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Adultery एक पत्नी का सफर
#68
संजय का कॉल आया।
पूजा ने फोन उठाया।
उसकी आवाज़ में हल्की-सी थकान थी, लेकिन वो छिपाने की कोशिश कर रही थी।
“हेलो जान… सब ठीक है ना?”

संजय की आवाज़ में हमेशा की तरह प्यार था।
“हाँ जान… बस थोड़ी थकान है। कॉलेज में पढ़ाई… तुम बताओ, दिल्ली कैसी?”

“अरे मैं ठीक हूँ। बस तुम्हारी याद आ रही है। जल्दी आ रहा हूँ लेने। क्या चाहिए तुम्हें वहाँ से?”

पूजा ने मुस्कुराने की कोशिश की।
“कुछ नहीं… बस तुम आ जाओ। आई लव यू…”

“आई लव यू टू जान… ख्याल रखना अपना।”

फ़ोन रखा।
पूजा ने साँस ली।
अवस्थी सर का नाम नहीं लिया।
न उसकी उंगलियाँ, न उसके होंठ, न वो दबाव।
“कैसे बताऊँगी… वो क्या कहेगा?”

वो बेड पर लेट गई।
रेणु अभी नहीं आई थी।
कमरा अकेला।
पूजा ने आँखें बंद कीं।
और नींद आ गई।
वो अवस्थी सर के घर में थी।
पर घर अब बड़ा था।
बिस्तर पर लेटी हुई।
नंगी।
उसकी गोरी त्वचा चमक रही थी।
उसकी हाइट 5 फीट 4 इंच – नाजुक, लेकिन कर्व्स परफेक्ट।
उसकी कमर 24 इंच की – इतनी पतली कि कोई भी हाथ घेर ले।
कूल्हे गोल, मोटे – 36 इंच के, जैसे कोई परफेक्ट आकार।
बूब्स 36B – गोल, भरे हुए, गोरे, जैसे दो दूध की प्यालियाँ।
निप्पल्स गुलाबी, छोटे-छोटे, लेकिन सपने में सख्त होकर तने हुए।
उसकी चूत – चिकनी, गुलाबी, होंठ सूजे हुए, पहले से ही गीली।
बाल खुले, लहराते हुए।
चेहरा – मासूम, पर आँखों में हवस।
होंठ काँपते हुए।
उसके गले में मंगलसूत्र – जो उसके बूब्स के बीच लटक रहा था।

और अवस्थी सर – नंगे।
उनका लंड तना हुआ, पूजा की चूत में घुसा हुआ।
पूजा उनके ऊपर थी।
उनके लंड पर कूद रही थी।
हर कूद में उसकी गांड हिल रही थी – गोल, मोटी, जैसे दो तकियों की तरह उछल रही थी।
हर धक्के में गांड नीचे गिरती और अवस्थी सर के जाँघों से टकराती।
चट-चट की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
पूजा की कमर लहरा रही थी – जैसे कोई डांस कर रही हो।
उसके बूब्स ऊपर-नीचे उछल रहे थे – गोल, भरे हुए, जैसे दो गुब्बारे हवा में नाच रहे हों।
निप्पल्स हर उछाल में और सख्त।
मंगलसूत्र उसके बूब्स के बीच में उछल रहा था – जैसे चिल्ला रहा हो।
पूजा का चेहरा – आँखें बंद, होंठ खुले, मुँह से आहें निकल रही थीं।
उसका चेहरा लाल, पसीने से चमकता हुआ – जैसे कोई आनंद की चरम पर हो।
उसके बाल बिखरे हुए, चेहरे पर गिरे हुए।
वो जोर-जोर से चिल्ला रही थी –
“आह्ह… पति देव… और जोर से…
आह्ह… मेरे पति देव… फाड़ दो मुझे…
आह्ह… जॉर से… जॉर से…”

उसकी गांड हर धक्के में और तेज़ हिल रही थी –
नीचे गिरती, फिर ऊपर उछलती।
उसकी जाँघें अवस्थी सर की जाँघों से रगड़ खा रही थीं।
उसकी चूत अवस्थी सर के लंड को पूरा निगल रही थी –
गीली, सूजी हुई, हर धक्के में और फैल रही थी।
अवस्थी सर पूजा की गांड दोनों हाथों से पकड़े हुए थे।
उंगलियाँ गोश्त में धँसी हुईं।
वो भी चीख रहे थे –
“आह्ह… जान मेरी प्यारी बीवी…
आह्ह… मेरी पूजा… तू मेरी है… बस मेरी…
आह्ह… चूत मारूँगा तेरी…
आह्ह… गांड भी मारूँगा…
मेरी रंडी… मेरी रखैल…”

दोनों की साँसें तेज़।
पूजा की आहें कमरे में गूँज रही थीं –
“आह्ह… पति देव… हाँ… और… आह्ह… फाड़ दो…
आह्ह… मैं तुम्हारी हूँ… तुम्हारी बीवी…
आह्ह… जोर से… जोर से चोदो…”

उनकी गांड और तेज़ हिल रही थी –
जैसे कोई मशीन हो।
बूब्स उछलते हुए – अवस्थी सर के चेहरे पर लगते हुए।
उनका मंगलसूत्र हर उछाल में उनके बीच में लटकता हुआ।
पूजा का चेहरा – आनंद से भरा, होंठ खुले, आँखें बंद, मुँह से लार टपक रही थी।

फिर दोनों एक साथ झड़ गए।
पूजा की चूत से रस बह निकला।
अवस्थी सर का वीर्य पूजा की चूत में भर गया।
दोनों ने एक-दूसरे को जोर से गले लगाया।
और होंठों पर होंठ रख दिए।
गहरा किस।
जीभें मिलीं।
लार का आदान-प्रदान।
पूजा की सिसकी –
“पति देव… आई लव यू…”

अवस्थी सर ने कहा,
“मेरी बीवी… मेरी पूजा…”

और फिर…
पूजा की आँख खुली।
उठकर बैठ गई।
उसकी साँसें तेज़।
बेड गीला।
उसकी चूत से रस बह रहा था।
वो चीखी –
“ये क्या सपना था…?
नहीं… नहीं… ये नहीं हो सकता…!!!”

उसका दिल धड़क रहा था।
वो रोने लगी।
तकिया गले लगाकर।
“नहीं पूजा… नहीं…
तू क्या हो गई है…?”

पर उसकी चूत अभी भी धड़क रही थी।
और मन में वही आवाज़ –
“पति देव… और जोर से…”

वो खुद से घिन्न कर रही थी।
पर रोक नहीं पा रही थी।
और उस रात वो फिर नहीं सोई।
बस रोती रही।
और खुद को कोसती रही।

क्योंकि अब वो जानती थी –
सपना सच होने वाला था।
और वो खुद ही उसकी तरफ़ बढ़ रही थी।
धीरे-धीरे।
पर बढ़ रही थी।
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RE: एक पत्नी का सफर - by Tiska jay - 21-12-2025, 11:43 PM



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