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Incest खेल ससुर बहु का
#7
अब आगे......

इन ज़ालिमों को इनके जन्गालियत को छोड़ हम आगे बढ़ते हैं आने वाली सुबह की ओर जब विश्वजीत अपनी दुल्हन को लेकर हनिमून के लिए स्विट्ज़र्लॅंड को जाने  वाला है।


सुबह सूरज की रोशनी चेहरे पर पड़ने से मेनका की आँख खुली। विश्वजीत कमरे मे नहीं था और वो पलंग पर अकेली नंगी पड़ी थी। वो उठकर बाथरूम मे आ गयी। नौकरानियों ने कल ही उसका सारा समान उसकी ज़रूरत के हिसाब से उसको रूम मे अरेंज कर दिया था।

बाथरूम मे घुसते ही वो चौंक पड़ी, आदम कद शीशे मे अपने अक्स को देख कर।।उसे लगा कि कोई और खड़ा है पर जब रीयलाइज़ किया कि ये तो उसी का अक्स है तो हंस पड़ी। वो शीशे मे अपने नंगे बदन को निहारने लगी। अपना परियो जैसा  खूबसूरत चेहरा, कमर तक लहराते घने काले बाल, मांसल बाहें, लंबी सुरहिदार गर्दन, उसके 36 साइज़ के बूब्स बिना ब्रा के भी बिल्कुल टाइट और सीधे तने  हुए थे। उसे खुद भी हैरत होती थी कि इतने बड़े साइज़ के होने के बावजूद  उसकी चूचिया ऐसी कसी थी ज़रा भी नही झूलती थी। ब्रा की तो जैसे उन्हे  ज़रूरत ही नही थी। उसने धीरे से उन्हे सहलाया और अपने हल्के गुलाबी रंग के निपल्स को हल्का सा मसला। उसने अपनी एक निपल को मसलते हुए दूसरा हाथ अब उसके हाथ अपनी सपाट पेट पर गये जिसके बीच  मे उसकी गोल गहरी नाभि चमक रही थी। अब उसने अपना बदन घुमा कर अपनी मखमली पीठ का मुआयना किया, नीचे अपनी 26 इंच की कमर को देखा और फिर अपनी मस्त  34 साइज़ की गांड को निहारा जो की उसकी चूचियो की तरह ही बिल्कुल पुष्ट और कसी थी। उसने अपना एक कुल्हे को थोडा चौड़ा कर के उसकी गांड का छेद देखा आर अपनी उस गांड के छेद को देख अपने आप पे गर्वित होते थोड़ी मुस्कुराई और अपने कुल्हो थपथपाया। उसकी मांसल, भारी जांघे और उसके सुडोल टांगे तो ऐसे चमक रही थी जैसे संगमरमर की बनी हो।

उसे अपनी सुंदरता पर थोड़ा गुरूर हो आया पर उसी वक़्त उसकी नज़र उसकी छातियो पर बने विश्वजीत के दांतो के निशान पर पड़ी और उसे कल की रात याद  आ गयी  और  एक  परछाई सी उसके चेहरे पर से गुज़र गयी, उसकी छातियो को देख  कर ऐसा लगता था जैसे चाँद पे दाग पड़ा हो। फ़र्क बस इतना था कि यहा दो-दो चाँद थे।

वो एक गहरी सांस भर के पानी भरे बाथ-टब मे बैठ गयी। उसके हाथ अपनी जांघों पर से होते हुए उसकी दिल आकार के झांटो भरी चूत से टकराए  और  उसे रात को विश्वा की कही  बात याद आ गयी। उसने हाथ बढ़ा कर बगल के शेल्फ से हेर-रिमूविंग क्रीम  निकाली और अपनी झाँटें साफ़ करने लगी। उसने नाम में कहा “जिसके लिए इतनी मेहनत कर के दिल आकार के झांटे सजाये उसको तो पसंद ही नहीं क्या करू!! वैसे मुझे भी तो कहा पसंद थे! ये सब साली उन सहेलियों की वजह से हुआ, क्या पता उनकी चुतो पर ऐसा किया हो या नहीं पर मुज से करवाया गया, वैसे भी ये फेशन भी तो है विदेशो में ऐसा करते है और अपनी चुतो को सजाते है ताकि ऐसा आकार में बने झांटे अपने पार्टनर को आकर्षित करते है, खेर मेरे नसीब में ही ऐसा था की मेरे पति को झांटेवाली चूत पसंद नहीं , अब उनको ये पसंद नहीं तो एकदम क्लीन चूत पेश करुँगी, शायद कल जैसा फिर से ना हो”।

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बेटे-बहू को हनिमून के लिए विदा करके राजा यशवीर अपने ऑफीस पहुचे। उनकी 5 मिल्स तो राजपुरा के अंदर  और  आसपास के इलाक़े मे फैली थी पर राजपुरा के उत्तरी हिस्से मे एक ओर उनकी सिक्स्थ मिल्स का एक बहुत बड़ा कोम्प्लेक्स था (उनका महल राजपुरा के पूर्वी बोर्डर पे था)। इसी के अंदर उन्होने मिल्स मे काम करने  वाले उनके स्टाफ मेम्बर्स के लिए रेसिडेन्षियल कॉंप्लेक्स, हॉस्पिटल और स्टाफ के बच्चों के लिए कॉलेज बनवाया था। साथ ही यहा उनके बिजनेस का  सेंट्रल ऑफीस भी था जहा से राजासाहब अपने कारोबार को चलाते थे।


ऑफीस मे अपने चेंबर मे बैठते ही उनके राजकुल मिल्स ग्रूप के CMD सेशाद्री  उनके पास  सारी रिपोर्ट्स ले कर आ गये। सेशाद्री उनका बहुत वफ़ादार एम्प्लोई था  और  राजासाहब उसके बिना बिज़नेस चलाना तो सोच भी नही सकते थे।

"नमस्कार, सेशाद्री साहब। आइए बैठिए।"

"कुंवरसाहब  और  कुँवरनीसाहिबा रवाना हो गये, राजासाहब?

"जी हां, सेशाद्री जी। उपरवाले की कृपा  और  आप सबकी शुभकामनाओं से शादी ठीक तरह से निपट गयी"।

"हम तो हुमेशा आपका शुभ ही चाहेंगे सर"सेशाद्री ने उनकी तरफ लेपटॉप घूमाते हुए कहा।

"वो जर्मन कंपनी जिसे हम अपनी शुगर मिल्स मे पार्ट्नर बनाना चाहते हैं, उनके साथ फोर्थ राउंड की मीटिंग कैसी रही?"

"बहुत बढ़िया सर। पेपर मिल्स के लिए एक  अमेरिकन कंपनी से भी बात की है। जैसा आप चाहते हैं हुमारी ग्रूप मे फॉरिन पार्ट्नर्स लेकर हम अपने  प्रॉडक्ट्स का एक्सपोर्ट तो आसान कर ही लेंगे, साथ-साथ हुमारे ग्रूप मे भी कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर तैयार हो जाएगा।"

"हा, हम चाहते हैं कि हमारा ग्रूप आगे भी एक  वेल-आय्ल्ड मशीन की तरह चले  और  आपके जैसे क्वालिफाइड लोग ही हमेशा इसकी बागडोर संभाले रहे।"

"पर राजासाहब, आपको डर नही लगता कि आपके परिवार का कंट्रोल ख़तम हो गया तो।।"

" देखो अगर ऐसा होता भी है तो उसका मतलब ये है कि हमारे परिवार मे से किसी को भी ग्रुप चलाने की काबिलियत नही है। ऐसे मे उन्हे पैसों से कॉमपेनसेट किया जाएगा ओर कंपनी को  सो कॉल्ड बाहर के लोग सुचारू रूप से चलाते रहेंगे। "राजासाहब ने उनकी बात बीच मे ही काटते हुऐ जवाब दिया।

"सेशाद्रीसाहब, क्या आप आउटसाइडर हैं? आपका हमारा खून का रिश्ता नही है पर आपने तो हमसे भी ज़्यादा इस ग्रूप की सेवा की है।"

"सर, प्लीज़ डोन्ट एंबरस्स मी।"

"सेशाद्रीसाहब, हम तो आपकी तारीफ करते रहेंगे, आप भी तारीफ पर फूलना सीख जाए!" कह कर दोनो हंस पड़े।

"अच्छा, वो अमेरिकन कंपनी भरोसे की तो है?"

यस सर, जबसे जब्बार वाला केस हुआ है मैं इस मामले मे डबल सावधान हो गया हूँ।"


जब तक ये दोनो और बात करते है मैं आपको "जब्बार वाले केस" से रूबरू करवा दू।


क्रमशः बने रहिये[b] [/b]

आज के लिए बस यही तक

इस अपडेट के लिए आपके मंतव्यो की प्रतीक्षा रहेगी

जय भारत
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RE: खेल ससुर बहु का - by maitripatel - 24-11-2025, 03:30 PM



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