Thread Rating:
  • 0 Vote(s) - 0 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
लंड की लालसा
#15
मैंने कहा- नहीं कुणाल, पर मैं ये कह रही हूँ …
इतने कहते के साथ ही कुणाल ने मुझे अपनी बांहों में दबोच लिया और मेरे होंठों को अपने होंठों से सील कर दिया।

मैंने थोड़ा सा विरोध किया और उसे पीछे धकेलने की कोशिश करने लगी।
पर कुणाल ने अपनी पकड़ और मजबूत कर दी और मेरे जिस्म से अपना जिस्म रगड़ने लगा।

मेरे दिमाग ने तो काम करना ही बंद कर दिया था, मुझे सही गलत कुछ समझ नहीं आ रहा था।
अब मेरे दो मन हो रहे थे, या तो इसे थप्पड़ मार के अंदर चली जाऊँ या उसे जो करना है करने दूँ।

पर कुणाल मुझे छोड़ने को तैयार नहीं था. अब तो उसका लंड भी मुझपे रगड़ मार रहा था।
मेरे मन में ख्याल आ रहा था कि ये चोद के ही मानेगा. क्या करूँ … इससे भी चुदवा लूँ क्या … किसी को क्या पता चलेगा।

और इसके साथ ही मैंने विरोध एकदम से बंद कर दिया और खुद को ढीला कर के उसके हवाले कर दिया।

विरोध रुका देख कुणाल एकदम रुका और मुस्कुराया।
मैंने कुछ नहीं कहा और वैसे ही खड़ी रही।

अब कुणाल ने मेरे होंठों को पागलों की तरह चूसना शुरू कर दिया.
और धीरे धीरे मैं भी उसका साथ देने लगी।

मैं मन ही मन सोच रही थी, मुझे क्या हो गया है, अभी कुछ समय पहले अजय से चुदवा के आई हूँ, अब कुणाल से भी चुदवाऊंगी।

किस करने के साथ ही कुणाल ने मेरे बूब्स को भी मसलना शुरू कर दिया जोर ज़ोर से!
मेरी उम्महह… उम्महह … की सिसकारियाँ निकलने लगी।

हम दोनों अब भी अंधेरी रात में खुले आसमान के नीचे ही थे.
हालांकि बंगले की लाईट्स की वजह से पूरा बगीचा रोशन था पर बिल्कुल सन्नाटा था.

हम दोनों की मादक सिसकारियों की आवाज आ रही थी।
जब किस हो गयी तो मैंने कहा- अंदर चलते है ना!
कुणाल बोला- नहीं, अंदर नहीं जा सकते, तुम्हारी भाभी को पता चल जाएगा।

मैंने कहा- तो फिर?
कुणाल बोला- यहीं कर लेते है, किसी को पता नहीं चलेगा।

मैंने कहा- यहाँ खुले में? नहीं नहीं।
कुणाल बोला- यहाँ कोई नहीं है देखने वाला, हम शहर से बहुत दूर है, और जंगल में हैं, कुछ नहीं होगा. आओ ना जल्दी!

उसकी बात सही थी पर फिर भी … सेक्स इन गार्डन … मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था।

कुणाल बोला- चलो उस पेड़ के पीछे चलते हैं।
मैं चुपचाप उसके साथ चल दी।

पेड़ के पीछे जाते जाते उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिया और मुझे भी बोलने लगा- तुम कपड़े उतारो फटाफट।
मैंने इधर उधर देखा और अपनी शर्ट उतार दी।

क्योंकि मैंने पैंट तो पहनी ही नहीं थी अब सिर्फ ब्रा पैंटी में ही बची थी।

कुणाल ने कच्छा उतारते हुए बोला- इन्हें भी उतारो फटाफट!
मैंने वो भी उतार दी और अब मैं बिल्कुल नंगी हो चुकी थी उसके सामने!

उसका लंड भी पूरे उफान पे था।
मैंने उसको हाथ से छूना शुरू कर दिया और हल्के हाथ से ऊपर नीचे करने लगी।

कुणाल बोला- ऐसे नहीं, जल्दी से चूसो, मजा आएगा।
मैंने कुछ नहीं कहा और चुपचाप घुटनों के बल घास में बैठ गयी और धीरे धीरे चूसना शुरू कर दिया।

कुणाल ने मेरे सिर पे हाथ रखा था और मैं आगे पीछे गुप्प.. गुप्प … गुप्प … कर के उसका लंड चूस रही थी।

फिर कुणाल ने मेरे मुंह से अपना लंड निकाल लिया और मैं खड़ी हो गयी।
कुणाल बोला- वाह लंड तो बहुत अच्छा चूसती हो तुम!

मैंने कहा- आज ही सीखा है।
कुणाल बोला- अच्छा है.

और वो घुटनों के बल मेरे आगे बैठ गया और मेरी एक टांग उठा के अपने एक कंधे पे रख ली।
फिर उसने सीधा मेरी चूत को सूंघा और अपनी जीभ से नीचे से ऊपर तक फिरा के चाटी।
मेरे मुंह से एकदम से आहह … निकल गयी।

फिर तो वो बुड़क भर भर के मेरी चूत चाटने लगा और अपने थूक से गीली कर दी।
मैं भी पेड़ से टेक लगाए ऊपर नीचे हो रही थी।

ऐसे ही वो 4-5 मिनट तक चूत चाटता रहा और मेरी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी, लंड लेने को उतावली हुई जा रही थी.
मैंने कहा- बस अब और नहीं, अब चोद डालो मुझे।

कुणाल खड़ा हुआ और बोला- ठीक है जान अभी लो!
वो मेरे से सट के खड़ा हो गया आर मेरी एक टांग जांघ से उठाई और अपना लंड मेरी चूत पे सटाया और गुप्प … कर के एक बार में ही घुसा दिया।

मेरी चूत गीली होने के कारण उसका लंड फिसलता हुआ अंदर चला गया और अटक गया जिससे मुझे ऊपर को एक झटका लगा और आउच… निकल गयी और मैंने उसको बांहों में भर लिया।

अब कुणाल ने धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर करना शुरु कर दिया और पट्ट पट्ट मेरी चुदाई होने लगी।

कुणाल के मुंह से हम्म … हम्मम्म … हम्म म्मम … की आवाजें निकल रही थी और मेरे मुंह से भी आहह … आहह … आई … कुणाल … स्सी … स्सी … निकल रही थी।

धीरे धीरे कुणाल ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और खुद को मुझ पे पटक पटक के चोदने लगा।
अब तो हमारे जिस्म टकराने की पट्ट पट्ट की आवाज भी आने लगी थी।

मेरे मुंह से हल्की हल्की दर्द भरी सिसकरियां भी निकल रही थी और हल्की मुस्कुराहट भी थी चुदवाने की।

ऐसे ही उसने मुझे 5-6 मिनट तक चोदा और जब उसकी सांस फूल गयी तो रुक गया और साइड में खड़ा होके हाँफने लगा।
मैं भी लम्बी लम्बी सांस लेती हुई हाँफ रही थी और मुस्कुरा भी रही थी।

कुणाल बोला- मजा आ रहा है ना?
मैंने कहा- हाँ बहुत मजा आ रहा है।

जब हमने आराम कर लिया और तो कुणाल बोला- चलो फिर से करते हैं.

वो मेरे पास आया और मुझे घुमा दिया, अब मेरी पीठ उसकी तरफ थी।

उसने मुझे हल्का सा आगे को झुकाया और पीछे से चूत में लंड डाल के अंदर घुसा दिया।
मेरी हल्की सी स्सी … निकली.

कुणाल ने मेरे कंधों को पीछे से पकड़ लिया और खुद आगे पीछे धक्के मारते हुए पट्ट पट्ट चोदने लगा।

इस बार तो उसने शायद अपनी पूरी ताकत से चोदना शुरू कर दिया और मुझे पूरी हिला के रख दिया।

वो बार बार अपना आधे से ज्यादा लंड निकालता और फिर पूरा अंदर तक डाल देता।

मैं ज़ोर ज़ोर से आहह … आहह … आहह … कर रही थी आगे पीछे हिलते हुए।

मेरी चूत ने फूल के उसके लंड को जकड़ रखा था और उसके लंड की रगड़ से मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मुझे लगने लगा था की अब मेरा पानी झड़ने वाला है।
मैंने ज़ोर ज़ोर से आह … आह … करते हुए कहा- और ज़ोर ज़ोर से … चोदो, मैं झड़ने वाली हूँ।

इतना सुनते ही कुणाल ने अपनी पूरी स्पीड कर दी अब सिर्फ पट्ट… पट्ट … पट्ट… की आवाज के साथ मेरी और उसकी ज़ोर ज़ोर की साँसों की आवाज आ रही थी।
अगले कुछ पलों में ही कुणाल ने कहा- आहह … नेहा … आ… आ … आ … नेहा …

और मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया और फ़च फ़च की आवाज आई.
तो वो समझ गया कि मैं झड़ने लगी हूँ।

उसके झटके भी रुक गए और वो पूरा लंड अंदर डाल के निकाल के मेरी चूत में ही झड गया।

फिर हम दोनों एक दूसरे से अलग हो गए और हाँफने लगे।

मेरी चूत से उसका वीर्य बह के मेरी जांघ से नीचे गिरने लगा।

जब सांस में सांस आई तो मैंने कहा- अब अंदर चलना चाहिए.

और हम दोनों ने अपने कपड़े समेटे और नंगे ही दबे पाँव अंदर चले गए और अपने कमरो में चले गए।
मैं सीधा बाथरूम गयी और खुद को साफ किया।

फिर मैं अजय के पास आ के सो गयी नंगी ही … ताकि उसको ये ना लगे कि मैं दुबारा चुदवा के आई हूँ।

हम सब अगले दिन सुबह उठे और चाय नाश्ता किया।
तब कुणाल ने बताया कि गाड़ी तो खराब हुई ही नहीं थी। उन्होंने जानबूझ कर बहाना बनाया था यहाँ आने के लिए … सब कुछ पहले से तय था ताकि कुणाल और भाभी मजे कर सकें।

पर क्योंकि अब तो मैं भी दोनों से चुदवा चुकी थी और खूब मजे लिए थे इसलिए मुझे कोई शिकायत नहीं थी बल्कि खुश ही थी।

उसके बाद हम सब वहाँ से निकल गए और फिर भाभी के मायके में आ गए।

हम दोनों कुछ दिन और वहाँ रही और फिर वापस अपने घर आ गयी।

यहाँ आकर फिर मेरी वही जिन्दगी शुरू हो गयी।
पर अब मैं सब भाभी को बता सकती थी और अगर मन होता तो भाभी मेरे लिए लंड का जुगाड़ कर देती थी।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
Like Reply


Messages In This Thread
RE: लंड की लालसा - by neerathemall - 26-03-2025, 01:14 PM



Users browsing this thread: