23-11-2025, 10:06 AM
Episode 4: बदलाव की हवा
संजय आत्मविश्वास से भरा था। उसके शरीर पर सिर्फ़ काले रंग की ब्रीफ थी। उसके अंदर अभी-अभी जवान हुआ लंड का उभार ही उसे 'L' ग्रुप का मेंबर घोषित कर रहा था।
नीरज की नज़र संजय के उभार पर ही अटक रही थी। उसने ऊपर से ही उसके लौड़ा का साइज़ नाप लिया और अपनी लिस्ट में धीरे से उसका नाम लिख लिया। पर उस वक़्त वह बोला कुछ नहीं। राजीव का डर था, और अभी माहौल ख़ुद सभी सीनियर्स के नंगे होने का बना था।
तभी संजय फिर बोला, "सर, है हिम्मत अपना बदन दिखाने की? अगर नहीं, तो तुम्हारा कोई नियम नहीं माना जाएगा।"
"कोई भी जूनियर आपकी कोई बात नहीं मानेगा। बोलो दोस्तो," संजय ने अपने जूनियर भाइयों से कहा, "मेरा साथ दो, हम इनका मुकाबला कर सकते हैं।"
एक हल्की-सी आवाज़ आई। फिर एक और, फिर एक और। "हाँ, हम तुम्हारे साथ हैं, रस्तोगी!" सभी जूनियर एक साथ बोले।
राजीव ने मौसम में बदलाव को समझा और सोचा, 'अगर ये सब एक साथ हो गए तो मुझे इन सबसे हाथ धोना पड़ेगा।'
राजीव अपनी जगह से खड़ा हुआ और अपनी पैंट खोलने लगा। पैंट खुलकर नीचे गिर गई।
"इतना काफ़ी है या फिर...?"
"उतारो, उतारो, चड्डी उतारो!" सभी जूनियर एक साथ चिल्लाए।
राजीव ने कहा, "मैं अकेले नहीं उतारूँगा, मेरे साथ यह संजय भी उतारेगा।"
संजय राजीव के पास जाकर साथ में खड़ा हो गया। दोनों ने एक साथ अपनी चड्डियाँ उतार दीं।
दोनों के लंड एक समान थे—मोटे और लंबे।
राजीव की नज़र संजय के हथियार पर गई, फिर उसने संजय का पिछवाड़ा देखा।
"संजय, तुम तो संपूर्ण मर्द हो," राजीव की आवाज़ में प्रशंसा के भाव थे।
संजय ने भी राजीव का लौड़ा देखकर कहा, "सर, वैसे आप भी मस्त औजार रखते हैं।"
दोनों हँस दिए। अब माहौल बिल्कुल दोस्ताना हो गया था। राजीव ने बाक़ी के भी कपड़े उतार दिए और बाक़ी के सीनियर्स को भी ऐसा करने को कहा। राजीव का आदेश पाकर सभी सीनियर्स भी नंगे हो गए।
"अब हम सब एक जैसे हो गए हैं। सीनियर-जूनियर का भेद मिट गया है। अब से कभी किसी की नंगा परेड नहीं होगी। कोई ग्रुप नहीं बनेगा। सब फ्री हैं। जिसे जिसके साथ जो करना है, वह कर सकता है।"
तभी नीरज ने संजय का लंड पकड़ा और साइज़ का जायज़ा लिया, जो कि राजीव ने भी देखा।
"क्यों, अच्छा लगा क्या नीरज?"
"राजीव, ये तो बिल्कुल तुम्हारे जैसा है! ये कॉपी हैं एक-दूसरे की।"
सभी हँस दिए।
सब एक-दूसरे से मिल रहे थे, बात कर रहे थे, नई दोस्ती बनाने लगे।
सभी सीनियर्स नंगे ही कुर्सियों पर बैठे थे। नए-नए जवान हुए लौड़ों को देखकर अपनी आँखें सेंक रहे थे। राजीव ने संजय को अपने पास बिठा लिया था।
इसका यह मतलब था कि संजय राजीव का चहेता बन गया था।
उस हॉल से सबसे पहले सभी सीनियर्स निकले, बिल्कुल नंगे। उनके हाथों में उनके कपड़े थे।
सभी जूनियर्स अभी भी वहीं मौजूद थे। उन सबने संजय को अपने कंधों पर उठाकर बिठा लिया। संजय बिल्कुल नंगा जूनियर्स पर बैठा था। उसका हथियार झूल रहा था।
सभी संजय को अपना सेवियर मानकर उसका गुणगान कर रहे थे। संजय एक ही रात में इतना फ़ेमस हो गया था कि लड़कों ने उसे अपनी आँखों पर बिठा लिया। हर लड़का 'संजय! संजय!' कर रहा था।
उसके बाद वह सब अपने-अपने डॉरमेट्री में चले गए। उस रात किसी भी जूनियर की आँखों में नींद नहीं आई। सब जगे पड़े थे। आज जीवन में पहली बार उनकी नज़रों ने एक साथ ऐसा नज़ारा देखा था।
(यही वजह थी इस बैच के लड़कों में संजय इतना फ़ेमस था और सभी उसकी इज़्ज़त करते थे। तभी सिर्फ़ संजय का नाम भर लेने से रोहन सीनियर्स के हाथों से बच पाया। जिस संजय ने जूनियर ईयर में सबको बचाया था, उसके छोटे भाई पर कोई कैसे हाथ लगाता?)
राजीव का कमरा: नई योजना
राजीव के पास अभी भी कुछ सीनियर्स बैठे थे। कोई गहन चर्चा हो रही थी। चर्चा का केंद्र बिंदु हॉल में हुई सीनियर-जूनियर की मीटिंग थी। राजीव अभी भी अपने कमरे में नंगा बैठा था, हालाँकि अंडरवियर पहने था।
एक सीनियर रमेश ने मज़ाक में कहा, "फ़र्स्ट ईयर के बाद आज फ़ाइनल ईयर में राजीव को फिर से नंगा देखा। बड़ी लालसा थी तुझे फिर बिना कपड़ों के देखूँ।"
राजीव बोला, "फ़र्स्ट ईयर में तो सब नंगे थे। हमें तो सिर्फ़ अपने सीनियर्स ने देखा था। बाक़ी हम सब तो नज़रें झुकाए खड़े थे। फिर कब तुमने मुझे देखा?"
"देखा था मैंने जब तुमने अपनी चड्डी उतारी थी सीनियर्स के सामने," रमेश ने हँसते हुए कहा।
"वैसे रमेश, अपन दोनों ने एक साथ मिलकर कई बार मस्त-मस्त लौंडे चोदे हैं, भूल गए क्या?" राजीव ने अपने अंडरवियर पर अपने अंड खोजते हुए कहा।
"तब बात अलग है। उस वक़्त मेरा ध्यान तुम पर कम और कमसिन लौंडे पर ज़्यादा रहता था।" रमेश अपने दाँत दिखाता हँस पड़ा।
तभी नीरज ने बात का सिलसिला आज के मुद्दे पर मोड़ा।
नीरज बोला, "राजीव, आज जो कुछ भी हुआ, उससे ऐसा लगता है कि अपने फ़ाइनल ईयर हमें सूखे-सूखे ही रहना पड़ेगा। तुम्हें किसी नई कली नहीं मिलेगी और मुझ जैसे को संजय जैसा हथियार।"
तभी राजीव बोला, "ऐसा नहीं है नीरज। जब हम जूनियर्स थे तो हमारे सीनियर्स ने हमारे साथ जैसा व्यवहार किया, हमने भी अपने जूनियर्स से वैसा सलूक किया।"
"नंगा परेड, ग्रुप डिवीज़न, फिर चुन-चुनकर जूनियर्स का लुत्फ़ लेना... ऐसा ही तो होता आया था, ऐसा ही हमने किया।"
"पर अब ज़माना बदल गया है। अब किसी पर ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं कर सकते, जब तक उसमें उसकी मर्ज़ी शामिल न हो। उस संजय ने मेरी आँखें खोल दी।"
"और पैंट भी," रमेश खिलखिलाकर हँस पड़ा।
"मुझे बदलाव करना पड़ा। पर देखना, आज जो भी हुआ, यानी कि जो आज मैं जूनियर्स के सामने नंगा हुआ हूँ, उसका फल हमें पूरे साल मिलता रहेगा। मीठे-मीठे फल, रसदार फल।"
"जब हम फ़ेयरवेल की पार्टी में होंगे, तो यही जूनियर्स हमसे गले मिल-मिलकर रोएँगे।
Just wait and watch, नीरज।"
नीरज के सर के ऊपर से चला गया जो भी राजीव ने कहा था, पर उसकी आँखों में संजय का जवान हथौड़ा घूम रहा था।
"राजीव, एक बात बोलूँ? मुझे संजय के लंड की सील तुड़वानी है अपने अंदर लेकर। प्लीज़, मुझे संजय का लंड दिलवा दो," नीरज ने राजीव से विनीत करते हुए कहा।
"तुम्हें उसके लंड की सील तोड़नी है और मुझे उसकी गांड की। क्या माखन-सा पिछवाड़ा है ज़ालिम का!,
राजीव ने नशीली आवाज़ में कहा, "पर वो इतनी जल्दी काबू नहीं आने वाला। थोड़ा वक़्त लगेगा उसे शीशी में उतरते। वो अलग मिट्टी का बना हुआ लगता है।"
इधर संजय को सभी लड़के अपने कंधों पर लिए संजय के रूम में ले जा रहे थे।
उसका रूम पार्टनर था ध्रुव मेहरा ('G' ग्रुप वाला)।
"वाह, क्या रूममेट की जोड़ी है, ध्रुव मेहरा और संजय की! एक G तो दूसरा सुपर L!"
आगे-आगे क्या करामातें होती हैं, देखना दिलचस्प रहेगा।
कहानी जारी रहेगी...
संजय आत्मविश्वास से भरा था। उसके शरीर पर सिर्फ़ काले रंग की ब्रीफ थी। उसके अंदर अभी-अभी जवान हुआ लंड का उभार ही उसे 'L' ग्रुप का मेंबर घोषित कर रहा था।
नीरज की नज़र संजय के उभार पर ही अटक रही थी। उसने ऊपर से ही उसके लौड़ा का साइज़ नाप लिया और अपनी लिस्ट में धीरे से उसका नाम लिख लिया। पर उस वक़्त वह बोला कुछ नहीं। राजीव का डर था, और अभी माहौल ख़ुद सभी सीनियर्स के नंगे होने का बना था।
तभी संजय फिर बोला, "सर, है हिम्मत अपना बदन दिखाने की? अगर नहीं, तो तुम्हारा कोई नियम नहीं माना जाएगा।"
"कोई भी जूनियर आपकी कोई बात नहीं मानेगा। बोलो दोस्तो," संजय ने अपने जूनियर भाइयों से कहा, "मेरा साथ दो, हम इनका मुकाबला कर सकते हैं।"
एक हल्की-सी आवाज़ आई। फिर एक और, फिर एक और। "हाँ, हम तुम्हारे साथ हैं, रस्तोगी!" सभी जूनियर एक साथ बोले।
राजीव ने मौसम में बदलाव को समझा और सोचा, 'अगर ये सब एक साथ हो गए तो मुझे इन सबसे हाथ धोना पड़ेगा।'
राजीव अपनी जगह से खड़ा हुआ और अपनी पैंट खोलने लगा। पैंट खुलकर नीचे गिर गई।
"इतना काफ़ी है या फिर...?"
"उतारो, उतारो, चड्डी उतारो!" सभी जूनियर एक साथ चिल्लाए।
राजीव ने कहा, "मैं अकेले नहीं उतारूँगा, मेरे साथ यह संजय भी उतारेगा।"
संजय राजीव के पास जाकर साथ में खड़ा हो गया। दोनों ने एक साथ अपनी चड्डियाँ उतार दीं।
दोनों के लंड एक समान थे—मोटे और लंबे।
राजीव की नज़र संजय के हथियार पर गई, फिर उसने संजय का पिछवाड़ा देखा।
"संजय, तुम तो संपूर्ण मर्द हो," राजीव की आवाज़ में प्रशंसा के भाव थे।
संजय ने भी राजीव का लौड़ा देखकर कहा, "सर, वैसे आप भी मस्त औजार रखते हैं।"
दोनों हँस दिए। अब माहौल बिल्कुल दोस्ताना हो गया था। राजीव ने बाक़ी के भी कपड़े उतार दिए और बाक़ी के सीनियर्स को भी ऐसा करने को कहा। राजीव का आदेश पाकर सभी सीनियर्स भी नंगे हो गए।
"अब हम सब एक जैसे हो गए हैं। सीनियर-जूनियर का भेद मिट गया है। अब से कभी किसी की नंगा परेड नहीं होगी। कोई ग्रुप नहीं बनेगा। सब फ्री हैं। जिसे जिसके साथ जो करना है, वह कर सकता है।"
तभी नीरज ने संजय का लंड पकड़ा और साइज़ का जायज़ा लिया, जो कि राजीव ने भी देखा।
"क्यों, अच्छा लगा क्या नीरज?"
"राजीव, ये तो बिल्कुल तुम्हारे जैसा है! ये कॉपी हैं एक-दूसरे की।"
सभी हँस दिए।
सब एक-दूसरे से मिल रहे थे, बात कर रहे थे, नई दोस्ती बनाने लगे।
सभी सीनियर्स नंगे ही कुर्सियों पर बैठे थे। नए-नए जवान हुए लौड़ों को देखकर अपनी आँखें सेंक रहे थे। राजीव ने संजय को अपने पास बिठा लिया था।
इसका यह मतलब था कि संजय राजीव का चहेता बन गया था।
उस हॉल से सबसे पहले सभी सीनियर्स निकले, बिल्कुल नंगे। उनके हाथों में उनके कपड़े थे।
सभी जूनियर्स अभी भी वहीं मौजूद थे। उन सबने संजय को अपने कंधों पर उठाकर बिठा लिया। संजय बिल्कुल नंगा जूनियर्स पर बैठा था। उसका हथियार झूल रहा था।
सभी संजय को अपना सेवियर मानकर उसका गुणगान कर रहे थे। संजय एक ही रात में इतना फ़ेमस हो गया था कि लड़कों ने उसे अपनी आँखों पर बिठा लिया। हर लड़का 'संजय! संजय!' कर रहा था।
उसके बाद वह सब अपने-अपने डॉरमेट्री में चले गए। उस रात किसी भी जूनियर की आँखों में नींद नहीं आई। सब जगे पड़े थे। आज जीवन में पहली बार उनकी नज़रों ने एक साथ ऐसा नज़ारा देखा था।
(यही वजह थी इस बैच के लड़कों में संजय इतना फ़ेमस था और सभी उसकी इज़्ज़त करते थे। तभी सिर्फ़ संजय का नाम भर लेने से रोहन सीनियर्स के हाथों से बच पाया। जिस संजय ने जूनियर ईयर में सबको बचाया था, उसके छोटे भाई पर कोई कैसे हाथ लगाता?)
राजीव का कमरा: नई योजना
राजीव के पास अभी भी कुछ सीनियर्स बैठे थे। कोई गहन चर्चा हो रही थी। चर्चा का केंद्र बिंदु हॉल में हुई सीनियर-जूनियर की मीटिंग थी। राजीव अभी भी अपने कमरे में नंगा बैठा था, हालाँकि अंडरवियर पहने था।
एक सीनियर रमेश ने मज़ाक में कहा, "फ़र्स्ट ईयर के बाद आज फ़ाइनल ईयर में राजीव को फिर से नंगा देखा। बड़ी लालसा थी तुझे फिर बिना कपड़ों के देखूँ।"
राजीव बोला, "फ़र्स्ट ईयर में तो सब नंगे थे। हमें तो सिर्फ़ अपने सीनियर्स ने देखा था। बाक़ी हम सब तो नज़रें झुकाए खड़े थे। फिर कब तुमने मुझे देखा?"
"देखा था मैंने जब तुमने अपनी चड्डी उतारी थी सीनियर्स के सामने," रमेश ने हँसते हुए कहा।
"वैसे रमेश, अपन दोनों ने एक साथ मिलकर कई बार मस्त-मस्त लौंडे चोदे हैं, भूल गए क्या?" राजीव ने अपने अंडरवियर पर अपने अंड खोजते हुए कहा।
"तब बात अलग है। उस वक़्त मेरा ध्यान तुम पर कम और कमसिन लौंडे पर ज़्यादा रहता था।" रमेश अपने दाँत दिखाता हँस पड़ा।
तभी नीरज ने बात का सिलसिला आज के मुद्दे पर मोड़ा।
नीरज बोला, "राजीव, आज जो कुछ भी हुआ, उससे ऐसा लगता है कि अपने फ़ाइनल ईयर हमें सूखे-सूखे ही रहना पड़ेगा। तुम्हें किसी नई कली नहीं मिलेगी और मुझ जैसे को संजय जैसा हथियार।"
तभी राजीव बोला, "ऐसा नहीं है नीरज। जब हम जूनियर्स थे तो हमारे सीनियर्स ने हमारे साथ जैसा व्यवहार किया, हमने भी अपने जूनियर्स से वैसा सलूक किया।"
"नंगा परेड, ग्रुप डिवीज़न, फिर चुन-चुनकर जूनियर्स का लुत्फ़ लेना... ऐसा ही तो होता आया था, ऐसा ही हमने किया।"
"पर अब ज़माना बदल गया है। अब किसी पर ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं कर सकते, जब तक उसमें उसकी मर्ज़ी शामिल न हो। उस संजय ने मेरी आँखें खोल दी।"
"और पैंट भी," रमेश खिलखिलाकर हँस पड़ा।
"मुझे बदलाव करना पड़ा। पर देखना, आज जो भी हुआ, यानी कि जो आज मैं जूनियर्स के सामने नंगा हुआ हूँ, उसका फल हमें पूरे साल मिलता रहेगा। मीठे-मीठे फल, रसदार फल।"
"जब हम फ़ेयरवेल की पार्टी में होंगे, तो यही जूनियर्स हमसे गले मिल-मिलकर रोएँगे।
Just wait and watch, नीरज।"
नीरज के सर के ऊपर से चला गया जो भी राजीव ने कहा था, पर उसकी आँखों में संजय का जवान हथौड़ा घूम रहा था।
"राजीव, एक बात बोलूँ? मुझे संजय के लंड की सील तुड़वानी है अपने अंदर लेकर। प्लीज़, मुझे संजय का लंड दिलवा दो," नीरज ने राजीव से विनीत करते हुए कहा।
"तुम्हें उसके लंड की सील तोड़नी है और मुझे उसकी गांड की। क्या माखन-सा पिछवाड़ा है ज़ालिम का!,
राजीव ने नशीली आवाज़ में कहा, "पर वो इतनी जल्दी काबू नहीं आने वाला। थोड़ा वक़्त लगेगा उसे शीशी में उतरते। वो अलग मिट्टी का बना हुआ लगता है।"
इधर संजय को सभी लड़के अपने कंधों पर लिए संजय के रूम में ले जा रहे थे।
उसका रूम पार्टनर था ध्रुव मेहरा ('G' ग्रुप वाला)।
"वाह, क्या रूममेट की जोड़ी है, ध्रुव मेहरा और संजय की! एक G तो दूसरा सुपर L!"
आगे-आगे क्या करामातें होती हैं, देखना दिलचस्प रहेगा।
कहानी जारी रहेगी...
✍️निहाल सिंह


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