29-12-2025, 01:46 PM
उनकी वीडियो को देख मैने भी उस रात तीन बार मुट्ठी मारी। अगले दिन सुबह उठते ही मैने सदफ को कॉल की ओर अनजान बनते हुए कल के हाल चाल पूछे, उसने बड़े प्यार से झूठ बोला और कहा कि कल उसकी तबियत ज्यादा खराब थी इसलिए वो बात नहीं कर पाई।
अभिनव खुश था इसलिए वो हरियाणा से वापस ही नहीं आया उसका और सदफ का आज भी मिलने का प्रोग्राम था
दोनों के जिस्म में बेतहाशा आग लगी थी कल 4 बार चुदने के बाद भी सदफ आज उससे चुदने को तैयार थी। एग्जाम आने वाले थे सदफ वापस आ गई थी। हमारी बातें लगभग रोज ही होती थी मैने कभी भी उसको नहीं बताया कि मुझे पता है कि वो अभिनव से हरियाणा में चूद चुकी थी। वो बड़ी चालाकी से हम दोनों से बाते कर रही थी, और हम दोनों जानते हुए मजे ले रहे थे। हमे थ्रीसम करना था अब उसके साथ , सपने में हम दोनों मिल कर उसे चोद भी चुके थे। पर एक चीज हम दोनों ही नहीं समझ पा रहे थे की सदफ हम दोनों से क्यों चूद रही थी । पर हमें क्या करना था हमे हुस्न मल्लिका चोदने को मिल रही थी तो हम लगे पड़े थे ।
उसके आते ही मैने उसको मिलने बुलाया और वो अभिनव के घर आने को मान भी गई। शाम को मैने उसको घर से पिक कर लिया। जल्दी जल्दी में वो बुर्के में ही आ गई थी तो रास्ते से उसको कपड़े दिलाए और सीधा गाड़ी अभिनव के रूम पर लगा दी। तीनों ने खाना खाया और सदफ कपड़े बदलने चली गई मैने अभिनव को कमरे में ही छुपा दिया।
सदफ बाथरूम से जैसे ही बाहर आई काले सूट में ऐसा लगा कोई अप्सरा धरती पर आ गई हो। काले सूट में से उसकी चूचियां बाहर झाक रही थी उसको देखते ही मेरा खड़ा हो गया था। मैने तुरन्त उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसको बेहताशा चूमने लगा। वो भी मेरा साथ दे रही थी। मुझे उसे चोदे दो महीने बीत चुके थे मैं और देरी नहीं करने वाला था। मैने उसकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया और उसके कपड़े उतार दिए।अब सदफ के शरीर पर केवल ब्रा और पैंटी थी। काली ब्रा में सफेद दूध जैसी चूचिया कहर ढा रही थी।
मैं बिस्तर पर लेट गया सदफ मेरी छाती के ऊपर लेट कर मेरे होंठों को चूमने लगी। मैं भी उसका पूरा साथ दे रहा था।
कुछ देर बाद मेरे हाथ सदफ की पीठ पर फिरने लगे और सदफ की ब्रा की हुक खोल दी। उसकी चूचियां मेरे हाथ में थी दूध जैसी सदफ और रुई से भी मुलायम उसकी चूचियो को में मुंह में भर कर पीने लगा। थोड़ी देर में मैने सदफ के बालों को पकड़कर उसको नीचे कर दिया और खुद ऊपर आ गया।
हम दोनों के होंठ अब भी एक-दूसरे से चिपके हुए थे, और अपने हाथों से सदफ की गोल-गोल चूचियों को बारी-बारी से मसल रहा था।कुछ देर बाद मेरे हाथ सदफ के पेट और जाँघ पर फिरने लगे। फिर मेरा हाथ सदफ की पैंटी के अंदर जाकर अपनी अँगुलियों से उसकी चूत को मसलने लगा।
कुछ देर बाद सदफ मेरे सिर को धक्का देकर अपनी चूत के पास ले आई। मैं उसकी पैंटी को नीचे करने लगा तो सदफ ने भी अपने चूतड़ों को उठा दिया।पैंटी सरक कर घुटने के पास आ गई।सदफ ने अपने पैरों की मदद से पैंटी को उतार फेंका।
अब उसकी गोरी चिकनी चूत मुझे दिखाई दे रही थी। जिसे उसने कुछ देर पहले ही शेव किया था। बहनचोद अभिनव ने कुछ ही चुदाई मैं चूत को भोसड़ा बनाने की पूरी कोशिश की थी। बहन के लोड़े ने इतनी प्यारी चूत की फांके बना दी थी चार बार की चुदाई में ही। में सदफ की चूत की फाँकों को फैला-फैला कर देख रहा था, की कितना नुकसान किया है भोसडीके ने।
कुछ ही देर में मैने अपना मुँह चूत में लगा कर चूसने लगा और सदफ भी चूतड़ उठा-उठा कर चूत चुसवा रही थी।
ये सब देखते-देखते मेरी उँगली कब उसकी चूत में घुस चुकी, पता ही नहीं चला!
8 मिनट की चूत चुसाई में सदफ की चूत ने मेरे मुंह पर ही पानी छोड़ दिया।
वो हाँफने लगी।मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से अच्छे से साफ़ करके सदफ के बगल में आकर लेट गया।
कुछ देर तक हम दोनों लेटकर एक-दूसरे को चूमते-चाटते रहे।
फिर सदफ ने अपने हाथ मेरे जाँघिया के अंदर डाल कर मेरे लंड को मसलने लगी।
कुछ ही देर में सदफ ने अपने हाथों से मेरे लंड को बाहर निकाला सदफ ने जब अपने हाथों से उसके लंड को नीचे दबाया तो मेरे लंड का लाल सुपाड़ा बाहर निकल गया।फिर वो उठी और अपना मुँह मेरे लंड के पास ले जाकर जीभ से उसके लंड को चाटने लगी। लंड के चारों तरफ जीभ फिरा-फिरा के उसके लंड को चाट रही थी।फिर सदफ लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
वो ज़बरदस्ती अपने मुँह में मेरे मोटे लंड को किसी अजगर के जैसे निगलने की प्रयास कर रही थी।इसके चलते कई बार लगा कि वो उल्टी कर देगी। मेरे लण्ङ का सारा वीर्य उसके मुंह में ही निकल गया।
वो मेरे लण्ङ को खड़ा करने के लिए फिर से चूसने लगी।
सदफ अपने मुँह से थूक उसके लंड पर गिरा के जोर-जोर से मूठ मार रही थी।
उसके भी मुँह से सिसकारी निकल रही थी।
कुछ देर बाद सदफ उठी और अपने पैरों को उसके शरीर के दोनों तरफ करके उसके लंड के पास बैठ गई और सदफ ने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के सामने किया।
मैने झट से मोटा-तगड़ा लंड सदफ की चूत में घुसा दिया।
सदफ मेरे ऊपर लेटकर मेरी छाती को,तो कभी मेरे होठों को चूमने लगी। मैं भी अपने दोनों हाथों से सदफ की चूचियों को मसलने लगा।
अब सदफ की कमर धीरे-धीरे आगे-पीछे हो रही थी। मैं पूरे जोश में आकर तेजी से झटके लगा रहा था
सदफ ने भी तेज़ झटका देना शुरू कर दिया। मैं जोश जोश में उसके चूतड़ों पर चाटे मार रहा था सदफ के चूतड़ लाल हो चुके थे।
सदफ मेरी छाती पर अपने दोनों हाथ रखकर ज़ोर-ज़ोर से उसके लंड पर कूदने लगी थी।
पूरा कमरा थप-थप की आवाज़ से गूँज रहा था।
सदफ ज़ोर-ज़ोर से हाँफ रही थी और साथ में मेरे लंड पर कूद भी रही थी। करीब पांच मिनट बाद मैने सदफ के दोनों पैरों को अपने काँधे पर रखकर अपना लंड उसकी चूत के छेद में सेट किया।
फिर ज़ोर से धक्का मारा और पूरा लंड चूत के अंदर! फिर तो दे टपाटप उसकी चूत चोदने लगा उसकी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी। ह! ऊह! आह! ऊह! अम्मी....., मर गई रे! धीरे......... आह..... या अल्लाह रहम...... आह । ” दस मिनट तक में उसको ऐसे ही चोदता रहा उसकी सिसकारियां बता रही थी कि मेरा लन्ड उसको बेहताशा मजा दे रहा है।
मैने सदफ को घोड़ी बना कर पीछे से अपना लण्ङ उसकी चूत में घुसा दिया और झटके मारने लगा। मैने उसके बालों को पकड़ कर पीछे खींचा वो संभली भी नहीं थी कि लन्ड का जोरदार झटका मैने मार दिया उसकी चीख निकल गई पर मैं रुका नहीं, और थोड़ा उसकी तरफ झुका उसके कान में जाकर कहा क्यों बहुत घोड़ी बनने का शौक है न अभिनव के सामने, उसका शरीर सुन्न हो गया ये सुनते ही, उसने अपने आप को छुटाने की कोशिश की पर मैने उसको चोदना जारी रखा। उसकी पोल खुल चुकी थी तो अभिनव भी सोफे के पीछे से बाहर आ गया हम दोनों जानते थे आज थ्रीसम पक्का है।
अभिनव खुश था इसलिए वो हरियाणा से वापस ही नहीं आया उसका और सदफ का आज भी मिलने का प्रोग्राम था
दोनों के जिस्म में बेतहाशा आग लगी थी कल 4 बार चुदने के बाद भी सदफ आज उससे चुदने को तैयार थी। एग्जाम आने वाले थे सदफ वापस आ गई थी। हमारी बातें लगभग रोज ही होती थी मैने कभी भी उसको नहीं बताया कि मुझे पता है कि वो अभिनव से हरियाणा में चूद चुकी थी। वो बड़ी चालाकी से हम दोनों से बाते कर रही थी, और हम दोनों जानते हुए मजे ले रहे थे। हमे थ्रीसम करना था अब उसके साथ , सपने में हम दोनों मिल कर उसे चोद भी चुके थे। पर एक चीज हम दोनों ही नहीं समझ पा रहे थे की सदफ हम दोनों से क्यों चूद रही थी । पर हमें क्या करना था हमे हुस्न मल्लिका चोदने को मिल रही थी तो हम लगे पड़े थे ।
उसके आते ही मैने उसको मिलने बुलाया और वो अभिनव के घर आने को मान भी गई। शाम को मैने उसको घर से पिक कर लिया। जल्दी जल्दी में वो बुर्के में ही आ गई थी तो रास्ते से उसको कपड़े दिलाए और सीधा गाड़ी अभिनव के रूम पर लगा दी। तीनों ने खाना खाया और सदफ कपड़े बदलने चली गई मैने अभिनव को कमरे में ही छुपा दिया।
सदफ बाथरूम से जैसे ही बाहर आई काले सूट में ऐसा लगा कोई अप्सरा धरती पर आ गई हो। काले सूट में से उसकी चूचियां बाहर झाक रही थी उसको देखते ही मेरा खड़ा हो गया था। मैने तुरन्त उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसको बेहताशा चूमने लगा। वो भी मेरा साथ दे रही थी। मुझे उसे चोदे दो महीने बीत चुके थे मैं और देरी नहीं करने वाला था। मैने उसकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया और उसके कपड़े उतार दिए।अब सदफ के शरीर पर केवल ब्रा और पैंटी थी। काली ब्रा में सफेद दूध जैसी चूचिया कहर ढा रही थी।
मैं बिस्तर पर लेट गया सदफ मेरी छाती के ऊपर लेट कर मेरे होंठों को चूमने लगी। मैं भी उसका पूरा साथ दे रहा था।
कुछ देर बाद मेरे हाथ सदफ की पीठ पर फिरने लगे और सदफ की ब्रा की हुक खोल दी। उसकी चूचियां मेरे हाथ में थी दूध जैसी सदफ और रुई से भी मुलायम उसकी चूचियो को में मुंह में भर कर पीने लगा। थोड़ी देर में मैने सदफ के बालों को पकड़कर उसको नीचे कर दिया और खुद ऊपर आ गया।
हम दोनों के होंठ अब भी एक-दूसरे से चिपके हुए थे, और अपने हाथों से सदफ की गोल-गोल चूचियों को बारी-बारी से मसल रहा था।कुछ देर बाद मेरे हाथ सदफ के पेट और जाँघ पर फिरने लगे। फिर मेरा हाथ सदफ की पैंटी के अंदर जाकर अपनी अँगुलियों से उसकी चूत को मसलने लगा।
कुछ देर बाद सदफ मेरे सिर को धक्का देकर अपनी चूत के पास ले आई। मैं उसकी पैंटी को नीचे करने लगा तो सदफ ने भी अपने चूतड़ों को उठा दिया।पैंटी सरक कर घुटने के पास आ गई।सदफ ने अपने पैरों की मदद से पैंटी को उतार फेंका।
अब उसकी गोरी चिकनी चूत मुझे दिखाई दे रही थी। जिसे उसने कुछ देर पहले ही शेव किया था। बहनचोद अभिनव ने कुछ ही चुदाई मैं चूत को भोसड़ा बनाने की पूरी कोशिश की थी। बहन के लोड़े ने इतनी प्यारी चूत की फांके बना दी थी चार बार की चुदाई में ही। में सदफ की चूत की फाँकों को फैला-फैला कर देख रहा था, की कितना नुकसान किया है भोसडीके ने।
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8 मिनट की चूत चुसाई में सदफ की चूत ने मेरे मुंह पर ही पानी छोड़ दिया।
वो हाँफने लगी।मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से अच्छे से साफ़ करके सदफ के बगल में आकर लेट गया।
कुछ देर तक हम दोनों लेटकर एक-दूसरे को चूमते-चाटते रहे।
फिर सदफ ने अपने हाथ मेरे जाँघिया के अंदर डाल कर मेरे लंड को मसलने लगी।
कुछ ही देर में सदफ ने अपने हाथों से मेरे लंड को बाहर निकाला सदफ ने जब अपने हाथों से उसके लंड को नीचे दबाया तो मेरे लंड का लाल सुपाड़ा बाहर निकल गया।फिर वो उठी और अपना मुँह मेरे लंड के पास ले जाकर जीभ से उसके लंड को चाटने लगी। लंड के चारों तरफ जीभ फिरा-फिरा के उसके लंड को चाट रही थी।फिर सदफ लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
वो ज़बरदस्ती अपने मुँह में मेरे मोटे लंड को किसी अजगर के जैसे निगलने की प्रयास कर रही थी।इसके चलते कई बार लगा कि वो उल्टी कर देगी। मेरे लण्ङ का सारा वीर्य उसके मुंह में ही निकल गया।
वो मेरे लण्ङ को खड़ा करने के लिए फिर से चूसने लगी।
सदफ अपने मुँह से थूक उसके लंड पर गिरा के जोर-जोर से मूठ मार रही थी।
उसके भी मुँह से सिसकारी निकल रही थी।
कुछ देर बाद सदफ उठी और अपने पैरों को उसके शरीर के दोनों तरफ करके उसके लंड के पास बैठ गई और सदफ ने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के सामने किया।
मैने झट से मोटा-तगड़ा लंड सदफ की चूत में घुसा दिया।
सदफ मेरे ऊपर लेटकर मेरी छाती को,तो कभी मेरे होठों को चूमने लगी। मैं भी अपने दोनों हाथों से सदफ की चूचियों को मसलने लगा।
अब सदफ की कमर धीरे-धीरे आगे-पीछे हो रही थी। मैं पूरे जोश में आकर तेजी से झटके लगा रहा था
सदफ ने भी तेज़ झटका देना शुरू कर दिया। मैं जोश जोश में उसके चूतड़ों पर चाटे मार रहा था सदफ के चूतड़ लाल हो चुके थे।
सदफ मेरी छाती पर अपने दोनों हाथ रखकर ज़ोर-ज़ोर से उसके लंड पर कूदने लगी थी।
पूरा कमरा थप-थप की आवाज़ से गूँज रहा था।
सदफ ज़ोर-ज़ोर से हाँफ रही थी और साथ में मेरे लंड पर कूद भी रही थी। करीब पांच मिनट बाद मैने सदफ के दोनों पैरों को अपने काँधे पर रखकर अपना लंड उसकी चूत के छेद में सेट किया।
फिर ज़ोर से धक्का मारा और पूरा लंड चूत के अंदर! फिर तो दे टपाटप उसकी चूत चोदने लगा उसकी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी। ह! ऊह! आह! ऊह! अम्मी....., मर गई रे! धीरे......... आह..... या अल्लाह रहम...... आह । ” दस मिनट तक में उसको ऐसे ही चोदता रहा उसकी सिसकारियां बता रही थी कि मेरा लन्ड उसको बेहताशा मजा दे रहा है।
मैने सदफ को घोड़ी बना कर पीछे से अपना लण्ङ उसकी चूत में घुसा दिया और झटके मारने लगा। मैने उसके बालों को पकड़ कर पीछे खींचा वो संभली भी नहीं थी कि लन्ड का जोरदार झटका मैने मार दिया उसकी चीख निकल गई पर मैं रुका नहीं, और थोड़ा उसकी तरफ झुका उसके कान में जाकर कहा क्यों बहुत घोड़ी बनने का शौक है न अभिनव के सामने, उसका शरीर सुन्न हो गया ये सुनते ही, उसने अपने आप को छुटाने की कोशिश की पर मैने उसको चोदना जारी रखा। उसकी पोल खुल चुकी थी तो अभिनव भी सोफे के पीछे से बाहर आ गया हम दोनों जानते थे आज थ्रीसम पक्का है।


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