05-12-2025, 11:58 AM
छठा पन्ना... छबीली
कॉलर (महिला - छबीली)
रिसीवर (पुरुष - मनोहर साहब)
छबीली: हेलो, मनोहर साहब जी बोल रहे हैं ना
मनोहर: हाँ जी, मैं मनोहर बोल रहा हूँ। बताइए।
छबीली: साहब जी, आपको एक कामवाली चाहिए थी ना?
मनोहर: हाँ-हाँ, चाहिए थी। आपको किसने बताया?
छबीली: ममता मैम ने कहा था कि आपसे बात कर लूँ, इसलिए आपका नंबर दिया।
मनोहर: अरे हाँ, मैंने ममता जी से ही कहा था कि मुझे एक कामवाली की जरूरत है।
मनोहर: अच्छा, आप कहाँ रहती हैं?
छबीली: सर, बस 2-3 किलोमीटर दूर।
मनोहर: अच्छा। पहले कहाँ काम करती थीं?
छबीली: यहीं आस-पास ही काम करती थी।
मनोहर: दरअसल बात ये है कि घर में कोई नहीं है। मेरी वाइफ गुजर गई थीं जब बच्चा एक साल का था। अब बच्चा चार साल का हो गया है। अभी तक मैं और उसकी बुआ देखभाल करते थे, लेकिन बुआ की शादी हो गई। अब बहुत दिक्कत हो रही है। बच्चे को कॉलेज भी भेजने लगा हूँ, मैं ऑफिस जाता हूँ तो घर पर कोई नहीं रहता। इसलिए सोचा कोई ऐसी काम करनेवाली मिल जाए जो घर के सारे काम के साथ-साथ बच्चे की भी पूरी देखभाल कर ले। मतलब घर को अपना घर समझकर रहे।
छबीली: जी सर, मैं तैयार हूँ आपके यहाँ काम करने के लिए।
मनोहर: सैलरी के बारे में कुछ पूछा नहीं आपने?
छबीली: ममता मैम ने कहा था कि आपको अच्छी सैलरी मिलेगी, खाना-पीना सब होगा। आप जितना चाहें उतना दे दीजिएगा।
मनोहर: जहाँ आप अभी काम कर रही हैं, उससे ज्यादा देंगे, क्योंकि यहाँ बच्चे का एक्स्ट्रा काम भी है।
मनोहर: एक बात बताइए, आप डेली अप-डाउन करेंगी या यहाँ रहकर काम करेंगी?
छबीली: अप-डाउन में टाइम लगेगा सर। अगर आप रहने की व्यवस्था कर दें तो बहुत अच्छा रहेगा। जैसा आप कहेंगे, वैसा कर लेंगे।
मनोहर: हम भी तो यही चाहते हैं! अगर कोई लाइव-इन मिल जाए तो मेरी सारी टेंशन खत्म। बच्चा भी आपके साथ रहेगा, रात को आपके पास सोएगा, आपसे बात करेगा, माँ जैसा लगेगा। सुबह लंच पैक कर देना, माँ की पूरी जिम्मेदारी समझ लीजिए।
छबीली: जी, मैं समझ रही हूँ।
मनोहर: आपकी फैमिली?
छबीली: एक बेटी हैं, गाँव में दादी-दादा के पास रहते हैं। हस्बैंड बाहर दूसरी कंपनी में पाइप का काम करते हैं। मैं यहाँ अकेले रहती हूँ, 5-6 साल से।
मनोहर: अच्छा… तो मिलना-जुलना कैसे होता है?
छबीली: जब वो गाँव आते हैं तो मैं भी चली जाती हूँ, कभी-कभार ही मिल पाते हैं।
मनोहर: (हँसते हुए) मतलब कभी-कभार हनीमून मन जाता है?
छबीली: (हँसकर) साहब जी, रोज़-रोज़ थोड़े हो पाता है, कमाना भी तो है।
मनोहर: अरे हमसे पूछो… वाइफ के जाने के बाद तीन-चार साल से तो किसी का प्यार ही नहीं मिला। सोच रहा था कोई ऐसी मिल जाए जो घर संभाल ले, बच्चे को देख ले… और मेरी भी थोड़ी देखभाल हो जाए।
छबीली: साहब जी, टेंशन मत लीजिए। मैं आपके पूरे घर की देखभाल कर लूँगी।
मनोहर: बस यही चाहिए था। रात को चाय बना देना, बच्चे को सुला देना… और बाकी अगर आपका भी मन करे तो हम भी साथ हो लेंगे। आखिर आप भी तो इंसान हैं, इतने दिन कैसे कटते होंगे?
छबीली: (हल्के से हँसकर) क्या बताऊँ…
मनोहर: उम्र क्या है आपकी?
छबीली: 26 के लगभग।
मनोहर: अरे वाह! शहर में तो 30-32 में शादी होती है, आप तो अभी पूरी एंजॉय वाली एज में हैं। शॉपिंग-वॉपिंग?
छबीली: कभी गाँव में शादी-ब्याह में थोड़ा-बहुत।
मनोहर: कोई लहंगा-चोली उठाता है कि नहीं?
छबीली: कौन उठाएगा साहब, कोई है ही नहीं।
मनोहर: हमें भी बहुत दिन हो गए किसी को उठाने का मौका नहीं मिला… आप आ जाओ तो हमारी भी देखभाल हो जाएगी। शायद हम दोनों की जोड़ी अच्छी जम जाए।
छबीली: (मुस्कुराते हुए) हाँ जी…
मनोहर: वैसे साइज क्या है आपका?
छबीली: 36।
मनोहर: वाह! अभी तो पूरी हरियाली है। नाम भी नहीं पूछा मैंने… नाम क्या है आपका?
छबीली: छबीली।
मनोहर: वाह! छबीली… नाम की तरह ही छबीली और रसीली लग रही हो बातों से।
छबीली: (हँसकर) आप देखोगे तब पता चलेगा ना।
मनोहर: तीन-चार साल से हम भरे बैठे हैं… आप आ जाओ तो सारा प्यार एक ही रात में उड़ेल देंगे। एक रात में 8-10 बार ना हो तो बेकार।
छबीली: (हँसते हुए) अरे साहब जी… जब रहना ही यहीं है तो कहाँ जाना है।
मनोहर: तो कब आ रही हो?
छबीली: आज शाम को ही आ जाऊँगी। बच्चे से मिलूँगी, आपसे मिलूँगी… आज से ही आपका खाना बनाऊँगी।
मनोहर: वाह! आज शाम से ही मजा आ जाएगा। ठीक है छबीली जी, शाम को मिलते हैं।
(कॉल खत्म)
शाम 7:15 बजे
मनोहर साहब ने दरवाज़ा खोला। छबीली एक साधारण साड़ी में, छोटा-सा बैग कंधे पर टांगे खड़ी थी। चार साल का बच्चा (आरव) उसके पीछे झाँक रहा था।
मनोहर (मुस्कुराते हुए आँख मारते हुए): आओ छबीली जी… अंदर आओ, आज से यही तुम्हारा घर है।
छबीली (हल्की मुस्कान के साथ): नमस्ते साहब… बच्चा बहुत प्यारा है। (आरव का गाल खींचते हुए) क्या नाम है बाबू?
आरव: आरव…
मनोहर: चलो, पहले बच्चे को खाना खिला दो, फिर हम लोग बात करेंगे।
रसोई में छबीली ने 20 मिनट में सब्ज़ी-रोटी-दाल बना दी। आरव को खाना खिलाया, दूध पिलाया और लिटा दिया।
रात 9:30 बजे
बच्चा सो चुका था। मनोहर साहब फ्रेश होकर टी-शर्ट और लोअर में आए। छबीली बर्तन धोकर कपड़े बदलने बाथरूम गई। जब बाहर आई तो उसने गहरी गुलाबी रंग की नाइटी पहन रखी थी।
मनोहर (सीटी मारते हुए): अरे वाह… यही नाइटी की बात कर रहे थे ना हम?
छबीली (शरमाते हुए): बस एक ही थी मेरे पास… पहन ली।
मनोहर (पास आकर उसकी कमर पर हाथ रखते हुए): तीन-चार साल बाद किसी ने छुआ है… हाथ काँप रहे हैं मेरे।
छबीली (उसकी छाती पर हाथ रखकर): साहब… आज से मैं हूँ ना… जितना मन भरा है, सब निकाल दो।
पहली बार (10:45 PM – धीरे-धीरे, बहुत प्यार से)
लाइट बंद, सिर्फ़ लाल बल्ब जल रहा था।
मनोहर साहब ने अपना टी-शर्ट उतारा, लोअर में थे। छबीली गुलाबी नाइटी में बेड पर लेटी थी, साँसें तेज़।
मनोहर ने उसके होंठों पर अपना होंठ रखा, धीरे-धीरे चूमा, फिर गर्दन पर किस किया। नाइटी के ऊपर से ही 36 साइज़ के स्तनों को दबाया, छबीली सिहर उठी और “उफ्फ… साहब…” बोली।
छबीली ने खुद मनोहर का लोअर नीचे खींचा। तीन साल बाद पहली बार किसी औरत का हाथ लगा था, लंड एकदम पत्थर जैसा तन गया।
मनोहर ने नाइटी ऊपर की, काले रंग की पैंटी एक झटके में उतार दी।
छबीली ने टाँगें फैलाईं, मनोहर धीरे से उसके ऊपर आए और सुपाड़ा अंदर किया। छबीली की आँखें बंद, मुँह से सिर्फ़ “आह… मार गए…” निकला।
धीरे-धीरे 15-20 मिनट तक झटके दिए, हर झटका गहरा पर नरम। आखिर में मनोहर ने कमर कस कर पकड़ी और सारा माल छबीली की चूत के सबसे अंदर छोड़ दिया।
दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे को कस कर लिपट गए।
दूसरी बार (11:20 PM – तेज़ और जंगली)
20 मिनट बाद ही मनोहर फिर तैयार।
इस बार छबीली ऊपर चढ़ गई। लंबे बाल खोल दिए, कमर हिलाने लगी। मनोहर ने नीचे से उसके स्तनों को मुँह में लेकर चूसने लगा, कभी दाँतों से काटता।
छबीली चीखी – “और तेज़… फाड़ दो आज… हाय…”
फिर पोज़िशन बदली – डॉगी स्टाइल। छबीली घुटनों के बल, मनोहर ने पीछे से उसकी कमर पकड़ कर ऐसा ठोका कि बेड की चादर फटने की आवाज़ आई।
हर झटके में छबीली का बदन आगे झुक जाता, बाल बिखर गए।
“अंदर ही डालना साहब… पूरा अंदर…” छबीली चिल्लाई।
मनोहर ने जोर का आखिरी झटका मारा और फिर से सारा माल अंदर छोड़ दिया। छबीली की टाँगें काँपने लगीं, वो बेड पर औंधे मुँह गिर पड़ी।
तीसरी बार (1:15 AM – क्लाइमेक्स, सबसे ज़ोरदार)
दोनों पागल हो चुके थे। मनोहर ने छबीली को उठाया, बेडरूम की दीवार से सटा दिया।
उसकी दाहिनी टाँग ऊपर उठाई और खड़े-खड़े घुसेड़ने लगा। छबीली की चीखें अब दब नहीं रही थीं – “हाँ… ऐसे ही… छः साल का सूखा मिटा दो आज… फाड़ दो मुझे…”
फिर बेड पर लिटाया, दोनों टाँगें कंधों पर रखीं और मिशनरी में पूरा जोर लगा दिया। हर धक्के में छबीली का बदन उछलता, उसके नाख़ून मनोहर की पीठ पर लाल निशान बना रहे थे।
मनोहर ने कहा – “अबकी बार बाहर नहीं… आज तुझे पूरी तरह अपना बना लूँगा।”
छबीली ने सिर्फ़ “हाँ… हाँ…” कहा और कस कर लिपट गई।
जब झड़े तो दोनों एक साथ चीखे। मनोहर ने इतना माल छोड़ा कि 10-15 मिनट तक छबीली की चूत से बाहर निकलता रहा। दोनों हाँफते हुए लेट गए।
चौथी बार (सुबह 4:00 AM – सबसे रोमांटिक और धीमी)
दोनों थके थे, फिर भी नींद नहीं आ रही थी।
छबीली ने मनोहर का लंड मुँह में लिया, धीरे-धीरे चूसा, जीभ से चाटा। पाँच मिनट में फिर खड़ा हो गया।
इस बार साइड पोज़िशन – दोनों एक-दूसरे की तरफ़ मुँह करके। मनोहर पीछे से अंदर डाला, बहुत धीरे-धीरे झटके।
बीच-बीच में रुक कर लंबे-लंबे किस करते, “आई लव यू… मेरी जान… आज से तू ही मेरी बीवी है…” मनोहर फुसफुसाता।
छबीली की आँखों में आँसू थे – खुशी के।
धीरे-धीरे 25-30 मिनट तक चला, आखिर में दोनों एक साथ झड़े। मनोहर का लंड अभी भी छबीली के अंदर ही था जब दोनों सो गए।
सुबह 6 बजे आरव के रोने की आवाज़ आई।
छबीली उठी तो चलते वक्त दर्द से मुँह सिकुड़ गया – चूत पूरी रात की मार से लाल और सूजी हुई थी।
मनोहर ने उसे गोद में उठाया, बाथरूम तक ले गए और किस करके कहा –
“हर रात ऐसी ही होगी… मेरी छबीली रानी।”
और सचमुच, उस दिन के बाद घर में सिर्फ़ प्यार और चुदाई का राज चलने लगा। ♡
तीसरी रात थी।
तीसरी बार की चुदाई अभी-अभी खत्म हुई थी। मनोहर का माल अभी भी छबीली की चूत से रिस रहा था। दोनों की साँसें अभी भी तेज़ थीं।
फिर अचानक छबीली ने मनोहर की छाती पर सिर रखा और रोने लगी… धीरे-धीरे, फिर फूट-फूट कर।
मनोहर ने उसे सीने से लगाया और प्यार से पूछा,
“क्या हुआ मेरी जान? रो क्यों रही है?”
छबीली ने आँसुओं को पोंछा नहीं। बस आँसुओं के बीच अपना पूरा सच उगल दिया… एकदम नंगा, बिना कुछ छुपाए।
तुम सुनो साहब… आज सारी सच्चाई बता देती हूँ।
फोन पर जो बोला था, वो सब झूठ था।
सब झूठ।
मेरा नाम छबीली है, ये सच है।
उम्र 26 है, ये भी सच है।
एक बेटी हैं, ये भी सच है।
पर मेरा मर्द… मेरा पति… वो कभी “बाहर पाइप का काम” नहीं करता था।
उसने मुझे छोड़ दिया था… पाँच साल पहले… कोरोना के टाइम में।
बोला था, “मैं दूसरी औरत के साथ रहूँगा। तू अपनी बेटी को ले जा।”
बस चला गया। नंबर बदल लिया। आज तक नहीं लौटा।
मैं उसकी रखैल थी साहब… सिर्फ़ रखैल।
15 साल की उम्र में शादी हुई थी।
पहली रात ही उसने मुझे फाड़ दिया था।
खून बह रहा था, मैं रो रही थी, वो हँस रहा था।
फिर हर बार आता, मारता, चोदता और सो जाता।
मैंने कभी प्यार नहीं देखा था… कभी नहीं।
16 साल की उम्र में पहला बच्चा हुआ।
फिर उसने कहा, “तेरे जैसे गंवार से और बच्चे नहीं चाहिए।”
और चला गया।
मैं गाँव में रहती तो लोग पीठ पीछे रंडी कहते।
बोले, “शहर में अकेली रहती है, पता नहीं कितनों के साथ सोती होगी।”
मैं चुप रहती।
क्योंकि सच तो ये था कि पाँच साल से किसी ने मुझे छुआ तक नहीं था।
रात को उँगलियाँ करती थी… बस।
मन भरता नहीं था।
सपने में भी एक मर्द की तलाश थी जो मुझे अपना ले… प्यार करे… और भरपूर चोदे।
जब ममता मैम ने तुम्हारा नंबर दिया…
मैंने सोचा… चलो एक बार कोशिश करके देखती हूँ।
पर डर भी लग रहा था।
अगर तुम्हें पता चल गया कि मैं किसी की थकी हुई औरत हूँ…
तो तुम मुझे निकाल दोगे।
इसलिए फोन पर झूठ बोला।
बोला कि पति है… कभी-कभार मिलते हैं… हनीमून होता है…
सब झूठ।
सच ये है कि तुम पहला मर्द हो…
पहला मर्द… जिसने मुझे औरत होने का अहसास कराया।
तुमने मुझे चुआ… किस किया… चोदा…
और मैं रोई नहीं… मैं हँसी थी।
पहली बार किसी ने मुझे प्यार से छुआ।
पहली बार किसी ने मेरे अंदर अपना माल डाला और मैंने उसे रोका नहीं…
बल्कि और माँगा।
साहब…
अब तुम जो चाहो करो।
अगर तुम कहो कि निकल जा… तो मैं चली जाऊँगी।
पर अगर तुम मुझे रखोगे…
तो मैं तुम्हारी गुलाम बन कर रहूँगी।
तुम्हारे बच्चे को माँ बनूँगी।
तुम्हें हर रात अपनी चूत दूँगी।
और अपनी बेटी को भी यहीं ले आऊँगी…
अगर तुम कहो तो।
बस एक बार कह दो…
कि तुम मुझे अपना लेते हो…
फिर मैं कभी झूठ नहीं बोलूँगी।
कभी नहीं।
ये कहते-कहते वो पूरी तरह फूट-फूट कर रोने लगी।
मनोहर चुप रहा।
फिर धीरे से उसका मुँह ऊपर उठाया, आँसुओं को चूमा…
और कहा…
“छबीली…
तेरा बीता हुआ कल मेरे पास नहीं है।
आज से तू मेरी बीवी है।
तेरे बच्चे मेरे बच्चे।
तेरी चूत मेरी।
तेरे स्तन मेरे।
तेरी साँसें मेरी।
और मैं… सिर्फ़ तेरा।
अब रो मत।
अब सिर्फ़ चुदाई होगी… और प्यार।
बस।”
और उस रात… चौथी बार भी हुई।
पर इस बार छबीली रोई नहीं।
वो चीखी थी… खुशी से।
और अगले ही महीने…
गुड़िया भी घर आ गए।
और छबीली… सचमुच घर की मालकिन बन गई।
बिना किसी झूठ के।
बिल्कुल नंगी सच्चाई के साथ। ♡
पहला महीना
- छबीली के बच्चे ( 10 साल की गुड़िया) मनोहर के घर आ गए।
आरव (मनोहर का बेटा) पहले तो जलता था, पर छबीली ने तीन दिन में ही उसे अपना बना लिया। अब दोनों बच्चे “मम्मी” छबीली को ही बुलाते हैं।
- मनोहर ने छबीली का नाम बैंक अकाउंट, आधार, राशन कार्ड सब में “छबीली मनोहर” करवा दिया।
- हर रात चुदाई अब भी जारी थी, पर अब और गहरी, और बेशर्म।
कभी-कभी बच्चे सोने के बाद लिविंग रूम में सोफे पर, कभी किचन में खाना बनाते-बनाते ही मनोहर पीछे से घुसेड़ देता। छबीली की चीखें दबाने के लिए मुँह में दुपट्टा ठूँस लेती।
#### छठा महीना – नया मेहमान
- छबीली प्रेग्नेंट हो गई।
वो रात याद है जब प्रेगनेंसी टेस्ट में दो लाइनें आईं।
छबीली रोते हुए मनोहर के पैरों पर गिर पड़ी थी, “साहब… मैं माँ बनने वाली हूँ… तुम्हारी संतान…”
मनोहर ने उसे गोद में उठाया और उसी रात 4 बार चोदा। आखिरी बार बहुत धीरे, पेट पर हाथ रख कर बोला, “ये हमारा बच्चा है… हमारा।”
#### दूसरा साल – पूरा परिवार
- बेटा हुआ। नाम रखा “मानव ।
अब घर में तीन बच्चे – आरव, गुड़िया और मानव।
छबीली की बॉडी और भी भरी-भरी, सेक्सी हो गई। स्तन 38 हो गए, गांड और रसीली। मनोहर कहता है, “तेरी चूत ने मुझे तीन बच्चे दिए… एक मेरे, दो बोनस में।”
पाँचवाँ साल (अभी चल रहा है – 2025)
- मनोहर ने नया 3 BHK फ्लैट ले लिया। छबीली का नाम जॉइंट है।
उसने गाड़ी भी ली, छबीली को ड्राइविंग सिखाई। अब वो खुद बच्चों को कॉलेज छोड़ती है।
- रात का रूटीन फिक्स है:
9:30 बजे बच्चे सो जाते हैं।
10 बजे से 2 बजे तक चुदाई। कभी 3 बार, कभी 5 बार।
सुबह 5 बजे फिर एक राउंड, फिर चाय बनाती है।
- छबीली अब बिल्कुल खुल गई है। घर में ज्यादातर नाइटी या साड़ी बिना ब्लाउज के रहती है।
मनोहर ऑफिस से आते ही उसे गोद में उठा कर बेडरूम ले जाता है।
#### सबसे प्यारी बात
हर साल 26 अप्रैल (जिस दिन छबीली पहली बार घर आई थी) को मनोहर पूरा दिन ऑफिस से छुट्टी लेता है।
सुबह से रात तक सिर्फ़ और सिर्फ़ चुदाई।
कोई फोन नहीं, कोई काम नहीं।
2025 में भी इसी साल 26 अप्रैल को उसने छबीली को 11 बार चोदा था।
गिनती छबीली ने की थी, और हँसते हुए बोला था,
“साहब… अब तो मेरी चूत भी थक गई… पर दिल नहीं थकता तुमसे चुदवाने को।”
और आज भी…
जब रात होती है, लाइट बंद होती है,
तो एक 38 साल का मर्द और उसकी 31 साल की रसीली बीवी
एक-दूसरे में पूरी तरह खो जाते हैं।
बच्चे सोते हैं अगले कमरे में…
और बेडरूम में बस एक ही आवाज़ गूँजती है,
“आह… साहब… और जोर से… आज फिर पूरा अंदर डाल दो…”
बस यही है उनकी ज़िंदगी।
प्यार, चुदाई और तीन बच्चों की हँसी।
और हाँ… कभी-कभी छबीली मनोहर के कान में फुसफुसाती है,
“साहब… चौथा बच्चा भी दे दो ना… इस बार बेटी चाहिए…”
मनोहर हँसता है और फिर शुरू हो जाता है नया राउंड। ♡
तो यही हुआ आगे… और अभी भी हो रहा है।
हर रात। हर सुबह।
बिना रुके।
कॉलर (महिला - छबीली)
रिसीवर (पुरुष - मनोहर साहब)
छबीली: हेलो, मनोहर साहब जी बोल रहे हैं ना
मनोहर: हाँ जी, मैं मनोहर बोल रहा हूँ। बताइए।
छबीली: साहब जी, आपको एक कामवाली चाहिए थी ना?
मनोहर: हाँ-हाँ, चाहिए थी। आपको किसने बताया?
छबीली: ममता मैम ने कहा था कि आपसे बात कर लूँ, इसलिए आपका नंबर दिया।
मनोहर: अरे हाँ, मैंने ममता जी से ही कहा था कि मुझे एक कामवाली की जरूरत है।
मनोहर: अच्छा, आप कहाँ रहती हैं?
छबीली: सर, बस 2-3 किलोमीटर दूर।
मनोहर: अच्छा। पहले कहाँ काम करती थीं?
छबीली: यहीं आस-पास ही काम करती थी।
मनोहर: दरअसल बात ये है कि घर में कोई नहीं है। मेरी वाइफ गुजर गई थीं जब बच्चा एक साल का था। अब बच्चा चार साल का हो गया है। अभी तक मैं और उसकी बुआ देखभाल करते थे, लेकिन बुआ की शादी हो गई। अब बहुत दिक्कत हो रही है। बच्चे को कॉलेज भी भेजने लगा हूँ, मैं ऑफिस जाता हूँ तो घर पर कोई नहीं रहता। इसलिए सोचा कोई ऐसी काम करनेवाली मिल जाए जो घर के सारे काम के साथ-साथ बच्चे की भी पूरी देखभाल कर ले। मतलब घर को अपना घर समझकर रहे।
छबीली: जी सर, मैं तैयार हूँ आपके यहाँ काम करने के लिए।
मनोहर: सैलरी के बारे में कुछ पूछा नहीं आपने?
छबीली: ममता मैम ने कहा था कि आपको अच्छी सैलरी मिलेगी, खाना-पीना सब होगा। आप जितना चाहें उतना दे दीजिएगा।
मनोहर: जहाँ आप अभी काम कर रही हैं, उससे ज्यादा देंगे, क्योंकि यहाँ बच्चे का एक्स्ट्रा काम भी है।
मनोहर: एक बात बताइए, आप डेली अप-डाउन करेंगी या यहाँ रहकर काम करेंगी?
छबीली: अप-डाउन में टाइम लगेगा सर। अगर आप रहने की व्यवस्था कर दें तो बहुत अच्छा रहेगा। जैसा आप कहेंगे, वैसा कर लेंगे।
मनोहर: हम भी तो यही चाहते हैं! अगर कोई लाइव-इन मिल जाए तो मेरी सारी टेंशन खत्म। बच्चा भी आपके साथ रहेगा, रात को आपके पास सोएगा, आपसे बात करेगा, माँ जैसा लगेगा। सुबह लंच पैक कर देना, माँ की पूरी जिम्मेदारी समझ लीजिए।
छबीली: जी, मैं समझ रही हूँ।
मनोहर: आपकी फैमिली?
छबीली: एक बेटी हैं, गाँव में दादी-दादा के पास रहते हैं। हस्बैंड बाहर दूसरी कंपनी में पाइप का काम करते हैं। मैं यहाँ अकेले रहती हूँ, 5-6 साल से।
मनोहर: अच्छा… तो मिलना-जुलना कैसे होता है?
छबीली: जब वो गाँव आते हैं तो मैं भी चली जाती हूँ, कभी-कभार ही मिल पाते हैं।
मनोहर: (हँसते हुए) मतलब कभी-कभार हनीमून मन जाता है?
छबीली: (हँसकर) साहब जी, रोज़-रोज़ थोड़े हो पाता है, कमाना भी तो है।
मनोहर: अरे हमसे पूछो… वाइफ के जाने के बाद तीन-चार साल से तो किसी का प्यार ही नहीं मिला। सोच रहा था कोई ऐसी मिल जाए जो घर संभाल ले, बच्चे को देख ले… और मेरी भी थोड़ी देखभाल हो जाए।
छबीली: साहब जी, टेंशन मत लीजिए। मैं आपके पूरे घर की देखभाल कर लूँगी।
मनोहर: बस यही चाहिए था। रात को चाय बना देना, बच्चे को सुला देना… और बाकी अगर आपका भी मन करे तो हम भी साथ हो लेंगे। आखिर आप भी तो इंसान हैं, इतने दिन कैसे कटते होंगे?
छबीली: (हल्के से हँसकर) क्या बताऊँ…
मनोहर: उम्र क्या है आपकी?
छबीली: 26 के लगभग।
मनोहर: अरे वाह! शहर में तो 30-32 में शादी होती है, आप तो अभी पूरी एंजॉय वाली एज में हैं। शॉपिंग-वॉपिंग?
छबीली: कभी गाँव में शादी-ब्याह में थोड़ा-बहुत।
मनोहर: कोई लहंगा-चोली उठाता है कि नहीं?
छबीली: कौन उठाएगा साहब, कोई है ही नहीं।
मनोहर: हमें भी बहुत दिन हो गए किसी को उठाने का मौका नहीं मिला… आप आ जाओ तो हमारी भी देखभाल हो जाएगी। शायद हम दोनों की जोड़ी अच्छी जम जाए।
छबीली: (मुस्कुराते हुए) हाँ जी…
मनोहर: वैसे साइज क्या है आपका?
छबीली: 36।
मनोहर: वाह! अभी तो पूरी हरियाली है। नाम भी नहीं पूछा मैंने… नाम क्या है आपका?
छबीली: छबीली।
मनोहर: वाह! छबीली… नाम की तरह ही छबीली और रसीली लग रही हो बातों से।
छबीली: (हँसकर) आप देखोगे तब पता चलेगा ना।
मनोहर: तीन-चार साल से हम भरे बैठे हैं… आप आ जाओ तो सारा प्यार एक ही रात में उड़ेल देंगे। एक रात में 8-10 बार ना हो तो बेकार।
छबीली: (हँसते हुए) अरे साहब जी… जब रहना ही यहीं है तो कहाँ जाना है।
मनोहर: तो कब आ रही हो?
छबीली: आज शाम को ही आ जाऊँगी। बच्चे से मिलूँगी, आपसे मिलूँगी… आज से ही आपका खाना बनाऊँगी।
मनोहर: वाह! आज शाम से ही मजा आ जाएगा। ठीक है छबीली जी, शाम को मिलते हैं।
(कॉल खत्म)
शाम 7:15 बजे
मनोहर साहब ने दरवाज़ा खोला। छबीली एक साधारण साड़ी में, छोटा-सा बैग कंधे पर टांगे खड़ी थी। चार साल का बच्चा (आरव) उसके पीछे झाँक रहा था।
मनोहर (मुस्कुराते हुए आँख मारते हुए): आओ छबीली जी… अंदर आओ, आज से यही तुम्हारा घर है।
छबीली (हल्की मुस्कान के साथ): नमस्ते साहब… बच्चा बहुत प्यारा है। (आरव का गाल खींचते हुए) क्या नाम है बाबू?
आरव: आरव…
मनोहर: चलो, पहले बच्चे को खाना खिला दो, फिर हम लोग बात करेंगे।
रसोई में छबीली ने 20 मिनट में सब्ज़ी-रोटी-दाल बना दी। आरव को खाना खिलाया, दूध पिलाया और लिटा दिया।
रात 9:30 बजे
बच्चा सो चुका था। मनोहर साहब फ्रेश होकर टी-शर्ट और लोअर में आए। छबीली बर्तन धोकर कपड़े बदलने बाथरूम गई। जब बाहर आई तो उसने गहरी गुलाबी रंग की नाइटी पहन रखी थी।
मनोहर (सीटी मारते हुए): अरे वाह… यही नाइटी की बात कर रहे थे ना हम?
छबीली (शरमाते हुए): बस एक ही थी मेरे पास… पहन ली।
मनोहर (पास आकर उसकी कमर पर हाथ रखते हुए): तीन-चार साल बाद किसी ने छुआ है… हाथ काँप रहे हैं मेरे।
छबीली (उसकी छाती पर हाथ रखकर): साहब… आज से मैं हूँ ना… जितना मन भरा है, सब निकाल दो।
पहली बार (10:45 PM – धीरे-धीरे, बहुत प्यार से)
लाइट बंद, सिर्फ़ लाल बल्ब जल रहा था।
मनोहर साहब ने अपना टी-शर्ट उतारा, लोअर में थे। छबीली गुलाबी नाइटी में बेड पर लेटी थी, साँसें तेज़।
मनोहर ने उसके होंठों पर अपना होंठ रखा, धीरे-धीरे चूमा, फिर गर्दन पर किस किया। नाइटी के ऊपर से ही 36 साइज़ के स्तनों को दबाया, छबीली सिहर उठी और “उफ्फ… साहब…” बोली।
छबीली ने खुद मनोहर का लोअर नीचे खींचा। तीन साल बाद पहली बार किसी औरत का हाथ लगा था, लंड एकदम पत्थर जैसा तन गया।
मनोहर ने नाइटी ऊपर की, काले रंग की पैंटी एक झटके में उतार दी।
छबीली ने टाँगें फैलाईं, मनोहर धीरे से उसके ऊपर आए और सुपाड़ा अंदर किया। छबीली की आँखें बंद, मुँह से सिर्फ़ “आह… मार गए…” निकला।
धीरे-धीरे 15-20 मिनट तक झटके दिए, हर झटका गहरा पर नरम। आखिर में मनोहर ने कमर कस कर पकड़ी और सारा माल छबीली की चूत के सबसे अंदर छोड़ दिया।
दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे को कस कर लिपट गए।
दूसरी बार (11:20 PM – तेज़ और जंगली)
20 मिनट बाद ही मनोहर फिर तैयार।
इस बार छबीली ऊपर चढ़ गई। लंबे बाल खोल दिए, कमर हिलाने लगी। मनोहर ने नीचे से उसके स्तनों को मुँह में लेकर चूसने लगा, कभी दाँतों से काटता।
छबीली चीखी – “और तेज़… फाड़ दो आज… हाय…”
फिर पोज़िशन बदली – डॉगी स्टाइल। छबीली घुटनों के बल, मनोहर ने पीछे से उसकी कमर पकड़ कर ऐसा ठोका कि बेड की चादर फटने की आवाज़ आई।
हर झटके में छबीली का बदन आगे झुक जाता, बाल बिखर गए।
“अंदर ही डालना साहब… पूरा अंदर…” छबीली चिल्लाई।
मनोहर ने जोर का आखिरी झटका मारा और फिर से सारा माल अंदर छोड़ दिया। छबीली की टाँगें काँपने लगीं, वो बेड पर औंधे मुँह गिर पड़ी।
तीसरी बार (1:15 AM – क्लाइमेक्स, सबसे ज़ोरदार)
दोनों पागल हो चुके थे। मनोहर ने छबीली को उठाया, बेडरूम की दीवार से सटा दिया।
उसकी दाहिनी टाँग ऊपर उठाई और खड़े-खड़े घुसेड़ने लगा। छबीली की चीखें अब दब नहीं रही थीं – “हाँ… ऐसे ही… छः साल का सूखा मिटा दो आज… फाड़ दो मुझे…”
फिर बेड पर लिटाया, दोनों टाँगें कंधों पर रखीं और मिशनरी में पूरा जोर लगा दिया। हर धक्के में छबीली का बदन उछलता, उसके नाख़ून मनोहर की पीठ पर लाल निशान बना रहे थे।
मनोहर ने कहा – “अबकी बार बाहर नहीं… आज तुझे पूरी तरह अपना बना लूँगा।”
छबीली ने सिर्फ़ “हाँ… हाँ…” कहा और कस कर लिपट गई।
जब झड़े तो दोनों एक साथ चीखे। मनोहर ने इतना माल छोड़ा कि 10-15 मिनट तक छबीली की चूत से बाहर निकलता रहा। दोनों हाँफते हुए लेट गए।
चौथी बार (सुबह 4:00 AM – सबसे रोमांटिक और धीमी)
दोनों थके थे, फिर भी नींद नहीं आ रही थी।
छबीली ने मनोहर का लंड मुँह में लिया, धीरे-धीरे चूसा, जीभ से चाटा। पाँच मिनट में फिर खड़ा हो गया।
इस बार साइड पोज़िशन – दोनों एक-दूसरे की तरफ़ मुँह करके। मनोहर पीछे से अंदर डाला, बहुत धीरे-धीरे झटके।
बीच-बीच में रुक कर लंबे-लंबे किस करते, “आई लव यू… मेरी जान… आज से तू ही मेरी बीवी है…” मनोहर फुसफुसाता।
छबीली की आँखों में आँसू थे – खुशी के।
धीरे-धीरे 25-30 मिनट तक चला, आखिर में दोनों एक साथ झड़े। मनोहर का लंड अभी भी छबीली के अंदर ही था जब दोनों सो गए।
सुबह 6 बजे आरव के रोने की आवाज़ आई।
छबीली उठी तो चलते वक्त दर्द से मुँह सिकुड़ गया – चूत पूरी रात की मार से लाल और सूजी हुई थी।
मनोहर ने उसे गोद में उठाया, बाथरूम तक ले गए और किस करके कहा –
“हर रात ऐसी ही होगी… मेरी छबीली रानी।”
और सचमुच, उस दिन के बाद घर में सिर्फ़ प्यार और चुदाई का राज चलने लगा। ♡
तीसरी रात थी।
तीसरी बार की चुदाई अभी-अभी खत्म हुई थी। मनोहर का माल अभी भी छबीली की चूत से रिस रहा था। दोनों की साँसें अभी भी तेज़ थीं।
फिर अचानक छबीली ने मनोहर की छाती पर सिर रखा और रोने लगी… धीरे-धीरे, फिर फूट-फूट कर।
मनोहर ने उसे सीने से लगाया और प्यार से पूछा,
“क्या हुआ मेरी जान? रो क्यों रही है?”
छबीली ने आँसुओं को पोंछा नहीं। बस आँसुओं के बीच अपना पूरा सच उगल दिया… एकदम नंगा, बिना कुछ छुपाए।
तुम सुनो साहब… आज सारी सच्चाई बता देती हूँ।
फोन पर जो बोला था, वो सब झूठ था।
सब झूठ।
मेरा नाम छबीली है, ये सच है।
उम्र 26 है, ये भी सच है।
एक बेटी हैं, ये भी सच है।
पर मेरा मर्द… मेरा पति… वो कभी “बाहर पाइप का काम” नहीं करता था।
उसने मुझे छोड़ दिया था… पाँच साल पहले… कोरोना के टाइम में।
बोला था, “मैं दूसरी औरत के साथ रहूँगा। तू अपनी बेटी को ले जा।”
बस चला गया। नंबर बदल लिया। आज तक नहीं लौटा।
मैं उसकी रखैल थी साहब… सिर्फ़ रखैल।
15 साल की उम्र में शादी हुई थी।
पहली रात ही उसने मुझे फाड़ दिया था।
खून बह रहा था, मैं रो रही थी, वो हँस रहा था।
फिर हर बार आता, मारता, चोदता और सो जाता।
मैंने कभी प्यार नहीं देखा था… कभी नहीं।
16 साल की उम्र में पहला बच्चा हुआ।
फिर उसने कहा, “तेरे जैसे गंवार से और बच्चे नहीं चाहिए।”
और चला गया।
मैं गाँव में रहती तो लोग पीठ पीछे रंडी कहते।
बोले, “शहर में अकेली रहती है, पता नहीं कितनों के साथ सोती होगी।”
मैं चुप रहती।
क्योंकि सच तो ये था कि पाँच साल से किसी ने मुझे छुआ तक नहीं था।
रात को उँगलियाँ करती थी… बस।
मन भरता नहीं था।
सपने में भी एक मर्द की तलाश थी जो मुझे अपना ले… प्यार करे… और भरपूर चोदे।
जब ममता मैम ने तुम्हारा नंबर दिया…
मैंने सोचा… चलो एक बार कोशिश करके देखती हूँ।
पर डर भी लग रहा था।
अगर तुम्हें पता चल गया कि मैं किसी की थकी हुई औरत हूँ…
तो तुम मुझे निकाल दोगे।
इसलिए फोन पर झूठ बोला।
बोला कि पति है… कभी-कभार मिलते हैं… हनीमून होता है…
सब झूठ।
सच ये है कि तुम पहला मर्द हो…
पहला मर्द… जिसने मुझे औरत होने का अहसास कराया।
तुमने मुझे चुआ… किस किया… चोदा…
और मैं रोई नहीं… मैं हँसी थी।
पहली बार किसी ने मुझे प्यार से छुआ।
पहली बार किसी ने मेरे अंदर अपना माल डाला और मैंने उसे रोका नहीं…
बल्कि और माँगा।
साहब…
अब तुम जो चाहो करो।
अगर तुम कहो कि निकल जा… तो मैं चली जाऊँगी।
पर अगर तुम मुझे रखोगे…
तो मैं तुम्हारी गुलाम बन कर रहूँगी।
तुम्हारे बच्चे को माँ बनूँगी।
तुम्हें हर रात अपनी चूत दूँगी।
और अपनी बेटी को भी यहीं ले आऊँगी…
अगर तुम कहो तो।
बस एक बार कह दो…
कि तुम मुझे अपना लेते हो…
फिर मैं कभी झूठ नहीं बोलूँगी।
कभी नहीं।
ये कहते-कहते वो पूरी तरह फूट-फूट कर रोने लगी।
मनोहर चुप रहा।
फिर धीरे से उसका मुँह ऊपर उठाया, आँसुओं को चूमा…
और कहा…
“छबीली…
तेरा बीता हुआ कल मेरे पास नहीं है।
आज से तू मेरी बीवी है।
तेरे बच्चे मेरे बच्चे।
तेरी चूत मेरी।
तेरे स्तन मेरे।
तेरी साँसें मेरी।
और मैं… सिर्फ़ तेरा।
अब रो मत।
अब सिर्फ़ चुदाई होगी… और प्यार।
बस।”
और उस रात… चौथी बार भी हुई।
पर इस बार छबीली रोई नहीं।
वो चीखी थी… खुशी से।
और अगले ही महीने…
गुड़िया भी घर आ गए।
और छबीली… सचमुच घर की मालकिन बन गई।
बिना किसी झूठ के।
बिल्कुल नंगी सच्चाई के साथ। ♡
पहला महीना
- छबीली के बच्चे ( 10 साल की गुड़िया) मनोहर के घर आ गए।
आरव (मनोहर का बेटा) पहले तो जलता था, पर छबीली ने तीन दिन में ही उसे अपना बना लिया। अब दोनों बच्चे “मम्मी” छबीली को ही बुलाते हैं।
- मनोहर ने छबीली का नाम बैंक अकाउंट, आधार, राशन कार्ड सब में “छबीली मनोहर” करवा दिया।
- हर रात चुदाई अब भी जारी थी, पर अब और गहरी, और बेशर्म।
कभी-कभी बच्चे सोने के बाद लिविंग रूम में सोफे पर, कभी किचन में खाना बनाते-बनाते ही मनोहर पीछे से घुसेड़ देता। छबीली की चीखें दबाने के लिए मुँह में दुपट्टा ठूँस लेती।
#### छठा महीना – नया मेहमान
- छबीली प्रेग्नेंट हो गई।
वो रात याद है जब प्रेगनेंसी टेस्ट में दो लाइनें आईं।
छबीली रोते हुए मनोहर के पैरों पर गिर पड़ी थी, “साहब… मैं माँ बनने वाली हूँ… तुम्हारी संतान…”
मनोहर ने उसे गोद में उठाया और उसी रात 4 बार चोदा। आखिरी बार बहुत धीरे, पेट पर हाथ रख कर बोला, “ये हमारा बच्चा है… हमारा।”
#### दूसरा साल – पूरा परिवार
- बेटा हुआ। नाम रखा “मानव ।
अब घर में तीन बच्चे – आरव, गुड़िया और मानव।
छबीली की बॉडी और भी भरी-भरी, सेक्सी हो गई। स्तन 38 हो गए, गांड और रसीली। मनोहर कहता है, “तेरी चूत ने मुझे तीन बच्चे दिए… एक मेरे, दो बोनस में।”
पाँचवाँ साल (अभी चल रहा है – 2025)
- मनोहर ने नया 3 BHK फ्लैट ले लिया। छबीली का नाम जॉइंट है।
उसने गाड़ी भी ली, छबीली को ड्राइविंग सिखाई। अब वो खुद बच्चों को कॉलेज छोड़ती है।
- रात का रूटीन फिक्स है:
9:30 बजे बच्चे सो जाते हैं।
10 बजे से 2 बजे तक चुदाई। कभी 3 बार, कभी 5 बार।
सुबह 5 बजे फिर एक राउंड, फिर चाय बनाती है।
- छबीली अब बिल्कुल खुल गई है। घर में ज्यादातर नाइटी या साड़ी बिना ब्लाउज के रहती है।
मनोहर ऑफिस से आते ही उसे गोद में उठा कर बेडरूम ले जाता है।
#### सबसे प्यारी बात
हर साल 26 अप्रैल (जिस दिन छबीली पहली बार घर आई थी) को मनोहर पूरा दिन ऑफिस से छुट्टी लेता है।
सुबह से रात तक सिर्फ़ और सिर्फ़ चुदाई।
कोई फोन नहीं, कोई काम नहीं।
2025 में भी इसी साल 26 अप्रैल को उसने छबीली को 11 बार चोदा था।
गिनती छबीली ने की थी, और हँसते हुए बोला था,
“साहब… अब तो मेरी चूत भी थक गई… पर दिल नहीं थकता तुमसे चुदवाने को।”
और आज भी…
जब रात होती है, लाइट बंद होती है,
तो एक 38 साल का मर्द और उसकी 31 साल की रसीली बीवी
एक-दूसरे में पूरी तरह खो जाते हैं।
बच्चे सोते हैं अगले कमरे में…
और बेडरूम में बस एक ही आवाज़ गूँजती है,
“आह… साहब… और जोर से… आज फिर पूरा अंदर डाल दो…”
बस यही है उनकी ज़िंदगी।
प्यार, चुदाई और तीन बच्चों की हँसी।
और हाँ… कभी-कभी छबीली मनोहर के कान में फुसफुसाती है,
“साहब… चौथा बच्चा भी दे दो ना… इस बार बेटी चाहिए…”
मनोहर हँसता है और फिर शुरू हो जाता है नया राउंड। ♡
तो यही हुआ आगे… और अभी भी हो रहा है।
हर रात। हर सुबह।
बिना रुके।
✍️निहाल सिंह


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