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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#27
उसने बेड के नीचे खड़े होकर रिशा को अपनी ओर खींचा और उसकी टांगें फैला कर अपना सुपाड़ा चूत के मुँह पर रख दिया। रिशा की आँखों में देखते हुए उसने अपने लौड़े को हल्का सा धक्का देकर अपने लंड का सुपाड़ा चूत के अंदर कर दिया. रिशा की हल्की सी चीख निकल गई . रिशा को ना जाने क्यों उसका लंड कल रात से ज्यादा मोटा लग रहा था. उसने राजू को पीछे ढकेलने की कोशिश की, लेकिन राजू ने मजबूती से उसकी बाजू पकड़ कर अपना मूसल एक ही धक्के में पेल दिया. रिशा के मुंह से दुबारा जोर की चीख निकल गई जो सरिता ने तो सुनी..अगर लाला जी जाग रहे होते तो वो भी अवश्या सुन लेते. मादरचोद अपने बाप का माल समझ रखा है या कोई रंडी समझ लिया है जो एक ही धक्के में ये मूसल मेरी चूत में घुसेड़ दिया है तूने…रिशा गुस्से से राजू को ढकेलते हुए बोली.


क्या करूं भाभी...आपको देख कर खुद को रोक नहीं पाया लेकिन अब आराम से करूंगा. पांच दस मिनट की चुदाई में रिशा की चूत ने अपना रस छोड़ना चालू कर दिया और अब रिशा को भी राजू के जोरदार धक्के से मजा आने लगा था

राजू अब रिशा के होठों को अपने होठों पर दबा कर दनादन अपना लंड पूरी ताकत के साथ चूत में पेल रहा था

राजू के अब दमदार धक्के लगने से चूत ने भी पानी छोड़ दिया था और अब चीखो की जगह सिसकियो ने ले ली.

राजू का मजबूत लंड रिशा की चूत की गहराइयां नाप रहा था. राजू बोला भाभी तुम्हारी चूत तो अभी भी बहुत टाइट है। लगता है भैया ने ठीक से ठुकाई नहीं करी। रिशा झट से बोल पड़ी..अगर तुम्हारे भैया ने ठीक से ठुकाई करी होती तो आज ऐसे तेरे नीचे नंगी नहीं पड़ी होती.
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 24-12-2025, 04:48 PM



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