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Adultery ऑफिस में सीमा और बॉस के संग का रंग
#8
शादी की नौवीं सालगिरह से ठीक पाँच दिन पहले।
रात के ग्यारह बज रहे थे। रोहन बेडरूम में लैपटॉप पर कुछ देख रहा था, तृप्ति बाथरूम से निकलकर आई। उसने सिर्फ़ एक पतली साटन की स्लीपिंग शर्ट पहनी थी, जो उसकी जाँघों तक भी नहीं पहुँचती थी। गले में मंगलसूत्र नहीं था। पिछले एक महीने से नहीं पहनती थी।
रोहन की नज़र उसकी जाँघों पर गई, जहाँ हल्के नीले-बैंगनी निशान अभी भी बाकी थे।
“ये क्या है, तृप्ति?” उसने धीरे से पूछा।
त्रिप्ति एक पल को सहम गई, फिर हँस दी।
“कुछ नहीं,  मे पहले से लगा होगा शायद “
रोहन चुप रहा।
उसके दिमाग़ में पिछले दो महीनों की सारी बातें घूम रही थीं।
•  तृप्ति का रात को देर से घर आना
•  फ़ोन को हमेशा उल्टा रखना
•  सेक्स के दौरान अचानक ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना, गंदी गालियाँ देना
•  और सबसे ज़्यादा, जब भी वो उसमें घुसता, तृप्ति की चूत पहले से ही ढीली और गीली मिलती, जैसे अभी-अभी कोई और उसमें झड़कर गया हो।
रोहन को शक था।
लेकिन साथ ही, उसका लंड भी खड़ा हो जाता था जब वो ये सब सोचता।
उसे याद आता कि कॉलेज के दिनों में वो चुपके से ककोल्ड पोर्न देखा करता था।
फिर भी वो मानने को तैयार नहीं था कि वो ककोल्ड है।
“मैं तो बस… अपनी बीवी को खुश देखना चाहता हूँ,” वो खुद से झूठ बोलता।
अगले दिन तृप्ति ने सालगिरह पार्टी का प्लान बताया।
“बस घर पर ही छोटी-सी पार्टी, बीस-पच्चीस लोग।”
रोहन ने हामी भरी।
फिर तृप्ति ने शर्माते हुए कहा, “सीमा और सर को भी बुलाऊँ? सर ने बहुत हेल्प की है प्रमोशन में…”
रोहन का दिल ज़ोर से धड़का।
उसने देखा था कैसे अविनाश सर ऑफिस पार्टी में तृप्ति की कमर पर हाथ रखते हैं, और तृप्ति शर्मा कर भी मुस्कुरा देती है।
“ठीक है, बुला लो,” उसने कहा, पर उसकी आवाज़ काँप गई।
पार्टी की रात।
घर सजा हुआ था। लाइट्स डिम। सॉफ्ट म्यूज़िक।
अविनाश और सीमा सबसे आखिर में आए।
अविनाश ने काला सूट पहना था, सीमा ने लाल बैकलेस गाउन, जिसमें उसकी गांड की शेप साफ़ दिख रही थी।
रोहन ने ड्रिंक्स सर्व किए।
सीमा ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “भाभी बहुत लकी हैं आपको पाकर। इतना केयरिंग हस्बैंड…”
उसका हाथ रोहन की जाँघ पर सरक गया।
रोहन शर्मा गया, पर हटा नहीं।
दूसरी तरफ़ अविनाश ने तृप्ति को किचन में पकड़ लिया।
सब लोग लिविंग रूम में थे।
उसने तृप्ति को दीवार से सटा दिया, एक हाथ से उसकी साड़ी का पल्लू नीचे खींचा।
“तेरे बेडरूम में आज तुझे तेरे पति के बिस्तर पर चोदूँगा, रंडी,” उसने कान में फुसफुसाया।
त्रिप्ति की साँसें तेज़ हो गईं। “सर… कोई देख लेगा…”
“देखने दे। आज तेरा मंगलसूत्र मेरे लंड पर लटकेगा।”
सीमा ने प्लान बिल्कुल सही चलाया।
वो रोहन को बार-बार ड्रिंक पिलाती रही।
फिर बोली, “चलो ना, एक डांस कर लें।”
रोहन नशे में था, मना नहीं कर पाया।
सीमा ने उसे गले लगाकर डांस करवाया, उसकी गांड रोहन के लंड पर रगड़ते हुए।
फिर धीरे से बोली, “तुम्हें पता है ना, तृप्ति मुझसे और सर से बहुत खुश रहती है?”
रोहन का लंड पत्थर हो गया।
सीमा ने उसका हाथ अपने मम्मों पर रख दिया।
“चलो गेस्ट रूम में… कोई नहीं आएगा।”
गेस्ट रूम में सीमा ने दरवाज़ा लॉक किया।
उसने अपना फ़ोन ट्राइपॉड पर लगाया, रिकॉर्डिंग ऑन की।
फिर घुटनों पर बैठकर रोहन की पैंट खोली।
“भाभी को तो सर चोद रहे होंगे अभी… तुम मुझे चोदो ना…”
रोहन ने विरोध नहीं किया।
सीमा ने उसका लंड मुँह में लिया, पूरा गले तक।
रोहन की आँखें बंद हो गईं।
सीमा ने उसे बेड पर धकेला, गाउन ऊपर किया, पैंटी साइड की, और रोहन के लंड पर बैठ गई।
“आह्ह… भाभी की चूत से छोटा है तुम्हारा… लेकिन चल जाएगा…”
रोहन बस सिसकियाँ लेता रहा। दस मिनट में झड़ गया।
सीमा ने सब रिकॉर्ड कर लिया।
उधर मास्टर बेडरूम में।
अविनाश ने तृप्ति को वैवाहिक बिस्तर पर लिटाया।
जहाँ उसकी शादी की पहली रात बीती थी।
साड़ी फाड़ दी। ब्लाउज़ के हुक तोड़ दिए।
“तेरे पति की चादर पर आज मैं तुझे कुत्ता बनाकर चोदूँगा।”
त्रिप्ति रोने लगी, “सर… कोई आ जाएगा…”
“तो आने दे। सब देखें कि तृप्ति  असल में अविनाश मीना की रंडी है।”
उसने तृप्ति को घोड़ी बनाया।
लंड एक झटके में गांड में घुसाया।
“ले साली… अपने सुहाग वाले बिस्तर पर गांड मरवा।”
हर धक्के में बेड की चीपें चिल्ला रही थीं।
त्रिप्ति की चीखें दबी हुईं, तकिए में मुँह घुसाकर।
अविनाश ने उसके बाल खींचे, “बोल… मैं किसकी रंड हूँ?”
“आपकी… सर… आपकी रंड हूँ… मेरी गांड फाड़ दो… मेरे पति के बिस्तर पर मुझे रंडी बना दो…”
अविनाश ने उसकी गांड में झड़ दिया।
फिर पलटा, चूत में घुसाया, दूसरा राउंड।
तीसरा राउंड मुँह में।
पूरी चादर वीर्य और चूत के रस से लथपथ।
पार्टी खत्म होने के बाद।
सब चले गए।
रोहन सोफे पर सो गया था, नशे में।
त्रिप्ति बेडरूम में गई। चादर देखकर उसका दिल धड़का।
सीमा ने उसका हाथ पकड़ा, फ़ोन आगे किया।
वीडियो चलाया।
रोहन का लंड सीमा की चूत में। सीमा की आवाज़, “भाभी को सर चोद रहे हैं, तुम मुझे चोदो…”
त्रिप्ति की आँखों में आँसू आ गए।
सीमा ने उसका गाल थपथपाया, “रो मत रंडी। अब तू विक्टिम है। जा, रोकर अविनाश सर से चुदाई माँग। वो तुझे फिर चोदेंगे। और मैं भी।”
त्रिप्ति रोते हुए अविनाश के पास गई, जो बालकनी में सिगरेट पी रहा था।
उसने उसके पैरों में गिरकर रोना शुरू किया, “सर… सीमा ने रोहन के साथ… मैंने देख लिया…”
अविनाश ने उसका चेहरा ऊपर उठाया, मुस्कुराया।
“अच्छा हुआ। अब तू पूरी तरह मेरी है।”
उसने तृप्ति को गोद में उठाया, फिर से बेडरूम में ले गया।
चादर अभी भी गीली थी।
उसने तृप्ति को उसी पर लिटाया और चौथा राउंड शुरू किया।
इस बार तृप्ति नहीं रोई।
उसने अविनाश की पीठ पर नाखून गड़ाए और चिल्लाई,
“हाँ सर… मुझे अपनी रंडी बनाओ… मेरे पति को ककोल्ड बनाओ… मैं हमेशा आपकी रहूँगी…”
बाहर सोफे पर रोहन करवट बदल रहा था।
उसके सपने में उसकी बीवी किसी और के लंड पर उछल रही थी।
और उसका लंड फिर से खड़ा हो गया था।
शायद कहीं गहरे में वो भी यही चाहता था।
बस मानने की हिम्मत नहीं थी।
अभी तक।
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RE: ऑफिस में सीमा और बॉस के संग का रंग - by Gomzey - 02-12-2025, 11:17 AM



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