Thread Rating:
  • 4 Vote(s) - 1 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Bhai Ki Behan Ki Virgin Chut Par Dost Ka Pehla Haq” part 1
#10
समर ने अपना लंड नेहा के मुँह से बाहर निकाला, तो नेहा बेदम होकर लंबी-लंबी साँसें लेने लगी। उसके मुँह के किनारों से लार टपक रही थी और होंठ गुलाबी होकर सूज गए थे। समर ने उसे एक झटके में वापस बेड पर लिटाया और खुद उसके ऊपर शेर की तरह टूट पड़ा।

नेहा की फटी हुई कुर्ती अब कन्धों से नीचे लटक रही थी और उसकी सफेद ब्रा पूरी तरह सामने थी। समर ने अपनी दोनों हथेलियों से उस सफेद ब्रा के ऊपर से ही उसके उभरते हुए सीने को जकड़ लिया।

समर (भारी आवाज़ में): "अब इनकी बारी है... बहुत तड़पाया है इन्होंने मुझे।"

उसने ब्रा के कपड़े के ऊपर से ही उन कोमल उभारों को इतनी बेरहमी से भींचना शुरू किया कि नेहा का शरीर बेड पर धनुष की तरह मुड़ गया। समर की उँगलियाँ ब्रा के पतले कपड़े को चीरकर अंदर की कोमल खाल को महसूस कर रही थीं।

नेहा (कराहते हुए): "आह्ह्ह... समर... धीरे... बहुत टाइट दबा रहे हो... उफ्फ!"

समर ने काफी देर तक ब्रा के ऊपर से उन्हें मसला, फिर अचानक उसने नेहा को थोड़ा सा ऊपर उठाया और पीछे का हुक एक झटके में खोल दिया। जैसे ही हुक खुला, नेहा के दोनों दूधिया उभार आज़ाद होकर समर की आँखों के सामने आ गए।

समर उन्हें देखता ही रह गया। वह बिल्कुल नए और ताज़ा थे, जिनके बीच में गुलाबी रंग के छोटे और सख्त निप्पल्स (new nipples) किसी अंगूर के दाने की तरह उभर रहे थे।

समर (पागलपन में): "कितने खूबसूरत हैं ये... आज इन्हें भी नीला कर दूँगा।"

समर ने बिना देरी किए अपने दोनों हाथों से उन नग्न उभारों को पकड़ा और उन्हें आटे की तरह गूँधना शुरू कर दिया। उसने एक निप्पल को अपनी दो उँगलियों के बीच फँसाया और उसे ज़ोर से मरोड़ दिया।

नेहा (चीखते हुए): "आआआह! मर गई... समर... मत करो... बहुत चुभ रहा है!"

लेकिन समर कहाँ रुकने वाला था? उसने अपना मुँह खोला और एक पूरे उभार को अपने मुँह में भर लिया। वह नेहा के उन कोमल निप्पल्स को अपनी जीभ और दाँतों से खरोंचने लगा। उसने अपनी हथेली से दूसरे उभार को बेड पर दबाते हुए उसे पूरी तरह चपटा कर दिया।

समर (कराहते हुए): "आह्ह... नेहा... कितने टाइट हैं ये... अभी तक किसी ने इन्हें छुआ भी नहीं है... ये सिर्फ़ मेरा हक़ है।"

वह नेहा के सीने पर किसी जानवर की तरह हमला कर रहा था। उसके हाथों के दबाव से नेहा के गोरे बदन पर उँगलियों के लाल निशान छपने लगे थे। नेहा दर्द से तड़प रही थी, लेकिन उस दर्द में एक ऐसा नशा था जो उसे और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रहा था। वह अपने हाथों से समर के सिर को अपने सीने पर और ज़ोर से दबा रही थी, जैसे चाह रही हो कि समर उसे और भी बेरहमी से मसले।
Like Reply


Messages In This Thread
RE: Bhai Ki Behan Ki Virgin Chut Par Dost Ka Pehla Haq” part 1 - by Shipra Bhardwaj - 21-12-2025, 10:27 AM



Users browsing this thread: 1 Guest(s)