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Adultery गुलमोहर... एक अल्हड़ सी लड़की
#7
Episode 4: आज फिर तुम पे प्यार आया हैं...

शाम के धुँधलके में फ्लैट की खिड़की से चाँदनी झाँक रही थी, हवा में एक मीठी उत्तेजना घुली हुई।

कमरे में हल्की-सी पीली रोशनी फैल गई, जिसने उनके माहौल को और भी रोमांटिक बना दिया।

आर्यन मुस्कुराया, उसने गुलमोहर को अपने पास से थोड़ा दूर किया। "रुको, मेरे पास तुम्हारे लिए एक और सरप्राइज है।"
गुलमोहर की आँखें उत्सुकता से चमक उठीं।
"क्या है?"

आर्यन उठकर अलमारी की ओर बढ़ा। उसने वह छिपा हुआ गिफ्ट पैकेट निकाला, जिसे उसने लॉन्जरी सेक्शन के पास खरीदा था।
उसने पैकेट गुलमोहर की ओर बढ़ाया।

"खोलो इसे," आर्यन ने कहा, उसकी आँखों में एक शरारत भरी चमक थी।

गुलमोहर ने धीरे से पैकेट खोला। अंदर देखकर उसकी साँसें थम गईं।

यह ब्लैक कलर की प्लेन सिल्क साड़ी थी—इतनी स्मूथ और चिकनी कि स्पर्श करने से ही कामुक सिहरन दौड़ जाए।
गुलमोहर के गालों पर एकदम से लाली दौड़ गई। वह समझ गई कि यह साड़ी सिर्फ़ कपड़ा नहीं, बल्कि आर्यन की गहरी इच्छा और रोमांटिक कल्पना का प्रतीक है।

आर्यन उसके पास आया और फुसफुसाया, "यह साड़ी... मैंने तुम्हारे लिए खरीदी थी। जब मैंने इसे देखा, तो मैंने सोचा... ये साड़ी तुम पर बहुत अच्छी लगेगी। मेरे प्यार का इज़हार करने का इससे बेहतर तरीका नहीं हो सकता।"

आर्यन ने पैकेट उसके हाथ में रखा।
गुलमोहर ने उत्सुकता से खोला—अंदर काली साड़ी, प्लेन सिल्क की, इतनी चिकनी कि स्पर्श से ही सिहरन दौड़ जाए। काला रंग उसके गेहुंए रंग पर फबेगा, उसके कर्व्स को उभार देगा।

"ये... इतनी खूबसूरत... लेकिन मेरे लिए?" वह फुसफुसाई, उंगलियाँ साड़ी पर फेरते हुए।

आर्यन पास सरका, उसके कान में फुसफुसाया, "हाँ, तुम्हारे लिए। पहन लो... देखूँ, मेरी गुल काली रात की तरह कैसी लगेगी।"
उसकी साँसें गुलमोहर के गले पर लगीं।

गुलमोहर शर्मा गई, लेकिन आँखों में चमक—उसका मन जानता था।
"ठीक है..." आर्यन मुस्कुराया, "जाओ, बेडरूम में। मैं बाहर इंतजार करूँगा।"
गुलमोहर बेडरूम में चली गई, दरवाजा बंद किया।

आईने के सामने खड़ी, पिला सूट उतारा—नंगा बदन फिर उजागर, स्तन निप्पल्स सख्त, चूत दिन की कल्पनाओं से हल्की गीली।
पहले ब्रा-पैंटी पहन ली—ब्लैक लेस, साड़ी के लिए परफेक्ट। पेटीकोट बाँधा
फिर साड़ी... काली सिल्क उसके बदन पर लिपटी।

साड़ी लपेटी—कमर पर चिपक गई, उसके पतले कूल्हों को उभारते हुए। ब्लाउज पहना—गहरा नेक, उसके स्तनों की गहराई दिखाती।
अब श्रृंगार... काजल लगाया, आँखें काली लकीरों से गहरी। लिपस्टिक लगाई—गुलाबी, होंठ चमकदार।
बिंदी चिपकाई—लाल बिंदु माथे पर। बालों में जूड़ा बनाया, गजरा लगाया—मोगरे की खुशबू।
हाथों में चूड़ियाँ पहनी—खनकती, कलाई पर। कान में झुमके लटकाए।
आईने में देखा—काली साड़ी उसके रंग पर चमक रही। स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे।
पूरा श्रृंगार... जैसे कोई दुल्हन सज रही हो। मन धड़का, लेकिन उत्तेजना—डर मिश्रित सुख की आस।
गहरी साँस ली, और फुसफुसाई, "आर्यन... आ जाओ... देख लो।"

आर्यन बाहर इंतज़ार करते-करते लगभग पागल हो रहा था।

उसकी आवाज़ सुनते ही वो धीरे से दरवाज़ा खोलकर अंदर आया और एकदम ठिठक गया।
गुलमोहर काली साड़ी में ऐसी लग रही थी मानो कोई सपनों की परी साकार हो गई हो।

उसकी आँखें उसकी काया पर जम गईं – कमर पर चिपकी सिल्क, नाभि की गहराई, उभरे हुए स्तन, काजल से गहरी आँखें।
उसका लंड पैंट में पहले से ही तना हुआ था, अब तो और ज़ोर से धड़कने लगा।

आर्यन और गुलमोहर नजरें आपस में मिली तो गुलमोहर शरम से लाल हो गई।

आर्यन का होश तो कब का उड़ चुका था।

वो दो कदम चला, फिर रुक गया। कमरे में सिर्फ़ साँसों की आवाज़।
आर्यन ने गहरी साँस ली और फुसफुसाया…

“गुल… मेरी गुल तुम्हें देखकर आज पहली बार लगा कि मैंने पूरी कायनात जीत ली है…
क्योंकि मेरी तो पूरी कायनात अभी मेरे सामने खड़ी है।

ये काली साड़ी, ये काजल, ये शर्माई हुई आँखें…
सब कुछ ऐसा है कि मुझे बस एक ही ख्याल आ रहा है –
मैं तुम्हें अभी इसी वक्त अपने अंदर ले लूँ…
और फिर कभी बाहर न निकलूँ।”

गुलमोहर की साँस रुक गई।

बस इतना ही।
फिर चुप्पी।

फिर एक लंबा, गहरा किस आर्यन ने गुल के होठों पर किया।

किस के बाद आर्यन ने गुल के कानों में फुसफुसाते हुवे कहा,"मुझे तुम्हें चोदने का मन हो रहा है…
पर सिर्फ़ चोदने का नहीं, मेरी जान।

मुझे तुम्हें प्यार करने का मन हो रहा है… इतना प्यार कि तुम्हारे जिस्म के हर रोम में मेरा नाम उतर जाए।
आज रात मुझे तुम्हारे जिस्म पर पूरा हक़ चाहिए।
रात भर तुम्हें चूमने, चाटने, सहलाने और फिर तुम्हारी कोख में खुद को खाली करने का हक़ चाहिए।
मुझे वो आहें चाहिए जो सिर्फ़ मेरे नाम की हों… वो सिसकारियाँ जो सिर्फ़ मेरे धक्कों से निकलें… वो चीख जो तब निकलेगी जब मैं तुम्हें अपने नीचे दबाकर तुम्हारी चूत को अपने लंड से भर दूँगा।
बता दो गुल… क्या आज रात तुम मुझे ये हक़ देती हो?”

गुलमोहर की आँखें नम हो गईं, होंठ काँपे। वो आगे बढ़ी, आर्यन की छाती से माथा टिका दिया और फुसफुसाई…
“हाँ आर्यन… हाँ…
ये रात तुम्हारी है। मैं तुम्हारी हूँ।
मुझे अपना बना लो… पूरी तरह।
मुझे प्यार करो…
मेरे जिस्म पर, मेरी पूरी रात पर… सिर्फ़ तुम्हारा हक़।”

आर्यन ने उसे गले लगा लिया – हग इतना टाइट कि दोनों की धड़कनें एक हो गईं।

फिर उसने उसके माथे को चूमा, कान में कहा, “अब धीरे-धीरे… मैं तुम्हें अपना बनाता हूँ।”
वो उसे आईने के सामने ले गया। पीछे से खड़ा होकर कमर में हाथ डाले।

साड़ी की सिल्क पर उँगलियाँ फिसलने लगीं। चूड़ियाँ खनक उठीं।

उसने उसके कान में जीभ फेरी, “तेरी ये महक… मुझे पागल कर रही है।”

हाथ ऊपर सरके, ब्लाउज के नीचे से स्तनों को सहलाने लगा – निप्पल्स पहले से सख्त।
गुलमोहर सिहर उठी, “आर्यन… आह… छूओ ना ऐसे…”

फिर उसने उसे घुमाया, पल्लू धीरे से सरकाया। स्तनों की घाटी चमकने लगी।
होंठ उसके कंधे पर, जीभ से चाटते हुए नीचे।

एक हाथ नीचे, साड़ी के ऊपर से चूत पर। उँगलियाँ गोल-गोल।

“देख आईने में… कितनी गीली हो रही है मेरे लिए…”

गुलमोहर की टाँगें काँपीं, “आर्यन… उफ्फ… मैं मर जाऊँगी…”

आर्यन ने उसे बिस्तर पर लिटाया। साड़ी-पेटीकोट ऊपर उठाया।

पैंटी गीली थी। उसने पैंटी साइड की और दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं – धीरे-धीरे, फिर तेज़।

क्लिट पर अंगूठा। गुलमोहर की कमर ऊपर उठने लगी, “और तेज… आह… मैं आने वाली हूँ…”
"तुम कितनी खूबसूरत हो, गुल... आज रात तुम मेरी हो," आर्यन ने गरम साँसों से कहा।

आर्यन का लंड पहले से ही तन चुका था, पैंट को चीरने को बेताब।

वो जल्दी से अपनी शर्ट और पैंट उतार फेंका, सिर्फ अंडरवियर ही बचा।
अब आर्यन गुल के स्तन चूसने लगा, जैसे कोई भूखा शावक। गुल के हाथ उसके बालों में उलझ गए, और वो खुद को उसके करीब खींचने लगी।
नीचे साड़ी पूरी तरह सरक चुकी थी, और उसके पैंटी में नमी महसूस हो रही थी।
आर्यन का हाथ नीचे सरका, और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। "गीली हो गई हो, मेरी जान... तेरी चूत तो रस टपक रही है," उसने शरारती मुस्कान के साथ कहा।

गुल ने शर्म से आँखें बंद कर लीं, लेकिन उसका शरीर सच बोल रहा था।
आर्यन ने अपनी अंडरवियर भी उतारी, और उसका मोटा, लंबा लंड बाहर कूद पड़ा। गुल ने चुपके से झाँका, और उसकी साँसें तेज हो गईं।
"ये... इतना बड़ा..." वो बुदबुदाई। आर्यन ने हँसते हुए कहा, "चिंता मत करो, धीरे धीरे समा जाएगा वो तुझ में।"
अब दोनों पूरे नंगे एक दूसरे की बाहों में मचलने लगे।

जब आर्यन को लंड का दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ तो वो गुल के पैरों को फैलाकर बीच में बैठ गया और अपने लंड के सिरे को उसकी चूत के द्वार पर रगड़ने लगा।

गुल का शरीर काँप रहा था, पहली बार का डर और उत्साह एक साथ। "

तैयार हो?" आर्यन ने पूछा। गुल ने सिर हिलाया, और आर्यन ने धीरे से अंदर धकेला। लेकिन उत्साह में तेज धक्का लग गया – सील टूट गई।
"आह्ह्ह!" गुल चीखी, दर्द से आँखें नम हो गईं।

खून की छोटी से लहर बिस्तर पर बहने लगी, लेकिन आर्यन रुक गया। वो उसे गले लगा लिया, "सॉरी, मेरी जान... चूत में दर्द हो रहा है?"
गुल ने सिसकते हुए कहा, "थोड़ा... लेकिन जारी रखो।"

आर्यन ने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए, हर बार गहराई तक। दर्द धीरे-धीरे सुख में बदल गया। गुल की चीखें अब आहों में बदल चुकी थीं – "हाँ... आर्यन... तेज... चूत को और चोदो!"

कमरा उनकी साँसों और तालों से गूँज उठा।

आर्यन के तेज धक्कों से गुल का बदन उछल रहा था, उसके स्तन लहरा रहे थे। वो उसके होंठ चूसता रहा, और नीचे से अपना लंड पूरी ताकत से चूत के अंदर-बाहर कर रहा था।

गुल के नाखून उसके पीठ पर खरोंच मारने लगे, "मैं... आ रही हूँ..." और एक झटके में वो चरम पर पहुँच गई। उसकी चूत सिकुड़ गई, आर्यन को और कसकर जकड़ लिया।

आर्यन भी अब कंट्रोल खो चुका था।

करीब 20 मिनट की चुदाई करने के बाद , वो गुल की चूत के अंदर ही फूट पड़ा, गरम वीर्य की धारें छोड़ते हुए।
दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटे लेट गए। गुल ने उसके सीने पर सिर रखा, "पहली रात... यादगार थी।"
आर्यन ने चूमते हुए कहा, "और भी आएँगी, मेरी गुल। तेरी चूत हमेशा मेरी रहेगी।"

इस पहली चुदाई ने प्यार गहरा किया—सील टूटने का दर्द सुख में बदला, अब वो एक थे, खतरे से लड़ने को तैयार।
उधर हरिया के गुंडे  शहर में फैले गुलमोहर को खोज रहे थे। हर जगह तलाश की ।एक ने मॉल के पास लड़की देखी, उसे लगा कि गुल मिल गई लेकिन वो गुल नहीं थी ।

ठाकुर फोन पर चिल्लाया, "ढूँढो! कल सुबह तक। वरना सालों एक एक के मुंह में अपना लौड़ा डाल दूंगा।
हरिया किसी भी कीमत पर गुल को पकड़ना चाहता था। जब तक गुल नहीं मिलेगी , तब तक सौतेली मां कमला की चूत में लन्ड दे रखेगा ।

कहानी जारी रहेगी...
✍️निहाल सिंह 
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Episode 4: आज फिर तुम पे प्यार आया हैं... - by Nihal1504 - 21-11-2025, 01:08 PM



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