20-11-2025, 09:28 PM
आज दिन की घटनाओ के बाद पूजा का बूरा हाल था।
राजू का msg आया :** पूजा, आज फिर नींद नहीं आ रही। बीवी का फोन आया था, पुरानी बातें याद आ गईं। वो पहले बहुत शरमाती थी, फिर धीरे-धीरे खुल गई। तू भी तो पहले शरमाती थी ना?
पूजा को लगा आज वो भी थोड़ा मजे कर ले।
**पूजा:** हाँ राजू… बहुत। पहले तो लाइट भी बंद करवाती थी। संजय को बोलती थी “ऐसे मत देखो”… पर वो मानते ही नहीं थे।
**राजू:** हाहा… बीवी भी पहले ऐसा ही करती थी। कहती थी “बत्ती बंद करो”। मैं कहता था “अरे अंधेरे में तो मज़ा नहीं आता, तेरी शक्ल देखने में ही मज़ा है”। फिर वो हँस के लिपट जाती थी। तू भी लिपट जाती होगी ना?
**पूजा:** लिपटना तो पड़ता था… वरना संजय छोड़ते ही नहीं थे। कभी पीछे से पकड़ लेते थे, कान में फुसफुसाते थे “आज कुछ ज़्यादा ही मन कर रहा है”… फिर मैं हँस के कहती थी “जितना मन करे कर लो”।
**राजू:** अरे वाह… तू तो खुल के खेलती थी फिर। बीवी भी एक बार खुली तो फिर पीछे नहीं हटी। कभी ऊपर चढ़ जाती थी, कहती थी “आज मैं चलाऊँगी”। मैं बस देखता रहता था। मज़ा अलग ही आता था। तू कभी ऊपर चढ़ी?
**पूजा:** (शर्मा के इमोजी) राजू… हाँ चढ़ी हूँ। संजय बहुत मना करते थे पहले, कहते थे “मैं कर लूँगा”। पर एक रात मैंने ज़िद की। फिर वो बस लेटे रहे और मैं… जो मन किया किया। बहुत शरमा रहे थे वो।
**राजू:** अरे बाप रे… मर्द भी शरमाता है कभी-कभी। मैं तो बीवी के ऊपर चढ़ने पर पागल हो जाता था। उसकी कमर पकड़ के बस देखता रहता। उसकी साँसें तेज़… बाल बिखरे हुए… आँखें बंद। जैसे कोई फिल्म चल रही हो। तू कैसी लगती होगी ऐसा करते वक़्त?
**पूजा:** संजय कहते थे मेरे बाल बिखर जाएँ तो बहुत सुंदर लगती हूँ। मैं जब ऊपर होती थी तो वो मेरे कूल्हों पर हाथ रखते थे, धीरे-धीरे दबाते थे। फिर मैं तेज़ हो जाती थी… वो बस “पूजा… धीरे…” कहते थे, पर मुझे रोकते नहीं थे।
**राजू:** उफ्फ… अब तो दिल तेज़ धड़कने लगा। बीवी भी जब तेज़ हो जाती थी तो मैं बस उसकी कमर पकड़ के साथ देता था। कभी-कभी तो इतना मज़ा आता था कि सुबह तक नहीं रुकते थे। एक बार तो तीन-तीन बार… फिर भी मन नहीं भरा। तू और संजय भी ऐसे ही पागल हो जाते होंगे ना?
**पूजा:** हाँ… शादी के पहले साल तो हम दोनों पागल थे। कभी रात भर, कभी सुबह-सुबह। संजय कहते थे “तेरे बिना नींद नहीं आती”। मैं हँस के कहती थी “नींद की बात मत करो, कुछ और करो”। फिर वो हँस के मुझे बाहों में भर लेते थे।
**राजू:** अब तो जलन हो रही है पूजा। तेरे संजय बड़े लकी हैं। मैं तो बस यादों में जी रहा हूँ। कभी-कभी बीवी फोन पर भी शरमाती है, कहती है “बच्चे पास हैं, बाद में बात करेंगे”। पर मैं जानता हूँ वो भी मिस करती है… वही पुराना वाला मज़ा।
**पूजा:** हाँ राजू… मैं भी मिस करती हूँ। संजय जब आखिरी बार आए थे तो दो दिन तक कमरे से बाहर ही नहीं निकले। खाना भी बेड पर मँगवाया था। अब तो बस यादें हैं… और ये चैट।
**राजू:** यादें ही तो हैं पूजा… पर इन यादों में भी कितना मज़ा है। तू जब बात करती है ना, लगता है वही पुराने दिन लौट आए।
**पूजा:** तू भी तो वही पुराने दिन याद दिलाता है राजू… अब सो जा। नहीं तो सुबह फिर थकान होगी।
**राजू:** ठीक है पूजा… पर सपने में तो मिलेंगे ना? वही पुराने वाले अंदाज़ में। ❤️
**पूजा:** (सिर्फ़ एक लाल दिल भेजा और ऑफलाइन हो गई)
दोनों के फोन साइड टेबल पर रखे थे।
दोनों की साँसें तेज़।
दोनों की आँखें बंद।
और दोनों के दिमाग़ में…
पुरानी यादें और नई कल्पनाएँ एक साथ चल रही थीं।
राजू का msg आया :** पूजा, आज फिर नींद नहीं आ रही। बीवी का फोन आया था, पुरानी बातें याद आ गईं। वो पहले बहुत शरमाती थी, फिर धीरे-धीरे खुल गई। तू भी तो पहले शरमाती थी ना?
पूजा को लगा आज वो भी थोड़ा मजे कर ले।
**पूजा:** हाँ राजू… बहुत। पहले तो लाइट भी बंद करवाती थी। संजय को बोलती थी “ऐसे मत देखो”… पर वो मानते ही नहीं थे।
**राजू:** हाहा… बीवी भी पहले ऐसा ही करती थी। कहती थी “बत्ती बंद करो”। मैं कहता था “अरे अंधेरे में तो मज़ा नहीं आता, तेरी शक्ल देखने में ही मज़ा है”। फिर वो हँस के लिपट जाती थी। तू भी लिपट जाती होगी ना?
**पूजा:** लिपटना तो पड़ता था… वरना संजय छोड़ते ही नहीं थे। कभी पीछे से पकड़ लेते थे, कान में फुसफुसाते थे “आज कुछ ज़्यादा ही मन कर रहा है”… फिर मैं हँस के कहती थी “जितना मन करे कर लो”।
**राजू:** अरे वाह… तू तो खुल के खेलती थी फिर। बीवी भी एक बार खुली तो फिर पीछे नहीं हटी। कभी ऊपर चढ़ जाती थी, कहती थी “आज मैं चलाऊँगी”। मैं बस देखता रहता था। मज़ा अलग ही आता था। तू कभी ऊपर चढ़ी?
**पूजा:** (शर्मा के इमोजी) राजू… हाँ चढ़ी हूँ। संजय बहुत मना करते थे पहले, कहते थे “मैं कर लूँगा”। पर एक रात मैंने ज़िद की। फिर वो बस लेटे रहे और मैं… जो मन किया किया। बहुत शरमा रहे थे वो।
**राजू:** अरे बाप रे… मर्द भी शरमाता है कभी-कभी। मैं तो बीवी के ऊपर चढ़ने पर पागल हो जाता था। उसकी कमर पकड़ के बस देखता रहता। उसकी साँसें तेज़… बाल बिखरे हुए… आँखें बंद। जैसे कोई फिल्म चल रही हो। तू कैसी लगती होगी ऐसा करते वक़्त?
**पूजा:** संजय कहते थे मेरे बाल बिखर जाएँ तो बहुत सुंदर लगती हूँ। मैं जब ऊपर होती थी तो वो मेरे कूल्हों पर हाथ रखते थे, धीरे-धीरे दबाते थे। फिर मैं तेज़ हो जाती थी… वो बस “पूजा… धीरे…” कहते थे, पर मुझे रोकते नहीं थे।
**राजू:** उफ्फ… अब तो दिल तेज़ धड़कने लगा। बीवी भी जब तेज़ हो जाती थी तो मैं बस उसकी कमर पकड़ के साथ देता था। कभी-कभी तो इतना मज़ा आता था कि सुबह तक नहीं रुकते थे। एक बार तो तीन-तीन बार… फिर भी मन नहीं भरा। तू और संजय भी ऐसे ही पागल हो जाते होंगे ना?
**पूजा:** हाँ… शादी के पहले साल तो हम दोनों पागल थे। कभी रात भर, कभी सुबह-सुबह। संजय कहते थे “तेरे बिना नींद नहीं आती”। मैं हँस के कहती थी “नींद की बात मत करो, कुछ और करो”। फिर वो हँस के मुझे बाहों में भर लेते थे।
**राजू:** अब तो जलन हो रही है पूजा। तेरे संजय बड़े लकी हैं। मैं तो बस यादों में जी रहा हूँ। कभी-कभी बीवी फोन पर भी शरमाती है, कहती है “बच्चे पास हैं, बाद में बात करेंगे”। पर मैं जानता हूँ वो भी मिस करती है… वही पुराना वाला मज़ा।
**पूजा:** हाँ राजू… मैं भी मिस करती हूँ। संजय जब आखिरी बार आए थे तो दो दिन तक कमरे से बाहर ही नहीं निकले। खाना भी बेड पर मँगवाया था। अब तो बस यादें हैं… और ये चैट।
**राजू:** यादें ही तो हैं पूजा… पर इन यादों में भी कितना मज़ा है। तू जब बात करती है ना, लगता है वही पुराने दिन लौट आए।
**पूजा:** तू भी तो वही पुराने दिन याद दिलाता है राजू… अब सो जा। नहीं तो सुबह फिर थकान होगी।
**राजू:** ठीक है पूजा… पर सपने में तो मिलेंगे ना? वही पुराने वाले अंदाज़ में। ❤️
**पूजा:** (सिर्फ़ एक लाल दिल भेजा और ऑफलाइन हो गई)
दोनों के फोन साइड टेबल पर रखे थे।
दोनों की साँसें तेज़।
दोनों की आँखें बंद।
और दोनों के दिमाग़ में…
पुरानी यादें और नई कल्पनाएँ एक साथ चल रही थीं।


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