18-06-2025, 03:58 PM
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Update -23-
साबिर से मेरी चूदाई के लिए मुलाकात का इंतजाम स्मिता ने ही किया था । उस दिन हम कॉलेज से बंक मार के साबिर की बाइक में उस पार्क में घूमने के लिए जाते हैं, जहां उस दिन गए थे । स्मिता बीच में थी और मैं बाइक पर पीछे बैठी हुई थी हमने कॉलेज ड्रेस पहन रही थी यानी की कमीज और सफेद रंग की कॉलेज स्कर्ट जो घुटनों से 2 inch ऊपर तक तक छोटी थी। college mein jyadatar ladkiyan घुटनों से नीचे तक या ज्यादा से ज्यादा घुटनों तक की स्कर्ट ही पहना करती थी लेकिन स्मिता और मैं अक्सर छोटी स्कर्ट ही पहना करती थी । स्मिता और मुझे इसके लिए प्रिंसिपल ने एक बार टोका भी था । स्मिता और अब मैं भी कॉलेज की हॉट गर्ल्स में शुमार हो गई थी । हमारी देखा देखी करके हमारे ग्रुप की और लड़कियां भी अब हमारे जैसे दिखने के लिए अपनी लंबी स्कर्ट को बेल्ट के जरिए फोर्ड कर ऊपर बांधने लगी थी । रस्ते में हम सिग्नल पे रुकते हैं तो आस पास खड़े बाइक और कार वाले वाले हमें घूरने लगते हैं । असल में आगे कुछ लोगों का जुलूस जा रहा था । अब दिल्ली है । यहां तो ये नॉर्मल होगा ही । मेरे बगल खड़ी बाइक पर बैठा अधेड़ उम्र का आदमी बार बार हमारी तरफ देख रहा था । उसके पीछे उसकी मोटी सी वाईफ थी । असल में बाइक में बैठने से हिप्स अपनी शेप ले लेते हैं । और हमारी स्कर्ट छोटी थी , इसीलिए बैठने से वो और ऊपर चढ़ गई थी । मतलब हमारी आधी से ज्यादा जांघें वहां सिग्नल पे खड़ी पब्लिक के बीच में नंगी हो रखी थीं । लोगों को एसे नजारे मुश्किल से ही नसीब होते हैं । इसीलिए हमारी बाइक के आस पास खड़े मर्द हम दोनों खूबसूरत बालाओं के हुस्न का आनंद ले रहे थे। दूसरी ओर कार में बैठे आदमियों की नजर भी हमारी जवानी पर थी । हम दोनों ये अच्छे से भांप रहे थे । साबिर को तो कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। पड़ता भी क्यों , वो हमारा भाई तो था नहीं ।
स्मिता को तो हमारी बाइक के पीछे खड़ी स्कूटी पे बैठी आंटी बड़े गुस्से से देख रही थी। स्मिता ने मुझे कहा- देख वो अंकल कैसे चोरी चोरी देख रहा है हमें ? हीही
मैं - बदमीज है, यहां तो हमें सभी ऐसे देख रहे हैं
स्मिता - मादर चोद हैं सब के सब, हमारी उम्र की तो इनकी बेटियां होंगी घर में
मैं - वही तो, कलयुग है
साबिर - तुम दोनों हॉट लग रही हो सबको यार
स्मिता - हॉट ...घंटा का हॉट ... हॉट तो मुझे लग रहा है इस गर्मी में ... इस जुलूस को भी अभी आना था।
तभी स्मिता का ध्यान उस आदमी पे जाता है। वो उसे देखती है तो पाती है कि वो लगातार हमे घूरे जा रहा था ।
स्मिता मुस्कुराते हुए उस अंकल को देखती है और उसे हाय का इशारा करती है जिसका वो गंवार कोई जवाब नहीं देता लेकिन अब वो और हमे lusty ढंग से देखने लगता है । उसकी wife स्मिता ko देख कर उस आदमी को गुस्से से आगे की ओर चलने के लिए कहती है तो वो थोड़ा आगे सरक के कहता है कि आगे कहा जाऊं , गाड़ी है,
पत्नी – यहां तुम्हें स्पेस नहीं दिख रहा, आगे चलो
आदमी – ठीक है
आदमी अनमने ढंग से ठीक हमारे आगे से थोड़ा लेफ्ट ( साइड) में आ जाता है।
वो फिर हम पे आंखे सेकने लगता है। मैं स्मिता को देख के मुस्कुराती हूं । तभी स्मिता अपनी स्कर्ट को दूसरी ओर से खींच कर और ऊपर एंड तक चढ़ा लेती है जिससे स्कर्ट और ऊपर होने पर उसकी दूधिया जांघ उसके सामने आ जाती है जो उस आदमी की तरफ थी । आदमी की नजर उसकी खुली जांघ पे जाती है और फिर उसे देख रही स्मिता के चेहरे पे । स्मिता भी उस आदमी को सेक्सी नजरों से मुस्कुराते हुए देखने लगती है। वो आगे देखने लगता है लेकिन अब वो भी थोड़ी थोड़ी देर में मुड़ मुड़ के अपनी बीवी की परवाह किए बिना हमें देख रहा था। अब तो वह चेहरे पर भी नहीं देख रहा था, सीधा स्मिता की अध नंगी जांघ की ओर ही देख रहा था। स्मिता ने उसे देख कर होंठों को गोल करते हुए फ्लाइंग किस दे दी । और अपनी जांघ को हाई लाइट करते हुए उस पे उंगली फिराने लगी । जिसे वो आदमी भी समझ गया कि वह उसे क्या दिखा रही है । आदमी ने उसके चेहरे पे देखा तो उसे स्मिता के शरारती होने का अहसास हुआ । वो भी मुसुराने लगा । तभी आंटी ने उसकी ओर देखा तो वो दूसरी ओर देखने लगी । थोड़ी देर बाद स्मिता ने उसे जानबूझकर कहा - हेलो अंकल ! किसका जुलूस निकल रहा है ये ,
तभी पीछे कार बैठा एक आदमी बोला - अरे ये पेट्रोल के जो दाम बढ़ गए हैं न , बस उसी के लिए निकाल रहे हैं
स्मिता ने उसकी ओर मुस्कुराते हुए सेक्सी ढंग से देखा - ओह ! अच्छा ! थैंक्स ! बताने के लिए ! लेकिन मैने आपसे नहीं , इनसे पूछा ...
इस पर आदमी थोड़ा खुश हुआ !
फिर अंकल भी बोला - जी ... मुझे पता नहीं जी ( थोड़ी देर चुप रहने के बाद )
... आप कौन से कॉलेज पड़ती हो
स्मिता –अंकल हम सेंट थॉमस पब्लिक कॉलेज में पढ़ते हैं
आंटी - जी तुम्हें क्या लेना है
अंकल - अरे यार, पूछ ही तो रहा हूं, तुम भी ,
आंटी - तुम्हारी नजर छोटी लौंडियों पर ही रहती है, ऐसे क्या देख रहे हो उसे , तुम्हारी बेटी की उम्र की है वो, तुम आगे देखो, ( धीरे से ) ये आजकल की लड़कियां भी ... न कपड़े पहनने का सलीका है , और न बात करने का और ये तो कुछ ज्यादा ही बदतमीज लग रही है । देखो कैसे रंडी की तरह टांगें नंगी करके बैठी है । सारे कैसे घूर रहे हैं , फिर भी शरम नहीं है बिल्कुल भी इसे ।
अंकल - अरे मैं लक्ष्मी के लिए पूछ रहा था । उसका भी तो admission कराना है इंटर में।
आंटी- ऐसे कॉलेज में ... कभी नहीं .... वो भी इन्ही की तरह हो जाएगी ।
तभी बगल में एक bulero में बैठे लड़के हमे hi बोलते हैं।
एक लड़का - hi baby
स्मिता - Hi
लड़का - व्हाट्स योर नेम, यू लुकिंग गॉर्जियस
स्मिता - थैंक यू, I am Smita,
बॉय- nice name, like you
स्मिता - थैंक you, this is my sis
लड़का– योर सिस इस also ब्यूटीफुल
स्मिता फिर चुप होके आगे देखने लग जाती है । लड़का फिर बोलता है ।
लड़का - I am viky, and this is rihaan,
स्मिता – ok
लड़का –आपको देखा है कहीं शायद
मैं – ऐसा हर लड़की को देख के कहते हो क्या आप
लड़का – नहीं नहीं , ऐसी कोई बात नहीं है, मै सच कह रहा हूं ।
स्मिता - हां देखा होगा जरूर, हम बहुत फेमस हैं , आजकल लोग बाहर कम और फोन पे ज्यादा देखते हैं, इंस्ट्राग्राम पे देखा होगा आपने, हमारा अकाउंट है वहां
लड़का - किस नाम से
स्मिता - I_am_Smita
लड़का - और आपकी बहन का
स्मिता - वहीं मेरी id में मिल जाएगा फॉलोअर लिस्ट में ।
लड़का - I will search
स्मिता - जरूर..... और फॉलो कर लेना , अपने दोस्तों को भी कहना ।
लड़का - हां बिल्कुल, a ... One minute ... Can I take your number, baby
स्मिता - I am not your baby ok,
लड़का - sorry - soory , please, हम नए हैं यहां, घूमने आएं हैं ... Socha aap hume .... If you would like to .... aa .. Isiliye maang raha tha, please don't mind,
स्मिता – नो वे , कौन हैं आप , हम ऐसे अजनबियों को अपना नंबर नहीं देते ।
लड़का – आपको कोई दिक्कत नहीं होगी, हम शरीफ लड़के हैं, आप भी एन्जॉय कर लेना
स्मिता - फोन नंबर तो नहीं है , लेकिन दूसरे नंबर हैं मेरे पास
लड़का – किसके
स्मिता – एक मेरी सैंडिल का और दूसरा पोलिस का ... अब बताओ किसका नंबर दूं ... सैंडिल का या पोलिस का ... ही ही ... सब लड़कियों से ऐसे ही मांगते हो क्या रोड पे आप ... ही ही
लड़का- ऐसी बात नहीं है ... Sorry , मैं मजाक कर रहा था
स्मिता - मै भी मजाक कर रही हूं,
लड़का - मै इंस्टा पे कॉन्टैक्ट करूंगा आपको
स्मिता - ok, जरूर, वहीं पे चैटिंग कर लेना, ओके ( उसके बाद वो और मैं आगे देखने लगती हैं )
लड़के आपस में बोलते हैं ...
पहला – नंबर मिल जाता तो मजा आ जाता
दूसरा - तीखी मिर्ची हैं दोनों .... दिल्ली की कॉलेज गर्ल्स बड़ी हॉट हैं यार ,
पहला - तभी तो नंबर मांग रहा था
पहला - जुगाड लग रही है ये दोनों ... बॉयफ्रेंड के साथ बंक मार के आईं हैं दोनों
दूसरा - पहन तो कॉलेज ड्रेस रखी है दोनों ने
पहला - हां ... हैं तो कॉलेज गर्ल्स लेकिन ये बीच वाली चुदी हुई लग रही है । देख के ही पता चल रहा है । शकल से ही राँड़ लग रही है ।
यहां दिल्ली में लड़कियां जल्दी जवान हो जाती हैं । गर्मी, शहर और लोगों की नजरें ये तीनों लड़कियों को उम्र से पहले ही बड़ा कर देते हैं ।
दूसरा - हां देख के तो लग रहा है इसे
पहला - हां... देख नहीं रहा आगे बुड्ढे का कैसे खड़ा कर रही है । बुड्ढा कैसे मुड़ मुड़ के देख रहा है इनको।
Dusra-- आजकल कॉलेज की लड़कियों को भी नहीं छोड़ रहे मर्द ।
पहला - अबे लड़कियां भी तो वैसी ही हो गई हैं । इसी को देख ले ।
दूसरा - क्यों , ऐसा क्या किया इसने
पहला - - तू तो मोबाइल चला रहा था । मैं देख रहा था इसे काफी देर से । पता है इसने क्या किया
दूसरा - क्या ... क्या किया
पहला - अपनी स्कर्ट दूसरी साइड से खींच कर एक जांघ पे ऊपर चढ़ा दी उस अंकल की ओर और फिर उंगली फिरा रही थी साली जांघ पे और उस अंकल दिखा रही थी ।
दूसरा - क्या बात कर रहा है ... सच में
पहला - हां यार ... मैने देखा अपनी आँखों से ।
दूसरा - ( हैरानी से) bahanchod ... Kya baat hai yaar. यहां तो haramai हैं यार लड़कियां।
दूसरी तरफ
मैं - तू भी ना स्मिता फालतू बात क्यों कर रही है । ना जान पहचान। देख साला हरामी सीधा नंबर मांग रहा था । इतनी हिम्मत आती कहां से है लोगों में । तू सही कह रही है , साले सब मर्द ठरकी होते हैं । थोड़ा सा दिख जाय कहीं पे , बस लार टपकाना शुरु कर देते हैं
Saabir- सब एक जैसे नहीं होते
मैं - तुम कौन सा शरीफ हो, मेरे से सुन्दर मिल जाएगी न तो उसी के पीछे भागोगे ।
स्मिता - अरे यार चुप रहो तुम दोनों ।
तभी बगल से एक क्लिक की आवाज आती है तो हम बाइक के दूसरी ओर देखते हैं, हमारे बगल पर खड़ी कार के अंदर बैठे दो आदमी फोन से हमारी फोटो खींच रहे थे । वो ऐसा क्यों कर रहे थे पता नहीं ।
मैं - स्मिता ये तो हमारी फोटो खींच रहे ... जैसे हम कोई सेलेब्रिटी हैं
स्मिता - हां हम हैं तो सेलेब्रिटी, इंस्टा के , ही ही,
मैं - लेकिन ऐसे फोटो क्यों खींच रहे हैं
स्मिता - (जोर से उन्हें सुनाते हुए कहती है )मुझे क्या पता यार, जाके हिलाएंगे रात को हमारी पिक्स देखके या
मैं - या .... या क्या
स्मिता–दिखाएंगे शायद अपनी बहनों को या बेटियों को की तुम भी ऐसे ही ड्रेस अप होके जाना कॉलेज ... ही ही
साबिर - सही बोला
मैं - तू भी ना, जब देखो उल्टी बात करती है
स्मिता - ऐसा कर तू ही जाके पूछ ले ,
मैं - लेकिन गलत है ये ऐसे ... किसी की फोटो खींचना बिना पूछे
स्मिता - खींचने दे न यार , कितने सारों के फोन पर हमारे स्क्रीनशॉट सेव होंगे , तू यह नहीं सोच रही, पता नहीं कितने लड़के हमारी फोटो देख-देख के रात को मुठ मारते होंगे , ( उसने इतने जोर से कहा कि साबिर ने भी बात सुन ली । मैं स्मिता को कोहनी मारी )
स्मिता - कोनी क्यों मार रही है , सही कह रही हूं मैं, क्यों साबिर, तू भी करता होगा न
साबिर – आ... ये क्या... बोल रही हो तुम
स्मिता - साले सब मर्द ठरकी होते हैं ... ये भी घर जाके हमारी फोटो देख कर हिलाएंगे अपना । ही ही । अच्छा हुआ हमने ऊपर से कमीज पहनी है, वो वाला टॉप नहीं पहना ।
साबिर आगे बैठा हुआ था । उसने भी ये बात सुनी और वो हंसा । मुझे स्मिता को देखकर हैरानी होती थी की कैसे वह इतनी फ्रैंक होके कुछ भी कह देती थी । किसी के भी सामने ।
साबिर - हां , ये तो सही कहा तुमने, वरना ये कार के अंदर ही शुरू हो जाते ... अगर वो वाला टॉप पहना होता तुम दोनों ने ( मैं साबिर को घर के देखती हूं)
स्मिता- चल चल बाइक स्टार्ट कर जुलूस खत्म होने वाला है।
हमारी बाइक आगे बढ़ गई।
उस आदमी को ओवर टेक करते समय स्मिता ने उसे बाई किया और फिर वो हंसने लगी
हम तीनों पार्क में पहुंचते हैं । हमने अपनी टाई और बेल्ट और बैच निकाल कर बैग में रख लिए थे। हमने अभी दो चुटियाएं बना रखी थी। पार्क में खड़े आसपास के लड़के हमें घूर रहे थे । हम पार्क में स्थित उस पुराने खंडहर हो चुके किले के अंदर जाते हैं जहां हम उस दिन गए थे । कुछ देर यहां वहां घूमने के बाद स्मिता हम दोनों को अकेला छोड़कर वहां से चली जाती है ।
स्मिता - मैं तुम्हारा बाहर पेड़ के नीचे इंतजार कर रही हूं । जल्दी करना मेरा मतलब जल्दी आना , घूम के ही ही । किले के अंदर थोड़ी देर हम बातें करते हैं और यहां वहां घूमते हैं ।
मुझे पता था कि हम यहां क्या करने आ रखे थे और अकेले क्यों घूम रहे हैं। आज भी यहां सुनसान था। मुझे पता था कि क्या होने वाला है । मुझे बहुत एक्साइटमेंट था । दिल की धड़कन बढ़ रही थी । उस दिन जो नहीं हुआ था वो आज होने वाला था ! आज मैं सोच के आई थी कि कुछ करना है।
मैं - तो बताओ अब , और कुछ कहना है, मैं आ गई अब
साबिर - आ गई हो तो चलो, चलते हैं वहां
मैं - क्यों , वहां क्यों
साबिर - तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे की कुछ पता नहीं । चलो तुम्हें प्यार करूं । यहां तक आ गई हो तो, थोड़ी तो हिम्मत दिखाओ ।
मैं - तुम में है हिम्मत
साबिर - अंदर तो चलो, दिखाता हूँ तुम्हें, फिर देख लेना, तुम्हें कली से फूल बनाने का टाइम आ गया है। ( मैं उसे चुपचाप घूरने लगी )
ऐसे क्या देख रही हो । एक बार मर्दानगी दिखाने का मौका तो दो मुझे ।
मैं - ओहो मर्द । ही ही ही । ठीक है लेकिन अगर मैंने बीच में मना किया तो फिर उसके बाद कोई जोर जबरदस्ती मेरे साथ मत करना ।
साबिर - नहीं करूंगा, तुम मुझपे यकीन कर सकती हो
मैं-- तो फिर ठीक है, मर्द तो मैं बनाऊंगी तुम्हें आज और तुम मुझे फूल बनाना ... ही ही
साबिर - तो चलो फिर
मेरी स्वीकृति मिलने के बाद साबिर मेरा हाथ पकड़ कर किले के एक तहखाने में ले जाता है और वहां दीवार से सटा कर मुझे वाइल्डली किस करने लगता है । मैं भी उसे किस करने लगती हूं वह कमीज के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबाने लगता है । मेरी आहें गर्म सांस के साथ निकलने लगती हैं । फिर वह मेरी शर्ट के बटन खोलता है और ब्रा के ऊपर से ही मेरे अनारों को मसलने लगता है । मैं भी उसके शर्ट के बटन खोलने लगती हूं । वो ब्रा के ऊपर से ही मेरे गुब्बारों पर यहां वहां ताबड़तोड़ किस करने लगा । मैं भी उसका सर अपने बूब्स पर दबाने लगती हूं । थोड़ी ही देर बाद वह मेरी स्कर्ट का हुक भी खोल देता है । वो सरक कर नीचे गिर जाती है । मैं अब सिर्फ कच्छी में थी । वो मेरे पीछे आकर हाथों को आगे लाकर पैंटी के ऊपर से ही जोरदार ढंग से मेरी चूत को सहलाने लगता है । दूसरे हाथ से वो ब्रा के ऊपर मेरे बूब्स को दबा रहा था और मेरी शर्ट को कंधे से नीचे कर गर्दन और कंधे पे किस रहा था । मैंने एक हाथ से उसके बालों को जकड़ रखा था और दूसरा हाथ उसके नीचे रखे हाथ के ऊपर था । वो धीरे धीरे मुझे सुलगा रहा था । अब उसने बीच बीच में मेरे गुलाबी निप्पलों को उंगली में रखकर हल्का हल्का मसलना शुरु कर दिया। मेरे मुंह से मादक सिसकारियां निकालने लगी । ओह ! .... आह ! अब मैं भी फार्म में आ गई और पीछे मुड़कर यानी फ्रंट से उसे जोर से किस करने लगी । इस बार मैने जीभ से उसके होठों को चाटना–चूसना शुरू कर दिया , उसने भी अपनी अपनी जीभ निकाल कर मुझे किस करना चालू कर दिया । एक दूसरे के होंठों के चूसने के बाद वो रुक गया और हांफने लगा . मेरी शर्ट के बटन खुले हुए थे । मैं अंदर से ब्रा में थी । मैं उससे थोड़ा दूर हटी । मैने उसकी आँखों में शरारती नजरों से देखा और अपनी शर्ट एक झटके में उतार के साइड में फेंक दिया । अब मैं सफेद ब्रा जो आगे और मैरून कलर की पैंटी में उसके सामने कड़ी थी । मैने अपनी चुटियाएं खोल दी और बाल खोलने के बाद उन्हें आगे लाकर एक साइड कर दिया । वो मुझे ऐसे देख रहा था जैसे अभी आके खा जायेगा । मैने दोनों हाथ अपनी कमर में रखे और पूछा ।
मैं – लो अब मैं भी आ गई आधे कपड़ों में । अब तक तुमने मुझे सिर्फ वीडियो कॉल में देखा है ।
अब लाइव शो का मजा लो । बाय द वे कैसी लग रही हूं ... सामने से
साबिर - वाउ , यू आर लुकिंग स्टनिंग निमी । फोन से भी ज्यादा खूबसूरत ।
मैं - थैंक यू
साबिर - अब देर मत करो , इस ब्रा और पैंटी भी उतारो । इससे पहले कि मेरा झड़ जाए तुम्हे देखते देखते ( वो अपना लण्ङ मुठियाने लग गया मुझे देखकर )
मैं - ए... सिर्फ देखने से ही ...ही ही ... तुम्हारा हाल तो बहुत बुरा है । लेकिन बहाना मत इतनी जल्दी अपना ।
साबिर - आह ... निमी , जल्दी उतारो
निमी – नहीं, पैंटी बाद में उतारूंगी
साबिर - ब्रा तो उतारो
मैं - ओके...मेरे बॉयफ़्रेंड .... फिलहाल ये मै कर लेती हूं । ये लो !
मैने हाथ पीछे ले जा कर ब्रा का हक खोल दिया । फिर ब्रा की दोनों स्ट्रिप्स नीचे सरका के उसे उतार कर साबिर के मुंह पे फेंक दी । वो पेंट के ऊपर से तेजी अपना लण्ङ मसलने लगा ।
वो अभी भी हाफ रहा था । उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था ।
मैं - हेलो ... अब आगे क्या ।
साबिर - आह ... ऐसे ही खड़ी रहो
मैं - ऐसे ही देखोगे या कुछ करोगे भी अब । मैं ज्यादा देर ऐसे खड़ी नहीं रह सकती । और वैसे भी ज्यादा देर मैं तुम्हारे सामने ऐसे रही न तो ... तुम्हारा वो निकल जाएगा ... ही ही ... और फिर आगे कुछ होगा नहीं ( मेरी बातें सुनके वो जोश में आ गया । वो मेरी ओर लपका , लेकिन उससे पहले मैं ही उसके नजदीक आ गई ) उसे दीवार पे धक्का देके मैने उसका लण्ङ भींच दिया।
साबिर - आह ... धीरे ... अंडे फोड़ेगी क्या मेरे
मैं - क्या हुआ, तुम्हे तो ठीक से मस्टरबेट करना भी नहीं आता .... मेरी पिक्स देखकर लड़के इतने धीरे नहीं करते । ( सक... सक ... सक ... सक .... सक ... मैं उसका लंद दबाने लगी )
साबिर – आह .... आह .... मजा आह रहा है .... तुम्हारे हाथ से
मैं - अभी तो शुरुआत है, लेकिन तुम तो अभी से हांफने लगे ... दिखाओ अपनी पॉवर ... वो क्या कह रहे थे तुम ... मर्दानगी ... दिखाओ अपनी मर्दानगी .... ( मैने इसका लण्ङ छोड़ दिया और उससे थोड़ा दूर हट गई )
साबिर - दिखाता हूं .. तुम्हे , रुको जरा।
मैं - हां... दिखाओ ... मुझे देखना है ... आज जो दिखाना चाहते हो .... दिखाओ मुझे .... बहुत परेशान किया है तुमने मुझे
वो अपनी अंडरशर्ट निकाल के दूर फेंक देता है । अब वो ऊपर से नंगा था ।
मैं हंसती हूं - अरे यह क्या अभी तुम्हें वापस भी जाना है । वहां गंदे में क्यों फेंक रहे हो ।
(मेरी नजर उसकी मर्दाना छाती से होते हुए उसके पेंट के उस पार्ट पे जाती है जहां पे उसका लिंग था । लेकिन ये क्या । अभी तक तो उसका खड़ा हो जाना चाहिए था। मैने कॉलेज में कई लड़कों का कई दफा खड़ा होते हुए देखा था पैंट में मुझे, स्मिता और मेरी सहेलियों को देख के । फिर हम सब लड़कियां हंसती थी उनके बारे में बात करके ।)
मैं पेंट के ऊपर हाथ रखके उसका ल** देखती हूं ।
मैं - ओह ये अभी तैयार नहीं है क्या,
साबिर - हो जाएगा (वह मुझे पकड़ने लगा)
मैं - नहीं पहले मेरे नीचे किस करो । ( मैं उसे नीचे बिठा देती हूं और चूत उसके मुंह पे लगा देती हूं ) ( और एक टांग उसके कंधे पर रख देती हूं ।) तब तक तुम्हारा हथियार भी रेडी हो जाएगा ।
साबिर - इसे तो उतारो
मैं - नहीं पहले पैंटी के ऊपर से ही करो , मेरा पानी निकालो पहले । गीली करो इसे ... आह !
(मैं उसका मुंह अपनी पैंटी के ऊपर दबाने लगती हूं। जब मेरे मुंह से जोर-जोर से मादक सिसकारियाँ निकलने लगती हैं तो वह ऊपर मेरी ओर देखता है तो पाता है कि मेरी आँखें मजे से बंद हो गई थीं । और वो मौके का फायदा उठा कर एक झटके में मेरी पैंटी नीचे सरका देता है । मेरी आँखें खुल जाती हैं। मैं उसे मुस्कुराते हुए देखती हूं और उसके बाल सहलाती हूं । मैं एक एक कर के पैर ऊपर करती हूं जिससे उसे मेरी पैंटी निकालने में आसानी हो । इस तरह वो मेरी चूत देखते देखते मेरे तन का आखिरी कपड़ा भी निकाल देता है ।
मैं - आह । अब देर मत करो साबिर , चूसो इसे । चाटो मेरी बटरफ्लाई को ।
उसके बाद वह मेरी चूत को किसी कुत्ते की तरह चाटने लगता है । मैं अपने सर को यहां वहा पटकने लगती हूं , और उसके बाल खींचने लगती हूं । उसे काफी देर हो गई थी और अब मेरी चूत भी लाल हो गई थी । मैं उसे खड़ा उठाती हूं । वह खड़ा होता है तो मैं उसका लण्ङ उसकी पेंट के बाहर से पकड़ लेती हूं जो अब हल्का खड़ा हो चुका था।
मैं - जल्दी खोलो अपनी पैंट , मेरे सारे कपड़े तो तुमने उतार दिए फिर तुमने क्यों पहना है ये , जल्दी उतारो इसे, पूरा दिन यही नहीं रहना है ... ठीक है न .... बाहर स्मिता भी हमारा वेट कर रही है ।
साबिर दूर जाकर अपनी पैंट खोलने लगता है उसके बाद अंडरवियर में वह मेरे पास आता है तो मैं अंडरवियर के बाहर से ही उसका लिंग हाथ में लेकर दबाने लगती हूं और उसके होठों पर किस करने लगती हूं । मुझे महसूस हुआ कि उसका पूरी तरह से खड़ा नहीं हुआ है । यह देखकर मैं हैरान थी ।
मैं - इसको भी तो उतारो , स्मिता ने 2 घंटे में आने के लिए कहा है ।
साबिर - इतनी भी क्या जल्दी है जान ,,, अभी तो बहुत टाइम है
मैं - टाइम ही तो नहीं है, कोई आ गया यहां तो
साबिर - यहां कोई नहीं आएगा यहां जो भी लड़के आते हैं वह अपनी गर्लफ्रेंड को चोदने के लिए आते हैं और लड़कियां चुदाने के लिए । उनके अलावा और यहां कोई नहीं आता ।
मैं - ओ हो ठीक है लेकिन तुम्हारा यह अब तक खड़ा क्यों नहीं हुआ । तुम क्या करने के लिए मुझे यहां लाए हो ।
साबिर अंडरवियर के ऊपर से ही मुठ मारने लगता है और साथ ही मेरे बूब्स दबाने लगता है ।
मैं - अब मेरे इनको ही दबाते रहोगे या कुछ करोगे भी,
ऐसे तो बहुत देर हो जायेगी । तुम्ही ने इतना कहा था, तो मैं आ गई , और अब तुम ... लगता है आज कुछ नहीं होने वाला
साबिर – बस होने वाला है
मैं - अभी पूरा नहीं खड़ा हुआ है, लगता है आज मेरी चुदाई नहीं हो पाएगी ।
साबिर - कुछ करो
मैं - क्या करूं
साबिर - डांस करो ... गान्ड मटकाओ अपनी
मैं - क्या कहा तुमने , गा ... गान्ड मटकाऊं
साबिर – हां हां ... गान्ड मटकाओ ... जल्दी
मैं– ,,, ओके ये भी करके देख लेते हैं ... लो देखो मुझे ( मै उससे थोड़ा पीछे होके अपने दोनों हाथों को सर पे रखकर , धीरे धीरे अपनी कमर मटकाने लगती हूं )
आँखें बंद मत करो , मुझपे फोकस करो
साबिर - आह ....आह
मैं - लगता है मुझे ही कुछ करना पड़ेगा
इसके बाद मैं आगे बढ़कर खुद ही साबिर की अंडरवियर निकाल देती हूं और उसका ल**अपनी च** के ऊपर लगाकर उसे अंदर धकेलने लगी।
साबिर - ओह ,,, आह,,,
मैं - अब क्या हुआ तुम्हे, फोन पर तो खूब कहते थे कि यह करूंगा वह करूंगा , स्टूपिड , बाहर तो बड़ी बड़ी फेंक रहे थे । गान्ड भी मटका दी मैने तो अब । फिर । ( अब मैं भी खुल के डर्टी लैंग्वेज में बात कर रही थी )
साबिर - कर तो रहा हूं
मैं - क्या खाक कर रहे हो,,, यह खड़ा क्यों नहीं हुआ अब तक ,,, मुझे तो लगता है तुममें दम नहीं है मेरी लेने का ।
मैं अब परेशान हो गई थी मेरा बदन जलने लगा था ,
मैं - कंडोम कहां है
वो पेंट की जेब से निकालता है । उसे मै साबिर के हाथ से लेकर उसे मुंह से फाड़कर नीचे बैठ कर खुद उसके लण्ङ पे पहनाने लगती हूं । उसके लण्ङ पे निरोध पहनाने के बाद मैंने एक नजर साबिर को देखा और एक झटके में उसका लण्ङ अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी । ( ये सब मैने बीएफ में देखा था, इसीलिए मैं सब जानती थी )
मैं - चलो अब यह थोड़ा खड़ा हो गया है अब डालो अंदर, जल्दी डालो प्लीज़ ... नहीं तो मैं मर जाऊंगी आज यहीं ... अब तो मुझसे भी रहा नहीं जा रहा
मैं खड़ी हो गई ।
मैं पीछे मुड़ जाती हूं और उसका ल** अपने एक हाथ से पकड़कर अपनी गांड में डालने लगती हूं ।
मैं - चलो पहले यहां ट्राई करो ।
वह कोशिश करने लगता है लेकिन उसका अभी भी पूरी तरह से खड़ा नहीं हुआ था ।
मैं अब पागल होने लगी थी ।
मैं - मुझे नहीं पता था तुम इतने बड़े नामर्द निकलोगे, जल्दी चोद कर मुझे ठंडा करो नहीं तो मैं किसी और को बुला लूंगी बाहर से .... इससे तो अच्छा होता कि मैं उस चूतिये सलीम को पटा लेती । वो तुम से ज्यादा स्ट्रांग लगता है ।
साबिर - पता नहीं क्यों , आज क्यों नहीं हो रहा है, शायद जल्दी बाजी के कारण
मैं - और कितना टाइम चाहिए, बॉयज तो तैयार रहते हैं इसके लिए, हमारे कॉलेज के टॉयलेट में कई लड़के लड़कियों का तो 5–10 मिनट हो जाता है ।
(वो अभी भी अपना अधखड़ा लिंग मेरी चूत में ठेलने का प्रयास कर रहा था )
साबिर - हो रहा है .... धीरे धीरे
मैं – नहीं हो रहा, रहने दो ऐसे नहीं होगा , तुम से नहीं हो पाएगा , तुम ऐसा करो बाहर जाओ और किसी को ढूंढ के लाओ . बिना मरवाए आज मैं यहां से नहीं जाने वाली । मेरे अंदर तुमने जवानी आग भड़काई है, तो उसे भी तुम ही बुझाओगे
वह कुछ देर तक असफल प्रयास करता रहा ।
मैं – तुम बेकार में कोशिश कर रहे हो,
अचानक उसका झड़ गया । मैंने उसके गाल पर हलकी चपत लगा दी । और गुस्से में अपने कपड़े पहने लगी ।
साबिर - तुम तो कह रही थी कि बिना करे नहीं जाऊंगी और बाहर से किसी को ले आने के लिए कह रही थी
मैं - तो क्या रण्डी बन जाऊं और किसी से भी मरा लूं अपनी । ( थोड़ी देर रुक के मैने कहा ) ऐसे क्या देख रहे हो .... ठीक है, तुम्हारे बस का नहीं है तो ले आओ । मैं तैयार हूं । फिर तुम खड़े रहना कोने में और देखते रहना अपनी गर्लफेंड्र को चुदते हुए किसी और से ... लूज़र कहीं के । सारा मूड खराब कर दिया ।
साबिर - सॉरी निमी वो ...
मैं - अब दोबारा मत बुलाना मुझे , बड़ी मुश्किल से आई थी यहां।
साबिर- - अरे ,रुको, निमी, तुम कपड़े क्यों पहन रही हो, अभी तो बहुत टाइम है, सिर्फ 20 मिनट ही हुए हैं
मैं - नहीं, तुम्हारा ना , दुबारा खड़ा होने में बहुत टाइम लगेगा साबिर,
साबिर - कुछ टाइम नहीं लगेगा
मैं - अच्छा जी, ठीक है फिर खड़ा करके दिखाओ पहले , उसके बाद मैं कपड़े उतारूंगी।
मैं उसके सामने खड़ी हो गई और वहां मुझे देखकर मुठ मारने लगा ।
मैं - जल्दी खड़ा करो , क्या हुआ,
साबिर - निमी , कुछ दिखाओ तो सही, तभी तो खड़ा होगा
मैं - नहीं, अब ये स्कर्ट तभी नीचे गिरेगी, जब तुम इसे मेरी बूर में जाने लायक बना लोगे , कोई लड़की तुम्हे दुबारा चांस दे रही है । ये भी बड़ी बात है
साबिर - मैं कोशिश कर रहा हूं
मैंने गुस्से में कपड़े तो पहन दिए थे लेकिन मैंने सोचा की एक मौका और देती हूं इसे। लेकिन उसका तभी भी पूरा खड़ा नहीं हुआ था। मुझे यह भी डर था कि कोई कपल यहां ना आ जाए । उसको हिलाते हिलाते 5 मिनट हो गए थे ।
मैं - तुम ऐसा करो , कोशिश करते रहो , मैं जाती हूँ ।
साबिर - नहीं रुको प्लीज
मैं - नहीं साबिर अब ज्यादा देर यहां रुकना ठीक नहीं है । कोई बात नहीं यार । इस बार नहीं हुआ तो अगली बार कर लेना ।
अब मैं भी वहां से जाने लगी । उसने मुझे रोकना चाहा लेकिन मैंने उसे नेक्स्ट टाइम का वादा कर के चलने के लिए कहा । फिर वह भी मेरे पीछे-पीछे आ गया । एक घंटे में ही हम बाहर आ गए । वहां कुछ और कपल्स हमने देखे जो एक दूसरे के साथ रोमांस कर रहे थे । आज पता नहीं कैसे कैसे शब्द मेरे मुंह से निकले थे । पहली बार में अक्सर लड़कियां घबराती और शर्माती हैं। लेकिन मैने ऐसा कुछ नहीं किया। मुझे अहसास हुआ कि मेरे अंदर भी एक रंडी छुपी हुई है और अब मैं भी अब स्मिता की तरह एक slut बनने की राह पे चल पड़ी हूं ।
साबिर से मेरी चूदाई के लिए मुलाकात का इंतजाम स्मिता ने ही किया था । उस दिन हम कॉलेज से बंक मार के साबिर की बाइक में उस पार्क में घूमने के लिए जाते हैं, जहां उस दिन गए थे । स्मिता बीच में थी और मैं बाइक पर पीछे बैठी हुई थी हमने कॉलेज ड्रेस पहन रही थी यानी की कमीज और सफेद रंग की कॉलेज स्कर्ट जो घुटनों से 2 inch ऊपर तक तक छोटी थी। college mein jyadatar ladkiyan घुटनों से नीचे तक या ज्यादा से ज्यादा घुटनों तक की स्कर्ट ही पहना करती थी लेकिन स्मिता और मैं अक्सर छोटी स्कर्ट ही पहना करती थी । स्मिता और मुझे इसके लिए प्रिंसिपल ने एक बार टोका भी था । स्मिता और अब मैं भी कॉलेज की हॉट गर्ल्स में शुमार हो गई थी । हमारी देखा देखी करके हमारे ग्रुप की और लड़कियां भी अब हमारे जैसे दिखने के लिए अपनी लंबी स्कर्ट को बेल्ट के जरिए फोर्ड कर ऊपर बांधने लगी थी । रस्ते में हम सिग्नल पे रुकते हैं तो आस पास खड़े बाइक और कार वाले वाले हमें घूरने लगते हैं । असल में आगे कुछ लोगों का जुलूस जा रहा था । अब दिल्ली है । यहां तो ये नॉर्मल होगा ही । मेरे बगल खड़ी बाइक पर बैठा अधेड़ उम्र का आदमी बार बार हमारी तरफ देख रहा था । उसके पीछे उसकी मोटी सी वाईफ थी । असल में बाइक में बैठने से हिप्स अपनी शेप ले लेते हैं । और हमारी स्कर्ट छोटी थी , इसीलिए बैठने से वो और ऊपर चढ़ गई थी । मतलब हमारी आधी से ज्यादा जांघें वहां सिग्नल पे खड़ी पब्लिक के बीच में नंगी हो रखी थीं । लोगों को एसे नजारे मुश्किल से ही नसीब होते हैं । इसीलिए हमारी बाइक के आस पास खड़े मर्द हम दोनों खूबसूरत बालाओं के हुस्न का आनंद ले रहे थे। दूसरी ओर कार में बैठे आदमियों की नजर भी हमारी जवानी पर थी । हम दोनों ये अच्छे से भांप रहे थे । साबिर को तो कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। पड़ता भी क्यों , वो हमारा भाई तो था नहीं ।
स्मिता को तो हमारी बाइक के पीछे खड़ी स्कूटी पे बैठी आंटी बड़े गुस्से से देख रही थी। स्मिता ने मुझे कहा- देख वो अंकल कैसे चोरी चोरी देख रहा है हमें ? हीही
मैं - बदमीज है, यहां तो हमें सभी ऐसे देख रहे हैं
स्मिता - मादर चोद हैं सब के सब, हमारी उम्र की तो इनकी बेटियां होंगी घर में
मैं - वही तो, कलयुग है
साबिर - तुम दोनों हॉट लग रही हो सबको यार
स्मिता - हॉट ...घंटा का हॉट ... हॉट तो मुझे लग रहा है इस गर्मी में ... इस जुलूस को भी अभी आना था।
तभी स्मिता का ध्यान उस आदमी पे जाता है। वो उसे देखती है तो पाती है कि वो लगातार हमे घूरे जा रहा था ।
स्मिता मुस्कुराते हुए उस अंकल को देखती है और उसे हाय का इशारा करती है जिसका वो गंवार कोई जवाब नहीं देता लेकिन अब वो और हमे lusty ढंग से देखने लगता है । उसकी wife स्मिता ko देख कर उस आदमी को गुस्से से आगे की ओर चलने के लिए कहती है तो वो थोड़ा आगे सरक के कहता है कि आगे कहा जाऊं , गाड़ी है,
पत्नी – यहां तुम्हें स्पेस नहीं दिख रहा, आगे चलो
आदमी – ठीक है
आदमी अनमने ढंग से ठीक हमारे आगे से थोड़ा लेफ्ट ( साइड) में आ जाता है।
वो फिर हम पे आंखे सेकने लगता है। मैं स्मिता को देख के मुस्कुराती हूं । तभी स्मिता अपनी स्कर्ट को दूसरी ओर से खींच कर और ऊपर एंड तक चढ़ा लेती है जिससे स्कर्ट और ऊपर होने पर उसकी दूधिया जांघ उसके सामने आ जाती है जो उस आदमी की तरफ थी । आदमी की नजर उसकी खुली जांघ पे जाती है और फिर उसे देख रही स्मिता के चेहरे पे । स्मिता भी उस आदमी को सेक्सी नजरों से मुस्कुराते हुए देखने लगती है। वो आगे देखने लगता है लेकिन अब वो भी थोड़ी थोड़ी देर में मुड़ मुड़ के अपनी बीवी की परवाह किए बिना हमें देख रहा था। अब तो वह चेहरे पर भी नहीं देख रहा था, सीधा स्मिता की अध नंगी जांघ की ओर ही देख रहा था। स्मिता ने उसे देख कर होंठों को गोल करते हुए फ्लाइंग किस दे दी । और अपनी जांघ को हाई लाइट करते हुए उस पे उंगली फिराने लगी । जिसे वो आदमी भी समझ गया कि वह उसे क्या दिखा रही है । आदमी ने उसके चेहरे पे देखा तो उसे स्मिता के शरारती होने का अहसास हुआ । वो भी मुसुराने लगा । तभी आंटी ने उसकी ओर देखा तो वो दूसरी ओर देखने लगी । थोड़ी देर बाद स्मिता ने उसे जानबूझकर कहा - हेलो अंकल ! किसका जुलूस निकल रहा है ये ,
तभी पीछे कार बैठा एक आदमी बोला - अरे ये पेट्रोल के जो दाम बढ़ गए हैं न , बस उसी के लिए निकाल रहे हैं
स्मिता ने उसकी ओर मुस्कुराते हुए सेक्सी ढंग से देखा - ओह ! अच्छा ! थैंक्स ! बताने के लिए ! लेकिन मैने आपसे नहीं , इनसे पूछा ...
इस पर आदमी थोड़ा खुश हुआ !
फिर अंकल भी बोला - जी ... मुझे पता नहीं जी ( थोड़ी देर चुप रहने के बाद )
... आप कौन से कॉलेज पड़ती हो
स्मिता –अंकल हम सेंट थॉमस पब्लिक कॉलेज में पढ़ते हैं
आंटी - जी तुम्हें क्या लेना है
अंकल - अरे यार, पूछ ही तो रहा हूं, तुम भी ,
आंटी - तुम्हारी नजर छोटी लौंडियों पर ही रहती है, ऐसे क्या देख रहे हो उसे , तुम्हारी बेटी की उम्र की है वो, तुम आगे देखो, ( धीरे से ) ये आजकल की लड़कियां भी ... न कपड़े पहनने का सलीका है , और न बात करने का और ये तो कुछ ज्यादा ही बदतमीज लग रही है । देखो कैसे रंडी की तरह टांगें नंगी करके बैठी है । सारे कैसे घूर रहे हैं , फिर भी शरम नहीं है बिल्कुल भी इसे ।
अंकल - अरे मैं लक्ष्मी के लिए पूछ रहा था । उसका भी तो admission कराना है इंटर में।
आंटी- ऐसे कॉलेज में ... कभी नहीं .... वो भी इन्ही की तरह हो जाएगी ।
तभी बगल में एक bulero में बैठे लड़के हमे hi बोलते हैं।
एक लड़का - hi baby
स्मिता - Hi
लड़का - व्हाट्स योर नेम, यू लुकिंग गॉर्जियस
स्मिता - थैंक यू, I am Smita,
बॉय- nice name, like you
स्मिता - थैंक you, this is my sis
लड़का– योर सिस इस also ब्यूटीफुल
स्मिता फिर चुप होके आगे देखने लग जाती है । लड़का फिर बोलता है ।
लड़का - I am viky, and this is rihaan,
स्मिता – ok
लड़का –आपको देखा है कहीं शायद
मैं – ऐसा हर लड़की को देख के कहते हो क्या आप
लड़का – नहीं नहीं , ऐसी कोई बात नहीं है, मै सच कह रहा हूं ।
स्मिता - हां देखा होगा जरूर, हम बहुत फेमस हैं , आजकल लोग बाहर कम और फोन पे ज्यादा देखते हैं, इंस्ट्राग्राम पे देखा होगा आपने, हमारा अकाउंट है वहां
लड़का - किस नाम से
स्मिता - I_am_Smita
लड़का - और आपकी बहन का
स्मिता - वहीं मेरी id में मिल जाएगा फॉलोअर लिस्ट में ।
लड़का - I will search
स्मिता - जरूर..... और फॉलो कर लेना , अपने दोस्तों को भी कहना ।
लड़का - हां बिल्कुल, a ... One minute ... Can I take your number, baby
स्मिता - I am not your baby ok,
लड़का - sorry - soory , please, हम नए हैं यहां, घूमने आएं हैं ... Socha aap hume .... If you would like to .... aa .. Isiliye maang raha tha, please don't mind,
स्मिता – नो वे , कौन हैं आप , हम ऐसे अजनबियों को अपना नंबर नहीं देते ।
लड़का – आपको कोई दिक्कत नहीं होगी, हम शरीफ लड़के हैं, आप भी एन्जॉय कर लेना
स्मिता - फोन नंबर तो नहीं है , लेकिन दूसरे नंबर हैं मेरे पास
लड़का – किसके
स्मिता – एक मेरी सैंडिल का और दूसरा पोलिस का ... अब बताओ किसका नंबर दूं ... सैंडिल का या पोलिस का ... ही ही ... सब लड़कियों से ऐसे ही मांगते हो क्या रोड पे आप ... ही ही
लड़का- ऐसी बात नहीं है ... Sorry , मैं मजाक कर रहा था
स्मिता - मै भी मजाक कर रही हूं,
लड़का - मै इंस्टा पे कॉन्टैक्ट करूंगा आपको
स्मिता - ok, जरूर, वहीं पे चैटिंग कर लेना, ओके ( उसके बाद वो और मैं आगे देखने लगती हैं )
लड़के आपस में बोलते हैं ...
पहला – नंबर मिल जाता तो मजा आ जाता
दूसरा - तीखी मिर्ची हैं दोनों .... दिल्ली की कॉलेज गर्ल्स बड़ी हॉट हैं यार ,
पहला - तभी तो नंबर मांग रहा था
पहला - जुगाड लग रही है ये दोनों ... बॉयफ्रेंड के साथ बंक मार के आईं हैं दोनों
दूसरा - पहन तो कॉलेज ड्रेस रखी है दोनों ने
पहला - हां ... हैं तो कॉलेज गर्ल्स लेकिन ये बीच वाली चुदी हुई लग रही है । देख के ही पता चल रहा है । शकल से ही राँड़ लग रही है ।
यहां दिल्ली में लड़कियां जल्दी जवान हो जाती हैं । गर्मी, शहर और लोगों की नजरें ये तीनों लड़कियों को उम्र से पहले ही बड़ा कर देते हैं ।
दूसरा - हां देख के तो लग रहा है इसे
पहला - हां... देख नहीं रहा आगे बुड्ढे का कैसे खड़ा कर रही है । बुड्ढा कैसे मुड़ मुड़ के देख रहा है इनको।
Dusra-- आजकल कॉलेज की लड़कियों को भी नहीं छोड़ रहे मर्द ।
पहला - अबे लड़कियां भी तो वैसी ही हो गई हैं । इसी को देख ले ।
दूसरा - क्यों , ऐसा क्या किया इसने
पहला - - तू तो मोबाइल चला रहा था । मैं देख रहा था इसे काफी देर से । पता है इसने क्या किया
दूसरा - क्या ... क्या किया
पहला - अपनी स्कर्ट दूसरी साइड से खींच कर एक जांघ पे ऊपर चढ़ा दी उस अंकल की ओर और फिर उंगली फिरा रही थी साली जांघ पे और उस अंकल दिखा रही थी ।
दूसरा - क्या बात कर रहा है ... सच में
पहला - हां यार ... मैने देखा अपनी आँखों से ।
दूसरा - ( हैरानी से) bahanchod ... Kya baat hai yaar. यहां तो haramai हैं यार लड़कियां।
दूसरी तरफ
मैं - तू भी ना स्मिता फालतू बात क्यों कर रही है । ना जान पहचान। देख साला हरामी सीधा नंबर मांग रहा था । इतनी हिम्मत आती कहां से है लोगों में । तू सही कह रही है , साले सब मर्द ठरकी होते हैं । थोड़ा सा दिख जाय कहीं पे , बस लार टपकाना शुरु कर देते हैं
Saabir- सब एक जैसे नहीं होते
मैं - तुम कौन सा शरीफ हो, मेरे से सुन्दर मिल जाएगी न तो उसी के पीछे भागोगे ।
स्मिता - अरे यार चुप रहो तुम दोनों ।
तभी बगल से एक क्लिक की आवाज आती है तो हम बाइक के दूसरी ओर देखते हैं, हमारे बगल पर खड़ी कार के अंदर बैठे दो आदमी फोन से हमारी फोटो खींच रहे थे । वो ऐसा क्यों कर रहे थे पता नहीं ।
मैं - स्मिता ये तो हमारी फोटो खींच रहे ... जैसे हम कोई सेलेब्रिटी हैं
स्मिता - हां हम हैं तो सेलेब्रिटी, इंस्टा के , ही ही,
मैं - लेकिन ऐसे फोटो क्यों खींच रहे हैं
स्मिता - (जोर से उन्हें सुनाते हुए कहती है )मुझे क्या पता यार, जाके हिलाएंगे रात को हमारी पिक्स देखके या
मैं - या .... या क्या
स्मिता–दिखाएंगे शायद अपनी बहनों को या बेटियों को की तुम भी ऐसे ही ड्रेस अप होके जाना कॉलेज ... ही ही
साबिर - सही बोला
मैं - तू भी ना, जब देखो उल्टी बात करती है
स्मिता - ऐसा कर तू ही जाके पूछ ले ,
मैं - लेकिन गलत है ये ऐसे ... किसी की फोटो खींचना बिना पूछे
स्मिता - खींचने दे न यार , कितने सारों के फोन पर हमारे स्क्रीनशॉट सेव होंगे , तू यह नहीं सोच रही, पता नहीं कितने लड़के हमारी फोटो देख-देख के रात को मुठ मारते होंगे , ( उसने इतने जोर से कहा कि साबिर ने भी बात सुन ली । मैं स्मिता को कोहनी मारी )
स्मिता - कोनी क्यों मार रही है , सही कह रही हूं मैं, क्यों साबिर, तू भी करता होगा न
साबिर – आ... ये क्या... बोल रही हो तुम
स्मिता - साले सब मर्द ठरकी होते हैं ... ये भी घर जाके हमारी फोटो देख कर हिलाएंगे अपना । ही ही । अच्छा हुआ हमने ऊपर से कमीज पहनी है, वो वाला टॉप नहीं पहना ।
साबिर आगे बैठा हुआ था । उसने भी ये बात सुनी और वो हंसा । मुझे स्मिता को देखकर हैरानी होती थी की कैसे वह इतनी फ्रैंक होके कुछ भी कह देती थी । किसी के भी सामने ।
साबिर - हां , ये तो सही कहा तुमने, वरना ये कार के अंदर ही शुरू हो जाते ... अगर वो वाला टॉप पहना होता तुम दोनों ने ( मैं साबिर को घर के देखती हूं)
स्मिता- चल चल बाइक स्टार्ट कर जुलूस खत्म होने वाला है।
हमारी बाइक आगे बढ़ गई।
उस आदमी को ओवर टेक करते समय स्मिता ने उसे बाई किया और फिर वो हंसने लगी
हम तीनों पार्क में पहुंचते हैं । हमने अपनी टाई और बेल्ट और बैच निकाल कर बैग में रख लिए थे। हमने अभी दो चुटियाएं बना रखी थी। पार्क में खड़े आसपास के लड़के हमें घूर रहे थे । हम पार्क में स्थित उस पुराने खंडहर हो चुके किले के अंदर जाते हैं जहां हम उस दिन गए थे । कुछ देर यहां वहां घूमने के बाद स्मिता हम दोनों को अकेला छोड़कर वहां से चली जाती है ।
स्मिता - मैं तुम्हारा बाहर पेड़ के नीचे इंतजार कर रही हूं । जल्दी करना मेरा मतलब जल्दी आना , घूम के ही ही । किले के अंदर थोड़ी देर हम बातें करते हैं और यहां वहां घूमते हैं ।
मुझे पता था कि हम यहां क्या करने आ रखे थे और अकेले क्यों घूम रहे हैं। आज भी यहां सुनसान था। मुझे पता था कि क्या होने वाला है । मुझे बहुत एक्साइटमेंट था । दिल की धड़कन बढ़ रही थी । उस दिन जो नहीं हुआ था वो आज होने वाला था ! आज मैं सोच के आई थी कि कुछ करना है।
मैं - तो बताओ अब , और कुछ कहना है, मैं आ गई अब
साबिर - आ गई हो तो चलो, चलते हैं वहां
मैं - क्यों , वहां क्यों
साबिर - तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे की कुछ पता नहीं । चलो तुम्हें प्यार करूं । यहां तक आ गई हो तो, थोड़ी तो हिम्मत दिखाओ ।
मैं - तुम में है हिम्मत
साबिर - अंदर तो चलो, दिखाता हूँ तुम्हें, फिर देख लेना, तुम्हें कली से फूल बनाने का टाइम आ गया है। ( मैं उसे चुपचाप घूरने लगी )
ऐसे क्या देख रही हो । एक बार मर्दानगी दिखाने का मौका तो दो मुझे ।
मैं - ओहो मर्द । ही ही ही । ठीक है लेकिन अगर मैंने बीच में मना किया तो फिर उसके बाद कोई जोर जबरदस्ती मेरे साथ मत करना ।
साबिर - नहीं करूंगा, तुम मुझपे यकीन कर सकती हो
मैं-- तो फिर ठीक है, मर्द तो मैं बनाऊंगी तुम्हें आज और तुम मुझे फूल बनाना ... ही ही
साबिर - तो चलो फिर
मेरी स्वीकृति मिलने के बाद साबिर मेरा हाथ पकड़ कर किले के एक तहखाने में ले जाता है और वहां दीवार से सटा कर मुझे वाइल्डली किस करने लगता है । मैं भी उसे किस करने लगती हूं वह कमीज के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबाने लगता है । मेरी आहें गर्म सांस के साथ निकलने लगती हैं । फिर वह मेरी शर्ट के बटन खोलता है और ब्रा के ऊपर से ही मेरे अनारों को मसलने लगता है । मैं भी उसके शर्ट के बटन खोलने लगती हूं । वो ब्रा के ऊपर से ही मेरे गुब्बारों पर यहां वहां ताबड़तोड़ किस करने लगा । मैं भी उसका सर अपने बूब्स पर दबाने लगती हूं । थोड़ी ही देर बाद वह मेरी स्कर्ट का हुक भी खोल देता है । वो सरक कर नीचे गिर जाती है । मैं अब सिर्फ कच्छी में थी । वो मेरे पीछे आकर हाथों को आगे लाकर पैंटी के ऊपर से ही जोरदार ढंग से मेरी चूत को सहलाने लगता है । दूसरे हाथ से वो ब्रा के ऊपर मेरे बूब्स को दबा रहा था और मेरी शर्ट को कंधे से नीचे कर गर्दन और कंधे पे किस रहा था । मैंने एक हाथ से उसके बालों को जकड़ रखा था और दूसरा हाथ उसके नीचे रखे हाथ के ऊपर था । वो धीरे धीरे मुझे सुलगा रहा था । अब उसने बीच बीच में मेरे गुलाबी निप्पलों को उंगली में रखकर हल्का हल्का मसलना शुरु कर दिया। मेरे मुंह से मादक सिसकारियां निकालने लगी । ओह ! .... आह ! अब मैं भी फार्म में आ गई और पीछे मुड़कर यानी फ्रंट से उसे जोर से किस करने लगी । इस बार मैने जीभ से उसके होठों को चाटना–चूसना शुरू कर दिया , उसने भी अपनी अपनी जीभ निकाल कर मुझे किस करना चालू कर दिया । एक दूसरे के होंठों के चूसने के बाद वो रुक गया और हांफने लगा . मेरी शर्ट के बटन खुले हुए थे । मैं अंदर से ब्रा में थी । मैं उससे थोड़ा दूर हटी । मैने उसकी आँखों में शरारती नजरों से देखा और अपनी शर्ट एक झटके में उतार के साइड में फेंक दिया । अब मैं सफेद ब्रा जो आगे और मैरून कलर की पैंटी में उसके सामने कड़ी थी । मैने अपनी चुटियाएं खोल दी और बाल खोलने के बाद उन्हें आगे लाकर एक साइड कर दिया । वो मुझे ऐसे देख रहा था जैसे अभी आके खा जायेगा । मैने दोनों हाथ अपनी कमर में रखे और पूछा ।
मैं – लो अब मैं भी आ गई आधे कपड़ों में । अब तक तुमने मुझे सिर्फ वीडियो कॉल में देखा है ।
अब लाइव शो का मजा लो । बाय द वे कैसी लग रही हूं ... सामने से
साबिर - वाउ , यू आर लुकिंग स्टनिंग निमी । फोन से भी ज्यादा खूबसूरत ।
मैं - थैंक यू
साबिर - अब देर मत करो , इस ब्रा और पैंटी भी उतारो । इससे पहले कि मेरा झड़ जाए तुम्हे देखते देखते ( वो अपना लण्ङ मुठियाने लग गया मुझे देखकर )
मैं - ए... सिर्फ देखने से ही ...ही ही ... तुम्हारा हाल तो बहुत बुरा है । लेकिन बहाना मत इतनी जल्दी अपना ।
साबिर - आह ... निमी , जल्दी उतारो
निमी – नहीं, पैंटी बाद में उतारूंगी
साबिर - ब्रा तो उतारो
मैं - ओके...मेरे बॉयफ़्रेंड .... फिलहाल ये मै कर लेती हूं । ये लो !
मैने हाथ पीछे ले जा कर ब्रा का हक खोल दिया । फिर ब्रा की दोनों स्ट्रिप्स नीचे सरका के उसे उतार कर साबिर के मुंह पे फेंक दी । वो पेंट के ऊपर से तेजी अपना लण्ङ मसलने लगा ।
वो अभी भी हाफ रहा था । उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था ।
मैं - हेलो ... अब आगे क्या ।
साबिर - आह ... ऐसे ही खड़ी रहो
मैं - ऐसे ही देखोगे या कुछ करोगे भी अब । मैं ज्यादा देर ऐसे खड़ी नहीं रह सकती । और वैसे भी ज्यादा देर मैं तुम्हारे सामने ऐसे रही न तो ... तुम्हारा वो निकल जाएगा ... ही ही ... और फिर आगे कुछ होगा नहीं ( मेरी बातें सुनके वो जोश में आ गया । वो मेरी ओर लपका , लेकिन उससे पहले मैं ही उसके नजदीक आ गई ) उसे दीवार पे धक्का देके मैने उसका लण्ङ भींच दिया।
साबिर - आह ... धीरे ... अंडे फोड़ेगी क्या मेरे
मैं - क्या हुआ, तुम्हे तो ठीक से मस्टरबेट करना भी नहीं आता .... मेरी पिक्स देखकर लड़के इतने धीरे नहीं करते । ( सक... सक ... सक ... सक .... सक ... मैं उसका लंद दबाने लगी )
साबिर – आह .... आह .... मजा आह रहा है .... तुम्हारे हाथ से
मैं - अभी तो शुरुआत है, लेकिन तुम तो अभी से हांफने लगे ... दिखाओ अपनी पॉवर ... वो क्या कह रहे थे तुम ... मर्दानगी ... दिखाओ अपनी मर्दानगी .... ( मैने इसका लण्ङ छोड़ दिया और उससे थोड़ा दूर हट गई )
साबिर - दिखाता हूं .. तुम्हे , रुको जरा।
मैं - हां... दिखाओ ... मुझे देखना है ... आज जो दिखाना चाहते हो .... दिखाओ मुझे .... बहुत परेशान किया है तुमने मुझे
वो अपनी अंडरशर्ट निकाल के दूर फेंक देता है । अब वो ऊपर से नंगा था ।
मैं हंसती हूं - अरे यह क्या अभी तुम्हें वापस भी जाना है । वहां गंदे में क्यों फेंक रहे हो ।
(मेरी नजर उसकी मर्दाना छाती से होते हुए उसके पेंट के उस पार्ट पे जाती है जहां पे उसका लिंग था । लेकिन ये क्या । अभी तक तो उसका खड़ा हो जाना चाहिए था। मैने कॉलेज में कई लड़कों का कई दफा खड़ा होते हुए देखा था पैंट में मुझे, स्मिता और मेरी सहेलियों को देख के । फिर हम सब लड़कियां हंसती थी उनके बारे में बात करके ।)
मैं पेंट के ऊपर हाथ रखके उसका ल** देखती हूं ।
मैं - ओह ये अभी तैयार नहीं है क्या,
साबिर - हो जाएगा (वह मुझे पकड़ने लगा)
मैं - नहीं पहले मेरे नीचे किस करो । ( मैं उसे नीचे बिठा देती हूं और चूत उसके मुंह पे लगा देती हूं ) ( और एक टांग उसके कंधे पर रख देती हूं ।) तब तक तुम्हारा हथियार भी रेडी हो जाएगा ।
साबिर - इसे तो उतारो
मैं - नहीं पहले पैंटी के ऊपर से ही करो , मेरा पानी निकालो पहले । गीली करो इसे ... आह !
(मैं उसका मुंह अपनी पैंटी के ऊपर दबाने लगती हूं। जब मेरे मुंह से जोर-जोर से मादक सिसकारियाँ निकलने लगती हैं तो वह ऊपर मेरी ओर देखता है तो पाता है कि मेरी आँखें मजे से बंद हो गई थीं । और वो मौके का फायदा उठा कर एक झटके में मेरी पैंटी नीचे सरका देता है । मेरी आँखें खुल जाती हैं। मैं उसे मुस्कुराते हुए देखती हूं और उसके बाल सहलाती हूं । मैं एक एक कर के पैर ऊपर करती हूं जिससे उसे मेरी पैंटी निकालने में आसानी हो । इस तरह वो मेरी चूत देखते देखते मेरे तन का आखिरी कपड़ा भी निकाल देता है ।
मैं - आह । अब देर मत करो साबिर , चूसो इसे । चाटो मेरी बटरफ्लाई को ।
उसके बाद वह मेरी चूत को किसी कुत्ते की तरह चाटने लगता है । मैं अपने सर को यहां वहा पटकने लगती हूं , और उसके बाल खींचने लगती हूं । उसे काफी देर हो गई थी और अब मेरी चूत भी लाल हो गई थी । मैं उसे खड़ा उठाती हूं । वह खड़ा होता है तो मैं उसका लण्ङ उसकी पेंट के बाहर से पकड़ लेती हूं जो अब हल्का खड़ा हो चुका था।
मैं - जल्दी खोलो अपनी पैंट , मेरे सारे कपड़े तो तुमने उतार दिए फिर तुमने क्यों पहना है ये , जल्दी उतारो इसे, पूरा दिन यही नहीं रहना है ... ठीक है न .... बाहर स्मिता भी हमारा वेट कर रही है ।
साबिर दूर जाकर अपनी पैंट खोलने लगता है उसके बाद अंडरवियर में वह मेरे पास आता है तो मैं अंडरवियर के बाहर से ही उसका लिंग हाथ में लेकर दबाने लगती हूं और उसके होठों पर किस करने लगती हूं । मुझे महसूस हुआ कि उसका पूरी तरह से खड़ा नहीं हुआ है । यह देखकर मैं हैरान थी ।
मैं - इसको भी तो उतारो , स्मिता ने 2 घंटे में आने के लिए कहा है ।
साबिर - इतनी भी क्या जल्दी है जान ,,, अभी तो बहुत टाइम है
मैं - टाइम ही तो नहीं है, कोई आ गया यहां तो
साबिर - यहां कोई नहीं आएगा यहां जो भी लड़के आते हैं वह अपनी गर्लफ्रेंड को चोदने के लिए आते हैं और लड़कियां चुदाने के लिए । उनके अलावा और यहां कोई नहीं आता ।
मैं - ओ हो ठीक है लेकिन तुम्हारा यह अब तक खड़ा क्यों नहीं हुआ । तुम क्या करने के लिए मुझे यहां लाए हो ।
साबिर अंडरवियर के ऊपर से ही मुठ मारने लगता है और साथ ही मेरे बूब्स दबाने लगता है ।
मैं - अब मेरे इनको ही दबाते रहोगे या कुछ करोगे भी,
ऐसे तो बहुत देर हो जायेगी । तुम्ही ने इतना कहा था, तो मैं आ गई , और अब तुम ... लगता है आज कुछ नहीं होने वाला
साबिर – बस होने वाला है
मैं - अभी पूरा नहीं खड़ा हुआ है, लगता है आज मेरी चुदाई नहीं हो पाएगी ।
साबिर - कुछ करो
मैं - क्या करूं
साबिर - डांस करो ... गान्ड मटकाओ अपनी
मैं - क्या कहा तुमने , गा ... गान्ड मटकाऊं
साबिर – हां हां ... गान्ड मटकाओ ... जल्दी
मैं– ,,, ओके ये भी करके देख लेते हैं ... लो देखो मुझे ( मै उससे थोड़ा पीछे होके अपने दोनों हाथों को सर पे रखकर , धीरे धीरे अपनी कमर मटकाने लगती हूं )
आँखें बंद मत करो , मुझपे फोकस करो
साबिर - आह ....आह
मैं - लगता है मुझे ही कुछ करना पड़ेगा
इसके बाद मैं आगे बढ़कर खुद ही साबिर की अंडरवियर निकाल देती हूं और उसका ल**अपनी च** के ऊपर लगाकर उसे अंदर धकेलने लगी।
साबिर - ओह ,,, आह,,,
मैं - अब क्या हुआ तुम्हे, फोन पर तो खूब कहते थे कि यह करूंगा वह करूंगा , स्टूपिड , बाहर तो बड़ी बड़ी फेंक रहे थे । गान्ड भी मटका दी मैने तो अब । फिर । ( अब मैं भी खुल के डर्टी लैंग्वेज में बात कर रही थी )
साबिर - कर तो रहा हूं
मैं - क्या खाक कर रहे हो,,, यह खड़ा क्यों नहीं हुआ अब तक ,,, मुझे तो लगता है तुममें दम नहीं है मेरी लेने का ।
मैं अब परेशान हो गई थी मेरा बदन जलने लगा था ,
मैं - कंडोम कहां है
वो पेंट की जेब से निकालता है । उसे मै साबिर के हाथ से लेकर उसे मुंह से फाड़कर नीचे बैठ कर खुद उसके लण्ङ पे पहनाने लगती हूं । उसके लण्ङ पे निरोध पहनाने के बाद मैंने एक नजर साबिर को देखा और एक झटके में उसका लण्ङ अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी । ( ये सब मैने बीएफ में देखा था, इसीलिए मैं सब जानती थी )
मैं - चलो अब यह थोड़ा खड़ा हो गया है अब डालो अंदर, जल्दी डालो प्लीज़ ... नहीं तो मैं मर जाऊंगी आज यहीं ... अब तो मुझसे भी रहा नहीं जा रहा
मैं खड़ी हो गई ।
मैं पीछे मुड़ जाती हूं और उसका ल** अपने एक हाथ से पकड़कर अपनी गांड में डालने लगती हूं ।
मैं - चलो पहले यहां ट्राई करो ।
वह कोशिश करने लगता है लेकिन उसका अभी भी पूरी तरह से खड़ा नहीं हुआ था ।
मैं अब पागल होने लगी थी ।
मैं - मुझे नहीं पता था तुम इतने बड़े नामर्द निकलोगे, जल्दी चोद कर मुझे ठंडा करो नहीं तो मैं किसी और को बुला लूंगी बाहर से .... इससे तो अच्छा होता कि मैं उस चूतिये सलीम को पटा लेती । वो तुम से ज्यादा स्ट्रांग लगता है ।
साबिर - पता नहीं क्यों , आज क्यों नहीं हो रहा है, शायद जल्दी बाजी के कारण
मैं - और कितना टाइम चाहिए, बॉयज तो तैयार रहते हैं इसके लिए, हमारे कॉलेज के टॉयलेट में कई लड़के लड़कियों का तो 5–10 मिनट हो जाता है ।
(वो अभी भी अपना अधखड़ा लिंग मेरी चूत में ठेलने का प्रयास कर रहा था )
साबिर - हो रहा है .... धीरे धीरे
मैं – नहीं हो रहा, रहने दो ऐसे नहीं होगा , तुम से नहीं हो पाएगा , तुम ऐसा करो बाहर जाओ और किसी को ढूंढ के लाओ . बिना मरवाए आज मैं यहां से नहीं जाने वाली । मेरे अंदर तुमने जवानी आग भड़काई है, तो उसे भी तुम ही बुझाओगे
वह कुछ देर तक असफल प्रयास करता रहा ।
मैं – तुम बेकार में कोशिश कर रहे हो,
अचानक उसका झड़ गया । मैंने उसके गाल पर हलकी चपत लगा दी । और गुस्से में अपने कपड़े पहने लगी ।
साबिर - तुम तो कह रही थी कि बिना करे नहीं जाऊंगी और बाहर से किसी को ले आने के लिए कह रही थी
मैं - तो क्या रण्डी बन जाऊं और किसी से भी मरा लूं अपनी । ( थोड़ी देर रुक के मैने कहा ) ऐसे क्या देख रहे हो .... ठीक है, तुम्हारे बस का नहीं है तो ले आओ । मैं तैयार हूं । फिर तुम खड़े रहना कोने में और देखते रहना अपनी गर्लफेंड्र को चुदते हुए किसी और से ... लूज़र कहीं के । सारा मूड खराब कर दिया ।
साबिर - सॉरी निमी वो ...
मैं - अब दोबारा मत बुलाना मुझे , बड़ी मुश्किल से आई थी यहां।
साबिर- - अरे ,रुको, निमी, तुम कपड़े क्यों पहन रही हो, अभी तो बहुत टाइम है, सिर्फ 20 मिनट ही हुए हैं
मैं - नहीं, तुम्हारा ना , दुबारा खड़ा होने में बहुत टाइम लगेगा साबिर,
साबिर - कुछ टाइम नहीं लगेगा
मैं - अच्छा जी, ठीक है फिर खड़ा करके दिखाओ पहले , उसके बाद मैं कपड़े उतारूंगी।
मैं उसके सामने खड़ी हो गई और वहां मुझे देखकर मुठ मारने लगा ।
मैं - जल्दी खड़ा करो , क्या हुआ,
साबिर - निमी , कुछ दिखाओ तो सही, तभी तो खड़ा होगा
मैं - नहीं, अब ये स्कर्ट तभी नीचे गिरेगी, जब तुम इसे मेरी बूर में जाने लायक बना लोगे , कोई लड़की तुम्हे दुबारा चांस दे रही है । ये भी बड़ी बात है
साबिर - मैं कोशिश कर रहा हूं
मैंने गुस्से में कपड़े तो पहन दिए थे लेकिन मैंने सोचा की एक मौका और देती हूं इसे। लेकिन उसका तभी भी पूरा खड़ा नहीं हुआ था। मुझे यह भी डर था कि कोई कपल यहां ना आ जाए । उसको हिलाते हिलाते 5 मिनट हो गए थे ।
मैं - तुम ऐसा करो , कोशिश करते रहो , मैं जाती हूँ ।
साबिर - नहीं रुको प्लीज
मैं - नहीं साबिर अब ज्यादा देर यहां रुकना ठीक नहीं है । कोई बात नहीं यार । इस बार नहीं हुआ तो अगली बार कर लेना ।
अब मैं भी वहां से जाने लगी । उसने मुझे रोकना चाहा लेकिन मैंने उसे नेक्स्ट टाइम का वादा कर के चलने के लिए कहा । फिर वह भी मेरे पीछे-पीछे आ गया । एक घंटे में ही हम बाहर आ गए । वहां कुछ और कपल्स हमने देखे जो एक दूसरे के साथ रोमांस कर रहे थे । आज पता नहीं कैसे कैसे शब्द मेरे मुंह से निकले थे । पहली बार में अक्सर लड़कियां घबराती और शर्माती हैं। लेकिन मैने ऐसा कुछ नहीं किया। मुझे अहसास हुआ कि मेरे अंदर भी एक रंडी छुपी हुई है और अब मैं भी अब स्मिता की तरह एक slut बनने की राह पे चल पड़ी हूं ।


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