23-11-2025, 05:27 PM
(This post was last modified: 24-11-2025, 12:04 AM by Tiska jay. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
जयपुर, दोपहर के ठीक 2:55 बजे।
धूप ने सड़क को तवा बना रखा था।
पूजा चल रही थी, लेकिन उसका ध्यान कहीं नहीं था।
आँखें लाल, सूजी हुईं।
होंठ काँप रहे थे।
हर कदम भारी।
जैसे कोई मरघट की ओर ले जाया जा रहा हो।
“मैं क्यों जा रही हूँ?”
“मैं रुक क्यों नहीं पाती?”
“संजय… मुझे माफ़ कर दो…”
ये तीन वाक्य उसके दिमाग़ में बार-बार घूम रहे थे।
सड़क पर तेज़ रफ्तार से एक ट्रक आ रहा था।
पूजा रोड क्रॉस कर रही थी, बिना देखे।
ट्रक का हॉर्न बजा।
ड्राइवर ने ब्रेक मारा।
ठीक उसी पल।
एक मज़बूत हाथ ने पूजा का दाहिना हाथ ज़ोर से खींचा।
वो सड़क के किनारे गिरते-गिरते बची।
“अरे क्या है मैडम! आँखें बंद करके चल रही हो?
मारने का इरादा है क्या?”
पूजा ने सिर उठाया।
सामने खड़ा था – विजय।
सिक्युरिटी की खाकी वर्दी।
हट्टा-कट्टा बदन।
35 साल।
चौड़ी छाती।
मूँछें घनी।
आँखें तेज़, लेकिन चिंता से भरी।
पूजा ने फुसफुसाया,
“शायद…”
“क्या?” विजय ने भौंहें चढ़ाईं।
“कुछ नहीं… मैं चलती हूँ। मुझे… देर हो रही है।”
उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
चेहरे पर उदासी और डर साफ़ दिख रहा था।
विजय ने देखा – लड़की टूट चुकी है।
“रुको। नाम क्या है तुम्हारा?”
पूजा ने कुछ नहीं कहा।
हाथ छुड़ाया और तेज़ कदमों से चल दी।
विजय उसे जाता देखता रहा।
उसकी सिक्युरिटीिया नज़र ने सब नोट कर लिया –
लड़की का डर।
उसकी आँखें।
वो दिशा जिसमें जा रही थी।
मुन्ना की दुकान – ठीक 3:00 बजे
शटर आधा नीचे था।
पूजा ने झुककर अंदर घुसी।
मुन्ना काउंटर पर बैठा था।
उसे देखते ही होंठों पर घिनौनी मुस्कान फैली।
“आ गई हमारी रानी…?”
उसने रिमोट दबाया।
शटर पूरी तरह नीचे आ गया।
क्लिक।
ताला लगा।
अंदर अँधेरा।
बस एक ट्यूबलाइट की पीली रोशनी।
कूलर की आवाज़।
मुन्ना उठा।
पास आया।
पूजा पीछे हटी।
उसकी पीठ दीवार से टकराई।
“डर मत… आज सिर्फ़ शुरुआत है।
एक घंटा।
हर रोज़।
और तेरी वो गंदी चैट्स… तेरी नंगी फोटोज़…
संजय को नहीं जाएँगी।”
पूजा की साँसें तेज़।
आँखें बंद।
“प्लीज़… जल्दी खत्म कर दो…”
शटर पूरी तरह बंद।
अंदर सिर्फ़ एक पीली ट्यूबलाइट की रोशनी।
कूलर की आवाज़।
और पूजा की काँपती साँसें।
मुन्ना ने पूजा को दीवार से सटाया।
उसकी आँखों में घिनौनी चमक।
उसके मन में तूफ़ान चल रहा था।
मुन्ना मन में
“वाह… आज तो लॉटरी लग गई।
ये साड़ी वाली रंडी… कितनी मस्त लग रही है।
साड़ी पतली जॉर्जेट की, गुलाबी रंग की…
पेट से चार इंच नीचे बंधी हुई।
नाभि पूरी खुली… गहरी, गोल…
जैसे उँगली डालकर खेलने को बुला रही हो।
पल्लू ढीला…
हर साँस में बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे हैं।
ब्लाउज़… अरे बाप रे!
गुलाबी रंग का, स्लीवलेस, पीठ पर सिर्फ़ दो पतली डोरियाँ।
गला इतना गहरा कि बूब्स का आधा हिस्सा बाहर झाँक रहा है।
ब्रा की लाइन भी नहीं…
मतलब बिना ब्रा के आई है साली।
निप्पल्स साफ़ उभरे हुए…
जैसे चिल्ला रहे हों – चूसो मुझे।
कमर इतनी पतली कि एक हाथ में आ जाएगी।
और नीचे… पेटीकोट… टाइट…
गांड का शेप साफ़ दिख रहा है।
जाँघें गोरी… चिकनी…
इसे तो आज पूरी नंगी करके…
हर कोने में घुसाऊँगा।
संजय का नाम लेकर रोयेगी…
फिर भी मजे लेगी।
ये शरीफ़ बनने का नाटक…
अब देखता हूँ कितना चलता है।”
मुन्ना ने पूजा का पल्लू एक झटके में खींच लिया।
फेंक दिया।
“साड़ी उतार… जल्दी!”
पूजा रोते हुए साड़ी खींचने लगी।
पल्लू सरका…
फिर पूरा…
साड़ी ज़मीन पर गिरी।
अब वो सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में।
ब्लाउज़ गुलाबी नेट का, पारदर्शी।
सामने सिर्फ़ दो हुक।
पीछे क्रॉस डोरियाँ।
बूब्स इतने भरे हुए कि हुक दबाव में थे।
निप्पल्स साफ़ दिख रहे थे – गुलाबी, छोटे, सख्त।
हर साँस में ब्लाउज़ फटने को था।
पेटीकोट सफ़ेद साटन का, कमर पर पतली नाड़ी।
टखनों तक।
लेकिन इतना टाइट कि गांड का हर कर्व साफ़।
पेटीकोट का निचला हिस्सा हल्का सा ऊपर चढ़ा हुआ था…
जाँघें चमक रही थीं।
मुन्ना की आँखें लाल।
“वाह… क्या माल है साली।
ब्लाउज़ भी उतार… पूरी नंगी हो जा।”
पूजा ने हाथ जोड़े।
“प्लीज़… बस इतना ही…
मैं शरीफ़ घर की हूँ…
मेरी इज़्ज़त…”
“इज़्ज़त?
जो राजू को नंगी फोटो भेज रही थी?”
उसने ब्लाउज़ के हुक खोले।
एक।
दो।
ब्लाउज़ खुल गया।
बूब्स बाहर।
गोल, भरे हुए, बिल्कुल परफेक्ट।
निप्पल्स तने हुए।
मुन्ना ने दोनों हाथों से पकड़ा।
मसला।
ज़ोर से।
“आह्ह्ह्ह… प्लीज़…”
पूजा की आह निकली।
“क्या मस्त चूचे हैं रे…
इतने गोरे… इतने नरम…
संजय को तो मज़े आते होंगे…”
फिर मुँह लगाया।
चूसा।
काटा।
दाँतों से निप्पल खींचा।
“आह्ह्ह… मत काटो… दर्द हो रहा है…”
“दर्द?
अभी तो शुरूआत है कुतिया…”
उसका हाथ पेटीकोट के अंदर।
पेटीकोट को उपर उठाया
पिंक पैंटी दिखी
लेस वाली।
चूत का शेप साफ़।
पैंटी गीली हो चुकी थी।
मुन्ना ने पैंटी में हाथ डाला।
उँगली चूत पर।
“वाह… पूरी गीली।
बोलती है शरीफ़ है…
चूत तो कह रही है चोद मुझे…”
पूजा रो रही थी।
लेकिन बदन काँप रहा था।
“नहीं… प्लीज़… बाहर निकालो…”
मुन्ना सोच रहा था “ये देख… रो रही है…
लेकिन चूत से पानी टपक रहा है।
अंदर से रंडी है साली।
आज इसे पूरा रगड़ूँगा।
पहले मुँह में दूँगा।
फिर चूत में।
फिर गांड में।
रोयेगी…
फिर भी माँगेगी।
ये शरीफ़ औरतें…
जब खुलती हैं…
सबसे गंदी होती हैं।”
वो पूजा को ज़मीन पर लिटाने ही वाला था…
तभी शटर ज़ोर से खुला।
विजय अंदर।
पिस्तौल तानी हुई।
“हाथ ऊपर साले!”
मुन्ना का चेहरा सफ़ेद।
पूजा दौड़कर विजय के पीछे छिप गई।
रोते हुए बोली,
“मुझे बचा लो सर… इसने मुझे ब्लैकमेल किया है… मेरे साथ ज़बरदस्ती कर रहा था…”
मुन्ना गिरते-गिरते बोला,
“झूठ बोल रही है ये रंडी! ये पैसे के बदले चुदने आई थी साहब… मेरा विश्वास करो!”
विजय ने एक ज़ोरदार थप्पड़ मुन्ना के गाल पर मारा।
मुन्ना ज़मीन पर गिर पड़ा।
विजय ने पूजा की ओर पलटा।
पूजा अपने बूब्स हाथ से छिपाए, पेटीकोट में खड़ी थी।
खुले बाल, आँसुओं से भीगा चेहरा।
उसकी गोरी त्वचा, नंगे कंधे, काँपता बदन…
विजय का पैंट में तुरंत तंबू बन गया।
उसने नज़रें फेरीं, लेकिन पूजा ने देख लिया।
वो चुप रही।
मुन्ना ज़मीन पर लेटे-लेटे बोला,
“साहब… मुझे जेल भेज के क्या मिलेगा?
इसे अभी साथ में चोदते हैं।
क्यों साहब?”
पूजा डर के मारे विजय की ओर देखने लगी।
विजय ने मुन्ना को एक और लात मारी।
“चुप साले!”
फिर पूजा की ओर मुड़ा।
उसके कपड़े उठाए।
धीरे से दिए।
“पहन लो। डरो मत। अब कोई कुछ नहीं करेगा।”
उसने अपना नंबर दिया।
“कुछ भी ज़रूरत पड़े… मुझे फ़ोन करना। सिक्युरिटी स्टेशन में भी आ सकती हो।”
फिर मुन्ना का लैपटॉप खोला।
सैकड़ों लड़कियों के वीडियो, फोटोज़।
सब जब्त।
मुन्ना को हथकड़ी लगाई।
जाते-जाते मुन्ना चीखा,
“कुतिया… मैं आकर बदला लूँगा।
तेरी गांड, तेरी चूत… सब फाड़ूँगा साली रंडी!”
विजय ने उसे घसीटा।
“चल साले!”
शटर फिर बंद हुआ।
इस बार बाहर से।
पूजा ने कपड़े पहने।
साड़ी फिर से लपेटी।
हाथ काँप रहे थे।
फिर भी उसने विजय को धन्यवाद कहा।
वो चुपचाप निकल गई।
हॉस्टल पहुँची।
दरवाज़ा बंद किया।
फोन हाथ में था – अब पूरी तरह ठीक।
लेकिन उसकी ज़िंदगी…
अब पहले जैसी कभी नहीं रहेगी।
वो बेड पर बैठी।
विजय का नंबर देखा।
और पहली बार…
राहत की साँस ली।
धूप ने सड़क को तवा बना रखा था।
पूजा चल रही थी, लेकिन उसका ध्यान कहीं नहीं था।
आँखें लाल, सूजी हुईं।
होंठ काँप रहे थे।
हर कदम भारी।
जैसे कोई मरघट की ओर ले जाया जा रहा हो।
“मैं क्यों जा रही हूँ?”
“मैं रुक क्यों नहीं पाती?”
“संजय… मुझे माफ़ कर दो…”
ये तीन वाक्य उसके दिमाग़ में बार-बार घूम रहे थे।
सड़क पर तेज़ रफ्तार से एक ट्रक आ रहा था।
पूजा रोड क्रॉस कर रही थी, बिना देखे।
ट्रक का हॉर्न बजा।
ड्राइवर ने ब्रेक मारा।
ठीक उसी पल।
एक मज़बूत हाथ ने पूजा का दाहिना हाथ ज़ोर से खींचा।
वो सड़क के किनारे गिरते-गिरते बची।
“अरे क्या है मैडम! आँखें बंद करके चल रही हो?
मारने का इरादा है क्या?”
पूजा ने सिर उठाया।
सामने खड़ा था – विजय।
सिक्युरिटी की खाकी वर्दी।
हट्टा-कट्टा बदन।
35 साल।
चौड़ी छाती।
मूँछें घनी।
आँखें तेज़, लेकिन चिंता से भरी।
पूजा ने फुसफुसाया,
“शायद…”
“क्या?” विजय ने भौंहें चढ़ाईं।
“कुछ नहीं… मैं चलती हूँ। मुझे… देर हो रही है।”
उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
चेहरे पर उदासी और डर साफ़ दिख रहा था।
विजय ने देखा – लड़की टूट चुकी है।
“रुको। नाम क्या है तुम्हारा?”
पूजा ने कुछ नहीं कहा।
हाथ छुड़ाया और तेज़ कदमों से चल दी।
विजय उसे जाता देखता रहा।
उसकी सिक्युरिटीिया नज़र ने सब नोट कर लिया –
लड़की का डर।
उसकी आँखें।
वो दिशा जिसमें जा रही थी।
मुन्ना की दुकान – ठीक 3:00 बजे
शटर आधा नीचे था।
पूजा ने झुककर अंदर घुसी।
मुन्ना काउंटर पर बैठा था।
उसे देखते ही होंठों पर घिनौनी मुस्कान फैली।
“आ गई हमारी रानी…?”
उसने रिमोट दबाया।
शटर पूरी तरह नीचे आ गया।
क्लिक।
ताला लगा।
अंदर अँधेरा।
बस एक ट्यूबलाइट की पीली रोशनी।
कूलर की आवाज़।
मुन्ना उठा।
पास आया।
पूजा पीछे हटी।
उसकी पीठ दीवार से टकराई।
“डर मत… आज सिर्फ़ शुरुआत है।
एक घंटा।
हर रोज़।
और तेरी वो गंदी चैट्स… तेरी नंगी फोटोज़…
संजय को नहीं जाएँगी।”
पूजा की साँसें तेज़।
आँखें बंद।
“प्लीज़… जल्दी खत्म कर दो…”
शटर पूरी तरह बंद।
अंदर सिर्फ़ एक पीली ट्यूबलाइट की रोशनी।
कूलर की आवाज़।
और पूजा की काँपती साँसें।
मुन्ना ने पूजा को दीवार से सटाया।
उसकी आँखों में घिनौनी चमक।
उसके मन में तूफ़ान चल रहा था।
मुन्ना मन में
“वाह… आज तो लॉटरी लग गई।
ये साड़ी वाली रंडी… कितनी मस्त लग रही है।
साड़ी पतली जॉर्जेट की, गुलाबी रंग की…
पेट से चार इंच नीचे बंधी हुई।
नाभि पूरी खुली… गहरी, गोल…
जैसे उँगली डालकर खेलने को बुला रही हो।
पल्लू ढीला…
हर साँस में बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे हैं।
ब्लाउज़… अरे बाप रे!
गुलाबी रंग का, स्लीवलेस, पीठ पर सिर्फ़ दो पतली डोरियाँ।
गला इतना गहरा कि बूब्स का आधा हिस्सा बाहर झाँक रहा है।
ब्रा की लाइन भी नहीं…
मतलब बिना ब्रा के आई है साली।
निप्पल्स साफ़ उभरे हुए…
जैसे चिल्ला रहे हों – चूसो मुझे।
कमर इतनी पतली कि एक हाथ में आ जाएगी।
और नीचे… पेटीकोट… टाइट…
गांड का शेप साफ़ दिख रहा है।
जाँघें गोरी… चिकनी…
इसे तो आज पूरी नंगी करके…
हर कोने में घुसाऊँगा।
संजय का नाम लेकर रोयेगी…
फिर भी मजे लेगी।
ये शरीफ़ बनने का नाटक…
अब देखता हूँ कितना चलता है।”
मुन्ना ने पूजा का पल्लू एक झटके में खींच लिया।
फेंक दिया।
“साड़ी उतार… जल्दी!”
पूजा रोते हुए साड़ी खींचने लगी।
पल्लू सरका…
फिर पूरा…
साड़ी ज़मीन पर गिरी।
अब वो सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में।
ब्लाउज़ गुलाबी नेट का, पारदर्शी।
सामने सिर्फ़ दो हुक।
पीछे क्रॉस डोरियाँ।
बूब्स इतने भरे हुए कि हुक दबाव में थे।
निप्पल्स साफ़ दिख रहे थे – गुलाबी, छोटे, सख्त।
हर साँस में ब्लाउज़ फटने को था।
पेटीकोट सफ़ेद साटन का, कमर पर पतली नाड़ी।
टखनों तक।
लेकिन इतना टाइट कि गांड का हर कर्व साफ़।
पेटीकोट का निचला हिस्सा हल्का सा ऊपर चढ़ा हुआ था…
जाँघें चमक रही थीं।
मुन्ना की आँखें लाल।
“वाह… क्या माल है साली।
ब्लाउज़ भी उतार… पूरी नंगी हो जा।”
पूजा ने हाथ जोड़े।
“प्लीज़… बस इतना ही…
मैं शरीफ़ घर की हूँ…
मेरी इज़्ज़त…”
“इज़्ज़त?
जो राजू को नंगी फोटो भेज रही थी?”
उसने ब्लाउज़ के हुक खोले।
एक।
दो।
ब्लाउज़ खुल गया।
बूब्स बाहर।
गोल, भरे हुए, बिल्कुल परफेक्ट।
निप्पल्स तने हुए।
मुन्ना ने दोनों हाथों से पकड़ा।
मसला।
ज़ोर से।
“आह्ह्ह्ह… प्लीज़…”
पूजा की आह निकली।
“क्या मस्त चूचे हैं रे…
इतने गोरे… इतने नरम…
संजय को तो मज़े आते होंगे…”
फिर मुँह लगाया।
चूसा।
काटा।
दाँतों से निप्पल खींचा।
“आह्ह्ह… मत काटो… दर्द हो रहा है…”
“दर्द?
अभी तो शुरूआत है कुतिया…”
उसका हाथ पेटीकोट के अंदर।
पेटीकोट को उपर उठाया
पिंक पैंटी दिखी
लेस वाली।
चूत का शेप साफ़।
पैंटी गीली हो चुकी थी।
मुन्ना ने पैंटी में हाथ डाला।
उँगली चूत पर।
“वाह… पूरी गीली।
बोलती है शरीफ़ है…
चूत तो कह रही है चोद मुझे…”
पूजा रो रही थी।
लेकिन बदन काँप रहा था।
“नहीं… प्लीज़… बाहर निकालो…”
मुन्ना सोच रहा था “ये देख… रो रही है…
लेकिन चूत से पानी टपक रहा है।
अंदर से रंडी है साली।
आज इसे पूरा रगड़ूँगा।
पहले मुँह में दूँगा।
फिर चूत में।
फिर गांड में।
रोयेगी…
फिर भी माँगेगी।
ये शरीफ़ औरतें…
जब खुलती हैं…
सबसे गंदी होती हैं।”
वो पूजा को ज़मीन पर लिटाने ही वाला था…
तभी शटर ज़ोर से खुला।
विजय अंदर।
पिस्तौल तानी हुई।
“हाथ ऊपर साले!”
मुन्ना का चेहरा सफ़ेद।
पूजा दौड़कर विजय के पीछे छिप गई।
रोते हुए बोली,
“मुझे बचा लो सर… इसने मुझे ब्लैकमेल किया है… मेरे साथ ज़बरदस्ती कर रहा था…”
मुन्ना गिरते-गिरते बोला,
“झूठ बोल रही है ये रंडी! ये पैसे के बदले चुदने आई थी साहब… मेरा विश्वास करो!”
विजय ने एक ज़ोरदार थप्पड़ मुन्ना के गाल पर मारा।
मुन्ना ज़मीन पर गिर पड़ा।
विजय ने पूजा की ओर पलटा।
पूजा अपने बूब्स हाथ से छिपाए, पेटीकोट में खड़ी थी।
खुले बाल, आँसुओं से भीगा चेहरा।
उसकी गोरी त्वचा, नंगे कंधे, काँपता बदन…
विजय का पैंट में तुरंत तंबू बन गया।
उसने नज़रें फेरीं, लेकिन पूजा ने देख लिया।
वो चुप रही।
मुन्ना ज़मीन पर लेटे-लेटे बोला,
“साहब… मुझे जेल भेज के क्या मिलेगा?
इसे अभी साथ में चोदते हैं।
क्यों साहब?”
पूजा डर के मारे विजय की ओर देखने लगी।
विजय ने मुन्ना को एक और लात मारी।
“चुप साले!”
फिर पूजा की ओर मुड़ा।
उसके कपड़े उठाए।
धीरे से दिए।
“पहन लो। डरो मत। अब कोई कुछ नहीं करेगा।”
उसने अपना नंबर दिया।
“कुछ भी ज़रूरत पड़े… मुझे फ़ोन करना। सिक्युरिटी स्टेशन में भी आ सकती हो।”
फिर मुन्ना का लैपटॉप खोला।
सैकड़ों लड़कियों के वीडियो, फोटोज़।
सब जब्त।
मुन्ना को हथकड़ी लगाई।
जाते-जाते मुन्ना चीखा,
“कुतिया… मैं आकर बदला लूँगा।
तेरी गांड, तेरी चूत… सब फाड़ूँगा साली रंडी!”
विजय ने उसे घसीटा।
“चल साले!”
शटर फिर बंद हुआ।
इस बार बाहर से।
पूजा ने कपड़े पहने।
साड़ी फिर से लपेटी।
हाथ काँप रहे थे।
फिर भी उसने विजय को धन्यवाद कहा।
वो चुपचाप निकल गई।
हॉस्टल पहुँची।
दरवाज़ा बंद किया।
फोन हाथ में था – अब पूरी तरह ठीक।
लेकिन उसकी ज़िंदगी…
अब पहले जैसी कभी नहीं रहेगी।
वो बेड पर बैठी।
विजय का नंबर देखा।
और पहली बार…
राहत की साँस ली।


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