20-11-2025, 09:20 PM
पुजा अब राजू के साथ msg मे बात करती थी। कभी चाय भी बना के पिला देती जब राजू कुछ काम के लिए आता तो।
अब दोनु बहुत खुल गए थे।
रात मे हॉस्टल का कमरा शांत था। Renu सो चुकी थी, उसके बेड से हल्की खर्राटे की आवाज़ आ रही थी।
पूजा बेड पर सिकुड़ी हुई लेटी थी, नाइट गाउन का कालर हल्का सा खुला, लेकिन वो उसे ठीक करने की जहमत न उठा रही थी।
उसका मन भारी था — विक्रम की यादें अभी भी काँटे की तरह चुभ रही थीं, संजय का फोन आया था लेकिन वो छोटा सा था, बस "लव यू" और "सो जाओ"।
अकेलापन... वो खालीपन जो रात को और गहरा हो जाता था।
फोन वाइब्रेट हुआ।
राजू का मैसेज।
राजू: पूजा, नींद नहीं आ रही। आज दिन भर काम किया, लेकिन शाम को चाय पीते वक़्त तेरी याद आई। तू तो चाय बना रही थी ना उस दिन? वो स्वाद... मन भा गया। अब लगता है, रोज़ वैसी चाय पीनी चाहिए।
पूजा मुस्कुराई। हल्के से।
राजू की सादगी... वो गंदे हाथों वाला इलेक्ट्रिशियन, लेकिन मैसेजेस में इतना सच्चा।
उसने उँगलियाँ स्क्रीन पर फेरीं। डबल मीनिंग? क्यों ना थोड़ा मज़ाक करें, बस हल्का सा। सेक्स की बातें? नहीं, वो लाइन पार नहीं करेगी। लेकिन फ्लर्ट... वो तो दोस्ती का मसाला है ना?
पूजा: हाहा राजू, चाय का स्वाद इतना अच्छा था? या कुछ और था जो मन भा गया? मैं तो सोच रही थी, तू काम में व्यस्त रहता होगा, लेकिन मैसेजेस से लगता है तेरा मन कहीं और भटकता है। बताओ, क्या राज़ है?
राजू का जवाब तुरंत।
राजू: अरे पूजा, राज़ तो तू ही है। चाय में तो चीनी डाली थी ना, लेकिन मीठा तो तेरा बात करने का अंदाज़ था। जैसे कोई मिश्री घोल दी हो। अब रात को अकेला पड़ा हूँ, लगता है कोई पास हो तो वो मीठास मिले। तू ऐसी ही मीठी बातें कर दे तो नींद आ जाए।
पूजा— मीठास... चाय की, या... कुछ और?
उसने तकिया सिर के नीचे दबाया। दिल में एक हल्की सी किलकार। संजय को मिस कर रही थी, लेकिन ये बातें... ये तो बस समय काटने का तरीका था।
पूजा: मीठी बातें? राजू, तू तो कवि हो गया। लेकिन सावधान, मीठा ज्यादा खाओगे तो दाँत खराब हो जाएँगे। या शायद तू चाहता है कि मैं रोज़ चाय बनाऊँ, ताकि वो मीठास तुझे मिलती रहे? पास होकर... हवा में घुली हुई।
राजू: हाहा, दाँत तो गुटखे से ही खराब हो चुके हैं पूजा। लेकिन तेरी चाय का मीठा तो कभी खराब नहीं होगा। हाँ, रोज़ बनाना। पास होकर...
पूजा बेड पर लेटी थी, मोबाइल स्क्रीन की नीली रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी।
उसने हल्का नाइट गाउन पहना था — पतला कॉटन का, जो उसके बदन से ढीला लटक रहा था। लेकिन गर्मी की वजह से वो आधी बाजू ऊपर चढ़ा ली थी, और गला थोड़ा खुला था।
उसकी छाती धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थी। संजय का आखिरी मैसेज पढ़ा — “सो जाओ जान, कल सुबह कॉल।”
उसने “गुड नाइट” टाइप किया, लेकिन भेजा नहीं।
दिल में वो अपराधबोध अभी भी था, लेकिन आज कुछ और था — एक अजीब सी बेचैनी। विक्रम को इग्नोर करने के बाद, राजू की बातें... वो सहानुभूति से शुरू हुईं, लेकिन अब...
फोन वाइब्रेट हुआ।
राजू का मैसेज।
राजू:- पूजा, सो गई क्या? आज मन उदास हो गया। बीवी की याद इतनी आ रही है कि नींद नहीं आ रही। उसके साथ बिस्तर पर लेटना, उसके बदन की गर्मी महसूस करना... वो सब मिस करता हूँ।
पूजा का दिल धड़का।
उसने एक गहरी साँस ली। उँगलियाँ स्क्रीन पर रुकीं।
क्या जवाब दूँ?
लेकिन अकेलापन... संजय की कमी... और राजू की सादगी।
वो इतना सच्चा लगता था। गंदा इलेक्ट्रिशियन, लेकिन दिल से...
पूजा: नहीं राजू, जाग रही हूँ। मुझे भी वही हाल है। संजय की बाहों की याद आती है। रात को अकेली लेटी हूँ तो लगता है कोई पास हो।
राजू का जवाब तुरंत आया।
राजू: हाँ पूजा... बस वही तो। उसके बदन को छूना, उसके सीने पर सिर रखना। कभी-कभी तो हाथ उसके पेट पर रखकर सोता था। वो गर्माहट... अब तो सपनों में भी आती है। तू भी तो जानती होगी ना? शादीशुदा का वो मज़ा...
पूजा के गाल लाल हो गए।
उसकी साँस तेज़।
नाइट गाउन का कंधा सरक गया, कंधे की गोरी त्वचा स्क्रीन की रोशनी में चमक रही थी।
उसने मन ही मन सोचा — ये क्या हो रहा है? लेकिन उँगलियाँ चल पड़ीं।
फ्लर्ट? हाँ, लेकिन सेक्सी। वो खुद को रोक नहीं पाई।
पूजा: हाँ राजू... जानती हूँ। संजय का हाथ मेरी कमर पर... वो स्पर्श। रात को वो धीरे से छूते थे, तो पूरा बदन सिहर जाता था। अब तो सपने में भी वो गर्मी महसूस होती है। तू अपनी बीवी के साथ ऐसा ही करता होगा ना?
राजू का मैसेज में देरी हुई। शायद सोच रहा हो। फिर...
राजू: पूजा... तू तो बहुत खुलकर बात करती है। हाँ, करता था। उसके बालों में उँगलियाँ फेरना, फिर धीरे से गर्दन पर किस... वो सिहरन। लेकिन अब... तू ऐसी बातें कर रही है तो लग रहा है जैसे तू पास ही है। तेरा क्या हाल है? तू भी तो सुंदर है, तेरी कमर इतनी पतली... अगर मैं पास होता तो...
पूजा का बदन गर्म हो गया।
उसने बेडशीट को पकड़ा। नाइट गाउन की स्कर्ट ऊपर सरक गई, जाँघें नंगी।
उसकी चूत में हल्की सी गुदगुदी।
“ये गलत है,” सोचा, लेकिन...
पूजा: राजू... शरमा गए क्या? हाँ, मेरी कमर पतली है, संजय को बहुत पसंद है। वो कहते हैं, हाथ रखते ही घेर में आ जाती है। तू अपनी बीवी की क्या पसंद करता था? बताओ ना... दोस्त हैं हम।
राजू: पूजा... तू तो आग लगा रही है। अच्छा, बीवी के कूल्हे... गोल, मोटे। रात को पीछे से पकड़ता था, तो लगता था पूरा संसार हाथ में है। और उसके होंठ... चूमने का मज़ा। लेकिन तू... तेरे होंठ गुलाबी हैं ना? अगर चूमूँ तो...
पूजा ने फोन सीने से दबा लिया।
उसकी साँसें भारी। एक हाथ अनजाने में नाइट गाउन के अंदर चला गया, पेट पर फेरा। नाभि के चारों ओर।
सेक्सी... हाँ, ये फ्लर्ट अब सेक्सी हो गया था।
पूजा: राजू... तू भी तो शरारती हो गया। चल सो जा।
राजू: पूजा... सॉरी अगर... लेकिन तू... कमाल है। गुड नाइट।
“मैं क्या कर रही हूँ?”
Chats का सिलसिला चलता रहा।
### राजू और पूजा के चैट्स
(सेक्सी फील के साथ, लेकिन बिना सीधे सेक्स की बात किए, सिर्फ़ डबल मीनिंग और फ्लर्ट)
**रात 11:15**
**राजू:** पूजा, आज बहुत थक गया। पूरा दिन तारें जोड़ता रहा। अब बिस्तर पर लेटा हूँ, हाथ खाली हैं। कुछ चाहिए जो पकड़ लूँ।
**पूजा:** अरे राजू, इतनी रात को हाथ खाली क्यों रखे हो? कुछ न कुछ तो पकड़ ही लेते।
**राजू:** हाँ सोच रहा हूँ… कुछ मुलायम सा, गर्म सा, जो हाथ में अच्छे से आ जाए। तुम्हारे पास कोई आइडिया है? ?
**पूजा:** मेरे पास तो बहुत कुछ है… पर अभी दूर है। तुम खुद ही ढूंढ लो ना, कुछ ऐसा जो रात भर साथ रहे।
**राजू:** दूर वाली चीज़ें ही सबसे अच्छी लगती हैं पूजा… पास आ जाएँ तो फिर छोड़ने का मन नहीं करता।
**पूजा:** छोड़ना भी नहीं चाहिए ना… जो पसंद आ जाए, उसे अच्छे से पकड़ के रखना चाहिए।
**राजू:** बिल्कुल… मैं तो पक्का पकड़ के रखता हूँ। कभी फिसलने नहीं देता। तुम भी तो वैसी ही हो ना? जो पसंद आए उसे ज़ोर से पकड़ लेती हो?
**पूजा:** हाँ राजू… बहुत ज़ोर से। कभी-कभी तो इतना ज़ोर कि निशान पड़ जाए। ?
**राजू:** उफ्फ… निशान की बात कर दी। अब तो नींद उड़ गई।
**पूजा:** अरे नींद उड़ाऊँ तो मैं भी नहीं सो पाऊँगी। तुम्हें सुला दूँ क्या? लोरी सुनाऊँ?
**राजू:** लोरी नहीं पूजा… बस थोड़ा पास आकर लेट जाओ, अपने आप नींद आ जाएगी। तुम्हारी गर्मी से।
**पूजा:** गर्मी तो मुझे भी बहुत लग रही है आज… पंखा भी नहीं ठंडक दे रहा।
**राजू:** पंखा क्या ठंडक देगा… असली ठंडक तो किसी के पास लेटने से मिलती है। सट के।
**पूजा:** सट के ठंडक मिलती है या और गर्मी बढ़ जाती है राजू? ?
**राजू:** पहले गर्मी बढ़ती है पूजा… फिर इतनी ठंडक मिलती है कि सुबह तक चैन की नींद आती है।
**पूजा:** सुबह तक? इतनी लंबी ठंडक?
**राजू:** हाँ… कभी-कभी तो सुबह भी नहीं छोड़ना चाहता। बस और थोड़ा… और थोड़ा…
**पूजा:** अरे बाप रे… तुम तो बहुत लालची हो गए हो।
**राजू:** लालच तो करना ही पड़ता है पूजा… जो चीज़ दूर हो और इतनी प्यारी हो, उसे पास लाने का लालच तो बनता है।
**पूजा:** दूर की चीज़ें पास आने में टाइम लेती हैं राजू… धैर्य रखो।
**राजू:** धैर्य है पूजा… बस कभी-कभी हाथ अपने आप आगे बढ़ जाते हैं। रोकना मुश्किल हो जाता है।
**पूजा:** हाथ को रोकना सीखो राजू… नहीं तो एक दिन पकड़ लिया जाएगा। ?
**राजू:** पकड़ में आना बुरा नहीं लगता पूजा… अगर पकड़ने वाली तुम जैसी हो तो।
**पूजा:** अच्छा जी… अब बहुत हो गया। सो जाओ। नहीं तो सुबह उठ नहीं पाओगे।
**राजू:** उठ तो जाऊँगा पूजा… पर कुछ चीज़ें रात भर खड़ी रहती हैं, नीचे नहीं होतीं। ?
**पूजा:** राजू!!! ?
गुड नाइट। फोन रख रही हूँ।
**राजू:** गुड नाइट पूजा… सपने में मिलना। वहीँ कुछ नहीं रोकता। ❤️
**पूजा:** (ऑनलाइन रही 5 मिनट तक, कुछ नहीं टाइप किया, फिर ऑफलाइन हो गई।
अब दोनु बहुत खुल गए थे।
रात मे हॉस्टल का कमरा शांत था। Renu सो चुकी थी, उसके बेड से हल्की खर्राटे की आवाज़ आ रही थी।
पूजा बेड पर सिकुड़ी हुई लेटी थी, नाइट गाउन का कालर हल्का सा खुला, लेकिन वो उसे ठीक करने की जहमत न उठा रही थी।
उसका मन भारी था — विक्रम की यादें अभी भी काँटे की तरह चुभ रही थीं, संजय का फोन आया था लेकिन वो छोटा सा था, बस "लव यू" और "सो जाओ"।
अकेलापन... वो खालीपन जो रात को और गहरा हो जाता था।
फोन वाइब्रेट हुआ।
राजू का मैसेज।
राजू: पूजा, नींद नहीं आ रही। आज दिन भर काम किया, लेकिन शाम को चाय पीते वक़्त तेरी याद आई। तू तो चाय बना रही थी ना उस दिन? वो स्वाद... मन भा गया। अब लगता है, रोज़ वैसी चाय पीनी चाहिए।
पूजा मुस्कुराई। हल्के से।
राजू की सादगी... वो गंदे हाथों वाला इलेक्ट्रिशियन, लेकिन मैसेजेस में इतना सच्चा।
उसने उँगलियाँ स्क्रीन पर फेरीं। डबल मीनिंग? क्यों ना थोड़ा मज़ाक करें, बस हल्का सा। सेक्स की बातें? नहीं, वो लाइन पार नहीं करेगी। लेकिन फ्लर्ट... वो तो दोस्ती का मसाला है ना?
पूजा: हाहा राजू, चाय का स्वाद इतना अच्छा था? या कुछ और था जो मन भा गया? मैं तो सोच रही थी, तू काम में व्यस्त रहता होगा, लेकिन मैसेजेस से लगता है तेरा मन कहीं और भटकता है। बताओ, क्या राज़ है?
राजू का जवाब तुरंत।
राजू: अरे पूजा, राज़ तो तू ही है। चाय में तो चीनी डाली थी ना, लेकिन मीठा तो तेरा बात करने का अंदाज़ था। जैसे कोई मिश्री घोल दी हो। अब रात को अकेला पड़ा हूँ, लगता है कोई पास हो तो वो मीठास मिले। तू ऐसी ही मीठी बातें कर दे तो नींद आ जाए।
पूजा— मीठास... चाय की, या... कुछ और?
उसने तकिया सिर के नीचे दबाया। दिल में एक हल्की सी किलकार। संजय को मिस कर रही थी, लेकिन ये बातें... ये तो बस समय काटने का तरीका था।
पूजा: मीठी बातें? राजू, तू तो कवि हो गया। लेकिन सावधान, मीठा ज्यादा खाओगे तो दाँत खराब हो जाएँगे। या शायद तू चाहता है कि मैं रोज़ चाय बनाऊँ, ताकि वो मीठास तुझे मिलती रहे? पास होकर... हवा में घुली हुई।
राजू: हाहा, दाँत तो गुटखे से ही खराब हो चुके हैं पूजा। लेकिन तेरी चाय का मीठा तो कभी खराब नहीं होगा। हाँ, रोज़ बनाना। पास होकर...
पूजा बेड पर लेटी थी, मोबाइल स्क्रीन की नीली रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी।
उसने हल्का नाइट गाउन पहना था — पतला कॉटन का, जो उसके बदन से ढीला लटक रहा था। लेकिन गर्मी की वजह से वो आधी बाजू ऊपर चढ़ा ली थी, और गला थोड़ा खुला था।
उसकी छाती धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थी। संजय का आखिरी मैसेज पढ़ा — “सो जाओ जान, कल सुबह कॉल।”
उसने “गुड नाइट” टाइप किया, लेकिन भेजा नहीं।
दिल में वो अपराधबोध अभी भी था, लेकिन आज कुछ और था — एक अजीब सी बेचैनी। विक्रम को इग्नोर करने के बाद, राजू की बातें... वो सहानुभूति से शुरू हुईं, लेकिन अब...
फोन वाइब्रेट हुआ।
राजू का मैसेज।
राजू:- पूजा, सो गई क्या? आज मन उदास हो गया। बीवी की याद इतनी आ रही है कि नींद नहीं आ रही। उसके साथ बिस्तर पर लेटना, उसके बदन की गर्मी महसूस करना... वो सब मिस करता हूँ।
पूजा का दिल धड़का।
उसने एक गहरी साँस ली। उँगलियाँ स्क्रीन पर रुकीं।
क्या जवाब दूँ?
लेकिन अकेलापन... संजय की कमी... और राजू की सादगी।
वो इतना सच्चा लगता था। गंदा इलेक्ट्रिशियन, लेकिन दिल से...
पूजा: नहीं राजू, जाग रही हूँ। मुझे भी वही हाल है। संजय की बाहों की याद आती है। रात को अकेली लेटी हूँ तो लगता है कोई पास हो।
राजू का जवाब तुरंत आया।
राजू: हाँ पूजा... बस वही तो। उसके बदन को छूना, उसके सीने पर सिर रखना। कभी-कभी तो हाथ उसके पेट पर रखकर सोता था। वो गर्माहट... अब तो सपनों में भी आती है। तू भी तो जानती होगी ना? शादीशुदा का वो मज़ा...
पूजा के गाल लाल हो गए।
उसकी साँस तेज़।
नाइट गाउन का कंधा सरक गया, कंधे की गोरी त्वचा स्क्रीन की रोशनी में चमक रही थी।
उसने मन ही मन सोचा — ये क्या हो रहा है? लेकिन उँगलियाँ चल पड़ीं।
फ्लर्ट? हाँ, लेकिन सेक्सी। वो खुद को रोक नहीं पाई।
पूजा: हाँ राजू... जानती हूँ। संजय का हाथ मेरी कमर पर... वो स्पर्श। रात को वो धीरे से छूते थे, तो पूरा बदन सिहर जाता था। अब तो सपने में भी वो गर्मी महसूस होती है। तू अपनी बीवी के साथ ऐसा ही करता होगा ना?
राजू का मैसेज में देरी हुई। शायद सोच रहा हो। फिर...
राजू: पूजा... तू तो बहुत खुलकर बात करती है। हाँ, करता था। उसके बालों में उँगलियाँ फेरना, फिर धीरे से गर्दन पर किस... वो सिहरन। लेकिन अब... तू ऐसी बातें कर रही है तो लग रहा है जैसे तू पास ही है। तेरा क्या हाल है? तू भी तो सुंदर है, तेरी कमर इतनी पतली... अगर मैं पास होता तो...
पूजा का बदन गर्म हो गया।
उसने बेडशीट को पकड़ा। नाइट गाउन की स्कर्ट ऊपर सरक गई, जाँघें नंगी।
उसकी चूत में हल्की सी गुदगुदी।
“ये गलत है,” सोचा, लेकिन...
पूजा: राजू... शरमा गए क्या? हाँ, मेरी कमर पतली है, संजय को बहुत पसंद है। वो कहते हैं, हाथ रखते ही घेर में आ जाती है। तू अपनी बीवी की क्या पसंद करता था? बताओ ना... दोस्त हैं हम।
राजू: पूजा... तू तो आग लगा रही है। अच्छा, बीवी के कूल्हे... गोल, मोटे। रात को पीछे से पकड़ता था, तो लगता था पूरा संसार हाथ में है। और उसके होंठ... चूमने का मज़ा। लेकिन तू... तेरे होंठ गुलाबी हैं ना? अगर चूमूँ तो...
पूजा ने फोन सीने से दबा लिया।
उसकी साँसें भारी। एक हाथ अनजाने में नाइट गाउन के अंदर चला गया, पेट पर फेरा। नाभि के चारों ओर।
सेक्सी... हाँ, ये फ्लर्ट अब सेक्सी हो गया था।
पूजा: राजू... तू भी तो शरारती हो गया। चल सो जा।
राजू: पूजा... सॉरी अगर... लेकिन तू... कमाल है। गुड नाइट।
“मैं क्या कर रही हूँ?”
Chats का सिलसिला चलता रहा।
### राजू और पूजा के चैट्स
(सेक्सी फील के साथ, लेकिन बिना सीधे सेक्स की बात किए, सिर्फ़ डबल मीनिंग और फ्लर्ट)
**रात 11:15**
**राजू:** पूजा, आज बहुत थक गया। पूरा दिन तारें जोड़ता रहा। अब बिस्तर पर लेटा हूँ, हाथ खाली हैं। कुछ चाहिए जो पकड़ लूँ।
**पूजा:** अरे राजू, इतनी रात को हाथ खाली क्यों रखे हो? कुछ न कुछ तो पकड़ ही लेते।
**राजू:** हाँ सोच रहा हूँ… कुछ मुलायम सा, गर्म सा, जो हाथ में अच्छे से आ जाए। तुम्हारे पास कोई आइडिया है? ?
**पूजा:** मेरे पास तो बहुत कुछ है… पर अभी दूर है। तुम खुद ही ढूंढ लो ना, कुछ ऐसा जो रात भर साथ रहे।
**राजू:** दूर वाली चीज़ें ही सबसे अच्छी लगती हैं पूजा… पास आ जाएँ तो फिर छोड़ने का मन नहीं करता।
**पूजा:** छोड़ना भी नहीं चाहिए ना… जो पसंद आ जाए, उसे अच्छे से पकड़ के रखना चाहिए।
**राजू:** बिल्कुल… मैं तो पक्का पकड़ के रखता हूँ। कभी फिसलने नहीं देता। तुम भी तो वैसी ही हो ना? जो पसंद आए उसे ज़ोर से पकड़ लेती हो?
**पूजा:** हाँ राजू… बहुत ज़ोर से। कभी-कभी तो इतना ज़ोर कि निशान पड़ जाए। ?
**राजू:** उफ्फ… निशान की बात कर दी। अब तो नींद उड़ गई।
**पूजा:** अरे नींद उड़ाऊँ तो मैं भी नहीं सो पाऊँगी। तुम्हें सुला दूँ क्या? लोरी सुनाऊँ?
**राजू:** लोरी नहीं पूजा… बस थोड़ा पास आकर लेट जाओ, अपने आप नींद आ जाएगी। तुम्हारी गर्मी से।
**पूजा:** गर्मी तो मुझे भी बहुत लग रही है आज… पंखा भी नहीं ठंडक दे रहा।
**राजू:** पंखा क्या ठंडक देगा… असली ठंडक तो किसी के पास लेटने से मिलती है। सट के।
**पूजा:** सट के ठंडक मिलती है या और गर्मी बढ़ जाती है राजू? ?
**राजू:** पहले गर्मी बढ़ती है पूजा… फिर इतनी ठंडक मिलती है कि सुबह तक चैन की नींद आती है।
**पूजा:** सुबह तक? इतनी लंबी ठंडक?
**राजू:** हाँ… कभी-कभी तो सुबह भी नहीं छोड़ना चाहता। बस और थोड़ा… और थोड़ा…
**पूजा:** अरे बाप रे… तुम तो बहुत लालची हो गए हो।
**राजू:** लालच तो करना ही पड़ता है पूजा… जो चीज़ दूर हो और इतनी प्यारी हो, उसे पास लाने का लालच तो बनता है।
**पूजा:** दूर की चीज़ें पास आने में टाइम लेती हैं राजू… धैर्य रखो।
**राजू:** धैर्य है पूजा… बस कभी-कभी हाथ अपने आप आगे बढ़ जाते हैं। रोकना मुश्किल हो जाता है।
**पूजा:** हाथ को रोकना सीखो राजू… नहीं तो एक दिन पकड़ लिया जाएगा। ?
**राजू:** पकड़ में आना बुरा नहीं लगता पूजा… अगर पकड़ने वाली तुम जैसी हो तो।
**पूजा:** अच्छा जी… अब बहुत हो गया। सो जाओ। नहीं तो सुबह उठ नहीं पाओगे।
**राजू:** उठ तो जाऊँगा पूजा… पर कुछ चीज़ें रात भर खड़ी रहती हैं, नीचे नहीं होतीं। ?
**पूजा:** राजू!!! ?
गुड नाइट। फोन रख रही हूँ।
**राजू:** गुड नाइट पूजा… सपने में मिलना। वहीँ कुछ नहीं रोकता। ❤️
**पूजा:** (ऑनलाइन रही 5 मिनट तक, कुछ नहीं टाइप किया, फिर ऑफलाइन हो गई।


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