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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#25
रिशा सरिता से चिपट गयी और बोली- दीदी, मेरी गलती है, पर क्या करूँ. मैं तो शादी से पहले भी बहुत चुदासी थी, सहेलियों की बात सुन सुन कर चूत भड़क जाती थी, पर फिर भी ब्याह होने का इंतज़ार किया. ब्याह हुआ पर आदमी भी केवल नोच खसोट कर चला जाता है. कुछ प्यार-व्यार नहीं हैं हम दोनों में. वह कहता है, बच्चा कर लो. मैंने शर्त रखी है कि जब तुम साथ रहोगे, तभी करूँगी. इन मर्दों का भरोसा नहीं कि कब इल्जाम लगा दें कि बच्चा हमारा नहीं है.
कल रात पहली बार राजू से चुद कर मुझे एक मर्द से चुदने का सही एहसास हुआ है। पहली बार ये एहसास हुआ कि ऑर्गेज्म क्या होता है। हाय दीदी क्या बताऊ तुम्हें कितना तगड़ा लंड है उसका। पहाड़ी आलू के जैसा मोटा सुपाड़ा और मेरी कलाई जितना लंबा और मोटा काला लंड।

उफ्फ मेरी तो सोच के ही पूरे बदन में फिर से सिरहन हो रही है. कल रात सिर्फ एक बार चोद के ही उसने मुझे ठंडा कर दिया और मेरी प्यास बुझा दी। मेरी कितनी बार चुदी बुर भी उसका लौड़ा सहन ना कर पाई और मेरी चीखे निकलवा दी हरामी ने. हमें ठंडा करना हमारे मर्दों के बस की बात नहीं है। मेरी मानो तो एक बार तुम भी उसके लौड़े की सवारी कर लो और अपनी प्यासी चूत को ठंडा करवा लो सरिता की चूत भी राजू के लंड की बात सुनकर गीली हो गयी थी. असल में उसने भी कई बार राजू के लंड के उभार को महसूस किया था.
उसने रिशा से राजू और उसकी चुदाई की सारी बातें पूछी और आखिर में वह रिशा से चिपटती हुई बोली- तूने तो कमाल का काम किया है. अब अकेली तू ही नहीं, मैं भी अपनी चूत रगड़वाउंगी उससे! मैं तेरी बात से पूरी तरह सहमत हूं हमारे मर्दो को भी समझना होगा की आप जितना मर्जी चारा डालो लेकिन अगर आपके डंडे में दम नहीं है तो आपकी भैंस का दूध कोई और ही निकलेगा. सरिता की बात सुन रिशा खुश हो गई

इस पर दोनों ने एक प्लान बनाया.
अगले दिन रिशा ने राजू को पैसे दिए और एक कागज़ पर लिखकर बाज़ार से हेयर रेमूविंग क्रीम मंगवाई.

राजू चुपके से वह क्रीम ले आया.

राजू ने पूछा भाभी ये क्रीम किसके लिए है तो रिशा ने हंसकर जवाब दिया कि मेरे राजा आज इस क्रीम से अपनी चूत से सारे बाल हटकर उसे पूरी तरह से चिकना और मुलायम कर दूंगी ताकि तूजे मेरी चूत चाटने में कोई दिक्कत ना हो .रिशा ने एक क्रीम की शीशी उसे भी देकर अपनी झांटे साफ करने को कहा। रिशा ने उसे समझाया कि इस्तेमाल कैसे होती है और कह दिया कि रात को दस बजे के बाद सबके सोने के बाद नहा धोकर उसके कमरे में आ जाए.
रात को रिशा खाने से जल्दी फारिग होकर अपने कमरे में आ गयी और नहाकर एक हल्की सी फ्रॉक डालकर लेट गयी. उस पारदर्शी फ्रॉक में वो गजब ढा रही थी और उसके बदन का हर एक अंग पूरा नुमाया हो रहा था

आते समय उसने आंखों ही आंखों में सरिता को इशारा कर दिया.

[Image: IMG-5719.jpg]

किचन से निबटकर सरिता कमरे में आई तो लालाजी शराब का गिलास लिए बैठे थे.

आज सरिता ने लालाजी से शराब को लेकर कुछ नहीं कहा, बल्कि पैग ख़त्म होने पर एक बड़ा पैग खुद ही बना कर दे दिया. लालाजी हैरान थे कि आज सूरज पश्चिम से कैसे उग गया!

सरिता बोली- पीकर तुम अच्छे से करते हो इसलिए!

लालाजी तो निहाल हो गए.

[Image: IMG-5755.jpg]
दो पैग चढ़ा कर लाला ने सरिता के ऊपर चढ़ने की कोशिश तो की लेकिन चूत के मुँह पर लौड़ा लगाते ही लालाजी के लौड़े ने दम तोड़ दिया और अपनी झेंप मिटाने के लिए एक और फिसल गए और जल्दी ही खर्राटे लेने लगे.
सरिता का दिल तो किया कि साले का गला दबा कर काम ख़त्म कर दे। बुड्ढा हमेशा गरम करके बीच में ही टपक जाता है . लेकिन राजू और रिशा का ख्याल आते ही उसके चेहरे में एक मुस्कान आई और वो आगे की तैयारी करने लगी। उधर राजू ने जब सरिता को किचन से बाहर जाते देखा तो वह चुपके से रिशा के कमरे में पहुंच गया. जवान रिशा की कसी हुई रसीली चूत ने उसके लंड का बुरा हाल कर रखा था और वो सुबह से तन गया था
रिशा ने उसे अन्दर करके दरवाजा भेड़ लिया.

तभी रिशा ने कमरे की लाइट बंद की और दोनों चूमाचाटी करने लगे. आज कोई जल्दी नहीं थी. पर राजू घबरा रहा था.
रिशा ने उसे उकसाया- तेरी क्यों फट रही है भोसड़ी के … आराम से कर न! थोड़ी देर में राजू सामान्य हो गया. वो अब इत्मिनान से रिशा के हर अंग का नाप अपनी हथेली से लेने लगा. रिशा की सुडोल चूचियो के अपने दोनों हाथों से मसल रहा था और बीच बीच में फ्रॉक के ऊपर से ही रिशा की गोल और चौड़ी गांड का भी मर्दन कर रहा था. राजू का लंड भी पजामे के अंदर से ही पूरा खड़ा उसकी चूत पे दस्तक दे रहा था जिसकी वजह से रिशा की चूत भी अब पूरी गिल्ली हो रही थी



रिशा ने राजू के पजामे में हाथ डाला तो पाया कि राजू ने अच्छे से सफाई कर ली है; उसका लंड चिकना हो गया था और इस समय तना हुआ था.

तब रिशा ने राजू का पजामा उतार दिया और उसका लंड अंडरवियर से बाहर निकल लिया फिर वो नीचे घुटनों पर बैठ कर लंड का मुयाना करने लगी. झांटे साफ करने के कारण आज लंड काफी बड़ा लग रहा था . चमड़ी पीछे कर के उसने लंड का टोपा बाहर निकाल लिया। लंड का टोपा आज कल से भी मोटा लग रहा था और प्रीकम से चमक रहा था। रिशा खुद को रोक ना पाई और लंड मुँह मैं लेकर चूसने लगी. होठों का स्पर्श होते ही राजू की सिसकियाँ निकल गयीं. आह उफ़ आह करता हुआ वो पूरा लंड आह उफ़ आह करता हुआ वो पूरा लंड रिशा के मुँह में घुसाने की कोशिश कर रहा था। रिशा ने भी उसे निराश नहीं किया और टट्टो के साथ उसके पूरे लंड पर अपनी जीभ चलाने लगी

रिशा के हाथों में राजू का औज़ार मचल रहा था.

उसने उसे थूक से भिगो दिया था और वह उसे मसल रही थी
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 23-12-2025, 06:41 PM



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