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Adultery Mother Secret Affair..2
#24
Heart 
स्पेन कि जो कंपनी भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपनी / फैक्टरी खोलने वाली उसके लिए उनलोगों को उड़ीसा के राउरकेला में अपनी नई कंपनी / फैक्टरी लगाने के लिए ज़मीन ख़रीदी , फिर निकोल और उसका बेटा जाॅनसन ने फैक्टरी बनाने कि सारी जिम्मेदारी मेरी पति को देकर स्पेन वापस लौट गए । करीब दो महीने बाद वहाँ पर कन्स्ट्रकशन का काम शुरू करवा दिया। इस दौरान मुझे वहाँ जाने का मौका नहीं मिला। पर जब सारा काम मुकम्मल हो गया तो मेरे पति मुझे वहाँ लेकर गए।

मुझे वहाँ की ठंडी हवा बहुत अच्छी लगी। हमारी फैक्टरी लगभग जंगल में ही थी। फ़ैक्टरी के पास ही एक छोटा सा घर भी मेरे पति ने बनवाया था।

घर के पास से ही एक कच्ची रोड नीचे घाटी की तरफ जाती थी जो एक गाँव में पहुँचती थी, मगर गाँव बहुत दूर था।

2-4 दिन तो ठीक ठाक कटे पर बाद में मैं बोर होने लगी, अब सारा दिन घर में क्या करती। एक दिन सोचा कि चलो नीचे गाँव में चल कर देखती हूँ।अपने पति को फ़ैक्टरी भेजने के बाद मैं तैयार होकर कच्ची रोड़ पे चल पड़ी।

थोड़ा सा आगे जाने पे तो पूरा जंगल शुरू हो गया, बिल्कुल शांत, सिर्फ झींगुर और किसी पंछी के बोलने के आवाज़ आ रही थी।
काफी देर चलने के बाद भी कोई गाँव नज़र नहीं आया।
फिर मेरे भी दिल में थोड़ा डर आया के इस जंगल में अकेली मैं, अगर कोई जंगली जानवर आ जाए तो?

फिर खयाल आया अगर कोई आदमी आ जाए और यहाँ मेरा देह शोषण करे यानि मुझे चोद दे तो? इस ख्याल से ही मेरे तन बदन में झुरझुरी सी हो गई।

मान लो अगर मेरा देह शोषण यहाँ हो जाता है तो मैं क्या करूंगी, क्या मैं उस देह शोषणकर्ता का विरोध करूँगी या खुद ही उसे अपनी मर्ज़ी से सेक्स करने दूँगी, अगर अपनी मर्ज़ी से ही सेक्स करने दिया तो फिर देह शोषण कैसे हुआ?
नहीं, मैं पूरी ताक़त से उसका विरोध करूँगी, हाँ बाद में उससे कह दूँगी कि मुझे भी बहुत मज़ा आया।

अभी मैं यह सब सोचती सोचती चली जा रही थी कि थोड़ी दूरी पर मैंने एक झोंपड़ी देखी। मैं अनायास ही उस झोंपड़ी की तरफ बढ़ गई।
जब मैं उस झोंपड़ी के पास पहुँची तो मुझे लगा जैसे यह किसी साधू की कुटिया है।

मैं अंदर गई तो देखा कि अंदर एक साधू ध्यान में मग्न बैठे हैं, सर पे जूड़ा, बढ़ी हुई दाढ़ी, चौड़े कंधे, उम्र करीब 45-50 साल। बाल अध-पके, सीना भी बालों से भरा हुआ।

देखते ही साधू के लिए मन में श्रद्धा भर आई, मैंने झुककर साधू के चरणों में प्रणाम किया।

साधू ने आँखें खोली और मुझे आशीर्वाद दिया- कहो बच्चा, इतनी दूर यहाँ कैसे आई?’ साधू ने पूछा।

‘बाबाजी, हमारी फ़ैक्टरी है यहाँ, वो जो ऊपर सड़क के पास नई बनी है न वो वाली, मैं तो बस गाँव की तरफ जा रही थी, रास्ते में आपकी कुटिया देखी तो आपका आशीर्वाद लेने चली आई।’ मैंने जवाब दिया।

‘अच्छा, अच्छा, क्या बनाते हो फ़ैक्टरी में?’ साधू ने पूछा।

‘जी इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाते हैं बहुत सारी…’ मैंने कहा।

लेकिन मैंने यह भी गौर किया कि साधू बात करते करते कई बार मेरे चूची को भी देख रहे थे ( ब्लाउज के उपर से ) , बातचीन के दौरान उन्होंने मेरे सारे बदन का मुआयना कर लिया था।
खैर उस दिन तो कोई ज़्यादा बात नहीं हुई, और मैं थोड़ी देर बाद ही साधू का आशीर्वाद लेकर वापिस आ गई।

वापिस आते समय मुझे पेशाब करने की इच्छा हुई तो मैंने आसपास देखा तो कहीं भी कोई नहीं था।
तो मैंने भी मस्ती करने की सोची और कच्ची सड़क के बीच में ही मैंने अपनी साड़ी ऊपर उठाई और बैठ कर पेशाब करने लगी।
मैं चाहती थी कि कोई अकस्मात ही आ जाए और मुझे नंगी पेशाब करते देख ले।

मगर कोई नहीं आया। मैंने ज़ोर से बोला, ‘अरे कोई है, एक सुंदर गोरी चिट्टी औरत सड़क पे मूत रही है, कोई तो आ के देख ले। मगर कोई नहीं आया।

मैंने मन में सोचा कि मैं यह क्या कर रही हूँ।
पर मस्ती तो मेरे दिमाग पे चढ़ी हुई थी।

मैं पेशाब करने के बाद भी बड़े आराम से उठी, चलते चलते अपनी पेंटी ऊपर की और काफी दूर तक अपनी साड़ी ऊपर उठाए चलती रही, मगर मुझे रास्ते में कोई नहीं मिला।

फिर मैं भी निराश सी होकर अपने घर को चली गई।

रात को पतिदेव ने खूब तसल्ली करवाई।
मगर मेरे मन में तो कुछ और ही चल रहा था।

अगले दिन सुबह मैं फिर से तैयार होकर जंगल की तरफ चल पड़ी।

आज मैंने टी शर्ट और कैप्री पहनी हुई थी। कपड़े स्किन टाईट होने की वजह से मेरे बदन की हर गोलाई बड़ी उभर कर दिख रही थी।

मैं वैसे ही घूमती-घामती फिर साधू की कुटिया की तरफ चल दी।

आज साधू कुटिया में नहीं थे।

मैंने कोई आवाज़ नहीं की बस बड़ी शांति से घूमते हुये कुटिया के पीछे गई।

वहाँ साधू एक छोटा सा लंगोट पहने लकड़ियाँ काट रहे थे।

साधू का शरीर बड़ा ही कसा हुआ था। लंगोट ने सिर्फ उनका लौड़ा ही छुपा रखा था, वर्ना इस लिबास में साधू तो बिल्कुल नंगे ही थे।
उनकी दो मजबूत मस्कुलर टाँगें और उन टाँगों के ऊपर दो बड़े से गोल चूतड़। आज साधू के कसरती बदन के भरपूर नज़ारा दिखा था। बस देखते ही मेरी तो चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया।

मैंने वैसे ही सोचा कि साधू इतने बलिष्ठ हैं, अगर कोई कुँवारी कन्या को ये चोदने लग जाएँ तो ये तो उसकी बैंड बजा देंगे, कुँवारी क्यों अगर मेरे को चोदे तो मेरी भी तो बैंड बजा देंगे।

यह सोचकर मेरे मन में एक विचार आया। मैंने अपनी टी शर्ट के ऊपर के तीनों बटन खोल दिये ताकि मेरा एक बड़ा सा क्लीवेज दिखे।

अब आधी छातियाँ नंगी और आधी टाँगें नंगी लेकर अगर मैं साधू के सामने जाऊँ तो हो सकता है कि साधू की घंटी बज जाए और मैं साधू जैसे बलिष्ठ और बलवान मर्द का भी सुख भोग सकूँ।

यह सोच कर मैं साधू के पास ही चली गई और उन्हें प्रणाम किया- प्रणाम बाबा! मैंने कहा।

साधू मुझे देखकर बिल्कुल भी नहीं सकपकाए, बल्कि बड़े विश्वास से बोले- जीती रहो बच्चा, भगवान तुम्हारा कल्याण करें!

‘बाबा भगवान का पता नहीं पर आप मेरा कल्याण ज़रूर कर सकते हैं।’ मेरे दिल की बात मेरी ज़ुबान पर आ ही गई।

अब साधू थोड़ा चौंके- क्या मतलब, बच्चा?

‘बाबा पति पर काम का बोझ बहुत ज़्यादा है, वो तो मेरी तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते। काम से आते हैं, खाना खाकर सो जाते हैं, और मैं बिस्तर पे तड़पती रहती हूँ। आप बताओ बाबा, मेरे सुंदर रूप में क्या कमी है?’ मैंने साधू से कहा।

साधू ने मुझे ऊपर से नीचे तक किसी बड़े ठरकी की तरह घूरा और कहा- तुम तो परमात्मा की एक बहुत ही सुंदर कृति हो।

‘वही तो… इस सुंदर रूप और इस आकर्षक बदन को जब पति देखे ही न, तो औरत क्या करे?’ यह कहकर मैंने जान बूझकर रोने का नाटक करना शुरू किया।

साधू बोले- मैं तुम्हें एक जड़ी देता हूँ, अपने पति को देना और फिर देखना!

यह कह कर साधू अंदर झोंपड़ी में चले गए तो मैं भी उनके पीछे पीछे झोंपड़ी के अंदर चली गई।

साधू ने अपन आसन ग्रहण किया और अपने झोले से एक जड़ी बूटी सी निकाली।

मैं बिल्कुल साधू के चरणों के पास नीचे बैठ गई मैंने उनके पाँव पकड़े और अपना सर उनकी गोद में रख दिया और जानबूझ कर रोती रही जैसे मैं बहुत दुखी हूँ।

साधू ने मेरे सर पे हाथ फेरा और मुझे ढांडस बँधाया- चिंता मत कर बेटी, यह जड़ी बहुत कारगर है, 2-3 दिन में ही अपना असर दिखा देगी। साधू बोले।

मुझे लगा कि साधू चाहते थे कि मैं उनके पाँव छोड़कर उनके सामने ठीक से बैठ जाऊँ, पर मैंने साधू के पाओं नहीं छोड़े।

साधू ने एक दो बार मेरा सर अपने चरणों से उठाने की भी कोशिश की मगर मैं नहीं हटी।

यह स्थिति शायद साधू के लिए भी बड़ी अजब रही होगी।

मेरे आँसू साधू के टखनों पर गिर रहे थे, मेरी गर्म साँसें साधू की एड़ियों को छू रही थी।

थोड़ी देर बाद मुझे एहसास हुआ जैसे कोई चीज़ मेरे माथे को छू रही थी, अपने अंदाजे से मैं जान गई थी के साधू का लौड़ा खड़ा हो गया है।

मैंने सर उठा कर साधू की तरफ देखा।

साधू बड़े प्यार से मेरा सर सहला रहे थे और उन्होंने भी बड़े प्यार से मेरी आँखों में देखा।

मैंने देखा कि साधू के लंगोट को लौड़े ने ऊपर उठा रखा था और उनके आँड और आस पास गहरे घने बाल भी दिख रहे थे।

मैंने साधू के लण्ड को घूरते हुये साधू से पूछा- बाबा प्रसाद नहीं दोगे?

‘कौन सा प्रसाद चाहिए बेटी?’ साधू ने भी कुछ बनावटी अंदाज़ में कहा।

‘मुझे इसका प्रसाद चाहिए!’ कहकर मैंने अपनी उंगली से साधू के तने हुये लण्ड को छू कर कहा।

साधू ने अपना लंगोट एक तरफ हटा कर अपना लौड़ा बाहर निकाला और कहा- लो बेटी, पिछले 13 साल से इसने कभी किसी स्त्री की योनि को नहीं देखा है, जब से यहाँ आया हूँ, मैं ब्रह्मचर्य का पालन कर रहा था, मगर तुम मेनका बन कर आई और मेरा ब्रह्मचर्य भंग कर दिया।

मैंने साधू के लवड़े को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया।

साधू का लण्ड बहुत ही मजबूत और डंडे की तरह बिल्कुल सीधा था।
मैंने बिना कुछ कहे साधू के लण्ड को अपने मुख में लेकर चूसना शुरू कर दिया।

साधू ने अपनी टाँगें खोल दी और अपना लंगोट भी उतार दिया।

मैंने बड़ी तसल्ली से साधू का सारा लण्ड, उनके आँड और अगल बगल सारी जगह को चाटा।

साधू भी ‘ऊह, आह…’ कर रहे थे, जब गुदगुदी होती तो उचक जाते, मेरे सारे बदन पे हाथ फेरते रहे और मेरे स्तनों से खेलते रहे।

थोड़ी देर चूसने के बाद साधू उठे और उन्होंने एक गद्दा, एक रज़ाई उठाई और फर्श पे बिछाई।

‘यहाँ आ जाओ, यहाँ भोग लगाऊँगा मैं !’ साधू बोले।

तो मैं रज़ाई के ऊपर आ गई।

साधू ने मुझे खड़ा रखा और बड़े प्यार से मेरी टाँगों को चूमा और चाटा जो मेरी कैप्री के बाहर दिख रही थी, मेरी जांघों को सहलाया, मेरे चूतड़ों को ज़ोर ज़ोर से दबाया, सहलाया, चूमा।

‘जानती हो, जब मैं शहर में जाता हूँ और वहाँ लड़कियों और औरतों को इस तरह के कपड़ों में देखता हूँ तो बड़ा दिल करता है के इसकी गाँड में उंगली डाल दूँ, उसके चूतड़ों पे कस के चपत मारूँ, मगर मैं ऐसे कर नहीं सकता, बस मन मसोस के रह जाता था, आज मैं अपनी इच्छा पूरी करनी चाहता हूँ।’ साधू ने अपना दिल खोला।

मैंने भी कहा बाबा, आज मैंने आपने आप को आपको अर्पण कर दिया, मेरा जो चाहो कर लो।

मेरी सहमति पाकर साधू ने मेरी गाँड को बहुत प्यार किया, बहुत सहलाया और चपात मार मार के दोनों चूतड़ लाल कर दिये।

फिर साधू ने मुझे अपने हाथों से एक एक कपड़ा उतार के बिल्कुल नंगी कर दिया।

मेरे नंगे बदन को साधू ने बड़े प्यार से देखा, मेरी जाघों पे हाथ फिराया, जीभ से चाटा, मेरे पेट और कमर पे भी चूमा-चाटी की।
मेरे स्तनों को सहलाया, दबाया, निचोड़ा, मेरे निपल मुँह में लेकर चूसे, उन्हें दाँतो से काटा।

मेरी गर्दन को चूमा, मेरे गालों को चूसा, होंठ चूसे अपने जीभ मेरे मुँह में घुमाई।

मतलब साधू ने बड़ी तसल्ली से मुझे चूसा।

उसके बाद मुझे नीचे लेटाया।

मैंने खुद ब खुद अपनी टाँगें खोल दी तो साधू मेरी टाँगों के बीच में आ गए, अपना लण्ड उन्होंने मेरी चूत पर टिकाया जो पहले से ही बेतहाशा पानी छोड़ रही थी।

साधू ने हाथ जोड़े, किसी देव को ध्याया और हल्का धक्का मारा, जिस से उनका लण्ड मेरी प्यासी चूत में समा गया।

2-3 धक्कों में ही पूरा लण्ड मेरी चूत में अंदर तक घुस गया।

साधू का लण्ड बहुत ही शानदार था, मोटा और लंबा और मेरी चूत को अंदर से बाहर तक पूरा भर दिया।

साधू ने पहले धीरे से चुदाई शुरू की, उनके हर धक्के के साथ मेरे मुख से हल्की सी सिसकारी निकल जाती।

मैं ‘ऊह, आह, अम्म, उफ़्फ़’ कर रही थी मगर साधू बड़े शांत स्वभाव से संभोग कर रहे थे।

मेरी बेचैनी बढ़ रही थी मगर साधू बड़े इतमीनान से लगे रहे।
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Mother Secret Affair..2 - by Puja3567853 - 10-02-2025, 01:40 PM
Mother secret affair 2 - by Puja3567853 - 12-02-2025, 08:02 AM
Mother secret affair 2 - by Puja3567853 - 12-02-2025, 08:06 AM
Mother Secret affair 2 - by Puja3567853 - 14-02-2025, 12:41 PM
RE: XXX: Uncensored Story - by Puja3567853 - 20-02-2025, 11:15 AM
RE: XXX: Uncensored Story - by Puja3567853 - 20-02-2025, 11:47 AM
RE: XXX: Uncensored Story - by momass - 05-03-2025, 08:32 AM
RE: XXX: Uncensored Story - by Puja3567853 - 19-04-2025, 11:56 AM
RE: XXX: Uncensored Story - by Puja3567853 - 19-04-2025, 12:04 PM
Mother Secret affair 2 - by Puja3567853 - 20-04-2025, 07:40 AM
RE: Mother Secret Affair........... 2 - by Xossiy - 12-05-2025, 12:01 PM
RE: Mother Secret Affair........... 2 - by Xossiy - 13-05-2025, 03:21 PM
RE: Mother Secret Affair..2 - by Puja3567853 - 08-10-2026, 10:45 PM



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