26-11-2025, 11:28 PM
किस अभी खत्म नहीं हुआ था।
राजू के होंठ पूजा के होंठों पर थे।
उसके मुँह से तेज़ दारू की बू आ रही थी, बदन से पसीना और शराब की मिली-जुली गंध।
पर पूजा को सब अच्छा लग रहा था।
उसने आँखें बंद कर ली थीं।
**पूजा का मन**
“इस पल मैं सिर्फ़ राजू की हूँ…
संजय की बीवी नहीं…
संजय की पत्नी नहीं…
सिर्फ़ एक औरत हूँ…
जो टूट चुकी है…
और जिसे कोई अपना समझ रहा है…
कोई मुझसे प्यार कर रहा है…
बिना शर्त के…
बिना कुछ माँगे…”
राजू ने उसकी कमर पर हाथ कस दिया।
पूजा का पसीने से भीगा सूट उसके बदन से चिपक गया था।
उसने धीरे से पूजा को पीठ के बल लिटाया।
फर्श ठंडा था, पर दोनों को गर्मी महसूस हो रही थी।
राजू ने अपना शर्ट का बटन खोला।
एक-एक करके।
उसकी छाती पर पुराने पसीने के दाग थे।
बाल घने, सीना चौड़ा।
पूजा ने हाथ बढ़ाया और उसकी छाती पर हाथ फेरा।
“राजू… तुम्हारा बदन… इतना गर्म है…”
राजू ने उसकी आँखों में देखा।
“पूजा… तुम चाहो तो रुक जाएँ…
मैं कुछ नहीं माँगूँगा…”
पूजा ने अपना हाथ उसके गाल पर रखा।
“नहीं राजू…
मैं रुकना नहीं चाहती…
मुझे तुम चाहिए…
सिर्फ़ तुम…”
राजू ने अपना शर्ट उतार फेंका।
फिर पैंट की बेल्ट खोली।
पूजा ने उसकी पैंट नीचे सरकाई।
अब राजू सिर्फ़ एक पुराना नीला अंडरवियर में था।
उसका लंड पहले से ही तना हुआ था।
पूजा ने उसकी जाँघों पर हाथ फेरा।
फिर उसका अंडरवियर नीचे सरकाया।
पहली बार…
संजय के अलावा किसी और का लंड उसने देखा।
राजू का लंड संजय से बहुत बड़ा था।
मोटा, लंबा, नसें उभरी हुईं।
सुपारा गुलाबी।
पूजा की साँस रुक गई।
वो उसे देखती रही।
फिर धीरे से हाथ बढ़ाया।
उसे छुआ।
गर्म था।
सख्त था।
राजू ने उसका हाथ पकड़ा।
“पूजा… तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा तो…”
पूजा ने सिर हिलाया।
“नहीं राजू…
मुझे बहुत अच्छा लग रहा है…
मैं तुम्हें चूमना चाहती हूँ…”
वो नीचे झुकी।
उसके लंड को होंठों से छुआ।
फिर चूमा।
धीरे-धीरे।
राजू ने उसका सिर सहलाया।
“पूजा… चूसोगी…?”
पूजा ने उसकी आँखों में देखा।
फिर अपना मुँह खोला।
उसके लंड को मुँह में लिया।
धीरे-धीरे चूसने लगी।
प्यार से।
जैसे कोई कीमती चीज़ हो।
राजू की साँसें तेज़ हो गईं।
“पूजा… आह्ह… तुम… तुम बहुत अच्छा कर रही हो…”
पूजा ने उसे और गहराई तक लिया।
उसकी जीभ लंड के नीचे फिर रही थी।
राजू ने उसका सिर सहलाते हुए कहा,
“पूजा… मैं तुम्हें कभी नहीं छोडूँगा…”
पूजा ने लंड मुँह से निकाला।
उसके लंड पर उसकी लार चमक रही थी।
वो ऊपर आई।
राजू ने उसका कुर्ता ऊपर किया।
पूजा ने खुद हाथ ऊपर करके कुर्ता उतार दिया।
अब वो सिर्फ़ क्रीम कलर की ब्रा और पैंटी में थी।
उसके बूब्स ब्रा में कैद थे।
राजू ने उसकी ब्रा का हुक खोला।
पूजा के गोरे, भरे हुए बूब्स बाहर आ गए।
निप्पल्स गुलाबी और सख्त।
राजू ने उसे देखा।
“पूजा… तुम बहुत सुंदर हो…”
वो उसके बूब्स पर झुका।
एक बूब चूसा।
दूसरे को हाथ से मसलते हुए।
पूजा की आह निकल गई।
“राजू… आह्ह… धीरे…”
राजू ने उसका निप्पल दाँतों से काटा।
पूजा की कमर ऊपर उठ गई।
“राजू… मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरत है…”
राजू नीचे सरक गया।
उसने पूजा की पैंटी नीचे की।
पूजा की चूत पूरी तरह गीली थी।
राजू ने उसकी जाँघों को चूमा।
फिर उसकी चूत पर मुँह रख दिया।
जीभ से चाटने लगा।
पूजा की सिसकी निकल गई।
“राजू… आह्ह… वहाँ… मत… आह्ह…”
राजू ने उसकी क्लिट चाटी।
फिर जीभ अंदर डाली।
पूजा का बदन काँपने लगा।
“राजू… मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…”
राजू ने और तेज़ चाटा।
पूजा की चूत से पानी निकल गया।
वो पूरी तरह झड़ गई।
राजू ने उसका पानी चाट लिया।
फिर ऊपर आया।
पूजा के होंठों पर अपना मुँह रखा।
पूजा ने अपना ही पानी चखा।
राजू ने अपना लंड उसकी चूत पर रखा।
धीरे से अंदर किया।
पूजा की चूत तंग थी।
पर गीली भी।
राजू ने धीरे-धीरे अंदर किया।
पूजा की आँखें बंद थीं।
“राजू… धीरे… दर्द हो रहा है…”
राजू ने रुका।
फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
पूजा की चूत ने उसे पूरा ले लिया।
राजू ने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया।
पूजा की सिसकियाँ और आहें कमरे में गूँज रही थीं।
“राजू… तुम बहुत बड़े हो…
मुझे पूरा भर दिया…”
राजू ने स्पीड बढ़ाई।
पूजा की कमर ऊपर उठ रही थी।
दोनों एक-दूसरे में खो चुके थे।
राजू ने पूजा को गले लगाया।
उसके कान में फुसफुसाया,
“पूजा… मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ…”
पूजा की आँखों से आँसू बह रहे थे।
“राजू… मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ…
इस पल मैं सिर्फ़ तुम्हारी हूँ…”
राजू ने और तेज़ चोदा।
पूजा फिर झड़ गई।
इस बार राजू भी नहीं रुका।
उसने पूजा की चूत में ही झड़ गया।
दोनों की साँसें तेज़ थीं।
राजू पूजा के ऊपर लेटा रहा।
पूजा ने उसे कसकर गले लगा लिया।
**पूजा का मन**
“ये गलत है…
मैंने संजय को धोखा दिया…
पर इस पल में मुझे कोई पछतावा नहीं है…
राजू ने मुझे वापस जीना सिखाया…
उसने मुझे अपना बना लिया…
और मैंने उसे अपना बना लिया…”
दोनों चुप थे।
बस एक-दूसरे की साँसें सुन रहे थे।
राजू ने पूजा के माथे पर किस किया।
“पूजा… तुम मेरी हो…”
पूजा ने मुस्कुराया।
“हाँ राजू… मैं तुम्हारी हूँ…”
और उस पल में…
दोनों ने एक-दूसरे को पूरा अपना बना लिया था।
बिना किसी शर्त के।
बिना किसी डर के।
सिर्फ़ प्यार से।
और उस छोटे से कमरे में…
दो टूटे हुए दिलों ने एक-दूसरे को जोड़ लिया था।
शायद हमेशा के लिए।
राजू के होंठ पूजा के होंठों पर थे।
उसके मुँह से तेज़ दारू की बू आ रही थी, बदन से पसीना और शराब की मिली-जुली गंध।
पर पूजा को सब अच्छा लग रहा था।
उसने आँखें बंद कर ली थीं।
**पूजा का मन**
“इस पल मैं सिर्फ़ राजू की हूँ…
संजय की बीवी नहीं…
संजय की पत्नी नहीं…
सिर्फ़ एक औरत हूँ…
जो टूट चुकी है…
और जिसे कोई अपना समझ रहा है…
कोई मुझसे प्यार कर रहा है…
बिना शर्त के…
बिना कुछ माँगे…”
राजू ने उसकी कमर पर हाथ कस दिया।
पूजा का पसीने से भीगा सूट उसके बदन से चिपक गया था।
उसने धीरे से पूजा को पीठ के बल लिटाया।
फर्श ठंडा था, पर दोनों को गर्मी महसूस हो रही थी।
राजू ने अपना शर्ट का बटन खोला।
एक-एक करके।
उसकी छाती पर पुराने पसीने के दाग थे।
बाल घने, सीना चौड़ा।
पूजा ने हाथ बढ़ाया और उसकी छाती पर हाथ फेरा।
“राजू… तुम्हारा बदन… इतना गर्म है…”
राजू ने उसकी आँखों में देखा।
“पूजा… तुम चाहो तो रुक जाएँ…
मैं कुछ नहीं माँगूँगा…”
पूजा ने अपना हाथ उसके गाल पर रखा।
“नहीं राजू…
मैं रुकना नहीं चाहती…
मुझे तुम चाहिए…
सिर्फ़ तुम…”
राजू ने अपना शर्ट उतार फेंका।
फिर पैंट की बेल्ट खोली।
पूजा ने उसकी पैंट नीचे सरकाई।
अब राजू सिर्फ़ एक पुराना नीला अंडरवियर में था।
उसका लंड पहले से ही तना हुआ था।
पूजा ने उसकी जाँघों पर हाथ फेरा।
फिर उसका अंडरवियर नीचे सरकाया।
पहली बार…
संजय के अलावा किसी और का लंड उसने देखा।
राजू का लंड संजय से बहुत बड़ा था।
मोटा, लंबा, नसें उभरी हुईं।
सुपारा गुलाबी।
पूजा की साँस रुक गई।
वो उसे देखती रही।
फिर धीरे से हाथ बढ़ाया।
उसे छुआ।
गर्म था।
सख्त था।
राजू ने उसका हाथ पकड़ा।
“पूजा… तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा तो…”
पूजा ने सिर हिलाया।
“नहीं राजू…
मुझे बहुत अच्छा लग रहा है…
मैं तुम्हें चूमना चाहती हूँ…”
वो नीचे झुकी।
उसके लंड को होंठों से छुआ।
फिर चूमा।
धीरे-धीरे।
राजू ने उसका सिर सहलाया।
“पूजा… चूसोगी…?”
पूजा ने उसकी आँखों में देखा।
फिर अपना मुँह खोला।
उसके लंड को मुँह में लिया।
धीरे-धीरे चूसने लगी।
प्यार से।
जैसे कोई कीमती चीज़ हो।
राजू की साँसें तेज़ हो गईं।
“पूजा… आह्ह… तुम… तुम बहुत अच्छा कर रही हो…”
पूजा ने उसे और गहराई तक लिया।
उसकी जीभ लंड के नीचे फिर रही थी।
राजू ने उसका सिर सहलाते हुए कहा,
“पूजा… मैं तुम्हें कभी नहीं छोडूँगा…”
पूजा ने लंड मुँह से निकाला।
उसके लंड पर उसकी लार चमक रही थी।
वो ऊपर आई।
राजू ने उसका कुर्ता ऊपर किया।
पूजा ने खुद हाथ ऊपर करके कुर्ता उतार दिया।
अब वो सिर्फ़ क्रीम कलर की ब्रा और पैंटी में थी।
उसके बूब्स ब्रा में कैद थे।
राजू ने उसकी ब्रा का हुक खोला।
पूजा के गोरे, भरे हुए बूब्स बाहर आ गए।
निप्पल्स गुलाबी और सख्त।
राजू ने उसे देखा।
“पूजा… तुम बहुत सुंदर हो…”
वो उसके बूब्स पर झुका।
एक बूब चूसा।
दूसरे को हाथ से मसलते हुए।
पूजा की आह निकल गई।
“राजू… आह्ह… धीरे…”
राजू ने उसका निप्पल दाँतों से काटा।
पूजा की कमर ऊपर उठ गई।
“राजू… मुझे तुम्हारी बहुत ज़रूरत है…”
राजू नीचे सरक गया।
उसने पूजा की पैंटी नीचे की।
पूजा की चूत पूरी तरह गीली थी।
राजू ने उसकी जाँघों को चूमा।
फिर उसकी चूत पर मुँह रख दिया।
जीभ से चाटने लगा।
पूजा की सिसकी निकल गई।
“राजू… आह्ह… वहाँ… मत… आह्ह…”
राजू ने उसकी क्लिट चाटी।
फिर जीभ अंदर डाली।
पूजा का बदन काँपने लगा।
“राजू… मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…”
राजू ने और तेज़ चाटा।
पूजा की चूत से पानी निकल गया।
वो पूरी तरह झड़ गई।
राजू ने उसका पानी चाट लिया।
फिर ऊपर आया।
पूजा के होंठों पर अपना मुँह रखा।
पूजा ने अपना ही पानी चखा।
राजू ने अपना लंड उसकी चूत पर रखा।
धीरे से अंदर किया।
पूजा की चूत तंग थी।
पर गीली भी।
राजू ने धीरे-धीरे अंदर किया।
पूजा की आँखें बंद थीं।
“राजू… धीरे… दर्द हो रहा है…”
राजू ने रुका।
फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
पूजा की चूत ने उसे पूरा ले लिया।
राजू ने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया।
पूजा की सिसकियाँ और आहें कमरे में गूँज रही थीं।
“राजू… तुम बहुत बड़े हो…
मुझे पूरा भर दिया…”
राजू ने स्पीड बढ़ाई।
पूजा की कमर ऊपर उठ रही थी।
दोनों एक-दूसरे में खो चुके थे।
राजू ने पूजा को गले लगाया।
उसके कान में फुसफुसाया,
“पूजा… मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ…”
पूजा की आँखों से आँसू बह रहे थे।
“राजू… मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ…
इस पल मैं सिर्फ़ तुम्हारी हूँ…”
राजू ने और तेज़ चोदा।
पूजा फिर झड़ गई।
इस बार राजू भी नहीं रुका।
उसने पूजा की चूत में ही झड़ गया।
दोनों की साँसें तेज़ थीं।
राजू पूजा के ऊपर लेटा रहा।
पूजा ने उसे कसकर गले लगा लिया।
**पूजा का मन**
“ये गलत है…
मैंने संजय को धोखा दिया…
पर इस पल में मुझे कोई पछतावा नहीं है…
राजू ने मुझे वापस जीना सिखाया…
उसने मुझे अपना बना लिया…
और मैंने उसे अपना बना लिया…”
दोनों चुप थे।
बस एक-दूसरे की साँसें सुन रहे थे।
राजू ने पूजा के माथे पर किस किया।
“पूजा… तुम मेरी हो…”
पूजा ने मुस्कुराया।
“हाँ राजू… मैं तुम्हारी हूँ…”
और उस पल में…
दोनों ने एक-दूसरे को पूरा अपना बना लिया था।
बिना किसी शर्त के।
बिना किसी डर के।
सिर्फ़ प्यार से।
और उस छोटे से कमरे में…
दो टूटे हुए दिलों ने एक-दूसरे को जोड़ लिया था।
शायद हमेशा के लिए।


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