Thread Rating:
  • 3 Vote(s) - 1.67 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Incest खेल ससुर बहु का
#9
गतान्क से आगे।।।।।।।।।।।।।।।।


जब से राजासाहब ने अपनी कंपनियो का कॉर्पोरेटिसेशन करना प्लान किया उनके पास पार्ट्नर्स बनाने के लिए कई लोग आने लगे। बस यही जब्बार को उनके किले मे सेंध लगाने का मौका मिल गया। उसने कुछ लोगों को बहुत एट्रेक्टिव ऑफर के साथ राजा साहेब के पास भेजा। बड़ी चालाकी से उसने अपना नाम सामने ना आने दिया पर राजकुल ग्रूप की खुशकिस्मती की उसके भेजे प्यादों मे से एक के मुँह से नशे मे कहीं उसका नाम निकल गया और राजासाहब सचेत हो गये।

अब तो जर्मन कंपनी और अमेरिकन कंपनी से बातें ऑलमोस्ट फाइनल हो गयी थी।

आइए वापस चले दोनो के पास।

"
जब्बार तो लगता है सबक सीख कर शांत हो गया सर।"

"
नही, सेशाद्री साहब दुश्मन को कभी कम नही आँकना चाहिए और खास कर जब वो जब्बार जैसा है। उसकी ये चुप्पी तो हमे तूफान से पहले की खामोशी लग रही है। बहुत सावधान रहना होगा हम सबको।"


यशवीरसिंग ने इससे सही बात शायद कभी कही हो।

रात हो चली है।अब हम राजपुरा की उस बड़ी आलीशान मगर मनहूस लगने वाली कोठी मे चलते हैं।

मलिका बड़े से पलंग पर बिल्कुल नंगी होकर घोड़ी बनी हुई थी और अपनी चौड़ी, मखमली गांड जब्बार की तरफ करके हवा मे घुमा रही थी। उसने गर्दन घुमाई और जब्बार की तरफ देख कर अपनी जीभ अपने गुलाबी होठों पर फिराते हुए एक  हाथ से अपनी बड़ी-बड़ी निपल्स को मसलने लगी। जब्बार उसे ऐसे देख रहा था जैसे भेड़िया अपने शिकार को।

वो केवल पायजामे मे था। उसने उसे उतार फेंका और पलंग पर चढ़ कर मलिका के पीछे पोज़िशन ले ली। मलिका अब अपनी गांड उसके लंड से टकराने लगी। जब्बार ने एक  हाथ से उसकी कमर पकड़ी और  दूसरे से अपना काला मोटा लंड पकड़ कर उसकी गांड के छेद मे अपना सुपारा घुसा दिया।

"
ऊऊ...ययइईई!", मलिका आगे को हो गयी पर जब्बार ने उसकी कमर पर पकड़ और मज़बूत कर दी और अगले झटके मे पूरे का पूरा लंड अंदर पेल दिया।

"
आ....आहह....मार....गा....ईए!"


जब्बार अब ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा और बीच-बिच मे मलिका के गोरे चूतडो पर थप्पड़ लगाने लगा। हलाकि मलिका की गांड जबार के लंड की साइज़ की हो गई थी और उसका लंड पूरा अन्दर और बाहर हो रहा था।

"
ऊओ....ऊओवववववव!", हर थप्पड़ पर मलिका चीखती थी पर साफ़ ज़ाहिर था कि उसका मज़ा और बढ़ रहा था। वो राक्षस वैसे ही उसकी गांड चोदता रहा और एक हाथ से उसकी निपल मसलने लगा। फिर थप्पड़ मारना बंद करके उसने उसकी चूत के दाने को दूसरे हाथ से रगड़ना शुरू कर दिया।


मलिका पागल हो गयी,"हा....अन्णन्न्...और ज़ोर ....से..फ...आ...आद्दद्ड....दे...मे...री...गा...आन्न्न्ड्ड...आई..से...ही चूऊऊऊद्द्द्द्द्द्दद्ड,साआआआअ.....ले!"

सुनते ही जब्बार ने स्तन मसलना छोड़ उसके लंबे बालों को घोड़ी की लगाम की तरह पकड़ कर खीच दिया। मलिका का चेहरा उपर को हो गया और उसपे दर्द की रेखाएँ दिखने लगी पर मलिका अब पूरी तरह से गरम हो गयी थी,"चूओत...मे....उन..ग्ली ..कर...नाआ!"

जब्बार ने उसकी चूत मे तीन उंगलिया घुसेड कर बेदर्दी से रगड़ना शुरू कर दिया। वो भी झड़ने के करीब था, धक्कों की स्पीड ओर बढ़ गयी मलिका भी अपनी कमर हिला कर उसकी ताल से ताल मिलाने लगी। चूत मे उंगलियों की रगड़ ने भी रफ़्तार पकड़ ली की तभी.."ऊओ....ईईई मा..आआअन्न्‍ननणणन्!",कहते हुए मलिका झड़ गयी, उसकी चूत ने चुतरस छोड़ दिया और वो निढाल हो कर आगे गिर गयी। जब्बार ने भी करीब 5-6 धक्कों के बाद अपने पानी से उसकी गांड को भर दिया और मलिका की पीठ पर गिर कर हाँफने लगा।

तभी बगल की त्रिपोई पे रखा उसका मोबाइल जो कि वाइब्रटर मोड पर था, हिलने लगा। जब्बार ने वैसे ही मलिका के उपर पड़े-पड़े उसे उठा कर नंबर देखा और फोन काट दिया। उसके बाद झटके से उसने अपना सिकुडा हुआ लंड मलिका की गांड से निकाला और अपना पायजामा पहन कर भागता हुआ कोठी के पीछे आया और वहा बने लॉन को पार किया और पीछे बने छोटे से दरवाज़े को बस इतना खोला कि बाहर खड़ा काले शॉल मे लिपटा आदमी अंदर आ सके। जैसे ही वो घुसा, जब्बार उसका हाथ पकड़ कर उसे कोठी के अंदर ले आया। कोठी के सारे दरवाज़े बंद और खिड़कियाँ पर्दे से ढकी हैं, उसने ये सुनिश्चित किया और उस आदमी को लेकर हॉल मे आकर बैठ गया।

"
तुम्हे यहा आते किसी ने देखा तो नही?", जब्बार ने उसकी तरफ पानी की बॉटल बढ़ाई।

"
नही",शॉल उतारते हुए और बॉटल खोलते हुए उसने जवाब दिया।


वो एक  6 फिट से कुछ लंबा गोरा, तगड़ा इंसान था। उसके कंधे तक लंबे बाल और चेहरे पर घनी दाढ़ी थी। जब्बार एक सोफे पर बैठ गया और वो इंसान उसके सामने वाले सोफे पर था।

तभी मलिका हॉल मे आई। उसके बाल वैसे ही अस्त-व्यस्त थे उसने एक ब्लॅक माइक्रो-मिनी स्कर्ट ओर उपर एक बहुत टाइट वाइट गंजी पहनी थी जिसके नीचे ब्रा नही थी और चुदाई के वक़्त से खड़ी हुई उसकी घुंडिया उस गंजी को फाड़ कर बाहर आने को बेताब लग रही थी। गंजी बेपरवाही से पहनी गयी थी और उसमे से उसका पेट और नाभि साफ दिख रहे थे। गॅंजी के गले से उसकी बड़ी चूचियो का काफ़ी हिस्सा दिख रहा था और जब वो चलती थी तो बड़े मादक ढंग से हिलता था। उसकी हालत देखकर कोई भी कह देता कि वो एक रंडी है और अभी चुद कर आ रही है। उसके पिछवाड़े से जब्बार का वीर्य बहार आते हुए स्पष्ट दिख रहा था।

वो आकर जब्बार के सोफे के हटते पर बैठ गयी और उस अजनबी को सर से पैर से तक एक बाज़ारु औरत की तरह देखने लगी। बैठते ही उसकी स्कर्ट पूरी उपर हो गयी और उसकी चूत की तिराड दिखने लगी बस चूत ही धकि रही।

"
ये कल्लन है और ये मेरी रखैल मलिका।", जब्बार ने दोनो का परिचय कराया। जवाब मे कल्लन ने सिर्फ़ सिर हिलाया। मलिका उसे वैसे ही चालू निगाहों से देखती रही।

"
इसकी रांड़ छाप हरकतों पर मत जाना। इसका दिमाग़ हुमेशा अलर्ट रहता है।", जब्बार ने कल्लन को कहा।


मलिका ने हँसते हुए अपने दाँतों से जब्बार के कान पे काटने लगी।

"
हुउँ! बस, अब काम का टाइम आ गया है मेरे लंड की रानी", जब्बार ने उसे रोकते हुए कहा।


फिर जब्बार दोनो को अपना प्लान समजाने लगा।

उसके चुप होते ही मलिका ने उसकी तरफ तारीफ भरी नज़रों से देखा,"हरामीपन मे तेरा जवाब नही! वो मादरचोद इस बार तो राजा गया।"

"हा, पर एक बात हम तीनो अच्छी तरह समझ ले। कल्लन, तुम हुम लोगों से कभी नही मिलोगे और इस गाव मे कभी नज़र नहीं आओगे।", जब्बार उठ कर अंदर गया और दो नये मोबाइल लेकर आया। एक उसने कल्लन को दिया, "इन दोनो मोबाइल्स बस एक दूसरे का नंबर सेव्ड है। जब भी ज़रूरत हो हम इसी पर बात करेंगे। प्लान कामयाब करने के लिए हमारी सावधानी बहुत ज़रूरी है।"

"
और हां तू भी सुन ले मलिका, मैं जानता हूँ इस को देख कर तेरी चूत लार टपका रही है पर जब तक हम अपने मक़सद मे कामयाब नही हो जाते तुझे तेरे सभी छेदों कंट्रोल मे रखना होगा", वो उसकी चूत थपथपाते हुए बोला।


कल्लन पे मलिका की जिस्म की नुमाइश का कोई असर नही हुआ या यू कहें कि उसने अपने भाव बड़ी सफाई से छुपा लिए थे, 'क्या गॅरेंटी है जब्बार कि काम ख़तम होने के बाद तुम मुझे दूध से मक्खी की तरह नही निकाल फेंकोगे?"

"
इस गुनाह मे हम तीनो बराबर के भागीदार रहेंगे, कल्लन हम तीनो एक दूसरे के राज़दार हैं और यही हम तीनो की सलामती की गॅरेंटी है।"


तब तक मलिका अंदर से विस्की ले आई थी। उसने 3 पेग बनाए, एक खुद लिया और बाकी 2 दोनो मर्दों को दिया," चियर्स to अवर सक्सेस।"

ग्लास खाली करते ही कल्लन ने शॉल वापस लपेटी और उसी रास्ते वापस लौट गया।

दरवाज़ा बंध करके जब्बार अंदर आया तो देखा की मलिका सोफे पर फिर से नंगी पड़ी अपनी चूत मे उंगली कर रही है और अपनी चूचिया दबा रही है।

"
साली छिनाल, हमेशा गरम रहती है!", जब्बार मन ही मन बड़बड़ाया और अपना पायजामा उतार कर सोफे की तरफ बढ़ गया। इस बार उसने प्लान बनाया था की उसकी चूत के धज्जिया उदा देगा।


।।।।।।।।।।।।।।






आज के लिए बस यही तक

कल इसी कहानी को आगे ले जायेंगे तब तक आप इस एपिसोड के बारे में अपनी राय दे दीजिये


मैत्री की ओर से 

जय भारत
[+] 1 user Likes maitripatel's post
Like Reply


Messages In This Thread
RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 25-11-2025, 01:31 PM



Users browsing this thread: