँसने में लगा था और रुकने का नाम ही नहीं ले रहे था। खुशबू की गाँड चौड़ी होती गयी और दर्द भी बढ़ता गया। गाँड में दर्द की वजह से खुशबू सिसकियाँ लेती रही। खुशबू के आँसू भी निकल आये पर खुशबू ने हिम्मत नहीं हारी। खुशबू की गाँड में अपना लण्ड पूरा घुसाने के बाद मैं रुक गया।
थोड़ी देर में दर्द धीरे-धीरे कम हो गया तो मैंने फिर धीरे-धीरे पेलना शुरू कर दिया। अब मैं अपना आधा लण्ड बाहर निकालता और वापस एक ही धक्के में पूरा लण्ड उसकी गाँड में अंदर तक घुसेड़ देता। हालांकि दर्द अभी खतम नहीं हुआ था पर फिर भी खुशबू अब अपनी गाँड मेरे हर धक्के के साथ आगे-पीछे हिलाने लगी थी। अब मैं पुरी स्पिड से खुशबू को चोदने लगा। अब मैं अपना पुरा लण्ड बाहर निकालता और वापस तेजी के साथ अंदर घुसा देता। खुशबू को तो यकीन ही नहीं था कि इतना लंबा और मोटा लण्ड वो कभी अपनी गाँड में ले पायेगी।
मैं बहुत मज़े ले-ले कर खुशबू की गाँड मारने में लगा हुआ था। खुशबू भी और ज्यादा मस्त हो गयी थी और अपनी गाँड ढकेलते हुए बोली, “पेलो मुझे! मेरी गाँड फाड़ दो! अपनी खुशबू की गाँड चौड़ी कर दो! बेदर्दी से पेलो मुझे... मेरे जनू! मेरे बॉस!” मैं खुशबू की गाँड पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारता हुआ अपना लण्ड उसकी गाँड में गहराई तक घुसेड़-घुसेड़ कर पेलता रहा। वो भी कभी चींखती तो कभी सिसकती और कभी मुजे ज़ोर-ज़ोर से गाँड पेलने को कहती और फिर चींखने लगती। थोड़ी देर में मैं खुशबू की गाँड में ही झड़ गया और हम दोनों दोने ज़मीन पर ही लेट गये। दोनों की साँसें फूली हुई थीं। बीस पच्चीस मिनट ऐसे ही पड़े रहने के बाद मैं खुशबू को अपनी बांहों में सहरा दे कर बेडरूम में ले गया और हम दोनों बिस्तर पे लेट कर सो गये।
अगले दिन सुबह खुशबू बहुत खुश थी और अब खुशबू तो मेरे लण्ड की दीवानी बन गयी थी और अगला एक महीने कैसे बीत पता ही नहीं चला अब खुशबू से सिर्फ मोबाइल पे हि बात होती है
फिर हम दोनों ने नंगे ही खाना खाया और खाना खाने के बाद हम फिर शराब पी रहे थे तो मैंने खुशबू से कहा, “खुशबू जी , और मज़ा दोगी?” खुशबू नशे में थी। उसने मुस्कुराते हुए अपना सिर हाँ में हिला दिया और बोली, “मज़ा दूँगी भी और लूटुँगी भी!” फिर खुशबू ने मेरा लण्ड, जोकि फिर खड़ा हो गया था, अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर बाद मैंने अपनी बीच की मोटी उंगली खुशबू की चूत में घुसा दी। “उफ़्फ़....!” खुशबू तड़प उठी। मेरी उंगली खुशबू की चूत में अंदर बाहर होने लगी। खुशबू को भी मज़ा आने लगा और खुशबू मेरा लण्ड चूसते हुए आहें भरने लगी।
फिर मैंने खुशबू के मुँह में से अपना लण्ड निकाला और उसे लेटने को कहा। मैं भी उठा और खुशबू की टाँगों के बीच में आ गया। उसके पैर उठाकर अपने कंधों पर रख लिये। मेरा तना हुआ लण्ड खुशबू की चूत से केवल एक इंच की ही दूरी पर था। फिर मैंने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा, “चोदूँ, मेरी रानी?” खुशबू ने अपना सर हाँ में हिला दिया और अपनी गाँड आगे ढकेलते हुए अपनी चूत मेरे लण्ड से सटा दी और बोली, “धीरे-धीरे चोदना प्लीज़! बहुत दर्द होता है... बहुत ही बड़ा है तुम्हारा!” फिर मैंने उसकी चूची को पकड़ा और निप्पलों को मसलते हुए अपने लण्ड को उसकी चूत में घुसाने लगा। अभी तक मैंने हल्का सा धक्का मारा था लेकिन आधा लण्ड खुशबू की चूत में घुस चुका था। खुशबू की चूचियों को दबाते हुए और दोनों निप्पलों को खींचते हुए मैं बोला, “एक बार में पुरा अंदर लोगी?” खुशबू तो एक दम जोश और नशे में थी और उसने दर्द की परवाह ना करते हुए कहा, “हाँ जानू!” फिर मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। इससे पहले कि खुशबू कुछ समझ पाती कि एक ही धक्के में मैंने अपना पूरा लण्ड वापस खुशबू की चूत में गहराई तक घुसा दिया। खुशबू अपनी चींख बड़ी मुश्किल से रोक पायी।
कुछ देर बाद मैंने खुशबू को तेजी से चोदना शुरू कर दिया। खुशबू के सैंडल मेरे हर धक्के के साथ मेरी गर्दन के पास थपथपाते थे जिससे मुझे और जोश आने लगा और मैं खुशबू को और तेजी के साथ चोदने लगा। मेरे हाथ अभी भी खुशबू की चूचियों और निप्पलों को मसल रहे थे और खुशबू को दर्द हो रहा था लेकिन उसे फिर भी मज़ा आ रहा था क्योंकि आज दो साल बाद कोई उसकी चूत की प्यास को बुझा रहा था वो भी इतने मोटे तगड़े लण्ड से। थोड़ी देर बाद मैंने खुशबू के पैरों को अपने कंधों से उठाया और खुशबू की टाँगें पीछे मोड़कर उसके कंधों की तरफ़ झुका दीं। अब खुशबू एक दम दोहरी हो गयी और खुशबू की चूत और ऊपर उठ आयी। फिर आगे होकर मैंने उसके पैरों के पास उसकी टाँगों को पकड़ कर बहुत ही तेजी के साथ खुशबू की चुदाई करनी शुरू कर दी। मुझे मेरे लण्ड के सुपाड़े पर उसकी बच्चेदानी का मुँह महसूस होने लगा था। खुशबू और भी जोश में आ गयी और अपनी आँखें बंद कर लीं। खुशबू के मुँह से केवल मस्ती भरी आवाज़ें निकल रही थी, “हाय मेरे जानू! ऐसे ही… और कस-कस कर जोर से चोदो... और जोर से चोदो... फाड़ दो मेरी चूत को!”
मेरे चेहरे का पसीना खुशबू की चूचियों पर टपक रहा था लेकिन लण्ड रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। खुशबू अब तक दो-तीन बार झड़ चुकी थी। कुछ ही देर में मेरे लण्ड ने फिर उसकी चूत में पानी छोड़ दिया था। मैं ऐसे ही थोड़ी देर खुशबू के ऊपर पड़ा रहा और खुशबू मुझे चूमती रही। फिर मैं खुशबू के ऊपर से हट कर उसके बगल में लेट गया।
थोड़ी देर बाद खुशबू ने मेरे मुर्झाये हुए लण्ड को अपने हाथों में लिया और अपने होंठों को दाँत से काटते हुए बोली, “अगर बुरा ना मानो तो मैं तुम्हारे लण्ड को फिर से चूसना चाहती हूँ, प्लीज़!!!” मैं बोला, “इसमें इजाज़त की क्या बात है... ये लण्ड तो अब सिर्फ़ तुम्हारा ही है!” खुशबू मेरे पैरों के बीच में आकर बैठ गयी और दोनों हाथों से लण्ड को पकड़कर लण्ड के सुपाड़े पर धीरे से किस किया। खुशबू ने मेरी तरफ़ देखकर आँखमारी और वापस अपने होंठ मेरे लण्ड पर रख दिये। लण्ड को पकड़कर चूसते हुए खुशबू अपने मुँह को ऊपर-नीचे करने लगी और मेरा लण्ड बिल्कुल तन गया। फिर खुशबू उठकर मेरे ऊपर आ गयी और अपने हाथ से लण्ड को पोज़िशन में करके अपनी चूत के बीच में सटा दिया और ऊपर से दबाव डालने लगी पर सिर्फ़ सुपाड़ा ही खुशबू की चूत में घुस पाया। उसने तरसती निगाहों से मेरी तरफ़ देखा। मैं उसका इशारा समझ गया। मैंने उसकी कमर को पकड़कर ज़ोर से नीचे किया तो एक झटके से आधे से ज्यादा लण्ड खुशबू की चूत में घुस गया। अब खुशबू धीरे-धीरे ऊपर नीचे होने लगी और मैं खुशबू की कमर को पकड़े हुए था। खुशबू ने अपनी आँखें बंद कर लीं और चुदाई का मज़ा लेने लगी। उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी और वो इतनी तेज़ हो गयी कि पता ही नहीं लगा कब हम दोनों झड़ गये। फिर हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में लिपटकर लेट गये।
थोड़ी देर बाद खुशबू उठकर बाथरूम में गयी। मैंने देखा कि चलते हुए नशे में खुशबू के कदम बीच-बीच में बहक रहे थे। उसने अभी भी ऊँची हील वाले सेंडल पहने हुए थे और नशे में डगमगाते हुए खुशबू के गुदाज़ चूतड़ बहुत ही कामुक ढंग से हिल रहे थे। ये देखकर मेरा लण्ड फिर तनने लगा था। जब वो बाथरूम से बाहर अयी तो मैं भी बाथरूम में जाकर थोड़ा प्रेश हुआ। बाथरूम से निकला तो खुशबू पैग बना रही थी। मैं अपना ग्लास लेकर सोफे पर बैठ गया और वो मेरी टाँगों के बीच में नीचे बैठ गयी। अचानक उसने मेरा लण्ड पकड़ कर अपने व्हिस्की के ग्लास में डुबा दिया और फिर बाहर निकाल कर अपने मुँह में लिया। खुशबू इसी तरह मेरा लण्ड व्हिस्की में डुबा-डुबा कर चूसने लगी।
मेरा लण्ड फिर से पत्थर की तरह सख्त होकर तन गया था। मैं बोला, “खुशबू , अब तुम फिर से घोड़ी बन जाओ!” खुशबू ने जल्दी से अपना गिलास खाली किया और ज़मीन पर घोड़ी बन गयी। तब मैंने कहा, “खुशबू , अब मैं तुम्हारी गाँड मारुँगा!” खुशबू थोड़ा डरते हुए बोली, “लेकिन तुम्हारा लण्ड तो बहुत मोटा है!” फिर मैं बोला, “तुम घबराओ मत... मैं आराम से करुँगा!” खुशबू अब काफी नशे में थी और मस्ती में चहकते हुए बोली, “ओके, तुम सिर्फ मेरे बॉस ही नहीं बल्कि जानेमन हो, मेरा सब कुछ तुम्हारा ही तो है! चाहे जो करो... आज तुम्हारी खुशबू तुम्हारे लण्ड की ग़ुलाम है! मारो मेरी गाँड को, फाड़ दो इसे भी... मैं कितना भी चिल्लाऊँ... तुम रुकना मत.... अपनी खुशबू की गाँड बेदर्दी से पेलना!”
मैं उठकर उसके पीछे आ गया और खुशबू की गाँड के छेद पर ढेर सारा थूक लगा दिया। मेरा लण्ड तो पहले से ही खुशबू के थूक से सना हुआ था। फिर मैंने खुशबू की गाँड के छेद पर अपने लण्ड की टोपी रखकर खुशबू की कमर को पकड़ लिया और धीरे-धीरे अपने लण्ड को खुशबू की गाँड में घुसाने लगा। खुशबू ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। अभी तक लण्ड का सिर्फ़ सुपाड़ा ही घुस पाया था। फिर मैंने खुशबू की गाँड के छेद को हाथों से फैलाया और फिर से खुशबू की कमर पकड़ कर एक धक्का दिया। खुशबू दर्द से अपना सर कुत्तिया की तरह इधर-उधर हिलाने लगी। मैंने थोड़ा ज़ोर और लगाया तो खुशबू और भी ज़ोर-ज़ोर से चींखने-चिल्लाने लगी। मैं बोला, “खुशबू मेरी जान! अगर तुम ऐसे चिल्लाओगी तो कैसे काम बनेगा? अभी तो ये तीन इंच ही अंदर घुसा है!” खुशबू दर्द से चिल्लाते हुए ही बोली, “मेरे चिल्लाने कि तुम परवाह मत करो! घुसा दो अपने तमाम लण्ड को मेरी गाँड में... फाड़ डालो इसे!”
फिर मैंने खुशबू के मुँह पर एक हाथ रख दिया और उसकी कमर को पकड़ कर धक्के पर धक्का लगाते हुए अपने लण्ड को खुशबू के गाँड में घुसाने लगा। लण्ड खुशबू की गाँड में और गहराई तक घुसने लगा तो खुशबू दर्द के मारे छटपटाने लगी। मैं बोला, “शाबाश खुशबू! मेरा लण्ड अब तुम्हारी गाँड में करीब छः इंच तक घुस चुका है!” दर्द से खुशबु कि हालत अभी भी खराब हो रही थी। मैं पूरी ताकत से खुशबू की गाँड में लंड ठूँसने में लगा था और रुकने का नाम ही नहीं ले रहे था। खुशबू की गाँड चौड़ी होती गयी और दर्द भी बढ़ता गया। गाँड में दर्द की वजह से खुशबू सिसकियाँ लेती रही। खुशबू के आँसू भी निकल आये पर खुशबू ने हिम्मत नहीं हारी। खुशबू की गाँड में अपना लण्ड पूरा घुसाने के बाद मैं रुक गया।
थोड़ी देर में दर्द धीरे-धीरे कम हो गया तो मैंने फिर धीरे-धीरे पेलना शुरू कर दिया। अब मैं अपना आधा लण्ड बाहर निकालता और वापस एक ही धक्के में पूरा लण्ड उसकी गाँड में अंदर तक घुसेड़ देता। हालांकि दर्द अभी खतम नहीं हुआ था पर फिर भी खुशबू अब अपनी गाँड मेरे हर धक्के के साथ आगे-पीछे हिलाने लगी थी। अब मैं पुरी स्पिड से खुशबू को चोदने लगा। अब मैं अपना पुरा लण्ड बाहर निकालता और वापस तेजी के साथ अंदर घुसा देता। खुशबू को तो यकीन ही नहीं था कि इतना लंबा और मोटा लण्ड वो कभी अपनी गाँड में ले पायेगी।
मैं बहुत मज़े ले-ले कर खुशबू की गाँड मारने में लगा हुआ था। खुशबू भी और ज्यादा मस्त हो गयी थी और अपनी गाँड ढकेलते हुए बोली, “पेलो मुझे! मेरी गाँड फाड़ दो! अपनी खुशबू की गाँड चौड़ी कर दो! बेदर्दी से पेलो मुझे... मेरे जनू! मेरे बॉस!” मैं खुशबू की गाँड पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारता हुआ अपना लण्ड उसकी गाँड में गहराई तक घुसेड़-घुसेड़ कर पेलता रहा। वो भी कभी चींखती तो कभी सिसकती और कभी मुजे ज़ोर-ज़ोर से गाँड पेलने को कहती और फिर चींखने लगती। थोड़ी देर में मैं खुशबू की गाँड में ही झड़ गया और हम दोनों दोने ज़मीन पर ही लेट गये। दोनों की साँसें फूली हुई थीं। बीस पच्चीस मिनट ऐसे ही पड़े रहने के बाद मैं खुशबू को अपनी बांहों में सहरा दे कर बेडरूम में ले गया और हम दोनों बिस्तर पे लेट कर सो गये।
अगले दिन सुबह खुशबू बहुत खुश थी और अब खुशबू तो मेरे लण्ड की दीवानी बन गयी थी और अगला एक महीने कैसे बीत पता ही नहीं चला अब खुशबू से सिर्फ मोबाइल पे हि बात होती है


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