03-12-2025, 04:42 PM
पार्टी के दूसरे दिन रोहन को कल का कुछ भी याद नहीं था उसके मन में शक का कीड़ा अभी भी घर किए हुए था लेकिन सीमा के साथ की मस्ती का गिल्ट भी उसको अंदर से परेशान किए हुए था इतने में रोहन को उसके गांव से पापा का फ़ोन आता है की वो और उसकी माँ रोहन लोगो से मिलने शहर आने वाले है । घर वालो के आने पर रोहन खुश था लेकिन तृप्ति को उनके एंड की टेंशन थी । दो दिनों बाद ट्रेन से रोहन के माँ बाप जयपुर आ गए ।
रोहन के माँ-बाप का आना घर में एक तूफान की तरह था। गांव से ट्रेन पकड़कर आए थे, सामान में पुराने सूटकेस और कुछ देसी मसाले। रोहन ने स्टेशन से उन्हें पिक किया, घर लाया। तृप्ति किचन में खड़ी थी, साड़ी ठीक से लपेटी हुई, चेहरे पर वो बनावटी मुस्कान जो पिछले महीनों में उसकी आदत बन चुकी थी।
“बहू, जय राम जी की,” रोहन की माँ ने कहा, तृप्ति पैर छूने के लिए झुकी। तृप्ति ने झुककर आशीर्वाद लिया, लेकिन अंदर से उसका मन उचट रहा था। रोहन के पापा चुपचाप सोफे पर बैठ गए, थकान से आंखें बंद। रोहन खुश था, “मां, पापा, अब एक हफ्ता यहां रहो। तृप्ति सब संभाल लेगी।”
रात को बेडरूम में रोहन ने तृप्ति से कहा, “जान, मां-पापा को अच्छे से देखना। सुबह चाय, नाश्ता, दवाईयां… वो गांव से आए हैं, थोड़ी सेवा कर लो।” तृप्ति ने हंसकर हामी भरी, “हां, क्यों नहीं। मैं सब कर लूंगी।” लेकिन जैसे ही रोहन सो गया, तृप्ति की आंखों में आंसू आ गए। वो नहीं चाहती थी ये सब। पिछले महीनों में उसकी जिंदगी बदल चुकी थी। अविनाश सर और सीमा के साथ वो एक अलग दुनिया में जी रही थी। एक दुनिया जहां वो रंडी थी, जहां दर्द और सुख मिलकर उसे आजाद करते थे। ऑफिस का काम और अब ये घरेलू ड्यूटी? मां पापा की सेवा? वो भागना चाहती थी।
अगले दिन सुबह तृप्ति ने चाय बनाई, पर मन नहीं लग रहा था। मां जी ने कहा, “बहू, रोटी थोड़ी पतली बनाना।” तृप्ति ने मन में सोचा, ‘क्यों नहीं खुद बना लेंती ?’ लेकिन मुस्कुरा दी। रोहन ऑफिस चला गया, उसे किस करके। तृप्ति अकेली थी घर में, बुजुर्गों के साथ। शाम को वो थक गई। फ़ोन उठाया, अविनाश सर को मैसेज किया: “सर, एक हफ्ते की ट्रिप पर चलें? कहीं बाहर, सिर्फ हम तीनों।”
अविनाश का रिप्लाई आया: “नहीं, घर में काम है। वाइफ के रिश्तेदार आ रहे हैं।” तृप्ति का दिल टूट गया। वो रोहन की तरफ देखती, जो शाम को लौटा था, मां पापा से बातें कर रहा था। रोहन खुश था, लेकिन तृप्ति का मन उदास। वो सोचती, ‘ये जिंदगी क्यों? मैं क्यों फंसी हूं यहां?’ रात को बिस्तर पर रोहन ने उसे गले लगाया, लेकिन तृप्ति ने बहाना बनाया, “सिर दर्द है।” रोहन ने चुपचाप करवट बदल ली। उसका शक अब और गहरा हो रहा था, लेकिन वो कुछ कहता नहीं। अंदर से वो सोचता, ‘शायद कोई और है… लेकिन अगर वो खुश है, तो…’ उसकी पुरानी ककोल्ड फैंटसी उसे इस बात को लेकर तमाशा बनाने से रोक रही थी , लेकिन वो खुद से लड़ रहा था।
अगले दिन तृप्ति ने सीमा को फोन किया। “यार , सर को मनाओ ना। एक हफ्ते गोवा चलें। मैं यहां फंस गई हूं।” सीमा हंसी, “अरे रंडी, मैं ट्राई करती हूं।” सीमा ने अविनाश को कॉल किया, “सर, तृप्ति परेशान है। गोवा चलते हैं, तीनों मिलकर मजे करेंगे।” अविनाश ने मना कर दिया, “नहीं सीमा, घर का काम।” सीमा ने तृप्ति को बताया। तृप्ति उदास हो गई। रोहन घर में था, मां पापा की सेवा करवा रहा था। तृप्ति शाम को किचन में खड़ी रो रही थी। ‘मैं क्यों सह रही हूं ये सब? मैं तो अविनाश सर की हूं अब।’
फिर तृप्ति और सीमा ने प्लान बनाया। रात को ग्रुप चैट में तृप्ति ने लिखा: “सर, अगर हम कुछ नया ट्राई करें? ऐसा जो आपने कभी नहीं किया।” सीमा ने जोड़ा, “हां सर, हम दोनों मिलकर आपको ऐसा सरप्राइज देंगी कि आप मना नहीं कर पाएंगे।” अविनाश की उत्सुकता जागी। “क्या नया?” तृप्ति ने शर्माते हुए लिखा, “ट्रिप पर बताएंगे। लेकिन पहले हां कहो। गोवा, एक हफ्ता।” अविनाश सोचा, घर का काम था, लेकिन नया एक्साइटमेंट… “ठीक है, चलते हैं।”
ट्रिप फिक्स हो गई। तृप्ति ने रोहन से कहा, “ऑफिस की ट्रेनिंग है, एक हफ्ते गोवा जाना है।” रोहन का दिल बैठ गया। “मां पापा यहां हैं, तुम्हें जाना जरूरी है?” तृप्ति ने आंसू बहाए, “हां, प्रमोशन के लिए।” रोहन ने हामी भरी, लेकिन अंदर से जल रहा था। वो सोचता, ‘शायद सर के साथ… लेकिन अगर वो खुश है…’ उस रात वो तृप्ति को छूना चाहता था, लेकिन तृप्ति ने बहाना बनाया। रोहन अकेला सोया, लंड खड़ा, लेकिन दिल टूटा।
गोवा पहुंचे। अविनाश, सीमा और तृप्ति। बीच पर होटल। पहले दिन अविनाश ने तृप्ति को रूम में घुसते ही दीवार से सटा दिया। “अब बता, क्या नया ऑफर है?” तृप्ति , “सर… कुछ नया ट्राई करेंगे।” सीमा हंसी, “पहले मजे लो।” रात को तीनों ने सेक्स किया, लेकिन तृप्ति का मन कहीं और था।जिस होटल में रुके थे उसके बगल रूम में एक रवांडा के कपल रुके थे । नाम थे जॉन और एमिली। जॉन लंबा, काला, मस्कुलर। एमिली गोरी, सेक्सी। तृप्ति की नजर जॉन पर अटक गई। उसकी दबी ख्वाहिश थी ब्लैक मैन के साथ सेक्स। वो सोचती थी, ‘कितना बड़ा होगा… कितना रफ…’ मौक़ा पके तृप्ति ने जॉन ने मुस्कुराकर बात की, “रवांडा से हैं हम, हनीमून पर।” थोड़ा नार्मल बात करके कपल घूमने चले गए। तृप्ति ने सीमा को अपने इस कपल के साथ ग्रुपर सेक्स करने का प्लान बताया , सीमा भी तुरंत राज़ी हो गई ।
शाम को भी बार में सब मिले। तृप्ति ने जॉन से फ्लर्ट किया, “तुम्हारा देश कैसा है? अफ्रीका… वाइल्ड?” जॉन हंसा, “हां, और हम भी।” सीमा ने आंख मारी। जॉन और एमिली भी उनकी फ्लर्टिंग का सपर के रहे थे उनके ग्रीन सिग्नल पाने के बाद रात को सीमा ने अविनाश से कहा, “सर, वो नया… ग्रुप सेक्स। उन दोनों के साथ।” अविनाश की आंखें चमक उठीं। “सच? रंडी, तू कितनी हॉट है।” तृप्ति ने प्लान बनाया। अगले दिन सीमा ने कपल को इनवाइट किया। जॉन और एमिली राजी हो गए। “क्यों नहीं, एडवेंचर ट्राई करेंगे।”
रिसोर्ट में बड़ा सुइट बुक किया। दो रातें। पहली रात। कमरा बड़ा, किंग साइज बेड, सोफा, जकूजी। सब नंगे हो गए। तृप्ति की नजर जॉन पर। जॉन का लंड—मोटा, लंबा, काला। तृप्ति की चूत गीली हो गई। “ओह गॉड…” वो फुसफुसाई। अविनाश ने तृप्ति को घुटनों पर बिठाया, “चूस, रंडी। पहले जॉन का।” तृप्ति ने जॉन का लंड मुँह में लिया। इतना बड़ा कि गला फटने लगा। जॉन ने उसके सिर पकड़कर धक्का दिया, “सक इट, बिच।” तृप्ति की आंसू निकल आए, लेकिन सुख से। सीमा एमिली के साथ थी, दोनों एक-दूसरे की चूत चाट रही थीं। अविनाश जॉन के साथ तृप्ति को देख रहा था। जॉन ने तृप्ति के मोटे चूतड़ों को अपने मुंह में डाल के चूत और गांड़ का खूब रस पिया , अविनाश सर का ध्यान एमिली पर गया , “ आह गोरी माल पहली बार मिलेगी “ अविनाश सोचते हुए नंगी एमिली पर चढ़ गया , सीमा पालतू कुतिया की तरह अपने मालिक को पहले मौक़ा देने के लिए पीछे हो गई और एमिली की चूत छोड़ कर बूब्स पर चूमा छाती करने लग गई । रूम का माहौल एकदम गर्म हो गया , रिसोर्ट में बाहर तक उह आह की आवाज़ आने लगी । पर इन सबको इसकी कोई परवाह नहीं थी ।
चुदाई खा खेल चालू हुआ , जॉन ने तृप्ति के चूत में अपना काला मूसल डाला , तृप्ति ने पोर्न देख देख के जगी अपने काले लंड की इच्छा आज पूरी कर ली, जॉन का लंड अविनाश के लंड से मोटा और लंबा था , सख़्ती कम पर भरा हुआ , तृप्ति आँख बंद कर के चुदाई का आनंद लेने लगी। इधर अविनाश सर भी एमिली की चूत मारते मारते तृप्ति और जॉन की चुदाई देख रहे थे , सीमा ने अपना डिलडो निकाल के रख लिया , उसे चुदने से जायदा चोदना पसंद था और एक गोरी ममेम को वो बिना चोदे नहीं जाने दे सकती थी ।
फिर हार्डकोर शुरू। अविनाश एमिली को सीमा को सौप के तृप्ति को खींचकर बेड पर लिटाया, चूत में लंड घुसाया। जॉन ने उसके मुँह में। डबल पेनेट्रेशन का पहला टेस्ट। तृप्ति चिल्लाई, “आह्ह… फाड़ दो…” सीमा ने स्ट्रैप-ऑन एमिली की गांड में घुसाया। कमरा चीखों से भर गया। फिर स्विच। जॉन ने तृप्ति की गांड ली। “टेक माय ब्लैक कॉक, स्लट।” तृप्ति की गांड फट रही थी, लेकिन वो पीछे धकेल रही थी। अविनाश ने उसकी चूत में घुसाया—डबल पेनेट्रेशन। दोनों लंड एक साथ, तृप्ति का शरीर कांप रहा था। “ओह फक… आई एम कमिंग…” वो झड़ गई, रस की फुहार। अविनाश खुश था, “रंडी, तूने कमाल कर दिया।”
रात फिर और वाइल्ड होते गई । जकूजी में शुरू। सब मिलकर। जॉन तृप्ति को गोद में उठाया, पानी में चूत में घुसाया। तृप्ति की ख्वाहिश पूरी हो रही थी। “जॉन… हार्डर… ब्लैक कॉक… ले लो मुझे…” अविनाश ने पीछे से गांड में घुसाया। डबल फिर। एमिली और सीमा एक-दूसरे को स्ट्रैप-ऑन से चोद रही थीं। फिर बेड पर। जॉन ने तृप्ति को उल्टा किया, गांड में लंड, अविनाश मुँह में। सीमा ने स्ट्रैप-ऑन से एमिली की। सब एक साथ झड़े। अविनाश ने कहा, “बेस्ट ट्रिप एवर।”
अगले दिन जॉन और एमिली अपने देश वापस चले गए । और 2 दिन गोवा घूमने और अविनाश सीमा के साथ रेगुलर सेक्स के बाद ट्रिप खत्म। तृप्ति घर लौटी। रोहन इंतजार कर रहा था। “कैसी रही ट्रिप?” तृप्ति ने हंसकर कहा, “अच्छी।” लेकिन अंदर से वो बदल चुकी थी। रोहन ने गले लगाया, लेकिन तृप्ति का मन जॉन के लंड पर था। रोहन का शक अब यकीन बन रहा था, लेकिन वो चुप था। उसकी फैंटसी जाग रही थी। तृप्ति सोचती, ‘मैं अब रुक नहीं सकती।’
रोहन के माँ-बाप का आना घर में एक तूफान की तरह था। गांव से ट्रेन पकड़कर आए थे, सामान में पुराने सूटकेस और कुछ देसी मसाले। रोहन ने स्टेशन से उन्हें पिक किया, घर लाया। तृप्ति किचन में खड़ी थी, साड़ी ठीक से लपेटी हुई, चेहरे पर वो बनावटी मुस्कान जो पिछले महीनों में उसकी आदत बन चुकी थी।
“बहू, जय राम जी की,” रोहन की माँ ने कहा, तृप्ति पैर छूने के लिए झुकी। तृप्ति ने झुककर आशीर्वाद लिया, लेकिन अंदर से उसका मन उचट रहा था। रोहन के पापा चुपचाप सोफे पर बैठ गए, थकान से आंखें बंद। रोहन खुश था, “मां, पापा, अब एक हफ्ता यहां रहो। तृप्ति सब संभाल लेगी।”
रात को बेडरूम में रोहन ने तृप्ति से कहा, “जान, मां-पापा को अच्छे से देखना। सुबह चाय, नाश्ता, दवाईयां… वो गांव से आए हैं, थोड़ी सेवा कर लो।” तृप्ति ने हंसकर हामी भरी, “हां, क्यों नहीं। मैं सब कर लूंगी।” लेकिन जैसे ही रोहन सो गया, तृप्ति की आंखों में आंसू आ गए। वो नहीं चाहती थी ये सब। पिछले महीनों में उसकी जिंदगी बदल चुकी थी। अविनाश सर और सीमा के साथ वो एक अलग दुनिया में जी रही थी। एक दुनिया जहां वो रंडी थी, जहां दर्द और सुख मिलकर उसे आजाद करते थे। ऑफिस का काम और अब ये घरेलू ड्यूटी? मां पापा की सेवा? वो भागना चाहती थी।
अगले दिन सुबह तृप्ति ने चाय बनाई, पर मन नहीं लग रहा था। मां जी ने कहा, “बहू, रोटी थोड़ी पतली बनाना।” तृप्ति ने मन में सोचा, ‘क्यों नहीं खुद बना लेंती ?’ लेकिन मुस्कुरा दी। रोहन ऑफिस चला गया, उसे किस करके। तृप्ति अकेली थी घर में, बुजुर्गों के साथ। शाम को वो थक गई। फ़ोन उठाया, अविनाश सर को मैसेज किया: “सर, एक हफ्ते की ट्रिप पर चलें? कहीं बाहर, सिर्फ हम तीनों।”
अविनाश का रिप्लाई आया: “नहीं, घर में काम है। वाइफ के रिश्तेदार आ रहे हैं।” तृप्ति का दिल टूट गया। वो रोहन की तरफ देखती, जो शाम को लौटा था, मां पापा से बातें कर रहा था। रोहन खुश था, लेकिन तृप्ति का मन उदास। वो सोचती, ‘ये जिंदगी क्यों? मैं क्यों फंसी हूं यहां?’ रात को बिस्तर पर रोहन ने उसे गले लगाया, लेकिन तृप्ति ने बहाना बनाया, “सिर दर्द है।” रोहन ने चुपचाप करवट बदल ली। उसका शक अब और गहरा हो रहा था, लेकिन वो कुछ कहता नहीं। अंदर से वो सोचता, ‘शायद कोई और है… लेकिन अगर वो खुश है, तो…’ उसकी पुरानी ककोल्ड फैंटसी उसे इस बात को लेकर तमाशा बनाने से रोक रही थी , लेकिन वो खुद से लड़ रहा था।
अगले दिन तृप्ति ने सीमा को फोन किया। “यार , सर को मनाओ ना। एक हफ्ते गोवा चलें। मैं यहां फंस गई हूं।” सीमा हंसी, “अरे रंडी, मैं ट्राई करती हूं।” सीमा ने अविनाश को कॉल किया, “सर, तृप्ति परेशान है। गोवा चलते हैं, तीनों मिलकर मजे करेंगे।” अविनाश ने मना कर दिया, “नहीं सीमा, घर का काम।” सीमा ने तृप्ति को बताया। तृप्ति उदास हो गई। रोहन घर में था, मां पापा की सेवा करवा रहा था। तृप्ति शाम को किचन में खड़ी रो रही थी। ‘मैं क्यों सह रही हूं ये सब? मैं तो अविनाश सर की हूं अब।’
फिर तृप्ति और सीमा ने प्लान बनाया। रात को ग्रुप चैट में तृप्ति ने लिखा: “सर, अगर हम कुछ नया ट्राई करें? ऐसा जो आपने कभी नहीं किया।” सीमा ने जोड़ा, “हां सर, हम दोनों मिलकर आपको ऐसा सरप्राइज देंगी कि आप मना नहीं कर पाएंगे।” अविनाश की उत्सुकता जागी। “क्या नया?” तृप्ति ने शर्माते हुए लिखा, “ट्रिप पर बताएंगे। लेकिन पहले हां कहो। गोवा, एक हफ्ता।” अविनाश सोचा, घर का काम था, लेकिन नया एक्साइटमेंट… “ठीक है, चलते हैं।”
ट्रिप फिक्स हो गई। तृप्ति ने रोहन से कहा, “ऑफिस की ट्रेनिंग है, एक हफ्ते गोवा जाना है।” रोहन का दिल बैठ गया। “मां पापा यहां हैं, तुम्हें जाना जरूरी है?” तृप्ति ने आंसू बहाए, “हां, प्रमोशन के लिए।” रोहन ने हामी भरी, लेकिन अंदर से जल रहा था। वो सोचता, ‘शायद सर के साथ… लेकिन अगर वो खुश है…’ उस रात वो तृप्ति को छूना चाहता था, लेकिन तृप्ति ने बहाना बनाया। रोहन अकेला सोया, लंड खड़ा, लेकिन दिल टूटा।
गोवा पहुंचे। अविनाश, सीमा और तृप्ति। बीच पर होटल। पहले दिन अविनाश ने तृप्ति को रूम में घुसते ही दीवार से सटा दिया। “अब बता, क्या नया ऑफर है?” तृप्ति , “सर… कुछ नया ट्राई करेंगे।” सीमा हंसी, “पहले मजे लो।” रात को तीनों ने सेक्स किया, लेकिन तृप्ति का मन कहीं और था।जिस होटल में रुके थे उसके बगल रूम में एक रवांडा के कपल रुके थे । नाम थे जॉन और एमिली। जॉन लंबा, काला, मस्कुलर। एमिली गोरी, सेक्सी। तृप्ति की नजर जॉन पर अटक गई। उसकी दबी ख्वाहिश थी ब्लैक मैन के साथ सेक्स। वो सोचती थी, ‘कितना बड़ा होगा… कितना रफ…’ मौक़ा पके तृप्ति ने जॉन ने मुस्कुराकर बात की, “रवांडा से हैं हम, हनीमून पर।” थोड़ा नार्मल बात करके कपल घूमने चले गए। तृप्ति ने सीमा को अपने इस कपल के साथ ग्रुपर सेक्स करने का प्लान बताया , सीमा भी तुरंत राज़ी हो गई ।
शाम को भी बार में सब मिले। तृप्ति ने जॉन से फ्लर्ट किया, “तुम्हारा देश कैसा है? अफ्रीका… वाइल्ड?” जॉन हंसा, “हां, और हम भी।” सीमा ने आंख मारी। जॉन और एमिली भी उनकी फ्लर्टिंग का सपर के रहे थे उनके ग्रीन सिग्नल पाने के बाद रात को सीमा ने अविनाश से कहा, “सर, वो नया… ग्रुप सेक्स। उन दोनों के साथ।” अविनाश की आंखें चमक उठीं। “सच? रंडी, तू कितनी हॉट है।” तृप्ति ने प्लान बनाया। अगले दिन सीमा ने कपल को इनवाइट किया। जॉन और एमिली राजी हो गए। “क्यों नहीं, एडवेंचर ट्राई करेंगे।”
रिसोर्ट में बड़ा सुइट बुक किया। दो रातें। पहली रात। कमरा बड़ा, किंग साइज बेड, सोफा, जकूजी। सब नंगे हो गए। तृप्ति की नजर जॉन पर। जॉन का लंड—मोटा, लंबा, काला। तृप्ति की चूत गीली हो गई। “ओह गॉड…” वो फुसफुसाई। अविनाश ने तृप्ति को घुटनों पर बिठाया, “चूस, रंडी। पहले जॉन का।” तृप्ति ने जॉन का लंड मुँह में लिया। इतना बड़ा कि गला फटने लगा। जॉन ने उसके सिर पकड़कर धक्का दिया, “सक इट, बिच।” तृप्ति की आंसू निकल आए, लेकिन सुख से। सीमा एमिली के साथ थी, दोनों एक-दूसरे की चूत चाट रही थीं। अविनाश जॉन के साथ तृप्ति को देख रहा था। जॉन ने तृप्ति के मोटे चूतड़ों को अपने मुंह में डाल के चूत और गांड़ का खूब रस पिया , अविनाश सर का ध्यान एमिली पर गया , “ आह गोरी माल पहली बार मिलेगी “ अविनाश सोचते हुए नंगी एमिली पर चढ़ गया , सीमा पालतू कुतिया की तरह अपने मालिक को पहले मौक़ा देने के लिए पीछे हो गई और एमिली की चूत छोड़ कर बूब्स पर चूमा छाती करने लग गई । रूम का माहौल एकदम गर्म हो गया , रिसोर्ट में बाहर तक उह आह की आवाज़ आने लगी । पर इन सबको इसकी कोई परवाह नहीं थी ।
चुदाई खा खेल चालू हुआ , जॉन ने तृप्ति के चूत में अपना काला मूसल डाला , तृप्ति ने पोर्न देख देख के जगी अपने काले लंड की इच्छा आज पूरी कर ली, जॉन का लंड अविनाश के लंड से मोटा और लंबा था , सख़्ती कम पर भरा हुआ , तृप्ति आँख बंद कर के चुदाई का आनंद लेने लगी। इधर अविनाश सर भी एमिली की चूत मारते मारते तृप्ति और जॉन की चुदाई देख रहे थे , सीमा ने अपना डिलडो निकाल के रख लिया , उसे चुदने से जायदा चोदना पसंद था और एक गोरी ममेम को वो बिना चोदे नहीं जाने दे सकती थी ।
फिर हार्डकोर शुरू। अविनाश एमिली को सीमा को सौप के तृप्ति को खींचकर बेड पर लिटाया, चूत में लंड घुसाया। जॉन ने उसके मुँह में। डबल पेनेट्रेशन का पहला टेस्ट। तृप्ति चिल्लाई, “आह्ह… फाड़ दो…” सीमा ने स्ट्रैप-ऑन एमिली की गांड में घुसाया। कमरा चीखों से भर गया। फिर स्विच। जॉन ने तृप्ति की गांड ली। “टेक माय ब्लैक कॉक, स्लट।” तृप्ति की गांड फट रही थी, लेकिन वो पीछे धकेल रही थी। अविनाश ने उसकी चूत में घुसाया—डबल पेनेट्रेशन। दोनों लंड एक साथ, तृप्ति का शरीर कांप रहा था। “ओह फक… आई एम कमिंग…” वो झड़ गई, रस की फुहार। अविनाश खुश था, “रंडी, तूने कमाल कर दिया।”
रात फिर और वाइल्ड होते गई । जकूजी में शुरू। सब मिलकर। जॉन तृप्ति को गोद में उठाया, पानी में चूत में घुसाया। तृप्ति की ख्वाहिश पूरी हो रही थी। “जॉन… हार्डर… ब्लैक कॉक… ले लो मुझे…” अविनाश ने पीछे से गांड में घुसाया। डबल फिर। एमिली और सीमा एक-दूसरे को स्ट्रैप-ऑन से चोद रही थीं। फिर बेड पर। जॉन ने तृप्ति को उल्टा किया, गांड में लंड, अविनाश मुँह में। सीमा ने स्ट्रैप-ऑन से एमिली की। सब एक साथ झड़े। अविनाश ने कहा, “बेस्ट ट्रिप एवर।”
अगले दिन जॉन और एमिली अपने देश वापस चले गए । और 2 दिन गोवा घूमने और अविनाश सीमा के साथ रेगुलर सेक्स के बाद ट्रिप खत्म। तृप्ति घर लौटी। रोहन इंतजार कर रहा था। “कैसी रही ट्रिप?” तृप्ति ने हंसकर कहा, “अच्छी।” लेकिन अंदर से वो बदल चुकी थी। रोहन ने गले लगाया, लेकिन तृप्ति का मन जॉन के लंड पर था। रोहन का शक अब यकीन बन रहा था, लेकिन वो चुप था। उसकी फैंटसी जाग रही थी। तृप्ति सोचती, ‘मैं अब रुक नहीं सकती।’


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