23-11-2025, 11:41 AM
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Episode 5: दिल ने ये कहा है दिल से
रात भर बारिश अनवरत बरसती रही।
बाहर की बारिश धरती को सराबोर कर रही थी, तो कमरे के अंदर आर्यन और गुलमोहर के जिस्म एक-दूसरे में पूरी तरह डूबे हुए थे।
पहली बार जब आर्यन ने गुलमोहर को अपना बनाया था, तो दर्द और सुख का तीव्र मिश्रण था—उसकी कोमल चूत में उसका मोटा लंड धीरे-धीरे समाता गया, गुलमोहर की आँखों में आँसू और होंठों पर कराह।
दूसरी बार सिर्फ भयंकर भूख थी—अनियंत्रित, जंगली।
तीसरी बार दोनों एक-दूसरे को इस तरह पी रहे थे मानो कल कभी न आए।
हर बार आर्यन का लंड गुलमोहर की तंग, गीली चूत में और गहराई तक उतरता गया, हर धक्के के साथ उसकी चीखें कमरे की दीवारों से टकराकर लौटतीं—धीरे-धीरे प्यार भरी आहों में बदलकर।
आखिरी बार जब दोनों झड़े, तो थककर नंगे ही लिपट गए।
गुलमोहर का चेहरा आर्यन की छाती पर, एक टांग उसकी कमर पर लपेटे, उसकी सुजी हुई, रस से भरी चूत अभी भी आर्यन के अर्ध-तने लंड से सटी हुई।
दोनों की साँसें एक हो गईं, और गहरी नींद ने उन्हें ढाँक लिया।
बाहर बारिश की लय बनी रही—टप-टप-टप—जैसे कोई प्रेम गीत गा रहा हो उनकी उन्मत्त रात का।
सुबह बहुत देर से आई।
पहली किरण से पहले गुलमोहर की आँखें खुलीं।
बाहर बारिश थम चुकी थी, सिर्फ पत्तों से पानी टपकने की हल्की-सी आवाज़ आ रही थी।
कमरे में अभी भी रात की उष्मा बाकी थी—पसीने, वीर्य और काम की मिली-जुली मदहोश कर देने वाली खुशबू।
गुलमोहर ने हल्के से हिलकर महसूस किया—आर्यन का लंड नींद में भी कठोर होकर उसकी जाँघों के बीच दबा हुआ था।
रात की यादें बिजली की तरह कौंधीं—चूत में हल्की-सी सिहरन हुई, गर्म रस का एक कतरा अपने आप बह निकला।
वह मुस्कुराई, बिना किसी शर्म के।
धीरे से आर्यन को पीठ के बल लिटाया। उसका चेहरा नींद में भी मासूम था।
गुलमोहर घुटनों के बल उसके ऊपर चढ़ गई। उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर लंड को पकड़ा—मोटा, गर्म, नसें उभरी हुईं, सिरा चमकदार।
फिर धीरे से अपनी चूत उसके सिरे पर रखी और एक लंबी साँस लेकर बैठ गई।
“उस्स… आह…” हल्का-सा दर्द, लेकिन उससे कहीं ज्यादा भरपूर सुख।
चूत ने लंड को पूरा निगल लिया। गुलमोहर ने आँखें बंद कीं, होंठ काटे, और धीरे-धीरे कमर हिलाने लगी।
चूड़ियाँ हल्के से खनकीं, उसके भरे हुए स्तन लहराए।
आर्यन की नींद टूटी।
पहले लगा सपना है। फिर आँखें खोलीं—गुलमोहर ऊपर, साड़ी कमर तक सिमटी हुई, चूत में उसका लंड पूरा समाया, चेहरा कामुक लाली से दमक रहा।
“गुल… तू…?” उसकी आवाज़ भारी थी, नींद और वासना से लबरेज़।
गुलमोहर ने सिर्फ मुस्कुराकर जवाब दिया और कमर और तेज़ी से हिलाने लगी।
आर्यन को अब इंतज़ार असहनीय हो गया।
एक झटके में उसने गुलमोहर को नीचे लिटाया, खुद ऊपर आ गया।
“सुबह-सुबह आग लगा दी तूने… अब देख, कैसे बुझाता हूँ।”
लंड फिर से चूत में सरक गया—इस बार एक ही ज़ोरदार झटके में जड़ तक।
गुलमोहर की चीख निकल गई, लेकिन उसमें सिर्फ उन्माद था।
“आर्यन… हाँ… और तेज़… सुबह की पहली चुदाई… फाड़ दो मुझे… पूरी तरह!”
कमरा फिर गूँज उठा।
चप-चप… गीली आवाज़ें… आहें… कराहें… बिस्तर का चरमराना।
आर्यन ने गुलमोहर के दोनों हाथ सिरहाने दबा रखे थे, उसके होंठ चूस रहा था, लंड हर झटके में गुलमोहर की चूत की सबसे गहरी दीवार से टकरा रहा था।
गुलमोहर की टांगें उसकी कमर पर लिपट गईं, नाखून उसकी पीठ पर गहरे निशान बना रहे थे।
“तेरी चूत… कितनी तंग और रसीली… रात भर चोदने के बाद भी भूखी है…” आर्यन कराहा।
“हाँ… तेरे लंड की गुलाम है… और दे… और ज़ोर से… आह्ह… आ रही हूँ…!”
दोनों एक साथ झड़े।
आर्यन का गर्म वीर्य गुलमोहर की चूत के सबसे अंदर धार बनकर बरसा, गुलमोहर का बदन थरथरा उठा।
कई पल तक दोनों ऐसे ही रहे—लंड चूत में गहराई तक, साँसें एक-दूसरे की गर्दन पर।
फिर आर्यन धीरे से निकला, गुलमोहर को बाँहों में कस लिया।
बाहर सूरज पूरी तरह निकल चुका था।
कमरे में सुनहरी रोशनी, चादरें गीली और बिखरी हुईं, दोनों के जिस्म पर पसीने और काम की चमक।
गुलमोहर ने आर्यन की छाती पर उँगली से लिखा—
“हर सुबह… ऐसी हो।”
आर्यन ने उसकी उँगली पकड़ी, होंठ उसके माथे पर टिकाए और फुसफुसाया,
“हर सुबह… हर रात… बस तेरी और मेरी।”
दोनों फिर लिपट गए।
चुदाई के बाद दोनों बिस्तर पर पड़े रहे—साँसें अभी तेज़, जिस्मों पर पसीने की चमक, चादरें वीर्य और रस से सनी हुईं।
आर्यन ने गुलमोहर को कसकर लपेट रखा था, एक हाथ उसके बालों में उलझा, दूसरा उसकी कमर पर। गुलमोहर का चेहरा उसकी छाती पर टिका था—हर धड़कन उसके कान में गूँज रही थी।
कुछ देर तक कोई बोला नहीं।
बस साँसें थीं और बाहर पक्षियों की चहचहाहट।
गुलमोहर ने पहले हल्के से सिर उठाया। उसकी आँखें अभी भी नशे में डूबी थीं—होंठ गीले, गाल लाल।
“आर्यन… अब तो उठना चाहिए न? चाय बनाऊँ?”
आर्यन ने मुस्कुराकर उसका माथा चूमा।
“हाँ… लेकिन पाँच मिनट और। तेरे बिना बिस्तर सूना लगता है।”
गुलमोहर की चाँदी-सी हँसी गूँजी। उसने उँगली से आर्यन की छाती पर गोल-गोल घुमाते हुए कहा,
“रात भर सोये नहीं… सुबह फिर शुरू हो गए। अब तो कमज़ोर पड़ जाओगे।”
आर्यन ने उसकी नाक दबाई।
“कमज़ोर? अभी तो असली खेल बाकी है।”
फिर गंभीर होकर, उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला,
“गुल… तुझे कभी अकेला नहीं छोड़ूँगा। जो भी हो, मैं तेरे साथ हूँ।”
गुलमोहर की आँखें भर आईं। उसने आर्यन की गर्दन में मुँह छिपा लिया।
“बस यही चाहिए था मुझे… एक अपना साया।”
दोनों फिर चुप।
फिर गुलमोहर ने खुद को छुड़ाया, चादर लपेटकर उठी। आर्यन ने उसकी कमर पकड़कर खींचा—वो हँसते हुए उसके ऊपर गिर पड़ी। दोनों खूब हँसे।
“अरे छोड़ो… चाय बनानी है,जाने दो!”
आर्यन ने आखिरी बार उसे कसकर गले लगाया, होंठ उसके कानों पर फेरते हुए फुसफुसाया,
“जा… लेकिन चाय के बाद फिर तेरी बारी है।”
गुलमोहर शरमाकर बिस्तर से उतरी, चादर को साड़ी की तरह लपेटे किचन की ओर बढ़ गई।
पीछे से आर्यन उसे देखता रहा—उसकी कमर की लय, बालों का लहराना, नंगे पैरों की आहट।
उसका दिल भर आया।
ये सुबह… ये औरत… अब उसकी पूरी जिंदगी थी।
कुछ देर बाद अदरक वाली चाय की तेज़, मदहोश कर देने वाली खुशबू पूरे कमरे में फैल गई।
दोनों सोफे पर एक-दूसरे से सटकर बैठे, प्याले हाथ में लिए धीरे-धीरे सिप कर रहे थे। लेकिन आर्यन का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।
गुलमोहर ने तुरंत पकड़ लिया।
“क्या हुआ? रात की यादें इतनी जल्दी भूल गए?” उसने मज़ाक में कहा, पर आँखों में चिंता थी।
आर्यन ने प्याला रखा और उसके दोनों हाथ अपने हाथों में ले लिए।
“पागल, वो यादें तो उम्र भर नहीं भूलेंगी। लेकिन सच ये है कि तू घर से भागी हुई है। कमला और वो बूढ़ा हरिया ठाकुर तुझे ढूँढ रहे होंगे। पचास हजार की कीमत तय हुई थी न? वो इतनी आसानी से हार नहीं मानेंगे। हमें अभी से सावधान रहना है।”
गुलमोहर का चेहरा पीला पड़ गया।
“आर्यन… डर लग रहा है। अगर वो लोग मुझे वापस ले गए तो…”
आर्यन ने उसे बाँहों में खींच लिया।
“डर मत। आज हम एक ऐसा कदम उठाएँगे कि साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। मेरा बचपन का दोस्त रोहित श्रीवास्तव SP है। उससे मिलते हैं। वो सब संभाल लेगा।”
गुलमोहर ने उसकी छाती से चिपकते हुए राहत की साँस ली।
“ठीक है… मैं तैयार हूँ।”
दोनों ने जल्दी से तैयार होकर निकले। गुलमोहर ने वही काली साड़ी पहनी—सादा, पर उसके गेहुए रंग पर इतनी खूबसूरत लग रही थी कि आर्यन की साँस रुक गई।
हल्का काजल, छोटी-सी बिंदी, होंठों पर गुलाबी चमक।
आर्यन ने उसे देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “चल, मेरी जान। आज तेरी जिंदगी की नई शुरुआत है।”
रोहित का बंगला शहर के सबसे पॉश इलाके में था। दरवाजे पर सिपाही सलूट ठोंक रहे थे।
रोहित ने आर्यन को देखते ही गले लगा लिया।
“अबे यार! और ये…?” उसकी नज़र गुलमोहर पर ठहर गई।
आर्यन ने गुलमोहर का हाथ थामकर आगे बढ़ाया।
“रोहित, ये गुलमोहर है। मेरी गुलमोहर। तेरी भाभी। आज हम तेरी मदद माँगने आए हैं।”
रोहित ने भौंहें चढ़ाईं, फिर हँसते हुए अंदर ले गया।
तीनों सोफे पर बैठे।
आर्यन ने एक साँस में सारी कहानी सुना दी—गाँव, सौतेली माँ का ज़ुल्म, पचास हजार में बेचने की साजिश, हरिया ठाकुर, भागकर शहर आना।
गुलमोहर ने बीच-बीच में हिम्मत जुटाकर अपनी बात जोड़ी। उसकी आँखें नम थीं, पर आवाज़ में अब हिम्मत ज्यादा थी।
रोहित ने पूरी बात ध्यान से सुनी।
फिर गहरी साँस लेकर बोला,
“ये सीधा ट्रैफिकिंग का केस है। हरिया ठाकुर का नाम मैं जानता हूँ—पैसा और गुंडे दोनों हैं। लेकिन कानून के सामने सब बराबर।”
उसने फोन उठाया, स्टेनो को बुलाया।
“आज ही FIR। धारा 370, 366A, 34—सब लगा दो। लड़की को तुरंत प्रोटेक्शन। दो महिला कांस्टेबल और एक सादी वर्दी वाला गार्ड फ्लैट पर लगाओ। ठाकुर के खिलाफ तलाशी और गिरफ्तारी का वारंट तैयार करो।”
फिर गुलमोहर की ओर मुड़ा और मुस्कुराया,
“तू टेंशन मत ले भाभी। जब तक मैं ज़िंदा हूँ, कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता।”
गुलमोहर की आँखों से खुशी के आँसू छलक आए।
“थैंक यू, भैया… आप भगवान हैं।”
रोहित ने आर्यन की ओर देखा।
“सुनो, एक काम करो। अभी के अभी मनाली निकल जाओ। मैं वहाँ पाँच सितारा होटल बुक करवा दूँगा—दस दिन का स्टे। जमकर हनीमून मनाओ। घर मत आना। चाबी मुझे दे दो। जो चाहिए, वहाँ भेज दूँगा। फ्लैट पर हमारा आदमी रहेगा—कोई नज़दीक भी आया तो पकड़ लिया जाएगा। जाओ, खुलकर एंजॉय करो भाभी के साथ। मेरी गारंटी है।”
आर्यन ने राहत की साँस ली।
“धन्यवाद भाई। तूने जान बचा ली।”
रोहित ने गले लगाया,
“भाई का फर्ज। बस रास्ते में सावधान रहना।”
गुलमोहर ने रोहित को प्रणाम किया,
“शुक्रिया भैया… आपके जैसे भाई हों तो डर ही नहीं लगता।”
चाबी सौंपी गई। दोनों कार में सवार हुए और मनाली की राह पकड़ ली।
रास्ते में गुलमोहर ने आर्यन का हाथ कसकर थामा हुआ था।
कार हाइवे पर रफ्तार पकड़ चुकी थी।
सामने बर्फीले पहाड़ नज़दीक आते जा रहे थे—और उनकी नई ज़िंदगी शुरू होने वाली थी।
कहानी जारी रहेगी....
रात भर बारिश अनवरत बरसती रही।
बाहर की बारिश धरती को सराबोर कर रही थी, तो कमरे के अंदर आर्यन और गुलमोहर के जिस्म एक-दूसरे में पूरी तरह डूबे हुए थे।
पहली बार जब आर्यन ने गुलमोहर को अपना बनाया था, तो दर्द और सुख का तीव्र मिश्रण था—उसकी कोमल चूत में उसका मोटा लंड धीरे-धीरे समाता गया, गुलमोहर की आँखों में आँसू और होंठों पर कराह।
दूसरी बार सिर्फ भयंकर भूख थी—अनियंत्रित, जंगली।
तीसरी बार दोनों एक-दूसरे को इस तरह पी रहे थे मानो कल कभी न आए।
हर बार आर्यन का लंड गुलमोहर की तंग, गीली चूत में और गहराई तक उतरता गया, हर धक्के के साथ उसकी चीखें कमरे की दीवारों से टकराकर लौटतीं—धीरे-धीरे प्यार भरी आहों में बदलकर।
आखिरी बार जब दोनों झड़े, तो थककर नंगे ही लिपट गए।
गुलमोहर का चेहरा आर्यन की छाती पर, एक टांग उसकी कमर पर लपेटे, उसकी सुजी हुई, रस से भरी चूत अभी भी आर्यन के अर्ध-तने लंड से सटी हुई।
दोनों की साँसें एक हो गईं, और गहरी नींद ने उन्हें ढाँक लिया।
बाहर बारिश की लय बनी रही—टप-टप-टप—जैसे कोई प्रेम गीत गा रहा हो उनकी उन्मत्त रात का।
सुबह बहुत देर से आई।
पहली किरण से पहले गुलमोहर की आँखें खुलीं।
बाहर बारिश थम चुकी थी, सिर्फ पत्तों से पानी टपकने की हल्की-सी आवाज़ आ रही थी।
कमरे में अभी भी रात की उष्मा बाकी थी—पसीने, वीर्य और काम की मिली-जुली मदहोश कर देने वाली खुशबू।
गुलमोहर ने हल्के से हिलकर महसूस किया—आर्यन का लंड नींद में भी कठोर होकर उसकी जाँघों के बीच दबा हुआ था।
रात की यादें बिजली की तरह कौंधीं—चूत में हल्की-सी सिहरन हुई, गर्म रस का एक कतरा अपने आप बह निकला।
वह मुस्कुराई, बिना किसी शर्म के।
धीरे से आर्यन को पीठ के बल लिटाया। उसका चेहरा नींद में भी मासूम था।
गुलमोहर घुटनों के बल उसके ऊपर चढ़ गई। उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर लंड को पकड़ा—मोटा, गर्म, नसें उभरी हुईं, सिरा चमकदार।
फिर धीरे से अपनी चूत उसके सिरे पर रखी और एक लंबी साँस लेकर बैठ गई।
“उस्स… आह…” हल्का-सा दर्द, लेकिन उससे कहीं ज्यादा भरपूर सुख।
चूत ने लंड को पूरा निगल लिया। गुलमोहर ने आँखें बंद कीं, होंठ काटे, और धीरे-धीरे कमर हिलाने लगी।
चूड़ियाँ हल्के से खनकीं, उसके भरे हुए स्तन लहराए।
आर्यन की नींद टूटी।
पहले लगा सपना है। फिर आँखें खोलीं—गुलमोहर ऊपर, साड़ी कमर तक सिमटी हुई, चूत में उसका लंड पूरा समाया, चेहरा कामुक लाली से दमक रहा।
“गुल… तू…?” उसकी आवाज़ भारी थी, नींद और वासना से लबरेज़।
गुलमोहर ने सिर्फ मुस्कुराकर जवाब दिया और कमर और तेज़ी से हिलाने लगी।
आर्यन को अब इंतज़ार असहनीय हो गया।
एक झटके में उसने गुलमोहर को नीचे लिटाया, खुद ऊपर आ गया।
“सुबह-सुबह आग लगा दी तूने… अब देख, कैसे बुझाता हूँ।”
लंड फिर से चूत में सरक गया—इस बार एक ही ज़ोरदार झटके में जड़ तक।
गुलमोहर की चीख निकल गई, लेकिन उसमें सिर्फ उन्माद था।
“आर्यन… हाँ… और तेज़… सुबह की पहली चुदाई… फाड़ दो मुझे… पूरी तरह!”
कमरा फिर गूँज उठा।
चप-चप… गीली आवाज़ें… आहें… कराहें… बिस्तर का चरमराना।
आर्यन ने गुलमोहर के दोनों हाथ सिरहाने दबा रखे थे, उसके होंठ चूस रहा था, लंड हर झटके में गुलमोहर की चूत की सबसे गहरी दीवार से टकरा रहा था।
गुलमोहर की टांगें उसकी कमर पर लिपट गईं, नाखून उसकी पीठ पर गहरे निशान बना रहे थे।
“तेरी चूत… कितनी तंग और रसीली… रात भर चोदने के बाद भी भूखी है…” आर्यन कराहा।
“हाँ… तेरे लंड की गुलाम है… और दे… और ज़ोर से… आह्ह… आ रही हूँ…!”
दोनों एक साथ झड़े।
आर्यन का गर्म वीर्य गुलमोहर की चूत के सबसे अंदर धार बनकर बरसा, गुलमोहर का बदन थरथरा उठा।
कई पल तक दोनों ऐसे ही रहे—लंड चूत में गहराई तक, साँसें एक-दूसरे की गर्दन पर।
फिर आर्यन धीरे से निकला, गुलमोहर को बाँहों में कस लिया।
बाहर सूरज पूरी तरह निकल चुका था।
कमरे में सुनहरी रोशनी, चादरें गीली और बिखरी हुईं, दोनों के जिस्म पर पसीने और काम की चमक।
गुलमोहर ने आर्यन की छाती पर उँगली से लिखा—
“हर सुबह… ऐसी हो।”
आर्यन ने उसकी उँगली पकड़ी, होंठ उसके माथे पर टिकाए और फुसफुसाया,
“हर सुबह… हर रात… बस तेरी और मेरी।”
दोनों फिर लिपट गए।
चुदाई के बाद दोनों बिस्तर पर पड़े रहे—साँसें अभी तेज़, जिस्मों पर पसीने की चमक, चादरें वीर्य और रस से सनी हुईं।
आर्यन ने गुलमोहर को कसकर लपेट रखा था, एक हाथ उसके बालों में उलझा, दूसरा उसकी कमर पर। गुलमोहर का चेहरा उसकी छाती पर टिका था—हर धड़कन उसके कान में गूँज रही थी।
कुछ देर तक कोई बोला नहीं।
बस साँसें थीं और बाहर पक्षियों की चहचहाहट।
गुलमोहर ने पहले हल्के से सिर उठाया। उसकी आँखें अभी भी नशे में डूबी थीं—होंठ गीले, गाल लाल।
“आर्यन… अब तो उठना चाहिए न? चाय बनाऊँ?”
आर्यन ने मुस्कुराकर उसका माथा चूमा।
“हाँ… लेकिन पाँच मिनट और। तेरे बिना बिस्तर सूना लगता है।”
गुलमोहर की चाँदी-सी हँसी गूँजी। उसने उँगली से आर्यन की छाती पर गोल-गोल घुमाते हुए कहा,
“रात भर सोये नहीं… सुबह फिर शुरू हो गए। अब तो कमज़ोर पड़ जाओगे।”
आर्यन ने उसकी नाक दबाई।
“कमज़ोर? अभी तो असली खेल बाकी है।”
फिर गंभीर होकर, उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला,
“गुल… तुझे कभी अकेला नहीं छोड़ूँगा। जो भी हो, मैं तेरे साथ हूँ।”
गुलमोहर की आँखें भर आईं। उसने आर्यन की गर्दन में मुँह छिपा लिया।
“बस यही चाहिए था मुझे… एक अपना साया।”
दोनों फिर चुप।
फिर गुलमोहर ने खुद को छुड़ाया, चादर लपेटकर उठी। आर्यन ने उसकी कमर पकड़कर खींचा—वो हँसते हुए उसके ऊपर गिर पड़ी। दोनों खूब हँसे।
“अरे छोड़ो… चाय बनानी है,जाने दो!”
आर्यन ने आखिरी बार उसे कसकर गले लगाया, होंठ उसके कानों पर फेरते हुए फुसफुसाया,
“जा… लेकिन चाय के बाद फिर तेरी बारी है।”
गुलमोहर शरमाकर बिस्तर से उतरी, चादर को साड़ी की तरह लपेटे किचन की ओर बढ़ गई।
पीछे से आर्यन उसे देखता रहा—उसकी कमर की लय, बालों का लहराना, नंगे पैरों की आहट।
उसका दिल भर आया।
ये सुबह… ये औरत… अब उसकी पूरी जिंदगी थी।
कुछ देर बाद अदरक वाली चाय की तेज़, मदहोश कर देने वाली खुशबू पूरे कमरे में फैल गई।
दोनों सोफे पर एक-दूसरे से सटकर बैठे, प्याले हाथ में लिए धीरे-धीरे सिप कर रहे थे। लेकिन आर्यन का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।
गुलमोहर ने तुरंत पकड़ लिया।
“क्या हुआ? रात की यादें इतनी जल्दी भूल गए?” उसने मज़ाक में कहा, पर आँखों में चिंता थी।
आर्यन ने प्याला रखा और उसके दोनों हाथ अपने हाथों में ले लिए।
“पागल, वो यादें तो उम्र भर नहीं भूलेंगी। लेकिन सच ये है कि तू घर से भागी हुई है। कमला और वो बूढ़ा हरिया ठाकुर तुझे ढूँढ रहे होंगे। पचास हजार की कीमत तय हुई थी न? वो इतनी आसानी से हार नहीं मानेंगे। हमें अभी से सावधान रहना है।”
गुलमोहर का चेहरा पीला पड़ गया।
“आर्यन… डर लग रहा है। अगर वो लोग मुझे वापस ले गए तो…”
आर्यन ने उसे बाँहों में खींच लिया।
“डर मत। आज हम एक ऐसा कदम उठाएँगे कि साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। मेरा बचपन का दोस्त रोहित श्रीवास्तव SP है। उससे मिलते हैं। वो सब संभाल लेगा।”
गुलमोहर ने उसकी छाती से चिपकते हुए राहत की साँस ली।
“ठीक है… मैं तैयार हूँ।”
दोनों ने जल्दी से तैयार होकर निकले। गुलमोहर ने वही काली साड़ी पहनी—सादा, पर उसके गेहुए रंग पर इतनी खूबसूरत लग रही थी कि आर्यन की साँस रुक गई।
हल्का काजल, छोटी-सी बिंदी, होंठों पर गुलाबी चमक।
आर्यन ने उसे देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “चल, मेरी जान। आज तेरी जिंदगी की नई शुरुआत है।”
रोहित का बंगला शहर के सबसे पॉश इलाके में था। दरवाजे पर सिपाही सलूट ठोंक रहे थे।
रोहित ने आर्यन को देखते ही गले लगा लिया।
“अबे यार! और ये…?” उसकी नज़र गुलमोहर पर ठहर गई।
आर्यन ने गुलमोहर का हाथ थामकर आगे बढ़ाया।
“रोहित, ये गुलमोहर है। मेरी गुलमोहर। तेरी भाभी। आज हम तेरी मदद माँगने आए हैं।”
रोहित ने भौंहें चढ़ाईं, फिर हँसते हुए अंदर ले गया।
तीनों सोफे पर बैठे।
आर्यन ने एक साँस में सारी कहानी सुना दी—गाँव, सौतेली माँ का ज़ुल्म, पचास हजार में बेचने की साजिश, हरिया ठाकुर, भागकर शहर आना।
गुलमोहर ने बीच-बीच में हिम्मत जुटाकर अपनी बात जोड़ी। उसकी आँखें नम थीं, पर आवाज़ में अब हिम्मत ज्यादा थी।
रोहित ने पूरी बात ध्यान से सुनी।
फिर गहरी साँस लेकर बोला,
“ये सीधा ट्रैफिकिंग का केस है। हरिया ठाकुर का नाम मैं जानता हूँ—पैसा और गुंडे दोनों हैं। लेकिन कानून के सामने सब बराबर।”
उसने फोन उठाया, स्टेनो को बुलाया।
“आज ही FIR। धारा 370, 366A, 34—सब लगा दो। लड़की को तुरंत प्रोटेक्शन। दो महिला कांस्टेबल और एक सादी वर्दी वाला गार्ड फ्लैट पर लगाओ। ठाकुर के खिलाफ तलाशी और गिरफ्तारी का वारंट तैयार करो।”
फिर गुलमोहर की ओर मुड़ा और मुस्कुराया,
“तू टेंशन मत ले भाभी। जब तक मैं ज़िंदा हूँ, कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता।”
गुलमोहर की आँखों से खुशी के आँसू छलक आए।
“थैंक यू, भैया… आप भगवान हैं।”
रोहित ने आर्यन की ओर देखा।
“सुनो, एक काम करो। अभी के अभी मनाली निकल जाओ। मैं वहाँ पाँच सितारा होटल बुक करवा दूँगा—दस दिन का स्टे। जमकर हनीमून मनाओ। घर मत आना। चाबी मुझे दे दो। जो चाहिए, वहाँ भेज दूँगा। फ्लैट पर हमारा आदमी रहेगा—कोई नज़दीक भी आया तो पकड़ लिया जाएगा। जाओ, खुलकर एंजॉय करो भाभी के साथ। मेरी गारंटी है।”
आर्यन ने राहत की साँस ली।
“धन्यवाद भाई। तूने जान बचा ली।”
रोहित ने गले लगाया,
“भाई का फर्ज। बस रास्ते में सावधान रहना।”
गुलमोहर ने रोहित को प्रणाम किया,
“शुक्रिया भैया… आपके जैसे भाई हों तो डर ही नहीं लगता।”
चाबी सौंपी गई। दोनों कार में सवार हुए और मनाली की राह पकड़ ली।
रास्ते में गुलमोहर ने आर्यन का हाथ कसकर थामा हुआ था।
कार हाइवे पर रफ्तार पकड़ चुकी थी।
सामने बर्फीले पहाड़ नज़दीक आते जा रहे थे—और उनकी नई ज़िंदगी शुरू होने वाली थी।
कहानी जारी रहेगी....
✍️निहाल सिंह


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