24-12-2025, 07:01 AM
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कार यात्रा
राज ने अपनी चमचमाती काली एसयूवी का दरवाज़ा अनीता के लिए खोला। जैसे ही अनीता कार की फ्रंट सीट पर बैठी, उसकी साड़ी का पल्लू हल्का सा और नीचे खिसक गया, जिससे उसके उभरे हुए वक्ष और गहरे गले के ब्लाउज़ की बनावट राज की नज़रों के सामने आ गई। राज ने एक लंबी सांस ली और ड्राइविंग सीट पर बैठ गया।
शहर की भीड़-भाड़ को पीछे छोड़ते ही, वे हाईवे पर आ गए। बाहर का नज़ारा अब धीरे-धीरे बदलने लगा था—कंक्रीट के जंगलों की जगह अब हरे-भरे खेत और धूल भरी सड़कें ले रही थीं। एसी की ठंडी हवा के बावजूद, कार के अंदर का माहौल अनीता की मौजूदगी और उसके इत्र की महक से गर्म हो रहा था।
करीब दो घंटे के सफर के बाद, राज ने देखा कि हाईवे के किनारे एक सुनसान कच्चा रास्ता घने पेड़ों के झुरमुट की तरफ जा रहा है। उसने अचानक स्टीयरिंग घुमा दी और गाड़ी को उन पेड़ों की छाँव में ले जाकर रोक दिया।
"गाड़ी यहाँ क्यों रोकी, राज? क्या कुछ गड़बड़ है?" अनीता ने अपनी पलकें झपकाते हुए पूछा, हालांकि वह राज की नज़रों की भूख को अच्छे से पहचानती थी।
राज ने इंजन बंद किया और उसकी तरफ मुड़ा। उसकी नज़रें सीधी अनीता की नंगी कमर और उस गहरे ब्लाउज़ पर टिकी थीं। उसने धीरे से हाथ बढ़ाकर अनीता की जाँघ पर रखा, जहाँ से साड़ी थोड़ी ऊपर सरक गई थी।
"गड़बड़ बहुत बड़ी है, जान," राज ने कहा। "पिछले दो घंटों से मैं तुम्हें इस अवतार में देख रहा हूँ और मेरा ध्यान ड्राइविंग से ज्यादा तुम्हारी इन कातिल अदाओं पर है। मुझे नहीं लगता कि मैं उस शहर तक बिना तुम्हें छुए पहुँच पाऊँगा।"
अनीता ने शरारत भरी मुस्कान के साथ अपना सिर पीछे सीट पर टिका लिया। उसने राज का हाथ पकड़ा और उसे अपनी कमर के उस नंगे हिस्से पर ले गई जहाँ उसकी त्वचा और साड़ी का रेशम मिल रहे थे।
"तो मिस्टर इंजीनियर... क्या आपका प्रोजेक्ट अभी शुरू होने वाला है?" अनीता ने फुसफुसाते हुए पूछा।
राज अब और खुद को रोक नहीं पाया। उसने झुककर अनीता की गर्दन पर अपने होंठ रख दिए। अनीता के मुँह से एक हल्की आह निकली। राज का एक हाथ अब अनीता की पीठ के उस नंगे हिस्से पर रेंग रहा था जो छोटे ब्लाउज की वजह से पूरी तरह खुला था। उसने महसूस किया कि अनीता का शरीर उसकी छुअन से तन गया है।
राज ने उसके कान के पास धीरे से काटते हुए कहा, "तुम्हारी ये साड़ी... और ये 5'7" का सेक्सी शरीर... तुम जानती हो न तुम मुझे किस हद तक पागल कर रही हो?"
उसने राज के कानों के पास झुककर, अपनी गर्म साँसें उसकी गर्दन पर छोड़ते हुए धीरे से कहा, "तो दिखा दो अपना पागलपन... यहाँ कोई देखने वाला नहीं है, राज।"
राज की धड़कनें अब तेज़ हो रही थीं। उसने अनीता की साड़ी के पल्लू को धीरे से उसके कंधे से नीचे सरका दिया, जिससे उसके गहरे गले वाले ब्लाउज का पूरा हिस्सा अब साफ़ झलक रहा था। 5'7" की लंबी और सुडौल अनीता उस तंग सीट पर अर्द्ध-लेटी हुई अवस्था में और भी मादक लग रही थी।
राज का हाथ अब उसकी रेशमी कमर से होता हुआ उसके पेट के निचले हिस्से तक पहुँचा। उसने महसूस किया कि अनीता की साँसें उखड़ रही हैं। राज ने झुककर उसके वक्षों के बीच की गहरी खाई पर अपने गर्म होंठ रख दिए।
"राज... उह्ह..." अनीता के मुँह से दबी हुई आवाज़ निकली। उसने अपनी आँखें मूँद लीं और अपनी पीठ को सीट से थोड़ा ऊपर उठाया, जिससे उसके उभार राज के चेहरे के और करीब आ गए।
राज ने अपना सिर ऊपर उठाया और अनीता की आँखों में देखते हुए उसके छोटे से ब्लाउज की डोरियों को अपनी उंगलियों से सहलाया। "तुम इतनी 'बोल्ड' हो अनीता... मुझे कभी-कभी लगता है कि मैं तुम्हें संभाल भी पाऊँगा या नहीं। खासकर तब, जब तुम ऐसे कपड़े पहनकर मेरे सामने होती हो।"
अनीता ने मुस्कुराते हुए राज का हाथ पकड़कर अपनी साड़ी के उस हिस्से पर रख दिया जो उसके भारी और सेक्सी नितंबों (buttocks) को ढके हुए था। "तो संभालो न... किसने रोका है?"
राज ने अपनी पकड़ मजबूत की और अनीता के सेक्सी नितंबों को साड़ी के ऊपर से ही भींच दिया। अनीता ने सिसकारी भरी और राज को अपनी ओर खींचकर उसके होंठों को अपने होंठों से ढँक लिया। कार के अंदर की हवा अब पूरी तरह से कामुकता और उत्तेजना से भर चुकी थी। राज का हाथ अब धीरे-धीरे उसकी साड़ी के अंदर जाने का रास्ता तलाश रहा था।
तभी, कार की खिड़की के बाहर से किसी के खाँसने की आवाज़ आई—"खूँ-खूँ!"
दोनों अचानक चौंककर अलग हुए। राज ने झटके से बाहर देखा। एक अधेड़ उम्र का ग्रामीण व्यक्ति, बड़े कौतूहल और तिरछी नज़रों से कार के काले शीशों के अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा था।
राज ने झटके से अपना हाथ अनीता की कमर से हटाया और हड़बड़ाहट में अपनी शर्ट के बटन ठीक करने लगा। अनीता, जो अभी-अभी राज के प्यार के आगोश में डूबी हुई थी, उसने बड़े ही इत्मीनान से अपनी साड़ी का पल्लू उठाया और उसे कंधे पर डालते हुए एक ऐसी अदा से राज की तरफ देखा जैसे कह रही हो—'डरते क्यों हो?'
बाहर खड़ा वह देहाती आदमी, जिसका नाम मंगलू था, अपनी फटी हुई कमीज़ के बटन खोले हुए था और उसके कंधे पर एक लाठी थी। वह कार के पास आकर शीशे पर उंगलियाँ मारने लगा। राज ने झिझकते हुए अपनी तरफ का शीशा थोड़ा नीचे किया।
मंगलू की नज़रें तुरंत राज को पार करती हुई अनीता पर जा टिकीं। अनीता ने अपनी गर्दन थोड़ी तिरछी कर ली, जिससे उसके गले का हार और ब्लाउज का गहरा हिस्सा मंगलू को साफ़ दिखाई देने लगा। मंगलू की आँखें फटी की फटी रह गईं; उसने अपनी पूरी ज़िंदगी में गाँव की औरतों को घूँघट में देखा था, ऐसी 'शहर की मेमसाब' को इस हाल में देखना उसके लिए किसी अजूबे से कम नहीं था।
"का भाई साहब... गाड़ी खराब हो गई है का?" मंगलू ने अपनी आँखों को अनीता के वक्षों पर टिकाते हुए पूछा।
राज ने रूखे स्वर में कहा, "नहीं-नहीं, बस रास्ता देख रहे थे। हम यहाँ से सीधे शहर की तरफ जा रहे हैं।"
मंगलू ने अपनी जगह से हिले बिना, थोड़ा झुककर अनीता को और करीब से देखने की कोशिश की। वह बोला, "अरे, ई रास्ता तो बहुत खराब है आगे। मेमसाब को बड़ी दिक्कत होगी। मेमसाब, आप कहाँ से आई हो? शहर की लगती हो एकदम परी जैसी।"
अनीता ने राज की घबराहट का मज़ा लेते हुए अपनी खिड़की का शीशा भी नीचे कर दिया। उसने मुस्कुराते हुए मंगलू की तरफ देखा। "जी, हम दिल्ली से आए हैं। क्या यह रास्ता वाकई इतना खराब है?"
अनीता की सुरीली आवाज़ और उसके हिलने से साड़ी के अंदर मचलते उसके सुडौल बदन को देखकर मंगलू के मुँह से जैसे लार टपकने लगी। वह अब गाड़ी के और करीब आ गया और बोनट पर हाथ रखकर खड़ा हो गया ताकि वह अनीता के ब्लाउज के अंदर झाँकने का बेहतर मौका पा सके।
वह अपनी नज़रें अनीता की नाभि और कमर के नंगे हिस्से पर गड़ाते हुए बोला, "अरे मेमसाब, दिल्ली की हवा तो आपकी रंगत में ही दिख रही है। हमारे इस छोटे शहर में तो धूल बहुत है, आपकी ये रेशमी साड़ी गंदी हो जाएगी। अगर आप कहें, तो मैं आगे तक चलकर रास्ता दिखा दूँ?"
राज को मंगलू की नीयत साफ़ समझ आ रही थी। वह जिस तरह से अनीता के 'सेक्सी' फिगर को घूर रहा था, राज का खून खौल उठा। पर अनीता को इसमें एक अलग ही रोमांच मिल रहा था। उसने राज का हाथ दबाया और मंगलू से कहा, "शुक्रिया, पर मेरे पति बहुत अच्छे ड्राइवर हैं, वो संभाल लेंगे।"
मंगलू जाने का नाम ही नहीं ले रहा था। वह अपनी जगह बदल-बदल कर अनीता के कर्व्स को निहार रहा था।
राज ने अब और बर्दाश्त नहीं किया। उसने इंजन स्टार्ट किया और मंगलू को पीछे हटने का इशारा किया। "ठीक है भाई, जानकारी के लिए शुक्रिया। अब हमें निकलना होगा।"
जैसे ही गाड़ी आगे बढ़ी, मंगलू वहीं खड़ा होकर धूल उड़ाती कार को देखता रहा, खासकर पीछे की तरफ से जहाँ से उसे अनीता के बालों का जूड़ा और उसकी गोरी पीठ का आखिरी दीदार हो रहा था।
कार के अंदर, राज ने गुस्से में कहा, "देखा तुमने? वो कैसे तुम्हें निगल जाने वाली नज़रों से देख रहा था? और तुम हो कि उसे बढ़ावा दे रही थीं।"
अनीता खिलखिलाकर हँस पड़ी। "अरे राज, बेचारे ने शायद पहली बार इतनी खूबसूरत औरत देखी होगी। उसे बस थोड़ा 'नज़रों का सुख' लेने दिया, इसमें क्या बुराई है?"
राज का चेहरा अभी भी तमतमाया हुआ था।
"नज़रों का सुख?" राज ने चिढ़ते हुए कहा, "अनीता, वह आदमी तुम्हें ऐसे घूर रहा था जैसे तुम्हें वहीं कच्चा चबा जाएगा। और तुम... तुम तो जैसे उसके लिए नुमाइश लगा कर बैठ गई थीं। खिड़की का शीशा नीचे करने की क्या ज़रूरत थी?"
अनीता ने अपनी साड़ी के पल्लू को वापस कंधे पर टिकाया। "ओह राज, तुम खामखां परेशान हो रहे हो। उस बेचारे देहाती की औकात ही क्या है? उसने अपनी पूरी ज़िंदगी गोबर और धूल में बिताई है, अगर उसने दो पल के लिए एक खूबसूरत शहरी औरत को देख लिया, तो उसकी रातों की नींद उड़ जाएगी।"
राज कुछ कहने के लिए मुँह खोलने ही वाला था कि अनीता ने उसे टोकते हुए बात पूरी की।
अनीता: "और सुनो राज... इससे पहले कि तुम सारा दोष मुझ पर डालो और मुझे और भी ज़्यादा बुरा-भला कहो, तुम्हें ये याद रखना चाहिए कि यह तुम ही थे जिसने इस सुनसान जगह पर गाड़ी रोकी थी। 'प्रोजेक्ट' शुरू करने की जल्दी तुम्हें थी, मुझे नहीं।"
अनीता: "अगर तुम इतने ही 'पजेसिव' (possessive) हो, तो तुम्हें गाड़ी सड़क के बीचों-बीच नहीं रोकनी चाहिए थी। अब बेचारा गरीब आदमी गुज़र रहा था, तो उसने रुक कर तमाशा देख लिया। इसमें मेरी क्या गलती कि तुम्हारी बीवी इतनी सुंदर हैं?"
राज का गुस्सा अब धीरे-धीरे कम हो रहा था, उसकी जगह एक हल्की सी झुंझलाहट और शर्मिंदगी ने ले ली थी।
राज: "मैं जानता हूँ, गलती मेरी थी। पर जिस तरह वो तुम्हें... मतलब, तुम्हारे ब्लाउज के अंदर झांकने की कोशिश कर रहा था, वो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। तुम शहर की हो, तुम्हें इन देहाती भेड़ियों की फितरत नहीं पता। ये आँखों से ही चीर देते हैं।"
अनीता (मुस्कुराते हुए): "तो चीरने दो न राज। देखने से शरीर कम थोड़े ही हो जाता है? बल्कि मुझे तो यह देख कर और भी अच्छा लग रहा था कि तुम्हारे पास जो है, उसे देखने के लिए लोग तरस रहे हैं। अब गुस्सा थूको और ड्राइविंग पर ध्यान दो, वरना हम सुबह तक भी उस बंगले पर नहीं पहुँच पाएंगे।"
राज ने एक गहरी साँस ली और अपनी शर्ट के खुले हुए बटन ठीक किए। "खैर, छोड़ो। हमें जल्दी पहुँचना होगा। अभी भी करीब तीन-चार घंटे का रास्ता बाकी है।"
अनीता ने राज की तरफ मुड़कर देखा। "तीन-चार घंटे और? राज, मैं तो अभी से थक रही हूँ। और वहाँ पहुँचने के बाद तुम्हारा क्या प्लान है?"
राज ने सड़क पर नज़रें टिकाते हुए जवाब दिया। "यह प्रोजेक्ट मेरे करियर के लिए बहुत बड़ा है। शुरुआती दो हफ़्तों का शेड्यूल बहुत टाइट है। सुबह आठ बजे मुझे साइट पर निकलना होगा और शायद शाम को सात-आठ बजे से पहले वापसी न हो पाए। फाइलें, लेबर मैनेजमेंट और सरकारी अफसरों के साथ मीटिंग... मुझे डर है कि तुम्हें वहाँ बोरियत न होने लगे।"
अनीता ने अपनी उंगलियों से राज के बाइसेप्स को सहलाया। "सुबह से शाम तक अकेले? यह तो बहुत ज़ुल्म है राज। मैं अकेले क्या करूँगी? और सुना है वहाँ का स्टाफ भी वैसा ही होगा जैसा अभी वह मिला था?"
राज थोड़ा गंभीर हुआ। "हाँ, बंगला शहर से थोड़ा हटकर है। वहाँ एक पुराना केयरटेकर है—करीम। वह बरसों से उस प्रॉपर्टी की देखरेख कर रहे हैं। वफादार आदमी हैं, पर हाँ, हैं तो देहाती ही। तुम्हें थोड़ा तालमेल बिठाना होगा। मैं कोशिश करूँगा कि हफ़्ते में एक-दो दिन जल्दी आ सकूँ ताकि हम उस छोटे से शहर की शांत रातों का मज़ा ले सकें।"
अनीता ने अपनी कमर को थोड़ा सा और झुकाया, जिससे उसकी नाभि के पास का हिस्सा राज को साफ़ दिखने लगा। "शांत रातें? राज, मुझे नहीं लगता कि तुम्हारे साथ रहते हुए मेरी रातें शांत बीतने वाली हैं। वैसे भी, तुमने अभी जो कार में शुरू किया था, वह अधूरा रह गया है। क्या मुझे उस 'प्रोजेक्ट' के पूरा होने के लिए बंगले तक इंतज़ार करना पड़ेगा?"
राज ने एक तिरछी नज़र अनीता के सुडौल जिस्म पर डाली। "इंतज़ार का फल मीठा होता है, अनीता। बंगले के उस बड़े से बेडरूम में, जहाँ कोई हमें टोकने वाला नहीं होगा, मैं तुम्हें बताऊंगा कि तुम्हारा यह बदन मेरे ऊपर क्या कहर ढाता है। बस ये कुछ घंटे और काट लो।"
अनीता मुस्कुराई और अपने पर्स से लिपस्टिक निकालकर अपने होंठों को और भी गहरा लाल करने लगी। "ठीक है मिस्टर इंजीनियर। मैं इंतज़ार करूँगी। पर याद रखना, अगर तुम काम में ज़्यादा बिजी रहे, तो मुझे अपनी बोरियत मिटाने के लिए कोई और रास्ता ढूँढना पड़ेगा...।"
राज ने गियर बदला और कार की रफ्तार बढ़ा दी। अब सूरज ढलने लगा था और आसमान का रंग गहरा नारंगी और बैंगनी होने लगा था।
"राज, एक बात बताओ," अनीता ने मद्धम आवाज़ में पूछा, उसकी नज़रें बाहर तेज़ी से पीछे छूटते पेड़ों पर थीं। "ये करीम ... । क्या वो अकेले रहते हैं उस बंगले में?"
राज ने स्टयरिंग को एक हाथ से संभालते हुए दूसरे हाथ से सिगरेट का पैकेट निकाला। "हाँ, लगभग अकेले ही समझो। उनकी बीवी का इंतकाल बरसों पहले हो चुका है। उनका एक बेटा है जो शहर में कहीं छोटा-मोटा काम करता है, पर करीम ने उस बंगले को कभी नहीं छोड़ा। वैसे आदमी बहुत तगड़ा है, उसे देखकर तुम कह नहीं पाओगी कि उसकी उम्र क्या होगी। 6 फीट से ऊपर कद है और आज भी लोहे जैसा शरीर।"
अनीता की आँखों में एक अजीब सी चमक आई। "6 फीट से ऊपर? लोहे जैसा शरीर? दिलचस्प है। मुझे लगा था कि कोई लाठी टेकने वाला बूढ़ा होगा जो बस दरवाज़े पर बैठा रहता होगा।"
"नहीं-नहीं," राज हँसा। "वो पुराने ज़माने के लोग हैं, अनीता। असली देसी घी और मेहनत की कमाई वाले। खैर, तुम उससे दूर ही रहना। वो थोड़ा सख्त और पुराने ख्यालों का आदमी है। उसे शहर की औरतों का ये बेबाक अंदाज़ शायद थोड़ा अजीब लगे।"
अनीता ने राज की तरफ झुककर उसके कान के पास फुसफुसाया, "अजीब लगेगा... या फिर पसंद आएगा? तुमने देखा नहीं उस देहाती मंगलू का हाल क्या हुआ था? अगर वो 6 फीट का करीम भी मुझे इसी हाल में देख ले, तो क्या तुम्हें जलन नहीं होगी?"
राज ने एक लंबा कश खींचा और धुआँ बाहर छोड़ते हुए कहा, "जलन तो होगी, पर मुझे अपनी चीज़ों पर पूरा भरोसा है। और करीम जैसे लोग अपनी हदें जानते हैं।
वैसे भी, अगले एक महीने तक मेरा शेड्यूल ऐसा है कि मैं तुम्हें बहुत मिस करने वाला हूँ। सुबह सूरज निकलने से पहले निकलना और चाँद निकलने के बाद आना... ये मेरी नियति होने वाली है।"
"यानी दिन भर मैं और वो विशाल शरीर वाला नौकर उस बड़े से सन्नाटे वाले बंगले में अकेले होंगे?" अनीता ने अपनी उंगलियों से अपनी गर्दन के पसीने को पोंछा। "राज, तुम तो मुझे डरा रहे हो। सोचो, मुझे किसी चीज़ की ज़रूरत हो, तो मुझे उसी को आवाज़ देनी पड़ेगी।"
राज ने मुस्कुराकर अनीता की जाँघ पर अपना हाथ रखा और थोड़ा दबाव बनाया। "वही तो उसका काम है, जान। वो तुम्हारी हर ज़रूरत का ख्याल रखेगा। मैंने उसे साफ़ कह दिया है कि मेमसाहब को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। बस तुम अपनी इस 'कातिल' अदाकारी को थोड़ा काबू में रखना, वरना बेचारा बुढ़ापे में अपना रास्ता भटक जाएगा।"
अनीता खिलखिलाकर हँस पड़ी। "रास्ता भटकना तो आसान है राज, मुश्किल है सही रास्ते पर वापस आना।
वैसे, तुम्हारा ऑफिस वर्क क्या वाकई इतना ज़्यादा होगा? क्या तुम लंच के लिए भी नहीं आ पाओगे?"
"मुश्किल है," राज ने घड़ी देखते हुए कहा। "साइट बंगले से करीब 20 किलोमीटर दूर है। कच्चे रास्ते और धूल... रोज़ आना-जाना वक्त की बर्बादी होगी। मैं वहीं साइट ऑफिस में ही खाना खा लिया करूँगा। तुम्हें करीम ही खाना बनाकर खिलाएगा। सुना है वो मुर्ग और रोटियाँ बहुत लाजवाब बनाता है।"
छह घंटे के थकाऊ सफर के बाद, जब सूरज ढल रहा था और आसमान में नारंगी रंग की लकीरें उभर आई थीं, राज की काली एसयूवी उस छोटे शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक विशाल बंगले के लोहे के भारी गेट के सामने रुकी। यह बंगला किसी पुरानी हवेली से कम नहीं था—पाँच बड़े बेडरूम, तीन बाथरूम और एक विशाल अहाता।
गाड़ी के हॉर्न की आवाज़ सुनकर अंदर से एक लंबी, साये जैसी आकृति बाहर निकलकर आई। यह करीम था, बंगले का हाउसकीपर। 6 फीट 2 इंच लंबा कद, जिस्म पर बुढ़ापे की लकीरें तो थीं पर ढांचा अभी भी मजबूत था। उसका रंग बिल्कुल गहरा काला था। उसके चेहरे पर एक सफेद दाढ़ी थी जो उसके काले रंग पर और भी साफ उभर रही थी।
राज ने गाड़ी अंदर ली और पोर्च में खड़ी कर दी। जैसे ही इंजन शांत हुआ, बाहर की गहरी खामोशी और झींगुरों की आवाज़ कार के अंदर तक सुनाई देने लगी।
"पहुँच गए जान," राज ने एक लंबी साँस ली और कार का दरवाज़ा खोला।
"सलाम, हुज़ूर। आप लोगों का ही इंतज़ार था। सफर में बहुत थक गए होंगे आप लोग," करीम ने अपनी गहरी आवाज़ में कहा। उसकी हिंदी में एक खास तहजीब और ,., लहज़ा था।
राज गाड़ी से उतरा और अपनी कमर सीधी करते हुए बोला, "सलाम, करीम। हाँ, रास्ता काफी लंबा और थकाऊ था।"
अनीता ने अपनी साड़ी को थोड़ा सँभाला। जैसे ही वह कार से बाहर निकली, रात की ठंडी हवा उसके बदन से टकराई। सामने ही करीम खड़ा था—उसका कद वाकई राज के बताए अनुसार 6 फीट 2 इंच से कम नहीं था। उसकी देह सख्त और काली थी।
करीम ने धीरे से अपनी गर्दन ऊपर उठाई। पीली रोशनी में अनीता का गोरा बदन और साड़ी की चमक और उस छोटे ब्लाउज से झलकती उसकी गोरी पीठ देखकर करीम की आँखों की पुतलियाँ फैल गईं। उसने अपनी पूरी ज़िंदगी में शहर की कई औरतें देखी थीं, पर अनीता जैसी मादक और उसके सामने पहली बार खड़ी थी।
"सलाम, मेमसाहब," करीम ने झुककर कहा।
अनीता ने अपनी गर्दन तिरछी की और अपनी मदहोश कर देने वाली मुस्कान के साथ करीम की आँखों में आँखें डालकर देखा। "सलाम, करीम। राज आपकी बहुत तारीफ कर रहे थे।"
करीम की नज़रें अनीता के गहरे गले के ब्लाउज़ और उसकी हिलती हुई कमर पर जम सी गईं। उसने अपनी सूखी ज़ुबान अपने होंठों पर फेरी और दबी आवाज़ में बुदबुदाया:
"छोटे मालिक की मेहरबानी है... हम तो बस इस मिट्टी के रखवाले हैं। आप अंदर पधारें मेमसाहब, हमने अंदर सारा इंतज़ाम कर दिया है। गुसलखाने (बाथरूम) में गर्म पानी तैयार है और खाने की मेज़ भी सज गई है।।"
अनीता ने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया, जिससे उसकी कमर का घुमाव और नाभि करीम की नज़रों के सामने एक पल के लिए नमाया हो गए। उसने मुस्कराकर करीम की तरफ देखा और कहा, "शुक्रिया करीम। मुझे बस एक अच्छे से शावर की ज़रूरत है।"
राज ने डिक्की से सामान निकाला और करीम की तरफ इशारा किया। "करीम, सामान अंदर ले चलो। सफर की वजह से हम काफी थक गए हैं।"
"जी मालिक," करीम ने लपककर भारी सूटकेस उठाए। जब वह अनीता के पास से गुज़रा, तो उसके शरीर की जंगली, पसीने और तंबाकू वाली महक अनीता के नथुनों से टकराई।
अनीता जब बंगले के बड़े बरामदे की सीढ़ियाँ चढ़ रही थी, राज का ध्यान अचानक पीछे की तरफ गया। उसने देखा कि करीम भारी सूटकेस उठाए हुए था, पर उसकी नज़रें सामान पर नहीं बल्कि सीढ़ियाँ चढ़ती अनीता पर जमी थीं। अनीता की तंग रेशमी साड़ी उसके हर कदम के साथ उसके भारी और सेक्सी नितंबों पर कस जाती थी। करीम की आँखें बिना पलक झपकाए उस थिरकते हुए मांसल उभार को निहार रही थीं।
राज को एक पल के लिए अपने सीने में फिर वही तीखी बेचैनी महसूस हुई, जो उसे रास्ते में उस ग्रामीण मंगलू को देखकर हुई थी। उसके दिमाग में सवालों का एक बवंडर उठने लगा।
उसने मन ही मन खुद से पूछा, "क्या मुझे अब मतिभ्रम होने लगा है? क्या मैं हर छोटी चीज़ में कुछ गलत देख रहा हूँ? या फिर इस वीरान और अनजाने माहौल का असर मुझ पर हो रहा है कि मैं अनीता को लेकर ज़रूरत से ज़्यादा असुरक्षित (possessive) होता जा रहा हूँ?"
राज ने अपना सिर झटककर उन ख्यालों को दूर करने की कोशिश की। उसे लगा कि शायद करीम सिर्फ सीढ़ियों पर सावधानी से चढ़ने की वजह से नीचे देख रहा होगा।
वह खुद को समझाने लगा कि अनीता का आकर्षण ही ऐसा है कि किसी की भी नज़रें एक पल के लिए ठहर जाएं, इसका मतलब यह नहीं कि हर कोई गलत नीयत रखता हो। फिर भी, एक अनजाना सा डर उसके दिल के किसी कोने में बैठ गया था।
![[Image: Car-door-image.png]](https://i.ibb.co/C40SrZN/Car-door-image.png)
When Raj opened car Door
![[Image: Gemini-Generated-Image-k4qj82k4qj82k4qj.png]](https://i.ibb.co/CKj2C177/Gemini-Generated-Image-k4qj82k4qj82k4qj.png)
Love scene Inside car
![[Image: Gemini-Generated-Image-7l0m0j7l0m0j7l0m.png]](https://i.ibb.co/35qxRKxR/Gemini-Generated-Image-7l0m0j7l0m0j7l0m.png)
Kissing
![[Image: Gemini-Generated-Image-8kyrpk8kyrpk8kyr.png]](https://i.ibb.co/TM5qmCwx/Gemini-Generated-Image-8kyrpk8kyrpk8kyr.png)
Kareem watching Anita back .
Deepak Kapoor
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- An Innocent Beauty Series ( 5 Books )
- सम्मान और बदला ( 5th-Book in hindi)
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