05-12-2025, 12:19 PM
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Episode 5... कली से फूल
Present day
"वाह, मेरे पति देव, तो इस रूम में मुझसा ही कोई था आपके फ़र्स्ट ईयर में!" रोहन ने नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा।
"हाँ मेरी रानी, उसके बाद तुम दूसरे हो जो मेरे रूममेट बने।"
"वैसे इस नाम का कोई भी सीनियर नहीं है सिविल में। कहाँ गया वो रूममेट?" रोहन ने पूछा।
"सेकेंड ईयर में वो चला गया कॉलेज छोड़कर। उसके जाने के बाद मैंने किसी को भी अपने रूम में रहने नहीं दिया। मैं अकेले ही रहना चाहता था, जिसकी परमिशन मैंने वार्डन से ले ली।"
"तो मुझे क्यों अलाऊ किया?"
"कोई और रूम ख़ाली नहीं था, तो वार्डन ने मुझसे रिक्वेस्ट की। इतने सालों में कभी रूम शेयर करने को नहीं बोला, पर इस बार रूम कम पड़ रहे हैं। सिर्फ़ एक ही लड़का बाक़ी रह रहा है—रोहन। उसे देख लो, मिल लो। जैसे ही मैंने तुम्हें देखा, उसकी याद आ गई। और मैंने हाँ कर दी, और तुम आ गए रूममेट बनकर।"
"और बताओ न ध्रुव के बारे में, अपने फ़र्स्ट ईयर की बातें," रोहन ने उत्सुकता से कहा।
"आगे की कहानी फिर सुनाऊँगा। पहले अपनी सुहागरात तो मना लूँ। कहानी के चक्कर में कहीं यह रात न बीत जाए।"
"पर अपनी कहानी सुनाना ज़रूर, क्योंकि जो मैंने थोड़ा-थोड़ा सुना है आपके बारे में, उसे सुनने के बाद ही मैं आपकी तरफ़ आकर्षित हुआ।"
"हाँ हाँ, सुनाऊँगा। पहले तुम्हें अपना बनाना है। अब सब्र नहीं हो रहा। बीती बातें याद आने के बाद तो और आग लग गई मेरे लौड़े में।"
ऐसा कहकर संजय ने रोहन को अपनी बाहों में भर लिया। उस पर चुंबन की बरसात कर दी। सच में, संजय में असीम जोश भरा हुआ था। वह रोहन पर अपना प्यार न्योछावर कर रहा था।
संजय कभी अपने दाँतों से रोहन के कानों के सिरे पकड़कर चूसता, तो कभी रोहन की गर्दन पर अपने होठ रखकर उसे गर्म करने लगा।
तभी रोहन के हाथों में संजय का कड़क लंड आ गया। आज उसका कड़कपन कुछ अलग था। मानो कामदेव ने स्वयं अपने हाथों से संजय के लंड में असीम ताक़त भर दी हो।
रोहन को संजय का लंड अपने अंदर महसूस करने की इच्छा प्रबल हो उठी।
वह संजय से बोला, "मेरे राजा, अब आपका यह घोड़ा मेरी गुफ़ा में घुसा दो। मेरी गांड में अजीब-सी हलचल मची है, मुझे आपका लौड़ा अपने अंदर महसूस करना है।"
"ठीक है मेरी रानी, आज तो तुझे ऐसा चोदूंगा कि रोज़-रोज़ मेरा लंड लिए बिना नींद नहीं आएगी तुझे।"
रोहन ने तकिए के नीचे से कंडोम का एक पाउच निकाला और फाड़कर संजय के लौड़े को पहना दिया।
"वाह, इसे तो मैं भूल ही गया था! कसम से, तुम समझदार बीवी बनोगी।"
तभी रोहन ने लुब्रिकेंट की बोतल भी निकालकर संजय को दी।
"अरे, सही आइटम है यह, तुम तो पूरा ज्ञान रखते हो," संजय ने हैरान होकर कहा।
रोहन नीचे लेट गया। संजय ने थोड़ा-सा लुब्रिकेंट निकालकर रोहन के स्वर्गद्वार पर लगाया और हल्के से एक उँगली भी अंदर कर दी।
रोहन की कली हल्की-सी चिटकी। रोहन की कराह निकल गई। हल्के-हल्के संजय उँगली अंदर-बाहर कर रहा था। थोड़ी देर में थोड़ा-सा और लुब्रिकेंट निकाला। अबकी बार संजय ने उँगली करते-करते दूसरी उँगली भी डाल दी।
इस बार रोहन चिल्ला उठा। "संजय! दर्द हो रहा है! निकाल दो!" पर संजय लगा रहा। थोड़ी देर बाद राहत हुई। उँगली करने से छेद अब रवा (नरम) हो गया था।
उसी वक़्त संजय ने ढेर सारा लुब्रिकेंट अपने लौड़े पर फिर से मला।
"मेरी जान, मेरी रानी, अब तैयार हो जा। अब तू मेरे लंड से चुद कर मेरी बनने जा रही है। अपनी गांड को जितना हो सके ढीला करना, जब मैं लौड़ा वहाँ रखूँ।"
"ठीक है, राजा।"
संजय ने लंड का टोपा छेद पर टिकाया और हल्के से दबाव दिया। टोपा छेद में घुसा, और साथ में दर्द भी दे गया। टोपा घुसते ही संजय रुक गया, रोहन का रिएक्शन देखने लगा। रोहन दर्द में था।
थोड़ी देर बाद संजय ने पिस्टन आगे-पीछे करनी शुरू की। लंड अपनी जगह बनाता जा रहा था, और संजय ने एक झटका दिया। 2 इंच छेद के अंदर घुस गया।
रोहन चिल्लाया, "संजय, बाहर निकालो! दर्द हो रहा है!"
संजय ने जैसे सुना ही नहीं। एक झटका और दिया। लंड का 5 इंची हिस्सा और घुस गया था, जिससे गांड की सील टूट गई।
"बस 3 इंच ही बाक़ी रह गई रानी, धैर्य धरो।"
आख़िरी झटके में बाक़ी का बचा लौड़ा भी घुसा दिया।
जिस पर रोहन को इतना दर्द हुआ कि वो चिल्लाने लगा। रोहन के चीखने की आवाज़ ख़ाली पड़े हॉस्टल में गूँज उठी। वो तो उस वक़्त हॉस्टल में कोई नहीं था, वरना सबको पता चल गया होता कि रोहन की कली फूल बन गई है।
रोहन अपने हाथों से संजय की छाती पर मुक्के मारने लगा। संजय के बाल पकड़कर नोचने लगा। रोहन के नाखून संजय की छाती पर निशान बनाते चले गए।
"निकाल लो संजय इसे! मैं मर जाऊँगा! निकाल दो संजय!"
संजय अपना लौड़ा अंदर कर रुक गया।
संजय का 8 इंची लौड़ा पूरा का पूरा समा चुका था। रोहन को लगा, किसी ने गरम मोटा सरिया उसकी गांड में घुसा दिया हो।
वह संजय से बार-बार मिन्नतें करने लगा। "संजय, निकाल दो!" पर संजय ने घुसाए रखा। अब रोहन कली से फूल बन चुका था। संजय के अनुभवी लौड़े ने अपना कमाल दिखा दिया।
ढेर सा खून निकलकर चादर में बहने लगा। यह सब संजय ने देखा, पर उसे नहीं बताया। वरना रोहन की भी हालत वैसी होती, जैसे उसकी हुई थी, जिसकी चुदाई संजय ने पहली बार की थी।
संजय को उसकी याद आ गई—ध्रुव मेहरा, उसका पहला रूममेट।
टू बी कंटिन्यूड...
Present day
"वाह, मेरे पति देव, तो इस रूम में मुझसा ही कोई था आपके फ़र्स्ट ईयर में!" रोहन ने नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा।
"हाँ मेरी रानी, उसके बाद तुम दूसरे हो जो मेरे रूममेट बने।"
"वैसे इस नाम का कोई भी सीनियर नहीं है सिविल में। कहाँ गया वो रूममेट?" रोहन ने पूछा।
"सेकेंड ईयर में वो चला गया कॉलेज छोड़कर। उसके जाने के बाद मैंने किसी को भी अपने रूम में रहने नहीं दिया। मैं अकेले ही रहना चाहता था, जिसकी परमिशन मैंने वार्डन से ले ली।"
"तो मुझे क्यों अलाऊ किया?"
"कोई और रूम ख़ाली नहीं था, तो वार्डन ने मुझसे रिक्वेस्ट की। इतने सालों में कभी रूम शेयर करने को नहीं बोला, पर इस बार रूम कम पड़ रहे हैं। सिर्फ़ एक ही लड़का बाक़ी रह रहा है—रोहन। उसे देख लो, मिल लो। जैसे ही मैंने तुम्हें देखा, उसकी याद आ गई। और मैंने हाँ कर दी, और तुम आ गए रूममेट बनकर।"
"और बताओ न ध्रुव के बारे में, अपने फ़र्स्ट ईयर की बातें," रोहन ने उत्सुकता से कहा।
"आगे की कहानी फिर सुनाऊँगा। पहले अपनी सुहागरात तो मना लूँ। कहानी के चक्कर में कहीं यह रात न बीत जाए।"
"पर अपनी कहानी सुनाना ज़रूर, क्योंकि जो मैंने थोड़ा-थोड़ा सुना है आपके बारे में, उसे सुनने के बाद ही मैं आपकी तरफ़ आकर्षित हुआ।"
"हाँ हाँ, सुनाऊँगा। पहले तुम्हें अपना बनाना है। अब सब्र नहीं हो रहा। बीती बातें याद आने के बाद तो और आग लग गई मेरे लौड़े में।"
ऐसा कहकर संजय ने रोहन को अपनी बाहों में भर लिया। उस पर चुंबन की बरसात कर दी। सच में, संजय में असीम जोश भरा हुआ था। वह रोहन पर अपना प्यार न्योछावर कर रहा था।
संजय कभी अपने दाँतों से रोहन के कानों के सिरे पकड़कर चूसता, तो कभी रोहन की गर्दन पर अपने होठ रखकर उसे गर्म करने लगा।
तभी रोहन के हाथों में संजय का कड़क लंड आ गया। आज उसका कड़कपन कुछ अलग था। मानो कामदेव ने स्वयं अपने हाथों से संजय के लंड में असीम ताक़त भर दी हो।
रोहन को संजय का लंड अपने अंदर महसूस करने की इच्छा प्रबल हो उठी।
वह संजय से बोला, "मेरे राजा, अब आपका यह घोड़ा मेरी गुफ़ा में घुसा दो। मेरी गांड में अजीब-सी हलचल मची है, मुझे आपका लौड़ा अपने अंदर महसूस करना है।"
"ठीक है मेरी रानी, आज तो तुझे ऐसा चोदूंगा कि रोज़-रोज़ मेरा लंड लिए बिना नींद नहीं आएगी तुझे।"
रोहन ने तकिए के नीचे से कंडोम का एक पाउच निकाला और फाड़कर संजय के लौड़े को पहना दिया।
"वाह, इसे तो मैं भूल ही गया था! कसम से, तुम समझदार बीवी बनोगी।"
तभी रोहन ने लुब्रिकेंट की बोतल भी निकालकर संजय को दी।
"अरे, सही आइटम है यह, तुम तो पूरा ज्ञान रखते हो," संजय ने हैरान होकर कहा।
रोहन नीचे लेट गया। संजय ने थोड़ा-सा लुब्रिकेंट निकालकर रोहन के स्वर्गद्वार पर लगाया और हल्के से एक उँगली भी अंदर कर दी।
रोहन की कली हल्की-सी चिटकी। रोहन की कराह निकल गई। हल्के-हल्के संजय उँगली अंदर-बाहर कर रहा था। थोड़ी देर में थोड़ा-सा और लुब्रिकेंट निकाला। अबकी बार संजय ने उँगली करते-करते दूसरी उँगली भी डाल दी।
इस बार रोहन चिल्ला उठा। "संजय! दर्द हो रहा है! निकाल दो!" पर संजय लगा रहा। थोड़ी देर बाद राहत हुई। उँगली करने से छेद अब रवा (नरम) हो गया था।
उसी वक़्त संजय ने ढेर सारा लुब्रिकेंट अपने लौड़े पर फिर से मला।
"मेरी जान, मेरी रानी, अब तैयार हो जा। अब तू मेरे लंड से चुद कर मेरी बनने जा रही है। अपनी गांड को जितना हो सके ढीला करना, जब मैं लौड़ा वहाँ रखूँ।"
"ठीक है, राजा।"
संजय ने लंड का टोपा छेद पर टिकाया और हल्के से दबाव दिया। टोपा छेद में घुसा, और साथ में दर्द भी दे गया। टोपा घुसते ही संजय रुक गया, रोहन का रिएक्शन देखने लगा। रोहन दर्द में था।
थोड़ी देर बाद संजय ने पिस्टन आगे-पीछे करनी शुरू की। लंड अपनी जगह बनाता जा रहा था, और संजय ने एक झटका दिया। 2 इंच छेद के अंदर घुस गया।
रोहन चिल्लाया, "संजय, बाहर निकालो! दर्द हो रहा है!"
संजय ने जैसे सुना ही नहीं। एक झटका और दिया। लंड का 5 इंची हिस्सा और घुस गया था, जिससे गांड की सील टूट गई।
"बस 3 इंच ही बाक़ी रह गई रानी, धैर्य धरो।"
आख़िरी झटके में बाक़ी का बचा लौड़ा भी घुसा दिया।
जिस पर रोहन को इतना दर्द हुआ कि वो चिल्लाने लगा। रोहन के चीखने की आवाज़ ख़ाली पड़े हॉस्टल में गूँज उठी। वो तो उस वक़्त हॉस्टल में कोई नहीं था, वरना सबको पता चल गया होता कि रोहन की कली फूल बन गई है।
रोहन अपने हाथों से संजय की छाती पर मुक्के मारने लगा। संजय के बाल पकड़कर नोचने लगा। रोहन के नाखून संजय की छाती पर निशान बनाते चले गए।
"निकाल लो संजय इसे! मैं मर जाऊँगा! निकाल दो संजय!"
संजय अपना लौड़ा अंदर कर रुक गया।
संजय का 8 इंची लौड़ा पूरा का पूरा समा चुका था। रोहन को लगा, किसी ने गरम मोटा सरिया उसकी गांड में घुसा दिया हो।
वह संजय से बार-बार मिन्नतें करने लगा। "संजय, निकाल दो!" पर संजय ने घुसाए रखा। अब रोहन कली से फूल बन चुका था। संजय के अनुभवी लौड़े ने अपना कमाल दिखा दिया।
ढेर सा खून निकलकर चादर में बहने लगा। यह सब संजय ने देखा, पर उसे नहीं बताया। वरना रोहन की भी हालत वैसी होती, जैसे उसकी हुई थी, जिसकी चुदाई संजय ने पहली बार की थी।
संजय को उसकी याद आ गई—ध्रुव मेहरा, उसका पहला रूममेट।
टू बी कंटिन्यूड...
✍️निहाल सिंह


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