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Adultery एक पत्नी का सफर
#40
कमरे में सेक्स के बाद

दोनों फर्श पर नंगे लेटे थे।
कोई चादर नहीं, कोई तकिया नहीं।
बस एक-दूसरे की बाँहें और साँसें।

राजू का लंड अब ढीला होकर पूजा की जाँघ पर लेटा था।
उसके सुपारे से अभी भी थोड़ा सा सफेद वीर्य रिस रहा था, जो पूजा की जाँघ पर चिपक गया था।
पूजा की चूत लाल और सूजी हुई थी।
अंदर-बाहर से गीली।
राजू का वीर्य उसकी चूत से धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था, फर्श पर एक छोटा सा गीला धब्बा बना रहा था।
कुछ वीर्य पूजा की गांड की दरार में भी चला गया था।
उसकी जाँघें चिपचिपी थी

पूजा की ब्रा और पैंटी एक कोने में फेंकी हुई थीं।
राजू का अंडरवियर उल्टा पड़ा था।
कुर्ता और पजामी दीवार से सटकर गिरी थीं।

दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे।
राजू का एक हाथ पूजा की कमर पर था, दूसरा उसके बालों में।
पूजा का चेहरा राजू की छाती पर था, आँसुओं से भीगा हुआ।
राजू का सीना भी गीला था – पूजा के आँसुओं से।

**अचानक पूजा सिहर उठी।**
उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
वो राजू से अलग हुई।
हाथ से अपनी चूत छूई – चिपचिपी, गीली, सूजी हुई।
उसके हाथ पर वीर्य लगा हुआ था।
उसने देखा और एकदम से रोने लगी।

“राजू… मैंने क्या कर दिया…
मैं शादीशुदा हूँ…
संजय… संजय मुझसे बहुत प्यार करता है…
मैंने उसका विश्वास तोड़ दिया…
मैं बहुत गंदी हूँ…
मैंने तुम्हारे साथ…
तेरे अंदर…
तेरा सब कुछ ले लिया…
और मैं… मैं किसी और की हूँ…”

वो घुटनों के बल बैठ गई।
हाथों से मुँह ढाँपकर फूट-फूट कर रोने लगी।
उसके नंगे बूब्स काँप रहे थे।
चूत से अभी भी वीर्य रिस रहा था।

राजू उठकर उसके पास बैठ गया।
उसने पूजा को पीछे से गले लगा लिया।
अपना नंगा बदन उसके नंगे बदन से चिपकाकर।
उसकी पीठ पर होंठ रखकर बोला,

“पूजा… शशश… रो मत…
हम दोनों भावनाओं में बह गए थे…
तुमने कुछ गलत नहीं किया…
मैंने भी तो…
मैंने भी तुम्हें अपना बना लिया…
हम दोनों ने एक-दूसरे को साँत्वना दी…
ये कोई गुनाह नहीं…
ये बस… दर्द था…
जो एक-दूसरे में समा गया…”

पूजा रोते हुए पलटी।
राजू के गले लग गई।
“पर संजय… वो मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा…”

राजू ने उसके आँसुओं को चूमा।
“ये हमारा राज़ रहेगा…
कभी किसी को पता नहीं चलेगा…
हम भूल जाएँगे…
जैसे कभी हुआ ही न था…
पर आज…
आज तुम मेरी थीं…
और मैं तुम्हारा था…
बस इतना याद रखना…”

पूजा ने उसकी छाती पर सिर टिकाया।
“राजू… मैं ये भूलना चाहती हूँ…
पर भूल नहीं पाऊँगी…
तुमने मुझे आज जीना सिखाया…
पर मैं… मैं अब और ज़्यादा टूट गई हूँ…”

राजू ने उसे और कसकर गले लगाया।
“तुम टूटी नहीं हो पूजा…
तुम आज पहली बार पूरी हुई हो…
मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ…
चाहे दूर से ही…”

दोनों बहुत देर तक ऐसे ही लिपटे रहे।
नंगे।
चुप।
बस एक-दूसरे की धड़कनें सुनते हुए।

### थोड़ी देर बाद…

पूजा ने धीरे से खुद को अलग किया।
उसने अपनी पैंटी उठाई – उस पर भी वीर्य का दाग था।
उसे सूँघा और फिर रोने लगी।
राजू ने उसे गले लगाया।
“छोड़ो इसे… मैं धो दूँगा…”

पूजा ने कुर्ता-पजामी पहना।
बिना ब्रा-पैंटी के।
कुर्ता पसीने और वीर्य की गंध से भरा था।
उसने दुपट्टा ओढ़ा और राजू को देखा।
राजू अभी भी नंगा बैठा था।
उसका लंड अब पूरी तरह ढीला था।
उसके चेहरे पर सुकून था, और दर्द भी।

पूजा ने उसके माथे पर किस किया।
“राजू… मैं जा रही हूँ…
ये सब…
हम भूल जाएँगे ना…?”

राजू ने उसका हाथ चूमा।
“हाँ पूजा…
हम भूल जाएँगे…
पर मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूँगा…”

पूजा ने आँसुओं को पोंछा।
दरवाज़ा खोला।
एक आखिरी बार पलटी।
राजू को देखा।
और चली गई।

### हॉस्टल वापस

रास्ते भर पूजा रोती रही।
कुर्ते में उसकी चूत अभी भी गीली थी।
हर कदम पर वीर्य की चिपचिपाहट महसूस हो रही थी।
लोग देख रहे थे, पर उसे कुछ नहीं दिख रहा था।

कमरे में घुसी।
दरवाज़ा बंद किया।
कपड़े उतारे।
सूट फेंक दिया।
नहाने गई।
पानी बहुत तेज़ किया।
चूत को बार-बार रगड़ा।
पर वो गंध… वो एहसास…
जाने का नाम नहीं ले रहा था।

वो नहाती रही।
रोती रही।
और फिर बेड पर लेट गई।
तकिया गले लगाकर।
और फुसफुसाई…

“संजय… मुझे माफ़ कर दो…
राजू… मुझे माफ़ कर दो…
मैं…
मैं अब किसी की नहीं रही…”

और उस रात…
वो सो नहीं पाई।
बस लेटी रही।
अपने बदन पर राजू की उंगलियों का एहसास लिए।
और आँसुओं में डूबी हुई।
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RE: एक पत्नी का सफर - by Tiska jay - 30-11-2025, 06:31 PM



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