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Adultery एक पत्नी का सफर
#70
अवस्थी सर बेड पर लेटे थे।
पूजा के जाने के बाद उनका लंड अभी भी तना हुआ था।
उस किस की याद – पूजा के नरम, गुलाबी होंठ, उसकी जीभ का मीठा स्वाद, उसकी साँसें उनके मुँह में।
उसकी कमर पर उनका हाथ – वो पतली कमर जो पूरी तरह उनके हाथ में आ गई थी।
उसकी गांड का दबाव।
वो सब याद करके अवस्थी सर का लंड और सख्त हो गया।
उन्होंने फोन उठाया।
डायल किया।

“हेलो… गई क्या पूजा?”

दूसरी तरफ़ रेणु की आवाज़ – हल्की हँसी के साथ।
“हाँ सर… वो गई अपने पति के साथ… बहुत दुखी लग रही थी… आपने  chod दिया क्या?”

“अरे अभी कहाँ… वो तेरी तरह नहीं है ना… साली शादीशुदा के नखरे बहुत होते हैं…”

“अच्छा… तो अब?”

“हाँ… तू आ जा… साली ने लंड खड़ा कर दिया है… पूरा 9 इंच का तंबू बन गया है…”

रेणु ने हँसकर कहा,
“आ जाऊँगी… पर आज तो आप बहुत जोश में लग रहे हैं…”

“हाँ… पास कर दूँगा तुझे भी… और तेरे बीएफ को भी… आ जा कुतिया… जल्दी…”

आधे घंटे बाद।
डोरबेल बजी।
अवस्थी सर ने दरवाज़ा खोला।

रेणु खड़ी थी।
सेक्सी ब्लैक क्रॉप टॉप – इतना छोटा कि उसका पेट पूरा बाहर, नाभि में चाँदी की रिंग चमक रही।
ब्रा नहीं पहनी थी – उसके गहरे भूरे निप्पल्स टॉप में साफ़ उभरे हुए, सख्त।
नीचे काले डेनिम शॉर्ट्स – इतने छोटे कि गांड का आधा हिस्सा बाहर, जाँघें पूरी चमक रही थीं।
उसकी दुस्की त्वचा पर हल्का पसीना।
बाल खुले, लहराते।
लिपस्टिक गहरी लाल।
आँखों में काजल।
वो मुस्कुराई – भूखी मुस्कान।

“आ गई मेरी कुतिया…”

अवस्थी सर ने उसे अंदर खींचा।
दरवाज़ा बंद।
रेणु को दीवार से सटाकर किस किया।
जीभ मुँह में घुसाई।
हाथ सीधे टॉप के नीचे – उसके बूब्स पकड़े।
ज़ोर से मसला।
निप्पल्स को चुटकी में लिया।
खींचा।

“उम्म… सर… आज तो बहुत जोश में हो…
आह्ह… निप्पल्स दर्द कर रहे हैं…
पर अच्छा लग रहा है…
आह्ह… और दबाओ…”

अवस्थी सर ने उसे गोद में उठाया।
बेड पर पटक दिया।
रेणु की सिसकी निकली।
“आह्ह… सर… धीरे…”

अवस्थी सर उसके ऊपर चढ़ गए।
टॉप ऊपर किया।
बूब्स बाहर।
गहरे भूरे निप्पल्स सख्त।
अवस्थी सर ने एक निप्पल मुँह में लिया।
ज़ोर से चूसा।
दूसरे को दाँतों से काटा।
जीभ से गोल-गोल घुमाया।

“आह्ह… सर… आह्ह… चूसो…
और ज़ोर से…
आह्ह… दाँत लगाओ…
उम्म… हाँ वैसे ही…
आह्ह… मेरे निप्पल्स को काटो…
आह्ह… दर्द अच्छा लग रहा है…”

अवस्थी सर ने शॉर्ट्स खींची।
पैंटी के साथ।
रेणु अब पूरी नंगी।
उसकी चूत – बाल हल्के ट्रिम्ड, होंठ गहरे भूरे, पहले से गीली, रस टपक रहा था।

अवस्थी सर ने रेणु का सिर बेड के किनारे लटका दिया।
मुँह नीचे।
अपना पायजामा नीचे किया।
उसका 9 इंच का लंड बाहर।
मोटा, लंबा, नसें फूली हुईं, सुपारा लाल और चमकदार।

“ले कुतिया… चूस…
पूजा की तरह चूस…”

रेणु ने मुँह खोला।
अवस्थी सर ने लंड मुँह में घुसाया।
गहरा।
रेणु की गैगिंग शुरू।
“ग्लक… ग्लक… आह्ह… सर… बहुत बड़ा है…
ग्लक… गला तक पहुँच गया…
आह्ह… आह्ह… दम घुट रहा है…”

अवस्थी सर ने कमर पकड़कर मुँह चोदना शुरू किया।
तेज़-तेज़।
“ले पूजा… ले साली…
तेरी चूचियाँ याद करके चोद रहा हूँ…
आह्ह… पूजा… चूस मेरा लंड…
गहरा ले… हाँ वैसे ही…
आह्ह… तेरी जीभ… मेरे लंड पर…”

रेणु की आँखों से आँसू बह रहे थे।
उसका मुँह लार से भरा।
गला लाल।
“क्या सर… पूजा क्यों बोल रहे हो…
पहले तो ऐसे नहीं चुसवाया… इतना वाइल्ड…
आह्ह… ग्लक… सर… दम घुट रहा है…
पर अच्छा लग रहा है…
आह्ह… और गहरा…”

अवस्थी सर ने और ज़ोर से घुसाया।
“पूजा ने लंड ऐसा खड़ा किया है…
क्या बताऊँ उसका फिगर…
उम्म… उसके बूब्स… उसकी गांड…
उसकी चूत… टाइट होगी…
आज तुझे पूजा बनाकर चोदूँगा…”

फिर रेणु को उठाया।
डॉगी स्टाइल me
रेणु की गांड ऊपर।
अवस्थी सर ने लंड चूत पर रगड़ा।
रस से चमक गया।
फिर एक झटके में पूरा घुसाया।

“आआह्ह्ह… सर… फाड़ दिया…!!!
आह्ह… बहुत बड़ा है…
आह्ह… धीरे… आह्ह…”

“ले कुतिया… ले पूजा…
तेरी चूत तो ढीली हो गई है…
पर पूजा की तो टाइट होगी…
आह्ह… ले… ले मेरा लंड…”

वो ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे।
थप-थप-थप-थप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
रेणु की गांड हर धक्के में हिल रही थी –
गोल, दुस्की, मुलायम गोश्त लहरा रहा था।
उसके बूब्स लहरा रहे थे।
अवस्थी सर ने एक हाथ से बूब पकड़ा।
मसला।
निप्पल खींचा।

“आह्ह… सर… चोदो…
पूजा बनकर चोदो मुझे…
आह्ह… हाँ… और ज़ोर से…
आह्ह… फाड़ दो मेरी चूत…
आह्ह… पति देव… चोदो अपनी पूजा को…”

अवस्थी सर लेट गए।
रेणु ऊपर बैठी।
उसने लंड चूत में लिया।
धीरे से नीचे बैठी।
“आह्ह… सर… पूरा अंदर…
आह्ह… कितना मोटा है…”

वो कूदने लगी।
उसकी गांड अवस्थी सर की जाँघों पर टकरा रही थी – चट-चट-चट।
उसके बूब्स उछल रहे थे – अवस्थी सर के चेहरे पर लगते।
अवस्थी सर ने दोनों बूब्स पकड़कर मसला।
निप्पल्स चुटकी में लेकर खींचा।
मुँह में लिया।
चूसा।

“आह्ह… पूजा… मेरी रंडी…
कूद… और तेज़…
आह्ह… तेरी चूत मेरे लंड को निगल रही है…
आह्ह… हाँ वैसे ही…
आह्ह… तेरी गांड हिल रही है…
कितनी मस्त है…”

रेणु की आहें –
“आह्ह… पति देव… आह्ह… तुम्हारा लंड…
मेरी चूत में… आह्ह… पूरा…
आह्ह… झड़ने वाली हूँ…
आह्ह… और ज़ोर से…
आह्ह… चोदो… चोदो अपनी पूजा को…
आह्ह… हाँ… नीचे से धक्का मारो…”

अवस्थी सर ऊपर।
रेणु की टाँगें उनके कंधों पर।
लंड पूरा गहराई तक।
अवस्थी सर ने तेज़-तेज़ धक्के मारे।
रेणु की चूत से रस की आवाज़ें – चप-चप-चप।

“आह्ह… सर… आह्ह… बहुत गहरा…
आह्ह… मेरी बच्चेदानी तक पहुँच गया…
आह्ह… फाड़ दो…
आह्ह… हाँ… और तेज़…”

अवस्थी सर ने उसकी टाँगें और ऊपर कीं।
लंड और गहरा।
“ले पूजा… ले मेरी रंडी…
तेरी चूत में मेरा लंड…
आह्ह… कितनी गर्म है…
आह्ह… सिकुड़ रही है…”

दोनों करवट लेकर।
अवस्थी सर पीछे से।
एक हाथ से बूब मसलते।
दूसरे से क्लिट रगड़ते।
लंड धीरे-धीरे अंदर-बाहर।

“आह्ह… सर… ये पोजीशन…
आह्ह… बहुत अच्छी लग रही है…
आह्ह… धीरे-धीरे…
आह्ह… हाँ… मेरी क्लिट…
आह्ह… रगड़ो…
आह्ह… झड़ने वाली हूँ फिर…”

अवस्थी सर ने रेणु को उठाया।
दीवार से सटाया।
एक टाँग ऊपर उठाई।
लंड चूत में घुसाया।
ज़ोर-ज़ोर से चोदा।
रेणु की पीठ दीवार से रगड़ खा रही थी।

“आह्ह… सर… खड़े-खड़े…
आह्ह… मेरी टाँग काँप रही है…
आह्ह… हाँ… और ज़ोर से…
आह्ह… दीवार से टकरा रही हूँ…
आह्ह… चोदो… चोदो मुझे…”

अवस्थी सर की साँसें फट रही थीं।
“पिल्स ले रही है ना…?”

“हाँ… ले रही हूँ…
आह्ह… अंदर ही डाल दो…
आह्ह… भर दो मुझे…
आह्ह… अपना वीर्य… मेरी चूत में…”

अवस्थी सर ने स्पीड और बढ़ाई।
रेणु की चूत सिकुड़ गई।
वो झड़ गई।
“आआह्ह्ह… आह्ह… सर… झड़ गई…
आह्ह… तुम्हारा लंड… आह्ह…”

अवस्थी सर भी नहीं रुके।
“ले पूजा… ले मेरी रंडी…
मेरा वीर्य ले…
आह्ह… आह्ह… ले…”

और वो झड़ गए।
रेणु की चूत में।
गर्म, गाढ़ा वीर्य।
बहुत सारा।
रेणु की चूत से बाहर बहने लगा।
उनकी जाँघों पर।

दोनों हाँफ रहे थे।
अवस्थी सर रेणु पर गिर पड़े।
उसके होंठों पर किस।
गहरा।
जीभें मिलीं।
लार का आदान-प्रदान।

रेणु ने हँसकर कहा,
“सर… आज तो आपने पूजा को ही चोद दिया…
मुझे तो बस इस्तेमाल किया…
पर मज़ा आया… बहुत…”

अवस्थी सर हँसे।
“तू तो मेरी पुरानी रंडी है…
पर पूजा… वो नई माल है…
अब वो आएगी…
और तब असली मज़ा आएगा…”

रूम में थप-थप की आवाज़ थम गई थी।
पर अवस्थी सर की भूख…
और बढ़ गई थी।
और रेणु…
रेणु बस हँस रही थी।
क्योंकि उसे पता था –
अवस्थी सर का अगला शिकार कौन है।

और पूजा…
दूर दिल्ली में…
संजय के साथ…
पर उसके सपने में अभी भी अवस्थी सर थे।
और उसकी चूत…
अभी भी गीली थी।
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RE: एक पत्नी का सफर - by Tiska jay - 22-12-2025, 12:25 AM



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