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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#26
अब राजू भी बेधड़क हो गया था. अब पूरे इत्मिनान से रिशा का सिर पकड़ कर उसके मुँह को चोद रहा था और लंड के धक्के उसके गले तक मार रहा था। रिशा गू गू करती हुई राजू के लंड के धक्के को झेल रही थी. उसके मुँह से बह रही लार से लंड पूरा भीग चुका था.


कुछ देर बाद उसने रिशा को खड़ा किया और उसकी फ्रॉक उतार दी और रिशा को पूरा नंगा कर दिया.

साथ ही अपनी कमीज भी. उतार दी अब दोनों एकदम नंगे थे.


कमरे में बाहर से हल्की सी रोशनी आ रही थी.

खड़ा खड़ा ही राजू रिशा के मम्मे चूमने चूसने लगा. इतने गोरे और सुडोल मम्मे आज तक उसने कभी नहीं देखे थे. वो पागलों की तरह उन्हें निचोड़ने और काटने लगा। रिशा को थोड़ा दर्द का एहसास हुआ लेकिन साथ में एक अजीब से मजा और नशा उस पर हावी होने लगा

रिशा के इशारे पर उसने रिशा की चूत में उंगली भी कर रखी थी.

अब रिशा अपनी चूत चुसवाना चाह रही थी तो वह बेड पर टांगें फैला कर लेट गयी.


उसने राजू को भी अपने पास घसीट कर उसका सर अपनी टांगों के बीच कर दिया.

राजू समझ गया कि रिशा उससे क्या चाहती है.

उसने अपनी जीभ रिशा की चूत की फाँकों के बीच में कर दी. रिशा की आहें निकलनी शुरू हो गयीं. उसकी फुद्दी लगतर पानी बहाने लगी

चूत चूसते चूसते राजू ने उसकी चूत थूक से भर दी.

अब राजू का मूसल भी टन टना रहा था और अन्दर आने को बेताब था.
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 24-12-2025, 04:46 PM



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