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Adultery खुशबू : गोल्ड डिगर हाउसवाइफ 2
ऑडिटिंग ऑफिसर - दीप

मैं " दीप " छब्बीस साल का एक हट्टा-कट्टा लड़का और मैं कंपनी में ऑडिटिंग ऑफिसर हूँ और हमारे कंपनी की शाखायें देश के अलग-अलग शहरों में हैं और अक्सर मुझे काम के सिलसिले में दूसरे शहरों की शाखाओं में दो-तीन महीनों के लिये जाना पड़ता है। मैं शादीशुदा नहीं हूँ इसलिये मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं होती है।

एक बार मुझे काम के सिलसिले में तीन महीने के लिये कोलकाता के शाखा जाना पड़ा। वहाँ मेरी मुलाकात श्री सिन्हा से हुई उन्होंने मुझे कंपनी की सारी जानकारी और डॉक्यूमेंट दिया और कहां " अगर किसी चीज की जरूरत पड़ने पर वह खुशबू से मदद ले सकते हैं " और उन्होंने मेरी मुलाकात ‘ खुशबू ’ से करवाई। जो कि डायरेक्टर थी कंपनी की । उसकी उम्र 38-39 साल की थी और उसकी शादी को 5 साल हुए थे। खुशबू जो कि बेहद खूबसूरत थी और उसका फिगर ३६-३०-३८ था। उसका भरा-भरा सा जिस्म बेहद सुडौल था और मैं तो उसके चूतड़ों पर बहुत फिदा था। वो जब ऊँची हील की सेंडल पहन कर चलती थी तो गाँड मटका-मटका कर चलती थी। खुशबू काफी बनठन कर दफ्तर आती थी। एक महीने में ही काम के दरमियाँ काफी घुलमिल गयी थी। वह मुझे ‘ सर ’ कहकर बुलाती थी क्योंकि वो मुझसे जुनियर थी। मैं भी उम्र में उससे छः-सात साल छोटा होने की वजह से उसे ‘ खुशबू जी ’ कहकर बुलाता था ।

एक बार बातों-बातों में उसने मुझसे रिक्वेस्ट की कि “सर! आप चाहें तो मेरा प्रमोशन हो सकता है... इसलिये आप हेड ऑफिस में मेरी सफारिश करेंगे तो मेरा प्रमोशन हो जायेगा और मैं इसके लिये कुछ दे भी सकती हूँ!” तब मैंने कहा, “आप क्या दे सकती हो?” तो वो कुटिल मुस्कान भरते हुए अदा के साथ बोली, “चाय पानी!” मैं भी हंस कर रह गया। उसके बाद से तो मैंने महसूस किया कि वो मुझे अजीब निगाहों से देखती थी और उसकी नज़रों में काम वासना की ललक नज़र आती थी। पहले मैं समझ नहीं सका कि वो ऐसे क्यों देखती है। फिर मुझे लगा कि या तो वो प्रमोशन के लिये ऐसा कर रही है या फिर दो साल से प्यासी होगी। खुशबू को देख कर अक्सर मेरा लण्ड भी पैंट में तंबू की तरह खड़ा हो जाता था।

एक दिन उसने मुझे डिनर के लिये इन्वाइट किया। उस दिन शुक्रवार था तो ऑफिस से मैं उनके साथ ही उसके होटल के लिये निकला। रास्ते में उसने व्हिस्की की बोतल खरीद ली और होटल पहुंचते ही उसने डिनर का ऑर्डर दे दिया। होटल पहुँच कर उसने मुझे रूम में बिठाया और खुद फ्रेश होने अंदर चली गयी। जब वो ऊँची हील की सैंडल खटखटाती हुई व्हिस्की की बोतल, सोडा, बर्फ और ग्लास वगैरह लेकर वापस आयी तो मैंने देखा कि खुशबू ने अपना मेक-अप दुरुस्त किया हुआ था और कपड़े बदलकर दूसरा सलवार-सूट पहन लिया था।

उसने दो ग्लास में पैग बनाये तो मैंने चौंकते हुए पूछा, “खुशबू जी! आप भी ये शौक फरमाती हैं क्या?” वो अदा से हंसते हुए बोली, “क्यों औरतें शराब का मज़ा नहीं ले सकती क्या...?” और फिर एक ग्लास मुझे पकड़ाते हुए बोली, “अकेलापन दूर करने के लिये कभी-कभी पी लेती हूँ!” फिर हम दोनों व्हिस्की पीते हुए बातें करने लगे। जब हम दो-दो पैग पी चुके तो मैंने महसुस किया कि खुशबू कुछ ज्यादा ही खिलखिला कर हंस रही थी और बार-बार मुझे अजीब निगाहों से देखती थी और बातों-बातों में कभी-कभी आँख मार देती या अपने होंठों को अपने दाँतों से दबा लेती थी। मैं समझ गया कि वो आज गरम हो चुकी है और उसे नशा चढ़ने लगा है। उसकी हरकतों से मेरा लण्ड भी सख्त हो गया था।

वो मेरे सामने सोफे पर बैठी थी और जब वो अपने लिये एक और पैग बनाने उठी तो मैंने खुशबू का हाथ पकड़ कर उसको अपनी तरफ़ खींच लिया। उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया तो मैंने उठकर खुशबू को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और खुशबू के होंठों को चूमने और चूसने लगा। खुशबू एकदम पागल सी हो रही थी जैसे जन्नत का मज़ा आ रहा हो। मैं खुशबू की ज़ुबान भी चूसे जा रहा था और मेरे हाथ खुशबू की कमर पर चल रहे थे। फिर मैं एक हाथ से खुशबू चूची दबने लगा तो खुशबू बेताब होने लगी। मैंने खुशबू के कान में कहा, “बहुत ज्यादा भूखी हो आप तो खुशबू जी!” खुशबू सिर्फ़, “जी सर..” ही कह सकी।

मेरा हाथ अब धीरे-धीरे खुशबू की सलवार के नाड़े पर आ गया और मैंने खुशबू को चूमते हुए एक झटके में ही सलवार के नाड़े को खोल दिया। खुशबू की लाल सलवार सरक कर नीचे उसके पैरों के पास ज़मीन पर गिर गयी। वो नीचे बिल्कुल नंगी थी। उसकी गोरी चूत बिल्कुल चिकनी थी और उस पर झाँटों का एक रेशा भी नहीं था। उसकी चूत बेहद गीली हो गयी थी। खुशबू ने मेरी पैंट में से लण्ड बाहर निकाल लिया और सहलाते हुए बोली, “हायऽऽऽऽ अल्लाहऽऽऽ काफी मोटा और लंबा है सर आपका ये!”

फिर मैं खुशबू की टाइट कमीज़ ऊपर की तरफ़ करने लगा तो खुशबू और जोश में आ गयी और खुशबू ने सहुलियत के लिये अपने हाथ ऊपर की तरफ़ कर दिये। मैंने उसकी कमीज़ उतार दी। कमीज़ उतारने के बाद पीछे से खुशबु की ब्रा का हुक खोल दिया और एक झटके से खुशबू की ब्रा को उतार कर फेंक दिया। अब वो बिल्कुल नंगी थी और ऊँची हील के सैंडल में बहुत ही सैक्सी लग रही थी।

फिर मैंने उसको दीवार की तरफ़ मुँह करके खड़ा किया और पीछे से उसकी चूचियों को दोनों हाथों में पकड़ लिया और मसलने लगा। जब मैंने उसके निप्पलों को मसलना शुरू किया तो खुशबू सिसकरियाँ भरने लगी। मैंने उसको दीवार के सहारे और दबा दिया। खुशबू की गाँड पर मेरा लण्ड सटा हुआ था और खुशबू के दोनों चूचियां मेरी मुठ्ठी में थे। मैं उंगली और अंगूठे से खुशबु के निप्प्लों को बेदर्दी से मसलने लगा। खुशबू तो जोश में एक दम जैसे पागल सी हो रही थी। दस मिनट बाद मैं खुशबू को पकड़ कर टेबल के पास ले गया और उसे टेबल पर बैठने को कहा। खुशबू टेबल पर बैठ गयी। अब मेरा मोटा और लंबा तना हुआ लण्ड खुशबू के सामने था। उसने तुरंत ही मेरा लण्ड हाथ में पकड़ा और सहलाने लगी। मैं बोला, “रानी, मुँह में लेकर चूसो इसको!” खुशबू लण्ड को पकड़ कर अपनी जीभ से चाटने लगी। थोड़ी ही देर बाद खुशबू ने लण्ड अपने मुँह में ले लिया और लण्ड के सुपाड़े को चूसने लगी। खुशबू भी जोश में अपने आपको काबू में नहीं रख पा रही थी और बोली, “ दीप , प्लीज़ जल्दी कुछ करो ना! नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगी!” फिर मैंने खुशबू की गाँड को टेबल के किनारे पर किया और उसकी सुडौल टाँगों के बीच आकर खड़ा हो गया।

खुशबू टेबल पर आधी लेटी हुई थी। मैंने खुशबू की टाँगों को हाथों से पकड़ कर फैला दिया और अपने लण्ड के सुपाड़े को उसकी चूत के बीच में रख दिया। फिर एक झटका दिया तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया। खुशबू दर्द से चिल्ला उठी, “ऊऊईईई! उफ़ उफ़ उफ़!! मर जाऊँगी मैं! आहहह रुक जाओ दीप ! प्लीज़ऽऽ!” खुशबू कराहने लगी तो मैं रुक गया और अपने लण्ड को खुशबू की चूत से बाहर निकल लिया।

फिर मैंने एक तकिया लिया और खुशबू की गाँड उठाकर उसकी गाँड के नीचे रख दिया। अब खुशबू की चूत थोड़ा और ऊपर हो गयी। मैं खुशबू के ऊपर झुक गया और खुशबू के होंठों को अपने मुँह में ले लिया। फिर मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा एक बार फिर उसकी चूत के मुहाने पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा। खुशबू की चींख निकलते-निकलते रह गयी क्योंकि मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में दबा रखा था। खुशबू दर्द से कराह उठी तो मैं रुक गया। इसी दौरान खुशबू ने कहा ' उसके पति का लण्ड छोटा है और उसकी चूत का छेद छोटे लण्ड के लिये ही मुनासिब है। '

अब मेरा आधा लण्ड घुस चुका था। दो-तीन मिनट तक मैं उसके ऊपर बिना हिलेडुले लेटा रहा। फिर मैंने धीरे-धीरे लण्ड को अंदर बाहर करना शुरू किया। खुशबू अभी भी दर्द से कराह रही थी। अचानक मैंने एक जोरदार धक्का दिया तो मेरा लण्ड सरसराता हुआ खुशबू की चूत में और ज्यादा अंदर तक घुस गया। खुशबू चिल्लाते हुए रुकने के लिये कहने लगी लेकिन मैं नहीं रुका और खुशबू को तेजी से चोदने लगा। बिजली की तरह मेरा लण्ड खुशबू की चूत में अंदर बाहर हो रहा था। जैसे ही खुशबू की चींख कुछ कम होती मैं एक धक्का ज़ोर से लगा देता था और खुशबू फिर चींख पड़ती थी। कुछ देर तक मैं इसी तरह चोदता रहा। धीरे-धीरे मेरा पूरा लण्ड खुशबू की चूत की गहराई तक जगह बना चुका था और तेजी के साथ अंदर-बाहर हो रहा था। खुशबू दर्द से तड़प रही थी। आठ-दस मिनट के बाद खुशबू को भी मज़ा आने लगा। उसने अपने हाथ मेरी कमर पर कैंची की तरह कस दिये और अपनी गाँड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी। मैं बोला, “शाबाश जानेमन! अब तो तुम्हें भी चुदवाने में मज़ा आ रहा है!” मैं उसको लगभग पंद्रह-बीस मिनट तक चोदता रहा। इस दौरान खुशबू तीन-चार बार झड़ चुकी थी लेकिन मेरा लण्ड था कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था।
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RE: खुशबू : गोल्ड डिगर हाउसवाइफ 2 - by Dhamakaindia108 - 30-12-2025, 07:27 PM



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