23-11-2025, 09:56 AM
सुबह 6 बजे।
हॉस्टल की घंटी बजी, लेकिन पूजा पहले से जाग रही थी।
उसने रात में सिर्फ़ दो घंटे सोया था। बाकी समय तकिए को गले लगाकर रोती रही।
टी-शर्ट अभी भी वही गुलाबी थी, लेकिन अब उसमें राजू की साँसों की गंध थी।
उसने आईने के सामने खड़ी होकर खुद को देखा।
गले में मंगलसूत्र, लेकिन उसकी चमक आज फीकी लग रही थी।
बूब्स पर हल्के लाल निशान – राजू के दाँतों के।
निप्पल्स अभी भी थोड़े सूजे हुए।
उसने उँगलियों से छुआ – एक सिहरन दौड़ गई।
फिर आँसू आ गए।
“मैंने क्या कर दिया…”
उसने फुसफुसाया।
फोन में राजू का मैसेज आया था रात 3 बजे।
**राजू:** पूजा… वो पल… कभी भूलूँगा नहीं। तेरे बूब्स… वो स्वाद… वो गर्मी… मैं आज भी काँप रहा हूँ। थैंक यू। तू मेरी जिंदगी में आई और सब बदल दिया। ❤️
पूजा ने मैसेज देखा और फोन दीवार पर दे मारा।
फोन टूट गया। उसके मन मे अजीब से विचार थे। वो अपने पति को आज दूसरी बार धोका दे चुकी थी।
जयपुर, जून की दोपहर।
धूप इतनी तेज़ कि सड़क पर चलते हुए लगता था पैर तलवे जल जाएँगे।
पूजा का फोन जो टूट चुका था वो ठीक कराने के लिए वो दुकान देख रही थी।
नज़दीकी दुकान थी – “मुन्ना मोबाइल रिपेयरिंग”, गली नंबर 7, मानसरोवर।
छोटी सी दुकान, बाहर बोर्ड पर लाल-नीले अक्षरों में लिखा था – “सभी ब्रांड्स ठीक होते हैं, 10 मिनट में।”
पूजा साधारण सलवार-सूट में थी – हल्का पीला कॉटन, दुपट्टा कंधे पर।
गर्मी में पसीना आ रहा था, सूट हल्का सा चिपक गया था।
ब्रालेट पहनी थी, लेकिन पतली कॉटन में हल्का उभार दिख ही रहा था।
दुकान में घुसी तो अंदर सिर्फ़ एक लड़का था –
**मुन्ना**।
उम्र 25-26, दुबला-पतला, आँखें लाल-लाल (शायद रात भर जागने की वजह से), होंठों पर हमेशा एक घटिया सी मुस्कान।
टी-शर्ट में “SWAG” लिखा था।
“हाँ मैडम, क्या प्रॉब्लम है?”
पूजा ने फोन आगे बढ़ाया।
“टूट गया है स्क्रीन टूट गयी। देख लो प्लीज़। नई लगा दो"
मुन्ना ने फोन लिया।
उसकी नज़रें फोन से पहले पूजा पर गईं –
गले से नीचे, छाती पर, कमर पर, फिर जाँघों पर।
मन ही मन बोला,
“वाह क्या माल है यार… शादीशुदा लग रही है, मंगलसूत्र भी है… लेकिन बॉडी तो कमाल की। बूब्स एकदम गोल… कमर पतली… ये तो चखना बनता है।”
“मैडम, 10 मिनट रुक जाओ, मैं चेक करता हूँ।”
पूजा बाहर कुर्सी पर बैठ गई।
दुकान में दो-तीन और कस्टमर थे, धीरे-धीरे चले गए।
मुन्ना ने फोन लैपटॉप से connect किया।
गैलरी खोली।
पहले तो नॉर्मल फोटो… फिर…
अंदर पूजा की कुछ सेल्फीज़ – ब्रा में, नाइट गाउन में, एक दो में बूब्स का क्लोज़अप।
और चैट्स… राजू के साथ।
बूब्स की फोटो… वो रात की।
मुन्ना की आँखें चमक उठीं।
लंड तुरंत खड़ा हो गया।
“अरे वाह… सती-सावित्री बनती है, लेकिन अंदर से तो आग है। ये तो मेरे हाथ लग गई।”
10 मिनट बाद मुन्ना बाहर आया।
हाथ में फोन।
“मैडम… फोन तो ठीक हो जाएगा। लेकिन… पेमेंट थोड़ा ज़्यादा लगेगा।”
पूजा परेशान, “कितना?”
मुन्ना ने चारों तरफ़ देखा, फिर पास आकर धीरे से बोला,
“हर रोज़… 1 घंटा। मेरे साथ।”
पूजा चौंकी।
“ये क्या बदतमीज़ी है?!”
मुन्ना हँसा। फोन उसकी तरफ़ घुमाया। स्क्रीन पर पूजा की नंगी बूब्स की फोटो।
“ओहो… सती सावित्री बन रही हो? शादीशुदा होकर AC वाले हरामी को अपनी बूब्स की फोटो भेज रही हो? और वो चैट्स… वाह मैडम, वाह।”
पूजा का चेहरा सफ़ेद पड़ गया।
हाथ-पैर ठंडे।
“ये… ये तुम… कैसे…?”
“अरे चुप… अब मेरी बात मान लो। वरना ये सब… तेरे पति को, तेरे कॉलेज ग्रुप में, फेसबुक पर… सबको भेज दूँगा। वायरल कर दूँगा। समझी?”
पूजा की आँखें भर आईं।
होंठ काँप रहे थे।
“प्लीज़… ऐसा मत करना… मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी…”
मुन्ना पास आया। उसकी साँसें पूजा के चेहरे पर।
“तो आज दोपहर 3 बजे आ जाना। दुकान बंद कर दूँगा। 1 घंटा। बस। फिर फोन तुझे वापस। और फोटोज़ डिलीट। वरना…”
पूजा रोते हुए फोन लिए बिना बाहर निकल गई।
सड़क पर चलते हुए आँसू नहीं रुक रहे थे।
लोग देख रहे थे, लेकिन उसे कुछ दिख नहीं रहा था।
“संजय… मैंने क्या कर दिया…
अब क्या होगा…
मैं मर क्यों नहीं जाती…”
दोपहर के 3 बजने में अभी ढाई घंटे बाकी थे।
और पूजा के पास कोई रास्ता नहीं दिख रहा था।
उसकी ज़िंदगी में अंधेरा अभी से छा गया था।
हॉस्टल की घंटी बजी, लेकिन पूजा पहले से जाग रही थी।
उसने रात में सिर्फ़ दो घंटे सोया था। बाकी समय तकिए को गले लगाकर रोती रही।
टी-शर्ट अभी भी वही गुलाबी थी, लेकिन अब उसमें राजू की साँसों की गंध थी।
उसने आईने के सामने खड़ी होकर खुद को देखा।
गले में मंगलसूत्र, लेकिन उसकी चमक आज फीकी लग रही थी।
बूब्स पर हल्के लाल निशान – राजू के दाँतों के।
निप्पल्स अभी भी थोड़े सूजे हुए।
उसने उँगलियों से छुआ – एक सिहरन दौड़ गई।
फिर आँसू आ गए।
“मैंने क्या कर दिया…”
उसने फुसफुसाया।
फोन में राजू का मैसेज आया था रात 3 बजे।
**राजू:** पूजा… वो पल… कभी भूलूँगा नहीं। तेरे बूब्स… वो स्वाद… वो गर्मी… मैं आज भी काँप रहा हूँ। थैंक यू। तू मेरी जिंदगी में आई और सब बदल दिया। ❤️
पूजा ने मैसेज देखा और फोन दीवार पर दे मारा।
फोन टूट गया। उसके मन मे अजीब से विचार थे। वो अपने पति को आज दूसरी बार धोका दे चुकी थी।
जयपुर, जून की दोपहर।
धूप इतनी तेज़ कि सड़क पर चलते हुए लगता था पैर तलवे जल जाएँगे।
पूजा का फोन जो टूट चुका था वो ठीक कराने के लिए वो दुकान देख रही थी।
नज़दीकी दुकान थी – “मुन्ना मोबाइल रिपेयरिंग”, गली नंबर 7, मानसरोवर।
छोटी सी दुकान, बाहर बोर्ड पर लाल-नीले अक्षरों में लिखा था – “सभी ब्रांड्स ठीक होते हैं, 10 मिनट में।”
पूजा साधारण सलवार-सूट में थी – हल्का पीला कॉटन, दुपट्टा कंधे पर।
गर्मी में पसीना आ रहा था, सूट हल्का सा चिपक गया था।
ब्रालेट पहनी थी, लेकिन पतली कॉटन में हल्का उभार दिख ही रहा था।
दुकान में घुसी तो अंदर सिर्फ़ एक लड़का था –
**मुन्ना**।
उम्र 25-26, दुबला-पतला, आँखें लाल-लाल (शायद रात भर जागने की वजह से), होंठों पर हमेशा एक घटिया सी मुस्कान।
टी-शर्ट में “SWAG” लिखा था।
“हाँ मैडम, क्या प्रॉब्लम है?”
पूजा ने फोन आगे बढ़ाया।
“टूट गया है स्क्रीन टूट गयी। देख लो प्लीज़। नई लगा दो"
मुन्ना ने फोन लिया।
उसकी नज़रें फोन से पहले पूजा पर गईं –
गले से नीचे, छाती पर, कमर पर, फिर जाँघों पर।
मन ही मन बोला,
“वाह क्या माल है यार… शादीशुदा लग रही है, मंगलसूत्र भी है… लेकिन बॉडी तो कमाल की। बूब्स एकदम गोल… कमर पतली… ये तो चखना बनता है।”
“मैडम, 10 मिनट रुक जाओ, मैं चेक करता हूँ।”
पूजा बाहर कुर्सी पर बैठ गई।
दुकान में दो-तीन और कस्टमर थे, धीरे-धीरे चले गए।
मुन्ना ने फोन लैपटॉप से connect किया।
गैलरी खोली।
पहले तो नॉर्मल फोटो… फिर…
अंदर पूजा की कुछ सेल्फीज़ – ब्रा में, नाइट गाउन में, एक दो में बूब्स का क्लोज़अप।
और चैट्स… राजू के साथ।
बूब्स की फोटो… वो रात की।
मुन्ना की आँखें चमक उठीं।
लंड तुरंत खड़ा हो गया।
“अरे वाह… सती-सावित्री बनती है, लेकिन अंदर से तो आग है। ये तो मेरे हाथ लग गई।”
10 मिनट बाद मुन्ना बाहर आया।
हाथ में फोन।
“मैडम… फोन तो ठीक हो जाएगा। लेकिन… पेमेंट थोड़ा ज़्यादा लगेगा।”
पूजा परेशान, “कितना?”
मुन्ना ने चारों तरफ़ देखा, फिर पास आकर धीरे से बोला,
“हर रोज़… 1 घंटा। मेरे साथ।”
पूजा चौंकी।
“ये क्या बदतमीज़ी है?!”
मुन्ना हँसा। फोन उसकी तरफ़ घुमाया। स्क्रीन पर पूजा की नंगी बूब्स की फोटो।
“ओहो… सती सावित्री बन रही हो? शादीशुदा होकर AC वाले हरामी को अपनी बूब्स की फोटो भेज रही हो? और वो चैट्स… वाह मैडम, वाह।”
पूजा का चेहरा सफ़ेद पड़ गया।
हाथ-पैर ठंडे।
“ये… ये तुम… कैसे…?”
“अरे चुप… अब मेरी बात मान लो। वरना ये सब… तेरे पति को, तेरे कॉलेज ग्रुप में, फेसबुक पर… सबको भेज दूँगा। वायरल कर दूँगा। समझी?”
पूजा की आँखें भर आईं।
होंठ काँप रहे थे।
“प्लीज़… ऐसा मत करना… मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी…”
मुन्ना पास आया। उसकी साँसें पूजा के चेहरे पर।
“तो आज दोपहर 3 बजे आ जाना। दुकान बंद कर दूँगा। 1 घंटा। बस। फिर फोन तुझे वापस। और फोटोज़ डिलीट। वरना…”
पूजा रोते हुए फोन लिए बिना बाहर निकल गई।
सड़क पर चलते हुए आँसू नहीं रुक रहे थे।
लोग देख रहे थे, लेकिन उसे कुछ दिख नहीं रहा था।
“संजय… मैंने क्या कर दिया…
अब क्या होगा…
मैं मर क्यों नहीं जाती…”
दोपहर के 3 बजने में अभी ढाई घंटे बाकी थे।
और पूजा के पास कोई रास्ता नहीं दिख रहा था।
उसकी ज़िंदगी में अंधेरा अभी से छा गया था।


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