05-12-2025, 12:09 AM
(This post was last modified: 05-12-2025, 12:30 AM by Tiska jay. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
कमरे में अकेले
दरवाज़ा बंद।
पूजा का मन दो हिस्सों में लड़ रहा था।
एक हिस्सा चीख रहा था –
“ये क्या हो रहा है तेरे साथ…? जिस सर की तू इतनी इज़्ज़त करती है… वो तेरी गांड दबा रहे थे… तेरे बूब्स चूस रहे… छिः पूजा… छिः…!!!”
दूसरा हिस्सा खुद को समझा रहा था –
“नहीं… नहीं… सर तो बस सहारा दे रहे थे…
इस उम्र में वो ऐसा थोड़े करेंगे… बेचारे अकेले हैं…पत्नी गुज़र गई…
20 साल से अकेले हैं…अगर करना होता तो दूसरी शादी कर लेते।
तू ही गलत सोच रही है… सब तेरी गंदी सोच है… सर तो कितने अच्छे हैं… शरीफ हैं… तू ही गलत है…”
और रोने लगी।
“नहीं पूजा… नहीं… तू गलत नहीं सोचेगी… सर अच्छे हैं…
सब तेरी गलती है… तू ही गंदी हो गई है…मुन्ना वाले हादसे के बाद तुझे ही सब बुरे लगने लगे हैं। "
और उस रात वो सोई नहीं।
बस लेटी रही। अपने आप से लड़ती रही।
उसकी अपनी बनाई हुई सच्चाई से।
और सुबह फिर वही हुआ।
वो उठी। तैयार हुई।
और फिर से अवस्थी सर के घर चली गई।
क्योंकि अब वो खुद को समझा चुकी थी –
“सर तो बस मदद कर रहे हैं… तू ही गलत सोचती है…”
पूजा बस आँखें बंद करके चल रही थी।
उस रास्ते पर…
सोचते हुए
“शालिनी मैम… मुझे माफ़ कर दो… मैंने आपके पति पर शक किया…
मैंने सोचा वो गलत हैं… पर वो तो बस…मदद कर रहे थे
20 साल से अकेले… आपको इतना प्यार करते हैं…
हर साल फूल चढ़ाते हैं… मैंने उनकी इज़्ज़त पर उँगली उठाई… मैंने सोचा वो मुझे…
पर वो तो बस मदद कर रहे थे… सब मेरी गंदी सोच थी…
मैं ही गंदी हूँ मैम… मैं ही… मैं ही पापी हूँ…”
पूजा दरवाज़े पर थी पूजा के मन में उथल पुथल थी।
“मलाकल मैं बिना बोले भाग गई थी… सर रात भर रोए होंगे…
उनकी बीवी की फोटो को देखकर रोए होंगे… मैं कितनी स्वार्थी हूँ…
मैंने उन्हें दुख दिया… मुझे सॉरी बोलना ही पड़ेगा…
वरना मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाऊँगी…”
अवस्थी मन में (दरवाज़ा खोलते ही)**
“आ गई साली…क्या करने आई है बुरा तो नहीं लगा इसे ज्यादा कल। "
अवस्थी- "सॉर्री पूजा कल के लिए... वो"
पूजा बात काट के सॉरी बोलती है
पूजा“सर… कल मैं… मैं बहुत गलत कर आई… बिना कुछ बोले चली गई… आपको बुरा लगा होगा… मुझे बहुत शर्मिंदगी हो रही है…”
**अवस्थी (धीमी आवाज़ में, आँखें नम)**
“कोई बात नहीं बेटा… मुझसे ही गलती हुई थी… मुझे तुम्हें सँभालना चाहिए था… गलती से तुम मेरे ऊपर आ गिरी चोट तो नही लगी थी न”
पूजा बोली " नहीं सर गलती मेरी है आपको मेरी चिंता है और मुझे.....मुझे लगा आप मेरा फायदा उठा रहे हैं, ई am sorry सर"
अवस्थी मन में “ओहो तो साली को लगत हहै उसकी गलती है अभी थोड़ा acting करनी पड़ेगी। अब बस थोड़ा सा और… बस थोड़ा सा और रोना है… फिर ये खुद ही मेरे गले लग जाएगी…"
अवस्थी का रोना शुरू
वो अचानक दीवार की तरफ़ मुड़े।
शालिनी की फोटो की तरफ़।
और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे।
अवस्थी (रोते हुए) दर्द भरी आवाज़ में
“देखो शालिनी… देखो… मैंने किसी को हाथ तक नहीं लगाया 20 साल में… और आज ये मुझ पर इल्ज़ाम लगा रही है…
कि मैंने जान-बूझकर… जान-बूझकर छुआ है… मैंने उसकी इज़्ज़त को हाथ लगाया है… मैं मर क्यों नहीं जाता…”
अवस्थी का मन (रोते-रोते भी हँस रहा है)
“रो… और ज़ोर से रो… ये देख… ये टूट रही है… अब ये खुद ही बोलेगी – ‘मेरी गलती है’… अब ये खुद ही मेरे पैरों में होगी…”
पूजा का मन (दिल टूट रहा है)“नहीं… नहीं… मैंने सर को इतना दुख दिया…? इनकी बीवी देख रही होगी…मुझे शर्मिंदा देख रही होगी…मैं कितनी नीच हूँ… मैंने इनके साथ ऐसा सोचा… मैं ही गंदी हूँ…मैं ही गलत हूँ…”
पूजा घुटनों पर पूजा ज़मीन पर बैठ गई। अवस्थी सर के पैर पकड़ लिए। रोते-रोते।
पूजा (फूट-फूट कर)“सर… माफ़ कर दीजिए… मैंने बहुत गलत सोचा… मैंने आपको गलत समझा… मैं बहुत बुरी हूँ… मेरी ही गंदी सोच है…
मैंने ही आपको दुख पहुँचाया… आप बिल्कुल साफ़ हैं… आप तो मुझे बेटी जैसे मानते हैं… मैंने ही… मैंने ही सब गलत किया…”
अवस्थी मैं में“हाँ… हाँ… रो… अब तूने खुद ही कबूल कर लिया…
अब तू मेरे सामने हमेशा झुकेगी… अब तू खुद ही मेरे बेड पर आएगी… खुद ही बोलेगी – ‘सर… मुझे सज़ा दो’…”
पूजा रोते-रोते घुटनों पर बैठ गई।
अवस्थी सर को गले लगा लिया।
बहुत ज़ोर से।
उसके बूब्स उनके सीने पर दब गए।
उसकी साँसें उनकी गर्दन पर।
उसके आँसू उनके कुर्ते पर।
“सर… मैं सबसे गंदी लड़की हूँ… मैंने आपके 20 साल के तप को कलंकित किया… मैंने आपको राक्षस समझा… जबकि आप तो भले मानुस हैं…आप जो कहें मैं करूँगी… बस मुझे माफ़ कर दीजिए… या… या आप जो चाहें वैसी बन जाऊँगी…खुब मेहनत करूँगी”
अवस्थी सर ने पूजा को और कसकर गले लगाया। उनका चेहरा पूजा की गर्दन में। होंठ उसकी नस पर। हाथ उसकी कमर से नीचे।
गांड पर। पूजा अलग नहीं हुई। उसे पुरा भरोसा था अब अवस्थी पर।
अवस्थी का मन “हो गया… अब ये मेरी गुलाम है… खुद बोली – ‘आप जो चाहें वैसी बन जाऊँगी’… अब अगली बार ये मेरे बेड पर होगी…
और जब मैं इसका कुर्ता उतारूँगा… तो ये रोएगी और बोलेगी – ‘सर… मैंने आपका दिल तोड़ा था… अब आप मेरे बदन को तोड़ दो… जैसा चाहें वैसा करो…’”
दरवाज़ा बंद।
पूजा का मन दो हिस्सों में लड़ रहा था।
एक हिस्सा चीख रहा था –
“ये क्या हो रहा है तेरे साथ…? जिस सर की तू इतनी इज़्ज़त करती है… वो तेरी गांड दबा रहे थे… तेरे बूब्स चूस रहे… छिः पूजा… छिः…!!!”
दूसरा हिस्सा खुद को समझा रहा था –
“नहीं… नहीं… सर तो बस सहारा दे रहे थे…
इस उम्र में वो ऐसा थोड़े करेंगे… बेचारे अकेले हैं…पत्नी गुज़र गई…
20 साल से अकेले हैं…अगर करना होता तो दूसरी शादी कर लेते।
तू ही गलत सोच रही है… सब तेरी गंदी सोच है… सर तो कितने अच्छे हैं… शरीफ हैं… तू ही गलत है…”
और रोने लगी।
“नहीं पूजा… नहीं… तू गलत नहीं सोचेगी… सर अच्छे हैं…
सब तेरी गलती है… तू ही गंदी हो गई है…मुन्ना वाले हादसे के बाद तुझे ही सब बुरे लगने लगे हैं। "
और उस रात वो सोई नहीं।
बस लेटी रही। अपने आप से लड़ती रही।
उसकी अपनी बनाई हुई सच्चाई से।
और सुबह फिर वही हुआ।
वो उठी। तैयार हुई।
और फिर से अवस्थी सर के घर चली गई।
क्योंकि अब वो खुद को समझा चुकी थी –
“सर तो बस मदद कर रहे हैं… तू ही गलत सोचती है…”
पूजा बस आँखें बंद करके चल रही थी।
उस रास्ते पर…
सोचते हुए
“शालिनी मैम… मुझे माफ़ कर दो… मैंने आपके पति पर शक किया…
मैंने सोचा वो गलत हैं… पर वो तो बस…मदद कर रहे थे
20 साल से अकेले… आपको इतना प्यार करते हैं…
हर साल फूल चढ़ाते हैं… मैंने उनकी इज़्ज़त पर उँगली उठाई… मैंने सोचा वो मुझे…
पर वो तो बस मदद कर रहे थे… सब मेरी गंदी सोच थी…
मैं ही गंदी हूँ मैम… मैं ही… मैं ही पापी हूँ…”
पूजा दरवाज़े पर थी पूजा के मन में उथल पुथल थी।
“मलाकल मैं बिना बोले भाग गई थी… सर रात भर रोए होंगे…
उनकी बीवी की फोटो को देखकर रोए होंगे… मैं कितनी स्वार्थी हूँ…
मैंने उन्हें दुख दिया… मुझे सॉरी बोलना ही पड़ेगा…
वरना मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाऊँगी…”
अवस्थी मन में (दरवाज़ा खोलते ही)**
“आ गई साली…क्या करने आई है बुरा तो नहीं लगा इसे ज्यादा कल। "
अवस्थी- "सॉर्री पूजा कल के लिए... वो"
पूजा बात काट के सॉरी बोलती है
पूजा“सर… कल मैं… मैं बहुत गलत कर आई… बिना कुछ बोले चली गई… आपको बुरा लगा होगा… मुझे बहुत शर्मिंदगी हो रही है…”
**अवस्थी (धीमी आवाज़ में, आँखें नम)**
“कोई बात नहीं बेटा… मुझसे ही गलती हुई थी… मुझे तुम्हें सँभालना चाहिए था… गलती से तुम मेरे ऊपर आ गिरी चोट तो नही लगी थी न”
पूजा बोली " नहीं सर गलती मेरी है आपको मेरी चिंता है और मुझे.....मुझे लगा आप मेरा फायदा उठा रहे हैं, ई am sorry सर"
अवस्थी मन में “ओहो तो साली को लगत हहै उसकी गलती है अभी थोड़ा acting करनी पड़ेगी। अब बस थोड़ा सा और… बस थोड़ा सा और रोना है… फिर ये खुद ही मेरे गले लग जाएगी…"
अवस्थी का रोना शुरू
वो अचानक दीवार की तरफ़ मुड़े।
शालिनी की फोटो की तरफ़।
और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे।
अवस्थी (रोते हुए) दर्द भरी आवाज़ में
“देखो शालिनी… देखो… मैंने किसी को हाथ तक नहीं लगाया 20 साल में… और आज ये मुझ पर इल्ज़ाम लगा रही है…
कि मैंने जान-बूझकर… जान-बूझकर छुआ है… मैंने उसकी इज़्ज़त को हाथ लगाया है… मैं मर क्यों नहीं जाता…”
अवस्थी का मन (रोते-रोते भी हँस रहा है)
“रो… और ज़ोर से रो… ये देख… ये टूट रही है… अब ये खुद ही बोलेगी – ‘मेरी गलती है’… अब ये खुद ही मेरे पैरों में होगी…”
पूजा का मन (दिल टूट रहा है)“नहीं… नहीं… मैंने सर को इतना दुख दिया…? इनकी बीवी देख रही होगी…मुझे शर्मिंदा देख रही होगी…मैं कितनी नीच हूँ… मैंने इनके साथ ऐसा सोचा… मैं ही गंदी हूँ…मैं ही गलत हूँ…”
पूजा घुटनों पर पूजा ज़मीन पर बैठ गई। अवस्थी सर के पैर पकड़ लिए। रोते-रोते।
पूजा (फूट-फूट कर)“सर… माफ़ कर दीजिए… मैंने बहुत गलत सोचा… मैंने आपको गलत समझा… मैं बहुत बुरी हूँ… मेरी ही गंदी सोच है…
मैंने ही आपको दुख पहुँचाया… आप बिल्कुल साफ़ हैं… आप तो मुझे बेटी जैसे मानते हैं… मैंने ही… मैंने ही सब गलत किया…”
अवस्थी मैं में“हाँ… हाँ… रो… अब तूने खुद ही कबूल कर लिया…
अब तू मेरे सामने हमेशा झुकेगी… अब तू खुद ही मेरे बेड पर आएगी… खुद ही बोलेगी – ‘सर… मुझे सज़ा दो’…”
पूजा रोते-रोते घुटनों पर बैठ गई।
अवस्थी सर को गले लगा लिया।
बहुत ज़ोर से।
उसके बूब्स उनके सीने पर दब गए।
उसकी साँसें उनकी गर्दन पर।
उसके आँसू उनके कुर्ते पर।
“सर… मैं सबसे गंदी लड़की हूँ… मैंने आपके 20 साल के तप को कलंकित किया… मैंने आपको राक्षस समझा… जबकि आप तो भले मानुस हैं…आप जो कहें मैं करूँगी… बस मुझे माफ़ कर दीजिए… या… या आप जो चाहें वैसी बन जाऊँगी…खुब मेहनत करूँगी”
अवस्थी सर ने पूजा को और कसकर गले लगाया। उनका चेहरा पूजा की गर्दन में। होंठ उसकी नस पर। हाथ उसकी कमर से नीचे।
गांड पर। पूजा अलग नहीं हुई। उसे पुरा भरोसा था अब अवस्थी पर।
अवस्थी का मन “हो गया… अब ये मेरी गुलाम है… खुद बोली – ‘आप जो चाहें वैसी बन जाऊँगी’… अब अगली बार ये मेरे बेड पर होगी…
और जब मैं इसका कुर्ता उतारूँगा… तो ये रोएगी और बोलेगी – ‘सर… मैंने आपका दिल तोड़ा था… अब आप मेरे बदन को तोड़ दो… जैसा चाहें वैसा करो…’”


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