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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#31
अब आगे…..
उसने लाईट जलाई तो रिशा और राजू नंग-धड़ंग थे और चुदाई में लगे थे. वहाँ पास ही बिस्तर पर रिशा की ब्रा और पैंटी पड़े हुए थे. राजू का लंड रिशा की चूत में पूरा घुसा हुआ था और रिशा की चूत की धुनाई कर रहा था . रिशा मस्ती में कराहती हुई चुदाई का आनंद उठा रही थी .



सरिता को आपने सामने यूं देख राजू की तो सिटी पिट्टी गुम हो गई राजू एक झटके से उतरा और अपना पजामा उठा कर अपने लंड को छिपा लिया. इधर रिशा ने भी अपना नंगा जिस्म चादर से ढक लिया. राजू तो डर के मारे कांप रहा था.

सरिता ने उसे एक झापड़ लगाया. …कमीने जिस थाली में खाता है उसमें छेद करता है और रिशा क्या है सब और कब से चल रहा है ये खेल तुम दोनों के बीच .

राजू नंगा ही अपनी कमीज उठा कर अपने कमरे में भाग गया.

सरिता ने किवाड़ बंद कर लिया, लाईट बंद कर दी.
बेड पर सरिता रिशा से चिपट गयी.

रिशा खिलखिलाती हुई बोली- मेरा होने वाला था. आप और पांच मिनट बाद आतीं, तो काम पूरा हो जाता.

सरिता ने अपने होंठ रिशा के होंठों से भिड़ा दिए और पूछा- कैसा है राजू का औज़ार?

रिशा बोली- बहुत दमदार है. ख़ूब लंबा और मोटा. चूत के अंदर तक जाकर चोट करता है

यह कहकर रिशा ने सरिता की चूत में उंगली घुसा दी और बोली- चुद मैं रही थी और पानी आपकी मुनिया बहा रही है.

सरिता बोली...क्या करती. तुम दोनों को खिड़की से देख गरम हो गई थी और अपने हाथों से अपनी चूत रगड़ रही थी

रिशा बोली ..अब क्या करना है?

सरिता बोली- मैं राजू को नीचे लेकर जाती हूँ और उससे अपनी मुनिया को शांत कराती हूँ. अब तू चुपचाप उंगली करके सो जा, मैं चली! रिशा बोली दीदी ऐसा जुल्म तो ना करो. इतने दमदार लंड के होते हुए मैं उंगली से खुद को ठंडा करू?

रिशा बोली- यहीं बुला लेते हैं. दोनों एक साथ कर लेंगी.

सरिता बोली- कुछ तो शर्म कर, तेरी सास हूँ मैं!

दोनों हंस पड़ीं.

सरिता बोली- मैं जाती हूँ, तू राजू को नीचे भेज और उससे कहना कि मुझसे माफ़ी मांगे वरना सुबह उसकी छुट्टी हो जायगी.

कह कर सरिता कमरे से चली गयी.
रिशा ने राजू को फोन करके बुलाया.

राजू आया तो रिशा उससे चिपट गयी.

वह दिखावटी घबराहट दिखाते हुए बोली- दीदी बहुत गुस्सा हैं. अब तू एक काम कर. नीचे जा और कैसे भी उन्हें मना ले. उन्होंने हमारी वीडियो बना ली है, इसलिए उनसे पंगा मत लेना. वो जो भी कहे चुप चाप मान लेना

डरा और सहमा हुआ राजू नीचे पहुंचा.

कमरे से तो लालाजी के खर्राटों की आवाज आ रही थी.

सरिता बराबर में बैठक पर सोफे पर अधलेटी थी.
राजू कमरे में घुसा और सरिता के पैर पकड़ लिए.

सरिता ने उसे धक्का दिया और कहा- तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर की इज्जत से खेलने की… सुबह तू अपना सामान बाँध लेना, मुझे सुबह दिखाई नहीं देना चाहिए!

राजू वहीं नीचे बैठ गया और बोला- ऐसा जुल्म नहीं करें, मैं आपकी गुलामी करूंगा. आप जैसा कहेंगी, वैसा ही करूंगा! इसमें मेरा कोई कसूर नहीं है. भाभी ने ही मुझे ऐसा करने को कहा और मैं बहक गया. सरिता झूठ मूठ का नाटक करते हुए बिफ़र पड़ी.

कमीने मेरी बहू पर इल्ज़ाम लगाने की तेरी हिम्मत कैसी हुई। सुबह ही लाला जी को बोल तुझे सिक्युरिटी के हवाले करवाती हूं

राजू ने पैर पकड़ लिए और बोला- मुझे माफ़ कर दो मालिकिन जैसा आप कहेंगी, वैसा ही होगा! मैंने इस घर का नमक खाया है। आप लोगो के सिवा मेरा और कोई नहीं.
नमक खाया है तो नमक हरामी करने की तेरी हिम्मत कैसी हुई। अपनी आँखों से देखा है मैंने कैसे तू बहू को ऊपर चढ़ा था और कितनी बेरहम से उसे चोद रहा था
मैं तो नौकर हूं मालिकन। भाभी ने मुझे धमकाया और वो सब करने के लिए मजबूर किया..अब आप बोलिए मैं मारता क्या ना करता.

सरिता कुटिल मुस्कान मुस्कुरा दी और बोली- फिर आज से तू वही करेगा जैसा मैं कहूंगी और आज से तू लालाजी से ज्यादा मेरा वफादार रहेगा … बोल मंजूर है?

कुछ सोचे समझे बिना ही राजू झट से बोल पड़ा हां मालिकन सब मंजूर है

सरिता बोली- चल अब किवाड़ बंद कर और मेरे जिस्म की तेल के साथ मालिश कर!

राजू उठ खड़ा हुआ और डरते हुए राजू ने किवाड़ बंद किए.

सरिता बोली- लाईट भी बंद कर और खूब अच्छे से मालिश कर . राजू सरसो के तेल की शीशी ले फर्श पर सरिता की टांगों के पास बैठ गया। सरिता उस वक्त एक लाल रंग की नाइटी डाल कर बैठी हुई थी। नाइटी दोनों छोर से एक पतली सी डोरी से बंधी हुई थी जिसमें से सरिता के उन्नत उरोज आधे से ज्यादा दिख रहे थे नीचे उसने ब्रा पहले ही निकाल दी थी.

[Image: Gebr-Qf-OWUAAi3jd.jpg]

पनी मालिकन को इस स्थिति में देख राजू की सिटी पिटी गायब हो चुकी थी लेकिन फिर भी वो डरते हुए सरिता की टांगों के पास ज़मीन पर बैठ गया.

राजू हाथो में तेल ले धीरे-धीरे सरिता की टांगो की मालिश करने लगा. सरिता ने उसे जोर से झिडकते हुए बोला... हाथों में दम नहीं है क्या... ऊपर तो रिशा के साथ खूब जोर दिखा रहा था. वैसे कब से चल रहा है तुम दोनो के बीच ये सब। राजू डरता हुआ बोला मालकिन कसम से आज दूसरी बार ही था। भाभी ने ही मुझे मजबूर किया ये सबके लिए.

हां जानती हूं जैसे तू बहुत दूध का धुला है। मैंने कई बार तुझे बहू और मुझे घूरते हुए देखा है. चल अब बातें कम कर और मेरी कमर तक मालिश कर। राजू का हाथ धीरे-धीरे मालिश करता हुआ सरिता की कमर की तरफ बढ़ने लगा.
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 30-12-2025, 12:53 PM



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