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लंड की लालसा
#14
अजय मुस्कुराया और बोला- ठीक है, चलो कुतिया बन जाओ, अब कुतिया की तरह चोदूँगा।
मैंने ब्लू फिल्मों में बहुत देखा था तो समझ गयी अब डोग्गी स्टाइल की बारी है।

मैं उठ के बेड पे कुतिया बन गयी और मजाक में बोली- ले कुत्ते चोद अपनी कुतिया को!
अजय बोला- अभी चोदता हूँ कुतिया रंडी तुझे!
और घुटनों के बल मेरे पीछे आ गया और मेरे चूतड़ो को पकड़ लिया।

मैंने पीछे देखा और बोला- तो डाल ना कुत्ते!

अजय ने चूत पे लंड लगाया और मेरे चूतड़ो को कस के पकड़ लिया ताकि मैं आगे ना हो जाऊँ।

मेरे चेहरे पे भी मुस्कान थी और मैंने पीछे सिर घूमा के अजय को देखना चाहा तो उसने तुरंत एक झटके में पूरा लंड अंदर तक घुसा दिया।
साथ ही मेरे मुंह से जोर की आहह … की चीख निकल गयी और मैं आगे से नीचे को झुक गयी।
मेरी आँखों से हल्के से आँसू भी आ गयी।

अजय बोला- आया मजा मेरी कुतिया?
मैंने कहा- आह … हम्म … आया … आह।

अजय बोला- तो ये ले!
फिर और ज़ोर ज़ोर से पट्ट पट्ट उसने धक्के मारना शुरू कर दिया और मैं उसके धक्को से आगे पीछे हिलने लगी।

उधर अजय उम्महह … उमम्ह … उमम्ह … करते हुए मुझे पूरी ताकत से चोद रहा था और इधर मेरा पूरा शारीर उसके धक्कों से आगे पीछे हिलते हुए थरथरा रहा था।
मेरे बाल, बूब्स सब आगे पीछे हिल रहे थे और मेरे मुंह से हल्के दर्द और बहुत से मजे की आहह … आहहह … आऊउच … आहह … हम्म … स्सस्सी … स्सस्सी … आहह … की सिसकारियाँ निकल रही थी।

अजय ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी थी और किसी कुत्ते की तरह पूरी स्पीड से मुझ कुतिया को चोदे जा रहा था।

मेरी चूत में खलबली मची हुई थी उसके लंड के घर्षण से। मेरे शरीर में आनंद भर गया था और इतना मजा मुझे कभी नहीं आया था।

धीरे धीरे मेरे शरीर में असीमित आनंद भर गया, मेरी चूत में जबर्दस्त मजा आने लगा और वो फूल के अजय के लंड को जकड़ने लगी।
मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरे अंदर एक धमाका हो जायेगा।

फिर तो बस मेरा शरीर अकड़ने सी लगा और मेरी सांस बुरी तरह फूल गयी।
कुछ ही पलों में मेरी ज़ोर की आहह … निकली और मेरी चूत झड़ने लगी।

कमरे में फच्च्ह … फच्छ … की आवाज आने लगी और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।

अब मैं ढीली पड़ने लगी पर अजय ढीला नहीं पड़ा था, उसने लबालब भरी चूत में ही चोदना जारी रखा 2 मिनट तक!
और फिर वो भी रुक रुक के धक्के मारने लगा।

मैं समझ गयी कि ये भी झड़ने वाला है।
इसके साथ ही एक ज़ोर ही आहह … के साथ अजय बोला- आहह … नेहा … आहह … आई …

और फिर वो रुक गया और उसके लंड ने मेरी चूत में अपना गर्म गर्म वीर्य भर दिया जो मुझे भी महसूस हुआ।

फिर भी अजय धीरे धीरे लंड डालने की कोशिश कर रहा था और निकाल रहा था. उसका लंड और वीर्य मेरी चूत में भरता जा रहा था।

जब वो भी पूरा खाली हो गया तो मेरे पीछे से मेरे ऊपर गिर गया और मैं भी नीचे गिर गयी।

हम दोनों ज़ोर ज़ोर से हाँफ रहे थे और सुस्ता रहे थे.
मैंने उसे इस रात के लिए धन्यवाद किया।

फिर ऐसे ही पड़े पड़े थकान में हम दोनों की आँख लग गयी सुस्ताते सुस्ताते!

मेरी पहली जबर्दस्त चुदाई खत्म हो चुकी थी।

आधी रात के बाद मेरी आँख खुली तो मैं उसी हालत में अजय के साथ पड़ी हुई थी।
मैं फिर धीरे से उठी और बाथरूम करने चली गयी।

इसके बाद मैंने अपने शरीर को साफ किया और मुंह धोया।
मेरी नींद टूट गयी थी तो अब मुझे नींद नहीं आ रही थी।

मैंने अपनी ब्रा पैंटी पहनी और ऊपर अजय की शर्ट डाल के रसोई में चली गयी पानी पीने!
मैं चुदवा के बहुत खुश थी और हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी।

पानी पी के मैं हाल में आ के बैठ गयी और अपना फोन चलाने लगी ऐसे ही।

मैंने ध्यान दिया कि बाहर कोई टहल रहा है।
दरवाजे से बाहर झांक के मैंने देखा तो कुणाल था, वो सिगरेट पी रहा था।

उसने भी मुझे देख लिया और मुस्कुरा दिया।
मैं भी बाहर आ गयी अब!

बाहर बहुत अच्छी हवा चल रही थी।
फिलहाल मुझे बहुत अजीब लग रहा था उससे बात करते हुए क्योंकि उसे भी पता था कि मैं क्या कर के आई हूँ।

मैंने ऐसे ही पूछा- भाभी सो गयी क्या?
कुणाल बोला- हाँ, वो थक गयी थी इसलिए सो गयी।

ये सोच के मेरी हंसी छूट गयी कि क्यूँ थकी होगी भाभी।

कुणाल ने पूछा- तो कैसा रहा?
मैंने पूछा- क्या कैसा रहा?

कुणाल बोला- मेरे दोस्त की सर्विस कैसी लगी?
मैंने भी थोड़ा शर्माते हुए बोला- अच्छी सर्विस थी, मजा आ गया।

कुणाल बोला- मुझे नहीं लगता. अगर इतनी अच्छी होती तो तुम भी अपनी भाभी की तरह थक के सो रही होती।
मैंने कहा- अरे नहीं, वो मैं सो गयी थी बस फिर नींद टूट गयी तो टहलने आ गयी।

कुणाल बोला- हम्म, टहलने में कोई दिक्कत तो नहीं हो रही होगी?
मैं समझ गयी कि वो क्या बोल रहा है, मैंने कहा- नहीं ऐसी कोई खास दिक्कत नहीं हो रही।

फिर हम ऐसे ही बात करते रहे थोड़ी बहुत।

मैंने पूछा- कल कितने बजे तक गाड़ी ठीक हो जाएगी?
कुणाल बोला- ये तो मैकेनिक ही बता पाएगा। तुम उसकी टेंशन क्यू ले रही हो. तुम्हारे घर पे एक अच्छी सी कहानी बता रखी है, किसी को नहीं पता कि तुम क्या कर रही हो। जी भर के मजे लो, अगर 2-3 दिन भी यहा रुकना पड़े तो किसी को कुछ पता नहीं चलेगा।

मैंने कहा- हम्म मजे तो ले ही लिए।
कुणाल बोला- और ले लो मजे, एक बार और!
मैंने कहा- नहीं, अजय सो रहा है।

कुणाल बोला- तो उसमें क्या है, मेरे से ले लो मजे, मैं दे देता हूँ।
और इतना कह के वो मेरी तरफ बढ़ने लगा।

मैं थोड़ा घबरा सी गयी तो पीछे हट गयी।
मैंने कहा- अरे अरे रुको, ये क्या कर रहे हो?
कुणाल बोला- मजे दे रहा हूँ।

मैंने कहा- नहीं, अजय से ही ले लूँगी मजे, आप अपने को काबू करो, भाभी को पता लगा तो लड़ाई हो जाएगी।
कुणाल बोला- कैसे पता लगेगा भाभी को, मैं तो नहीं बताऊंगा।

मैंने कहा- तुम्हारे इरादे ठीक नहीं लग रहे।
कुणाल बोला- ये गलत इरादों का ही टाइम है, आओ ना!

वो फिर मेरी ओर बढ़ा और मैं फिर पीछे सी को हट गयी।
कुणाल बोला- अरे डरो मत, किसी को कुछ नहीं पता लगेगा, मैं नहीं बताऊंगा, तुम भी मत बताना।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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RE: लंड की लालसा - by neerathemall - 26-03-2025, 01:13 PM



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