22-12-2025, 12:08 AM
अगले दिन से पूजा अवस्थी सर से नज़रें चुराने लगी।
क्लास में जब वो बोर्ड पर लिखते, पूजा की नज़रें ज़मीन पर।
पर जैसे ही सर की तरफ़ देखती –
सपना याद आ जाता।
वो सपना जिसमें वो अवस्थी सर के ऊपर थी।
उनका लंड उसकी चूत में।
वो खुद कूद रही थी।
उसकी गांड हिल रही थी।
उसके बूब्स उछल रहे थे।
और वो चिल्ला रही थी – “पति देव… और ज़ोर से…”
पूजा का चेहरा लाल हो जाता।
उसकी साँसें तेज़।
ना चाहते हुए भी उसकी नज़रें अवस्थी सर की पैंट पर जातीं।
उसके लंड की जगह पर।
वो सोचती –
“कितना बड़ा होगा…?
सपने में तो बहुत बड़ा था…
मोटा… मेरी चूत फाड़ रहा था…”
वो खुद को कोसती।
“नहीं पूजा… नहीं…
ये गलत है…”
पर नज़रें फिर चली जातीं।
हर बार।
अवस्थी सर के घर जाना बंद कर दिया।
पेपर्स शुरू हो गए थे।
पूजा दिन-रात पढ़ती।
पर रात को सपना फिर आता।
वो अवस्थी सर के ऊपर।
उनका लंड उसकी चूत में।
वो कूद रही।
“पति देव… आह्ह… और ज़ोर से…”
वो बैचेन होकर उठ जाती।
चूत गीली।
निप्पल्स सख्त।
वो रोती।
“मैं कितनी गंदी हो गई हूँ…”
लास्ट पेपर के बाद – शाम
पेपर्स अच्छे गए थे।
रात को संजय आने वाला था।
पूजा ने सोचा –
“सर से मिलकर थैंक्स बोल दूँ…
फिर सब खत्म।
संजय के साथ चली जाऊँगी…”
वो अवस्थी सर के घर गई।
डोरबेल बजाई।
कोई जवाब नहीं।
दरवाज़ा धक्का दिया – खुला था।
अंदर रोने की आवाज़।
पूजा अंदर गई।
ड्रॉइंग रूम में अवस्थी सर फर्श पर बैठे थे।
शालिनी मैम की फोटो के सामने।
उस पर फूल।
दीया जला हुआ।
अवस्थी सर ज़ोर-ज़ोर से रो रहे थे।
कंधे हिल रहे थे।
“सर… क्या हुआ…?”
अवस्थी सर ने आँसू भरी आँखों से देखा।
“आज का दिन ही था पूजा…
आज ही के दिन वो मुझे छोड़कर चली गई थी…
20 साल…
20 साल हो गए…
और आज…
तुम भी चली जाओगी…”
वो फिर रोने लगे।
“एक तुम थीं…
जो शालिनी की तरह…
मुझे अपने हाथ से खाना खिलाती थीं…
उसकी तरह देखभाल करती थीं…
और आज… तुम भी चली जाओगी…
अब फिर अकेलापन…”
पूजा का दिल फट गया।
वो उनके पास बैठ गई।
“अरे नहीं सर… मैं वापस तो आऊँगी ना…
बस एक महीने की तो बात है…”
अवस्थी सर ने आँसू भरी आँखों से देखा।
उनकी नज़रें पूजा के कुर्ते के गले पर रुकीं –
जहाँ पसीने से कुर्ता चिपक गया था, बूब्स का शेप साफ़ दिख रहा था।
“पता नहीं तब तक मैं रहूँ या न रहूँ…”
“नहीं सर… ऐसा मत बोलिए…”
“और क्या करूँ…?
तुम अपने पति के साथ होगी…
सब अपने घरवालों के साथ…
और मैं अकेला फिर से…
अब तक तो बच्चों को पढ़ाकर मन बहला लेता था…
फिर तुम आईं…
घाव को कुरेद गईं…
मेरा अकेलापन मुझे काटने लगेगा…”
पूजा की आँखें भर आईं।
उसकी साँसें तेज़।
उसने अवस्थी सर का हाथ पकड़ा।
उनकी उंगलियाँ गर्म थीं।
“प्लीज़ सर… ऐसा मत बोलो…
मैं आपसे रोज़ बात करूँगी…
मैं आपका साथ दूँगी…
आपको कभी अकेला महसूस नहीं होने दूँगी…”
“कसम से…?”
“हाँ कसम से सर…”
“तो खाओ मेरी मरी हुई बीवी की कसम…”
पूजा ने आँखें बंद कीं।
उसकी चूत में एक हल्की सिहरन।
पर वो बोली,
“आपकी बीवी तो अब इस दुनिया में नहीं हैं सर…
फिर भी… मैं उनकी और अपने पति की कसम खाती हूँ…
आपको कभी अकेला महसूस नहीं होने दूँगी…
आपका हमेशा साथ दूँगी…
आपको आपकी बीवी की कमी नहीं खलने दूँगी…”
बोल तो गई।
फिर मन में सोचा –
“ये क्या बोल दिया मैंने…?
पर अब बोल दिया… तो निभाऊँगी…”
अवस्थी सर रोते हुए पूजा को गले लगा लिए।
उन्होंने पूजा को पूरा फील किया।
उसके बूब्स उनकी छाती से दबे हुए – मुलायम, गर्म, निप्पल्स सख्त होकर उनकी शर्ट में घुस रहे थे।
उनकी साँसें पूजा की गर्दन पर गर्म हवा फेंक रही थीं।
उनका हाथ पूजा की कमर पर – धीरे से नीचे सरकता हुआ, गांड पर।
हल्का सा दबाव।
पूजा की साँस रुक गई।
उसकी चूत में बिजली दौड़ गई।
पैंटी गीली हो गई।
पर वो अलग नहीं हुई।
आज वो जुदा होने वाली थी।
अकेला छोड़ने वाली थी।
अवस्थी सर की साँसें तेज़।
उनका लंड पूजा की जाँघ से दब रहा था – सख्त, गर्म।
पूजा ने महसूस किया।
उसकी चूत और गीली हो गई।
पर वो चुप रही।
“आपको वादा करना होगा…
कि आप मेरा वेट करोगे…”
“हाँ मैं करूँगा बेटा…”
“बेटा नहीं… पूजा…
आप मुझे अब पूजा ही बुलाएँगे…”
“ठीक है पूजा… मैं वेट करूँगा…
पर तुम क्या सच में वापस आओगी…?
यहीं बनके मुकर गई तो मैं मर…”
“इतना ही बोल पाए अवस्थी…”
पूजा ने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
किस।
धीरे से।
फिर गहरा।
जीभें मिलीं।
अवस्थी सर की साँसें पूजा के मुँह में।
पूजा की सिसकी।
उसकी जीभ अवस्थी सर के मुँह में घूम रही थी।
अवस्थी सर का हाथ पूजा की गांड पर – ज़ोर से दबाया।
उंगलियाँ दरार में।
पूजा की चूत से रस बह निकला।
किस टूटा।
दोनों की साँसें तेज़।
पूजा के होंठ गीले।
अवस्थी सर के होंठ पर पूजा की लार।
पूजा ने कहा,
“लो… अब भरोसा हुआ ना…?”
“हाँ पूजा… मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगा…”
पूजा उठी।
आँखें नम।
दुपट्टा संभाला।
पर उसकी चूत अभी भी धड़क रही थी।
उसके निप्पल्स सख्त।
वो दरवाज़े तक गई।
एक बार पलटी।
अवस्थी सर अभी भी रो रहे थे।
वो मुस्कुराई।
“सर… मैं आऊँगी…
पक्का…”
और चली गई।
नम आँखों के साथ।
पर मन में एक अजीब सा सुकून।
और एक नई आग।
**अवस्थी का मन**
“साली ने किस कर दिया…
अपने नरम होंठ मेरे होंठों पर…
उसकी जीभ मेरे मुँह में…
उसकी गांड मेरे हाथ में…
अब ये मेरी है…
ये वापस आएगी…
और तब मैं इसे पूरा अपना बना लूँगा…
इसकी चूत में अपना लंड पेलूँगा…
इसके बूब्स चूसूँगा…
ये मेरे लिए रोएगी…
और मेरे लिए चीखेगी…”
**पूजा का मन**
“मैंने क्या कर दिया…?
एक बूढ़े को किस…
उसकी साँसें मेरे मुँह में…
उसका हाथ मेरी गांड पर…
पर मुझे… अच्छा लग रहा था…?
मेरी चूत क्यों गीली हो गई…?
संजय… माफ़ कर दो…
पर सर रो रहे थे…
मैंने बस सांत्वना दी…”
वो हॉस्टल लौटी।
संजय का इंतज़ार कर रही थी।
पर उसके होंठों पर अभी भी अवस्थी सर की साँसें थीं।
उसकी चूत में अभी भी वो सिहरन।
और मन में एक नया वादा।
जो वो निभाने वाली थी।
चाहे कुछ भी हो जाए।
रात गहरी थी।
और पूजा की ज़िंदगी…
अब एक नई दिशा में मुड़ चुकी थी।
एक ऐसी दिशा…
जहाँ वापसी मुश्किल थी।
क्लास में जब वो बोर्ड पर लिखते, पूजा की नज़रें ज़मीन पर।
पर जैसे ही सर की तरफ़ देखती –
सपना याद आ जाता।
वो सपना जिसमें वो अवस्थी सर के ऊपर थी।
उनका लंड उसकी चूत में।
वो खुद कूद रही थी।
उसकी गांड हिल रही थी।
उसके बूब्स उछल रहे थे।
और वो चिल्ला रही थी – “पति देव… और ज़ोर से…”
पूजा का चेहरा लाल हो जाता।
उसकी साँसें तेज़।
ना चाहते हुए भी उसकी नज़रें अवस्थी सर की पैंट पर जातीं।
उसके लंड की जगह पर।
वो सोचती –
“कितना बड़ा होगा…?
सपने में तो बहुत बड़ा था…
मोटा… मेरी चूत फाड़ रहा था…”
वो खुद को कोसती।
“नहीं पूजा… नहीं…
ये गलत है…”
पर नज़रें फिर चली जातीं।
हर बार।
अवस्थी सर के घर जाना बंद कर दिया।
पेपर्स शुरू हो गए थे।
पूजा दिन-रात पढ़ती।
पर रात को सपना फिर आता।
वो अवस्थी सर के ऊपर।
उनका लंड उसकी चूत में।
वो कूद रही।
“पति देव… आह्ह… और ज़ोर से…”
वो बैचेन होकर उठ जाती।
चूत गीली।
निप्पल्स सख्त।
वो रोती।
“मैं कितनी गंदी हो गई हूँ…”
लास्ट पेपर के बाद – शाम
पेपर्स अच्छे गए थे।
रात को संजय आने वाला था।
पूजा ने सोचा –
“सर से मिलकर थैंक्स बोल दूँ…
फिर सब खत्म।
संजय के साथ चली जाऊँगी…”
वो अवस्थी सर के घर गई।
डोरबेल बजाई।
कोई जवाब नहीं।
दरवाज़ा धक्का दिया – खुला था।
अंदर रोने की आवाज़।
पूजा अंदर गई।
ड्रॉइंग रूम में अवस्थी सर फर्श पर बैठे थे।
शालिनी मैम की फोटो के सामने।
उस पर फूल।
दीया जला हुआ।
अवस्थी सर ज़ोर-ज़ोर से रो रहे थे।
कंधे हिल रहे थे।
“सर… क्या हुआ…?”
अवस्थी सर ने आँसू भरी आँखों से देखा।
“आज का दिन ही था पूजा…
आज ही के दिन वो मुझे छोड़कर चली गई थी…
20 साल…
20 साल हो गए…
और आज…
तुम भी चली जाओगी…”
वो फिर रोने लगे।
“एक तुम थीं…
जो शालिनी की तरह…
मुझे अपने हाथ से खाना खिलाती थीं…
उसकी तरह देखभाल करती थीं…
और आज… तुम भी चली जाओगी…
अब फिर अकेलापन…”
पूजा का दिल फट गया।
वो उनके पास बैठ गई।
“अरे नहीं सर… मैं वापस तो आऊँगी ना…
बस एक महीने की तो बात है…”
अवस्थी सर ने आँसू भरी आँखों से देखा।
उनकी नज़रें पूजा के कुर्ते के गले पर रुकीं –
जहाँ पसीने से कुर्ता चिपक गया था, बूब्स का शेप साफ़ दिख रहा था।
“पता नहीं तब तक मैं रहूँ या न रहूँ…”
“नहीं सर… ऐसा मत बोलिए…”
“और क्या करूँ…?
तुम अपने पति के साथ होगी…
सब अपने घरवालों के साथ…
और मैं अकेला फिर से…
अब तक तो बच्चों को पढ़ाकर मन बहला लेता था…
फिर तुम आईं…
घाव को कुरेद गईं…
मेरा अकेलापन मुझे काटने लगेगा…”
पूजा की आँखें भर आईं।
उसकी साँसें तेज़।
उसने अवस्थी सर का हाथ पकड़ा।
उनकी उंगलियाँ गर्म थीं।
“प्लीज़ सर… ऐसा मत बोलो…
मैं आपसे रोज़ बात करूँगी…
मैं आपका साथ दूँगी…
आपको कभी अकेला महसूस नहीं होने दूँगी…”
“कसम से…?”
“हाँ कसम से सर…”
“तो खाओ मेरी मरी हुई बीवी की कसम…”
पूजा ने आँखें बंद कीं।
उसकी चूत में एक हल्की सिहरन।
पर वो बोली,
“आपकी बीवी तो अब इस दुनिया में नहीं हैं सर…
फिर भी… मैं उनकी और अपने पति की कसम खाती हूँ…
आपको कभी अकेला महसूस नहीं होने दूँगी…
आपका हमेशा साथ दूँगी…
आपको आपकी बीवी की कमी नहीं खलने दूँगी…”
बोल तो गई।
फिर मन में सोचा –
“ये क्या बोल दिया मैंने…?
पर अब बोल दिया… तो निभाऊँगी…”
अवस्थी सर रोते हुए पूजा को गले लगा लिए।
उन्होंने पूजा को पूरा फील किया।
उसके बूब्स उनकी छाती से दबे हुए – मुलायम, गर्म, निप्पल्स सख्त होकर उनकी शर्ट में घुस रहे थे।
उनकी साँसें पूजा की गर्दन पर गर्म हवा फेंक रही थीं।
उनका हाथ पूजा की कमर पर – धीरे से नीचे सरकता हुआ, गांड पर।
हल्का सा दबाव।
पूजा की साँस रुक गई।
उसकी चूत में बिजली दौड़ गई।
पैंटी गीली हो गई।
पर वो अलग नहीं हुई।
आज वो जुदा होने वाली थी।
अकेला छोड़ने वाली थी।
अवस्थी सर की साँसें तेज़।
उनका लंड पूजा की जाँघ से दब रहा था – सख्त, गर्म।
पूजा ने महसूस किया।
उसकी चूत और गीली हो गई।
पर वो चुप रही।
“आपको वादा करना होगा…
कि आप मेरा वेट करोगे…”
“हाँ मैं करूँगा बेटा…”
“बेटा नहीं… पूजा…
आप मुझे अब पूजा ही बुलाएँगे…”
“ठीक है पूजा… मैं वेट करूँगा…
पर तुम क्या सच में वापस आओगी…?
यहीं बनके मुकर गई तो मैं मर…”
“इतना ही बोल पाए अवस्थी…”
पूजा ने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
किस।
धीरे से।
फिर गहरा।
जीभें मिलीं।
अवस्थी सर की साँसें पूजा के मुँह में।
पूजा की सिसकी।
उसकी जीभ अवस्थी सर के मुँह में घूम रही थी।
अवस्थी सर का हाथ पूजा की गांड पर – ज़ोर से दबाया।
उंगलियाँ दरार में।
पूजा की चूत से रस बह निकला।
किस टूटा।
दोनों की साँसें तेज़।
पूजा के होंठ गीले।
अवस्थी सर के होंठ पर पूजा की लार।
पूजा ने कहा,
“लो… अब भरोसा हुआ ना…?”
“हाँ पूजा… मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगा…”
पूजा उठी।
आँखें नम।
दुपट्टा संभाला।
पर उसकी चूत अभी भी धड़क रही थी।
उसके निप्पल्स सख्त।
वो दरवाज़े तक गई।
एक बार पलटी।
अवस्थी सर अभी भी रो रहे थे।
वो मुस्कुराई।
“सर… मैं आऊँगी…
पक्का…”
और चली गई।
नम आँखों के साथ।
पर मन में एक अजीब सा सुकून।
और एक नई आग।
**अवस्थी का मन**
“साली ने किस कर दिया…
अपने नरम होंठ मेरे होंठों पर…
उसकी जीभ मेरे मुँह में…
उसकी गांड मेरे हाथ में…
अब ये मेरी है…
ये वापस आएगी…
और तब मैं इसे पूरा अपना बना लूँगा…
इसकी चूत में अपना लंड पेलूँगा…
इसके बूब्स चूसूँगा…
ये मेरे लिए रोएगी…
और मेरे लिए चीखेगी…”
**पूजा का मन**
“मैंने क्या कर दिया…?
एक बूढ़े को किस…
उसकी साँसें मेरे मुँह में…
उसका हाथ मेरी गांड पर…
पर मुझे… अच्छा लग रहा था…?
मेरी चूत क्यों गीली हो गई…?
संजय… माफ़ कर दो…
पर सर रो रहे थे…
मैंने बस सांत्वना दी…”
वो हॉस्टल लौटी।
संजय का इंतज़ार कर रही थी।
पर उसके होंठों पर अभी भी अवस्थी सर की साँसें थीं।
उसकी चूत में अभी भी वो सिहरन।
और मन में एक नया वादा।
जो वो निभाने वाली थी।
चाहे कुछ भी हो जाए।
रात गहरी थी।
और पूजा की ज़िंदगी…
अब एक नई दिशा में मुड़ चुकी थी।
एक ऐसी दिशा…
जहाँ वापसी मुश्किल थी।


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