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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#22
अगली सुबह सरिता ने मुस्कुराते हुए उससे पूछा- रात को तेरे कमरे से कुछ आवाज आ रही थी! शायद तूने टीवी पर कोई पोर्न लगा ली थी … तो पगली आवाज थोड़ी धीमी कर लिया किया कर!


रिशा ने भी कह दिया- मैं नीचे पानी लेने आई थी तो आपका कमरा हिल रहा था.

सरिता हंस दी और बोली- लाला जी चढ़ाई की कोशिश कर रहे थे … पर बार बार फिसल जा रहे थे, तो मैंने ही चढ़ाई कर ली थी. पर लालाजी से प्यास बुझाई तो जाती नहीं है, उलटे भड़का और देते हैं. मैं सोच रही थी तेरे पास आ जाऊं … पर लालाजी ने कमरे की चिटकनी कसके बंद कर दी थी, जो मुझसे खुली ही नहीं.

रिशा की तो यह सुन कर जान निकलते निकलते बची. वह सोच रही थी कि दीदी अगर ऊपर आ जातीं तो क्या होता!

रिशा ने सरिता से कहा- मेरे से तो अब बर्दाश्त नहीं होता. मैं सोचती हूँ कि भाग जाऊं या अजय को तलाक दे दूं.

सरिता सुन कर सन्न रह गयी.

वह रिशा का हाथ पकड़ कर कमरे में ले गयी और कमरा बंद करके उससे चिपट गयी.


दोनों रोने लगीं.

सरिता ने उससे कहा- कहां जाएगी पगली. दुनिया तुझे नोंच खसोट लेगी. यहां जब हम दोनों रानियों की तरह रह रही हैं. बस शरीर की आग नहीं बुझ रही है, तो हमें बर्दाश्त करना होगा … और यहीं रहकर कोई रास्ता निकालेंगी.
दोनों आपस में लिपट कर एक दूसरे को संभालने लगीं. रिशा ने सरिता के होठों को चूमना शुरू किया.

सरिता ने उससे कहा- अभी शांत हो, आज रात को दोनों साथ सोयेंगी. गर्मी मिटाने को मैं कुछ लाऊंगी अपने साथ! रिशा हंस पड़ी.

दिन में राजू रिशा के सामने आने से बचता रहा.

दोपहर को जब खाना खाने आया तो रिशा ने उसकी खाने में मिर्च ज्यादा ही तेज कर दी.

राजू ने जैसे ही निवाला मुँह में रखा तो उसकी आह निकल गयी.


पास खड़ी सरिता बोली- क्या हुआ?

राजू धीरे से बोला- शायद सब्जी कुछ तीखी ज्यादा है

रिशा हँसती हुई बोली- अभी लालाजी खा कर गए हैं, उन्होंने तो कुछ नहीं कहा. तूने कुछ गर्म ले लिया होगा मुँह में, तो तेरा मुँह कट गया है.

यह कह कर उसने सरिता से नजर बचाकर राजू को आंख मार दी.

राजू ने जैसे तैसे खाना खाया.

फिर रिशा ने उससे कहा- ऊपर मेरे कमरे में आ जाना, ग्लिसरीन दे दूँगी. वह मुँह में लगा लेना, आराम मिल जाएगा.

यह कहकर वह ऊपर कमरे में चली गयी.
पीछे पीछे सरिता ने राजू को जबरदस्ती भेज दिया- जा, भाभी से ग्लिसरीन ले आ, नहीं तो परेशान रहेगा.


ऊपर कमरे में उसके पहुंचते ही रिशा उससे चिपट गयी और ताबड़तोड़ चूमने लगी. रिशा ने उसके पजामे के ऊपर से ही उसका लंड कसके पकड़ लिया और मसलने लगी.
राजू गिड़गिड़ाया- भाभी ज़ी अभी जाने दो. लालाजी राह देख रहे होंगे. राजू के लन को हाथो में पकड़ रिशा बोली कल रात से जब से इसको चूत में लिया है इसने मेरा सारा चैन लूट लिया है। और कुछ ना सही कम से कम दो मिनट चूस तो लेने दे. राजू का पायजामा नीचे सरका रिशा ने झट से राजू के तन्ने लौड़े को मूंह में भर लिया और खूब मजे से चूसने लगी। राजू की तो जैसी जान की हलक में फंसी पड़ी थी लेकिन रिशा के मुंह की गर्मी के आगे वो ज्यादा देर तक रुक नहीं पाया और पांच मिनट में ही अपनी ढेर सारी मलाई से रिशा का मुंह भर दिया जिसे रिशा भी पूरे चटकारे लेते हुए पी गई. उसके बाद वो दोनों नीचे आ गए.
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 23-12-2025, 06:06 PM



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