08-12-2025, 01:37 PM
अब आगे............
शहर के उस घटिया से होटेल के उस रूम मे वो आदमी पलंग पर नंगा पड़ा था। उसके दोनो हाथ बेडपॉस्ट्स से सिल्क स्कार्व्स से बँधे थे और उसके सामने एक खूबसूरत, सेक्सी लड़की धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार रही थी। थोड़ी ही देर मे वो पूरी नंगी हो गयी और उसकी तरफ बोझिल पलकों से देख कर अपने गुलाबी होठों पे जीभ फेरी और दो कदम आगे बढ़ कर अपना एक पैर पलंग पर रख दिया और पैर के अंगूठे के नाख़ून से उस आदमी के तलवे गुदगुदाने लगी, फिर उसने अपनी दाए हाथ की उंगलिया अपने चूत मे डाल दी और बाए हाथ से अपनी भारी छातियो को मसलने लगी।
वो आदमी जोश से पागल हो गया और अपने हाथ छुडाने की कोशिश करने लगा। उसका लंड पूरा तन चुका था। पर उसकी हालत से बेपरवाह वो लड़की अपने बदन से खेलते रही, "ऊऊहह....आआ...ह....हह......बत्रा साहब, ऐसे ही आप मेरी चूचिया दबाना चाहते हैं ना?" उसने अपने बूब्स को बेरहमी से मसलते हुए पूछा।
"हा...हा...मलिका मेरी जान मेरे हाथ तो खोलो।"
"क्यू? बर्दाश्त नही हो रहा?", मलिका वैसे ही अपने जिस्म से खेलती हुई और उसे और तड़पाते हुए बोली।
"नही,,नही!!!!!!!!!!!!प्लीज़ खोलो मलिका।"
पर मलिका ने तो उसे और तड़पाना था। वो उसके बदन के दोनो तरफ घुटने रख कर उसके लंड के ठीक उपर अपनी चूत लहराने लगी। बत्रा अपनी गांड उठा कर अपने लंड को उसमे घुसाने की कोशिश करने लगा। पर मलिका हंसते और उपर उठ गयी और अपने हाथ से उसे फिर वापस बिस्तर पर सुला दिया। फिर अपने हाथ उसके सीने पे रखे और यूँ बैठने लगी जैसे उसके लंड को लेने वाली हो। बत्रा मुस्कुराने लगा।।।मलिका की चूत उसके लंड के सुपारे से सटी।।बत्रा को लगा कि अब उसकी मुराद पूरी हुई और ये कसी चूत अब उसके लंड को निगल लेगि पर उसके सपने को तोड़ते हुए मलिका फिर उठ गयी।
बत्रा रुवासा हो गया, "प्लीज़ मलिका और मत तड़पाओ....प्लीज़....प्लीज़!!"
मलिका फिर बेदर्दी से हँसी और इस बार उसके लंड पे बैठ गयी, जैसे ही पूरा लंड उसकी चूत के अंदर गया बत्रा नीचे से ज़ोर-जोर से गांड हिलाने लगा। मलिका ऩे फीर उसे मज़बूती से अपने बदन से दबा दिया और बहुत ही धीरे-धीरे अपनी गांड हिला कर उसे चोदने लगी।
बत्रा अब बिल्कुल पागल हो गया। जोश के मारे उसका बुरा हाल था और उसने फिर नीचे से अपनी गांड ज़ोर-जोर से हिला कर धक्के मारने लगा। मलिका पागलों की तरह हँसने लगी और थोड़ी ही देर मे बत्रा झड़ गया।
तब मलिका ने वैसे ही उसके उपर बैठे-बैठे उसके हाथ खोले। हाथ खुलते ही बत्रा ने उसे पकड़ कर नीचे गिरा दिया और फिर उसके उपर चढ़ गया। उसका सिकुडा लंड अभी भी मलिका की चूत मे ही था।
"साली, तू बहुत तड़पाती है....बहुत मज़ा आता है ने तुझे इसमे....ये ले....ये ले!", कह के वो अपने सिकुड़े लंड से ही धक्के लगाने लगा। थोड़ी ही देर मे लंड फिर तन गया और बत्रा के धक्कों मे भी ओर तेज़ी आ गयी।
वो बहुत बेदर्दी से धक्के मार रहा था पर मलिका वैसे ही पागलों की तरह हँसती रही। थोड़ी ही देर मे उसके बदन ने झटके खाए और वो झड़ कर मलिका के उपर ही ढेर हो गया।
"अब थोड़ी काम की बातें हो जाए, बत्रा मादरचोद साहब?। मलिका ने उसके कान मे कहा।
बत्रा राजकुल ग्रूप मे मॅनेजर था। सेशाद्री को उस पर बहुत भरोसा था और बत्रा आदमी था भी भरोसे के लायक पर फिर एक दिन उसकी मुलाकात मलिका से हुई और उस दिन से वो राजा साहेब के बिज़नेस के अंदर जब्बार का भेड़िया बन गया।
बत्रा को जैसे सेक्स करना पसंद था, उसकी बीवी को वो बिल्कुल भी अच्छा नही लगता था।बत्रा रफ सेक्स और सेडो-मासकिज़म का शौकीन था। दर्द के साथ सेक्स ही उसे पूरी तरह संतुष्ट कर पाता था। किसी तरह जब्बार को उसकी ये कमज़ोरी पता चल गयी और मलिका के ज़रिए उसने उसे अपना जासूस बना लिया। मज़े की बात ये थी, बत्रा ये समझता था कि वो राजासाहब के बिज़नेस राइवल पॅंट ग्रूप के लिए काम करती थी। इस तरह से जब कभी पोल खुलती भी तो नुकसान केवल बत्रा का था। जब्बार का नाम भी सामने नही आता और मलिका-मलिका को तो किसी चीज़ की परवाह नही थी सिवाय इसके कि उसके डेबिट और क्रेडिट कार्ड हुमेशा काम करते रहें और उसके जिस्म की आग रोज़ बुझती रहे। उसकी गांड की भूख हमेशा खुली ही रहती थी और उसकी गांड में एक लंड हमेशा जाना चाहिए होता था और वो मर्दों के लंड से और कही नहीं मिलने वाला था।
जब्बार टी-शर्ट और शॉर्ट्स मे अपनी कोठी के किचन मे खड़ा फ्रिज से बॉटल निकाल कर पानी पी रहा था जब मलिका हॉल मे दाखिल हुई। उसने अपना हेंड बॅग एक तरफ फेका और जब्बार को हॉल से किचन मे खुलते दरवाज़े से देखते हुए बेडरूम मे घुस गयी। जब्बार बॉटल लेकर हॉल मे आया और बड़े सोफे पर बैठ गया।
"क्या पता चला?"
सुनकर मलिका बेडरूम से हॉल मे खुलने वाले दरवाज़े पे आकर खड़ी हुई, "यही कि बत्रा का लंड तुमसे बड़ा है", हंसकर अपना टॉप उतारते हुए अंदर चली गयी।
"उंगली मत कर भोसड़ी की।"
क्रमश:
आप को कहानी कैसी लग रही है कृपया अपने मंतव्यो को कोमेंट बॉक्स में लिखिए
बाकी बस यहाँ तक फिर एक नए एपिसोड के साथ मिलेंगे तब तक के लिए.
मैत्री की ओर से..............
जय भारत।
शहर के उस घटिया से होटेल के उस रूम मे वो आदमी पलंग पर नंगा पड़ा था। उसके दोनो हाथ बेडपॉस्ट्स से सिल्क स्कार्व्स से बँधे थे और उसके सामने एक खूबसूरत, सेक्सी लड़की धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार रही थी। थोड़ी ही देर मे वो पूरी नंगी हो गयी और उसकी तरफ बोझिल पलकों से देख कर अपने गुलाबी होठों पे जीभ फेरी और दो कदम आगे बढ़ कर अपना एक पैर पलंग पर रख दिया और पैर के अंगूठे के नाख़ून से उस आदमी के तलवे गुदगुदाने लगी, फिर उसने अपनी दाए हाथ की उंगलिया अपने चूत मे डाल दी और बाए हाथ से अपनी भारी छातियो को मसलने लगी।
वो आदमी जोश से पागल हो गया और अपने हाथ छुडाने की कोशिश करने लगा। उसका लंड पूरा तन चुका था। पर उसकी हालत से बेपरवाह वो लड़की अपने बदन से खेलते रही, "ऊऊहह....आआ...ह....हह......बत्रा साहब, ऐसे ही आप मेरी चूचिया दबाना चाहते हैं ना?" उसने अपने बूब्स को बेरहमी से मसलते हुए पूछा।
"हा...हा...मलिका मेरी जान मेरे हाथ तो खोलो।"
"क्यू? बर्दाश्त नही हो रहा?", मलिका वैसे ही अपने जिस्म से खेलती हुई और उसे और तड़पाते हुए बोली।
"नही,,नही!!!!!!!!!!!!प्लीज़ खोलो मलिका।"
पर मलिका ने तो उसे और तड़पाना था। वो उसके बदन के दोनो तरफ घुटने रख कर उसके लंड के ठीक उपर अपनी चूत लहराने लगी। बत्रा अपनी गांड उठा कर अपने लंड को उसमे घुसाने की कोशिश करने लगा। पर मलिका हंसते और उपर उठ गयी और अपने हाथ से उसे फिर वापस बिस्तर पर सुला दिया। फिर अपने हाथ उसके सीने पे रखे और यूँ बैठने लगी जैसे उसके लंड को लेने वाली हो। बत्रा मुस्कुराने लगा।।।मलिका की चूत उसके लंड के सुपारे से सटी।।बत्रा को लगा कि अब उसकी मुराद पूरी हुई और ये कसी चूत अब उसके लंड को निगल लेगि पर उसके सपने को तोड़ते हुए मलिका फिर उठ गयी।
बत्रा रुवासा हो गया, "प्लीज़ मलिका और मत तड़पाओ....प्लीज़....प्लीज़!!"
मलिका फिर बेदर्दी से हँसी और इस बार उसके लंड पे बैठ गयी, जैसे ही पूरा लंड उसकी चूत के अंदर गया बत्रा नीचे से ज़ोर-जोर से गांड हिलाने लगा। मलिका ऩे फीर उसे मज़बूती से अपने बदन से दबा दिया और बहुत ही धीरे-धीरे अपनी गांड हिला कर उसे चोदने लगी।
बत्रा अब बिल्कुल पागल हो गया। जोश के मारे उसका बुरा हाल था और उसने फिर नीचे से अपनी गांड ज़ोर-जोर से हिला कर धक्के मारने लगा। मलिका पागलों की तरह हँसने लगी और थोड़ी ही देर मे बत्रा झड़ गया।
तब मलिका ने वैसे ही उसके उपर बैठे-बैठे उसके हाथ खोले। हाथ खुलते ही बत्रा ने उसे पकड़ कर नीचे गिरा दिया और फिर उसके उपर चढ़ गया। उसका सिकुडा लंड अभी भी मलिका की चूत मे ही था।
"साली, तू बहुत तड़पाती है....बहुत मज़ा आता है ने तुझे इसमे....ये ले....ये ले!", कह के वो अपने सिकुड़े लंड से ही धक्के लगाने लगा। थोड़ी ही देर मे लंड फिर तन गया और बत्रा के धक्कों मे भी ओर तेज़ी आ गयी।
वो बहुत बेदर्दी से धक्के मार रहा था पर मलिका वैसे ही पागलों की तरह हँसती रही। थोड़ी ही देर मे उसके बदन ने झटके खाए और वो झड़ कर मलिका के उपर ही ढेर हो गया।
"अब थोड़ी काम की बातें हो जाए, बत्रा मादरचोद साहब?। मलिका ने उसके कान मे कहा।
बत्रा राजकुल ग्रूप मे मॅनेजर था। सेशाद्री को उस पर बहुत भरोसा था और बत्रा आदमी था भी भरोसे के लायक पर फिर एक दिन उसकी मुलाकात मलिका से हुई और उस दिन से वो राजा साहेब के बिज़नेस के अंदर जब्बार का भेड़िया बन गया।
बत्रा को जैसे सेक्स करना पसंद था, उसकी बीवी को वो बिल्कुल भी अच्छा नही लगता था।बत्रा रफ सेक्स और सेडो-मासकिज़म का शौकीन था। दर्द के साथ सेक्स ही उसे पूरी तरह संतुष्ट कर पाता था। किसी तरह जब्बार को उसकी ये कमज़ोरी पता चल गयी और मलिका के ज़रिए उसने उसे अपना जासूस बना लिया। मज़े की बात ये थी, बत्रा ये समझता था कि वो राजासाहब के बिज़नेस राइवल पॅंट ग्रूप के लिए काम करती थी। इस तरह से जब कभी पोल खुलती भी तो नुकसान केवल बत्रा का था। जब्बार का नाम भी सामने नही आता और मलिका-मलिका को तो किसी चीज़ की परवाह नही थी सिवाय इसके कि उसके डेबिट और क्रेडिट कार्ड हुमेशा काम करते रहें और उसके जिस्म की आग रोज़ बुझती रहे। उसकी गांड की भूख हमेशा खुली ही रहती थी और उसकी गांड में एक लंड हमेशा जाना चाहिए होता था और वो मर्दों के लंड से और कही नहीं मिलने वाला था।
जब्बार टी-शर्ट और शॉर्ट्स मे अपनी कोठी के किचन मे खड़ा फ्रिज से बॉटल निकाल कर पानी पी रहा था जब मलिका हॉल मे दाखिल हुई। उसने अपना हेंड बॅग एक तरफ फेका और जब्बार को हॉल से किचन मे खुलते दरवाज़े से देखते हुए बेडरूम मे घुस गयी। जब्बार बॉटल लेकर हॉल मे आया और बड़े सोफे पर बैठ गया।
"क्या पता चला?"
सुनकर मलिका बेडरूम से हॉल मे खुलने वाले दरवाज़े पे आकर खड़ी हुई, "यही कि बत्रा का लंड तुमसे बड़ा है", हंसकर अपना टॉप उतारते हुए अंदर चली गयी।
"उंगली मत कर भोसड़ी की।"
क्रमश:
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मैत्री की ओर से..............
जय भारत।


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