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Adultery अनीता सिंह -- किरदार निभाना (Role Play)
#32
गेस्ट हाउस

गेस्ट हाउस के अंदर कदम रखते ही अनीता और राज दंग रह गए। ऊँची छतें, नक्काशीदार खंभे और फर्श पर चमकता कीमती संगमरमर—सब कुछ राजसी ठाठ-बाट का एहसास दिला रहा था।


अनीता: (थकान के बावजूद उत्साह से अपना पर्स सोफे पर रखते हुए) "ओह गॉड, राज! यह तो किसी महल जैसा है। मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि इस छोटे से शहर में तुम्हारी कंपनी तुम्हें इतना शानदार बंगला देगी।"


राज: (चारों तरफ देखते हुए) "सच में, मेनटेनेंस तो वाकई काबिले-तारीफ है। मुझे तो लगा था कि यहाँ धूल और जाले मिलेंगे, पर देखो, कोना-कोना चमक रहा है।"


अनीता: (खिड़की के पास जाकर बाहर देखते हुए) "और वो हाउसकीपर... करीम। कितना लंबा है वह! जब वह गाड़ी के पास आया, तो एक पल के लिए तो मैं भी डर गई थी। 6 फीट 2 इंच... और ऊपर से इतना काला!"


राज ने पास आकर अनीता को पीछे से कमर से पकड़ लिया और अपनी ठुड्डी उसके कंधे पर टिका दी।


राज: "हाँ, उसका कद काफी है। पर लगता है कि आदमी तजुर्बेकार है। देखो कैसे सब कुछ सलीके से रखा है। पर जान, तुम अपनी ये तारीफें बंद करो, वरना मैं जेलस हो जाऊँगा।"


अनीता: (खिलखिलाकर हँसते हुए और राज के गले में हाथ डालते हुए) "तुम और जलन? वैसे तुमने देखा नहीं, वो बेचारा तो मेरी तरफ ठीक से देख भी नहीं पा रहा था। शायद उसने शहर की इतनी बिंदास औरत पहले कभी नहीं देखी होगी।"


राज: (शरारत से कमर कसते हुए) "बिंदास नहीं जान, 'सेक्सी' और 'खतरनाक'। और यकीन मानो, उसने देखा तो है... बस नजरें नीची रखने का नाटक कर रहा था। खैर, छह घंटे की ड्राइविंग के बाद मेरी कमर टूट रही है। मुझे एक गरम पानी के शावर की सख्त ज़रूरत है।"


अनीता: (राज के गाल को चूमते हुए) "तुम जाओ, तब तक मैं ज़रा बेडरूम चेक करती हूँ और देखती हूँ कि करीम ने सामान कहाँ रखा है। फिर हम साथ में खाना खाएंगे।"


जैसे ही राज बाथरूम की तरफ बढ़ा, अनीता कमरे के बाहर गैलरी में आई। गलियारे के दूसरे छोर पर करीम खड़ा था, उसके हाथ में कुछ तौलिए थे। अनीता को वहां खड़ा देखकर करीम ने तुरंत अपनी गर्दन झुका ली।


अनीता: (साड़ी का पल्लू सँभालते हुए उसके करीब जाकर) "करीम, सामान पहुँचा दिया तुमने?"


करीम: (धीरे से नज़रें ऊपर उठाते हुए) "जी मेमसाहब, सब बड़े कमरे में रख दिया है। और ये ताज़ा धुले हुए तौलिए हैं।"


अनीता ने हाथ बढ़ाकर तौलिए लेने चाहे, और इस दौरान उसकी कोमल कलाई करीम के बड़े, खुरदरे हाथ से हल्की सी छू गई। करीम के शरीर से एक अजीब सी मर्दाना महक आ रही थी—चंदन और पसीने का मिला-जुला मिश्रण।


करीम: (थोड़ा पीछे हटते हुए) "माफ़ कीजिएगा मेमसाहब, हमारे हाथ आपको छू गए।"


अनीता: (मुस्कुराते हुए उसे ऊपर से नीचे तक देखते हुए) "कोई बात नहीं करीम। राज ने मुझे बताया कि आप यहाँ बिल्कुल अकेले रहते हैं?"


करीम: (भारी आवाज़ में) "जी, हम तन्हा ही रहते हैं। अल्लाह ने जो दिया था, वो वापस ले लिया। अब तो बस ये बंगला और यहाँ आने वाले मेहमान ही हमारा कुनबा हैं।"


तभी अनीता ने गौर किया कि करीम की नज़रें उसकी साड़ी के नीचे से झलकती खुली कमर और गहरे गले वाले ब्लाउज़ की डोरी पर टिक गई हैं। वह नज़रें हटाने के बजाय जानबूझकर अपनी कमर पर हाथ फेरने लगी।


अनीता: (शरारत भरी नज़रों से) "करीम, मुझे चाय की बहुत तलब हो रही है। क्या तुम मेरे लिए एक कड़क चाय बना सकते हो?"


करीम: "जी मेमसाहब, अभी हाज़िर करता हूँ। इलायची और अदरक वाली ऐसी चाय पिलाऊँगा कि आपकी सारी थकान काफूर हो जाएगी।"


जैसे ही करीम मुड़कर जाने लगा, अनीता ने उसे टोका, "सुनो करीम... चाय मेरे कमरे में ही ले आना। राज अभी नहा रहे हैं।"


करीम रुका, उसने एक पल के लिए पीछे मुड़कर अनीता के उस सुडौल और सेक्सी बदन को देखा जो उस तंग साड़ी में लिपटा हुआ था। उसके मन में एक हूक सी उठी।


करीम: (धीमी और भारी आवाज़ में) "जी... जैसा आपका हुक्म।"


अनीता ने उसे जाते हुए देखा और अपने होंठों पर एक शरारती मुस्कान ले आई।


अनीता: (मन ही मन) "हूँ... यह छोटा शहर शायद उतना भी बोरिंग नहीं होने वाला है जितना राज कह रहा था।"


राज अभी नहाने में व्यस्त था। 6 घंटे के लंबे सफर की थकान अनीता के शरीर पर हावी होने लगी थी। उसने अपनी सैंडल उतारी और उस बड़े से मखमली पलंग पर ढीली होकर गिर पड़ी। उसे पता ही नहीं चला कि कब उसे गहरी नींद आ गई।


बेसुध हालत में सोते हुए उसकी साड़ी का पल्लू कंधे से फिसलकर नीचे गिर गया था, जिससे उसके उभरे हुए वक्ष उस तंग और छोटे ब्लाउज में आधे से ज्यादा बाहर झलक रहे थे।


उसकी गोरी और मादक नाभि पूरी तरह बेपर्द थी और साड़ी कमर से काफी नीचे खिसक गई थी।

तभी करीम हाथ में चाय की ट्रे लिए कमरे के दरवाज़े पर आया। दरवाज़ा आधा खुला था। जैसे ही उसने अंदर कदम रखा, उसकी नज़रें सामने बिस्तर पर पड़ीं और उसके कदम वहीं जम गए। करीम की साँसें भारी हो गईं। 6 फीट 2 इंच का वह काला विशालकाय आदमी बुत बना खड़ा अनीता की खूबसूरती को निहारने लगा।


करीम: (मन ही मन) "या अल्लाह... यह औरत है या कोई कयामत? इतना गोरा बदन... ऐसी ढलान..."


करीम की आँखें अनीता के उस गोरे बदन, उसके वक्षों के उभार और उस चिकनी कमर पर रेंगने लगीं। वह करीब 5 मिनट तक वहीं खड़ा रहा, अपनी आँखों से अनीता के जिस्म की हर लकीर को पीता रहा। आखिरकार, उसने खुद को संभाला और किवाड़ पर अपनी उंगलियों से दस्तक दी।


करीम: (धीमी आवाज़ में) "मेमसाहब... चाय।"


अनीता ने चौंककर आँखें खोलीं। सामने करीम को खड़ा देख उसे तुरंत अहसास हुआ कि उसका जिस्म नुमाया है। पर अनीता ने हड़बड़ाने के बजाय धीरे-धीरे अपना पल्लू उठाया।


अनीता: (बिस्तर पर उठकर बैठते हुए और जुल्फें सँभालते हुए) "अरे करीम... मुझे तो पता ही नहीं चला कब नींद लग गई। ले आओ चाय।"


करीम ट्रे लेकर करीब आया, उसके हाथ कांप रहे थे। जब उसने चाय की प्याली मेज़ पर रखी, तो उसकी नज़रें फिर से अनीता के उस गहरे गले के ब्लाउज में जा फंसीं। तभी राज बाथरूम से बाहर निकला।


अनीता: (चाय का प्याला उठाते हुए) "राज, चाय बहुत ही लाजवाब बनी है। सारा सिरदर्द गायब हो गया।"
राज: "चलो, अच्छी बात है। थक जो गई थी तुम।"


अनीता ने चाय का घूँट भरा और फिर बड़े ही मासूम मगर शरारती अंदाज़ में करीम की ओर मुड़ी।


अनीता: "करीम, एक बात कहूँ? आप उम्र में मुझसे काफी बड़े हो... क्या मैं आपको 'करीम बाबा' कह सकती हूँ? और बदले में तुम मुझे 'अनीता बेटी' कह सकते हो। क्या तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?"


करीम, जो अब तक अनीता के सेक्सी बदन की चमक से ही बाहर नहीं आ पाया था, यह सुनकर हक्का-बक्का रह गया।


करीम: (गर्दन झुकाकर, भर्राई आवाज़ में) "अरे नहीं मेमसाहब... हमारा मतलब है, अनीता बेटी... ये तो हमारी खुशनसीबी होगी। आपने हमें इतना बड़ा रुतबा दे दिया, वरना हम तो बस इस चौखट के पहरेदार हैं।"


राज: (हँसते हुए) "अरे वाह! यह तो बहुत अच्छी बात है। करीम बाबा, अब तो आपको इनका और भी ख्याल रखना होगा, क्योंकि यह बहुत जिद्दी हैं।"


करीम: "जी हुज़ूर, अब तो जान भी हाज़िर है।"


पर जैसे ही राज अलमारी की तरफ मुड़ा, करीम की नज़रें एक बार फिर अनीता पर पड़ीं। अनीता ने उसे एक ऐसी नज़रों से देखा जो 'बेटी' के संबोधन से कहीं ज़्यादा गहरी और कामुक थी। करीम ट्रे उठाकर बाहर जाने लगा, लेकिन उसके दिमाग में अनीता का वह आधा खुला बदन किसी नश्तर की तरह चुभ रहा था।


बाद में करीम ने उन्हें पूरा बंगला दिखाया। पाँच कमरों और तीन बाथरूमों वाला वह आलीशान घर। करीम ने उन्हें आगे और पीछे के बड़े बगीचों की सैर कराई, जहाँ रात की रानी के फूलों की महक वातावरण को और भी मादक बना रही थी।


करीम: "अनीता बेटी, साहब... वह पिछवाड़े की तरफ मेरा छोटा सा बसेरा है। अगर रात में किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो, तो बस आवाज़ दे दीजिएगा, मैं फौरन हाज़िर हो जाऊँगा।"


दौरा खत्म होने के बाद राज अपनी फाइलों में व्यस्त हो गया और अनीता शावर लेने चली गई। करीम रसोई की ओर चला गया। उसके हाथ आटा गूँध रहे थे, लेकिन उसकी आँखों के सामने अभी भी बिस्तर पर लेटी वह कामुक मूरत घूम रही थी।


रसोई में आटा गूँधते समय करीम के भीतर भावनाओं का एक भयंकर तूफ़ान उठा हुआ था। वह रह-रहकर अपने सिर को झटकता, पर अनीता की वह मखमली सूरत उसके दिमाग से नहीं निकल रही थी।


करीम: (धीमी आवाज़ में बुदबुदाते हुए) "उसने हमें बाबा कहा और खुद को हमारी बेटी... पर अल्लाह जानता है कि हमारे मन में जो चल रहा है, वो एक बाप के ख्याल तो बिल्कुल नहीं हैं। जब हमने उसे बिस्तर पर उस हाल में देखा, तो हमारा ईमान डोल गया था। ऐसी कयामत जैसी जवान मेमसाहब को बेटी कहना कितना मुश्किल है, ये तो सिर्फ हमारा दिल ही जानता है। ऐसी खूबसूरती के बारे में जो हम सोच रहे हैं, वो किसी बेटी के लिए सोचना गुनाह है... पर हम खुद को रोक नहीं पा रहे।"


उधर, बाथरूम के धुंधले आईने के सामने खड़ी अनीता ने अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार दिए थे। वह पूरी तरह निर्वस्त्र होकर आईने में अपनी आकृति को निहार रही थी। उसने अपनी गर्दन को सहलाया और फिर अपने उन प्राउड ट्विन को देखा।


उसने अपनी उंगलियों को अपनी चिकनी और सेक्सी कमर पर फिराया, जहाँ साड़ी की वजह से हल्का सा निशान पड़ गया था।


अनीता: (आईने में अपनी सुडौल जाँघों और सेक्सी नितंबों के उभार को निहारते हुए) "करीम की आँखें... वो मुझे किसी बेटी की तरह नहीं देख रही थीं। वो मुझे एक भूखे मर्द की तरह देख रहा था। मुझे पता है कि जब मैं सो रही थी, तो उसकी नज़रें मेरे बदन के एक-एक हिस्से को नाप रही होंगी। कितना रोमांचक होगा जब वो 'बाबा' बनकर भी मुझे इसी तरह हवस भरी नज़रों से देखेगा। वह काला, लंबा और खुरदरा शरीर... और मेरी यह मखमली गोरी त्वचा।"


अनीता ने शावर लिया और बाहर आकर लाल रंग के अंडरगारमेंट्स के ऊपर एक बेहद पतली काली साटन की नाइटी पहन ली। नाइटी उसके बदन से चिपक गई थी और अंदर के लाल कपड़े साफ़ झलक रहे थे। अपनी इस उत्तेजक हालत को थोड़ा छिपाने के लिए उसने नाइटी के ऊपर एक काला साटन का रोब (Robe) पहन लिया।


हालांकि उस रोब ने उसके शरीर का अधिकांश हिस्सा ढंक लिया था, लेकिन जब वह चलती थी, तो रोब के बीच के खुले हिस्से से उसकी काली नाइटी और उसके नीचे दबे लाल अंडरगारमेंट्स की झलक साफ़ दिखाई दे रही थी। तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई।


करीम: (बाहर से भारी आवाज़ में) "अनीता बेटी... खाना मेज़ पर लग गया है।"


अनीता ने जानबूझकर दरवाज़ा पूरा खोल दिया और करीम के ठीक सामने आकर खड़ी हो गई। करीम ने जैसे ही ऊपर देखा, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। रोब के बीच से झाँकती वह लाल झलक किसी दहकते अंगारे जैसी लग रही थी।


करीम: (मन ही मन, बेकाबू होते हुए) "अनीता बेटी... कसम खुदा की, इस काली पोशाक में तुम क्या कयामत ढा रही हो। ऊपर से तो ये चोगा (Robe) पहन लिया है, पर अंदर का लाल कपड़ा तो साला झाँक रहा है। जवान मेमसाब का ये भरा हुआ बदन और ये सेक्सी टांगें देख के तो हमारे अंदर का जानवर बेकाबू हो रहा है। मन तो करता है कि इस बेटी वाले पर्दे को फाड़ दूँ और तुम्हारे इस गोरे जिस्म को अपने इन काले हाथों से मसल दूँ। साला, इतना गरम और मखमली माल... साहब की तो वाकई चांदी है।"


करीम की नज़रें अनीता की जाँघों के उस हिस्से पर टिकी थीं जहाँ नाइटी और रोब के बीच से उसकी गोरी त्वचा चमक रही थी। वह उस पल पूरी तरह उत्तेजित हो चुका था। तभी अनीता ने राज को बुलाने के लिए अपनी पीठ करीम की तरफ घुमाई।


अनीता: "राज! चलो, खाना लग गया है!"


जैसे ही वह मुड़ी, साटन का वह पतला कपड़ा उसके सुडौल गाँड के उभारों पर बिल्कुल चिपक गया। रोब के ढीले होने की वजह से पीछे से उसके कूल्हों की बनावट और भी साफ़ नज़र आ रही थी।


करीम: (मंत्रमुग्ध होकर सोचते हुए) "अनीता बेटी... साला पीछे से तो तुम और भी ज़ालिम लग रही हो। ये भारी और सेक्सी गाँड देख के तो किसी का भी पानी निकल जाए। मन कर रहा है कि यहीं दबोच लूँ।"


अनीता ने मुड़कर करीम की तरफ देखा, वह जानती थी कि करीम की भूख कहाँ अटकी है। उसने एक कातिलाना मुस्कान के साथ कहा।


अनीता: "शुक्रिया करीम बाबा। आप चलिए, हम बस आते हैं।"


करीम: (भर्राई आवाज़ में) "जी... जी... हम इंतज़ार करते हैं।"


करीम बिना कुछ बोले पीछे मुड़ा और तेज़ कदमों से वहां से निकल गया।
Deepak Kapoor
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RE: अनीता सिंह -- किरदार निभाना (Role Play) - by Deepak.kapoor - 28-12-2025, 05:12 AM



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