23-12-2025, 06:08 PM
रात को खाने से निबटकर सरिता ने लालाजी को कह दिया- आज रात मैं रिशा के पास सोऊंगी, मेरा जी खराब हो रहा है.
लालाजी भी समझते थे.
वे सरिता से बोले- अबकी बार जब अजय आए, तो उसे समझाओ कि वह नौकरी छोड़ दे. यहां क्या कमी है!
सरिता ऊपर चली गयी. रिशा उसका इंतज़ार कर रही थी. उसने किवाड़ बंद कर लिया और रिशा के साथ बिस्तर पर बैठ गयी. सरिता के हाथ में थैले में कुछ था.
रिशा ने जानना चाहा, तो सरिता हंस दी और बोली- अभी दिखा दूंगी. तब रिशा ने अपनी अल्मारी से दो नाइटी निकालीं जो उसने नीचे से कटवा ली थीं.
मतलब वह बहुत शॉर्ट नाइटी बन गयी थीं. रिशा सरिता से बोली- आप फ्रेश होकर इसे पहन लेना.
सरिता हंस पड़ी और बोली- इसकी भी क्या जरूरत है हमें! पर रिशा ने जिद की तो दोनों ने पहन ली. अब दोनों किसी सहेलियों की तरह नजर आ रही थीं. हँसते खिलखिलाते दोनों बेड पर पसर गईं और टीवी देखने लगीं.
रिशा की चूत सुलग रही थी.
उसने धीरे धीरे अपने पैरों को सरिता के ऊपर रगड़ना शुरू कर दिया. सरिता असहज हुई और बोली- थोड़ा सब्र तो रख!
इस पर रिशा ने उसका मुँह अपनी ओर किया और लगी चूमने!
इसके बाद जो होना था, वही हुआ.
दोनों की नाइटी उतर गईं और दोनों एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगीं. सरिता के मम्मे भारी थे. रिशा उसके निप्पल चूसने लगी और दांतों से काटने लगी. अब सरिता की चूत भी फुंफकार मारने लगी. उसने रिशा को अपने ऊपर कर लिया.
रिशा अपनी चूत से उसकी चूत रगड़ने लगी. दोनों कसमसा रही थीं. सरिता ने पास रखे थैले से एक बहुत मोटी मोमबत्ती निकाली जिसके दोनों सिरे उसने लंड के सुपारे की तरह घिस रखे थे. सरिता ने थूक लगा कर उसका एक सिरा रिशा की चूत में कर दिया और अन्दर बाहर करने लगी.
रिशा तो पागल जैसी हो गयी. मोमबत्ती उसे राजू के लंड जैसा मजा दे रही थी. वह हांफने लगी.
अब सरिता ने दूसरा सिरा अपनी चूत में किया और दोनों बगल बगल लेटकर एक दूसरे को धक्के लगाने लगीं. दोनों के होंठ मिले हुए थे.
मोमबत्ती तो मोमबत्ती ही होती है, उससे लंड सा मजा कहां.
तब भी दोनों तड़पती हुई मोमबत्ती से मजा लेती रहीं.
रिशा बोली- दीदी, तुम तो लालाजी के औज़ार से खेल लेती हो, मैं क्या करूँ. कब तक अपने दाने को हाथ और खीरे से मसलती रहूँ. अपन दोनों को तो एक असल का मर्द चाहिए.
सरिता चुप रही. तो आखिर में रिशा ने उसे कल रात की पूरी बात बता दी.
लालाजी भी समझते थे.
वे सरिता से बोले- अबकी बार जब अजय आए, तो उसे समझाओ कि वह नौकरी छोड़ दे. यहां क्या कमी है!
सरिता ऊपर चली गयी. रिशा उसका इंतज़ार कर रही थी. उसने किवाड़ बंद कर लिया और रिशा के साथ बिस्तर पर बैठ गयी. सरिता के हाथ में थैले में कुछ था.
रिशा ने जानना चाहा, तो सरिता हंस दी और बोली- अभी दिखा दूंगी. तब रिशा ने अपनी अल्मारी से दो नाइटी निकालीं जो उसने नीचे से कटवा ली थीं.
मतलब वह बहुत शॉर्ट नाइटी बन गयी थीं. रिशा सरिता से बोली- आप फ्रेश होकर इसे पहन लेना.
सरिता हंस पड़ी और बोली- इसकी भी क्या जरूरत है हमें! पर रिशा ने जिद की तो दोनों ने पहन ली. अब दोनों किसी सहेलियों की तरह नजर आ रही थीं. हँसते खिलखिलाते दोनों बेड पर पसर गईं और टीवी देखने लगीं.
रिशा की चूत सुलग रही थी.
उसने धीरे धीरे अपने पैरों को सरिता के ऊपर रगड़ना शुरू कर दिया. सरिता असहज हुई और बोली- थोड़ा सब्र तो रख!
इस पर रिशा ने उसका मुँह अपनी ओर किया और लगी चूमने!
इसके बाद जो होना था, वही हुआ.
दोनों की नाइटी उतर गईं और दोनों एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगीं. सरिता के मम्मे भारी थे. रिशा उसके निप्पल चूसने लगी और दांतों से काटने लगी. अब सरिता की चूत भी फुंफकार मारने लगी. उसने रिशा को अपने ऊपर कर लिया.
रिशा अपनी चूत से उसकी चूत रगड़ने लगी. दोनों कसमसा रही थीं. सरिता ने पास रखे थैले से एक बहुत मोटी मोमबत्ती निकाली जिसके दोनों सिरे उसने लंड के सुपारे की तरह घिस रखे थे. सरिता ने थूक लगा कर उसका एक सिरा रिशा की चूत में कर दिया और अन्दर बाहर करने लगी.
रिशा तो पागल जैसी हो गयी. मोमबत्ती उसे राजू के लंड जैसा मजा दे रही थी. वह हांफने लगी.
अब सरिता ने दूसरा सिरा अपनी चूत में किया और दोनों बगल बगल लेटकर एक दूसरे को धक्के लगाने लगीं. दोनों के होंठ मिले हुए थे.
मोमबत्ती तो मोमबत्ती ही होती है, उससे लंड सा मजा कहां.
तब भी दोनों तड़पती हुई मोमबत्ती से मजा लेती रहीं.
रिशा बोली- दीदी, तुम तो लालाजी के औज़ार से खेल लेती हो, मैं क्या करूँ. कब तक अपने दाने को हाथ और खीरे से मसलती रहूँ. अपन दोनों को तो एक असल का मर्द चाहिए.
सरिता चुप रही. तो आखिर में रिशा ने उसे कल रात की पूरी बात बता दी.


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