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लंड की लालसा
#12
अजय बोला- ठीक है, तुम थोड़ा आराम कर लो, मैं एक सिगरेट पी आता हूँ तब तक।
मैंने कहा- ठीक है.
और अजय ने एक तौलिया लपेटा और सिगरेट पीने चला गया.

मैं वैसे ही नंगी बेड पे टांगें खोल के पड़ी रही और सुस्ताती रही।
मैंने सोचा कि अभी तो सेक्स हुआ भी तब इतना मजा आ रहां है, सेक्स में तो पता नहीं कितना मजा आएगा।

कुछ देर बाद मैं उठी और बाथरूम में पेशाब करने और अपनी चूत साफ करने चली गयी।

वापस आई तो अजय कमरे में आ चुका था।
मुझे देखते ही बोला- तो तैयार हो अपनी जबर्दस्त चुदाई करवाने के लिए?
मैंने कहा- हम्म बिल्कुल।

अजय बोला- तो फिर आओ मेरे पास और खड़ा करो मेरा लंड!

अब मुझे पता ही था कि क्या करना है.
इसलिए मैं घुटनों के बल अजय के सामने बैठ गयी और उसके मुरझाए हुए लंड को किस करने लगी.
और फिर धीरे धीरे होंठों से मुंह में लेते हुए हल्का हल्का चूसने लगी।

कुछ ही देर में उसका लंड फिर से बड़ा होने लगा मेरे मुंह में।

फिर मैं और अच्छे से अंदर बाहर चूसने लगी और वो अपनी पूरी लंबाई तक बड़ा हो गया 2 मिनट में ही।
अजय ने बोला- अब रुक जाओ, अब देर मत करो, चुपचाप बेड पे टांगें खोल के लेट जाओ।

मैंने तुरंत वैसे ही किया और सिर के नीचे तकिया लगा के घुटने मोड के बेड पे लेट गयी।
अजय फिर मेरी चूत पे आया और जीभ से चाटने लगा।

मुझे हल्की हल्की गुदगुदी के साथ मजा आने लगा और उत्तेजना में मेरी चूत गीली सी होने लगी.
और मेरे बूब्स भी सख्त होने लगे।

मेरे मुंह से हल्की हल्की आहह … आह … उम्महह … उमम्ह … सिसकारियाँ निकल रही थी और पूरा शरीर में करेंट सा दौड़ रहा था।

मैंने उसका सिर बालों से पकड़ रखा था और अपनी चूत पे ऊपर नीचे घिस रही थी।
आखिर मेरी चूत अब चुदाई के लिए तैयार थी।

मैंने उसे रोकते हुए कहा- बस अजय, अब तो लंड डाल ही दो, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा एक पल भी!

अजय रुका और घुटनों के बल चल के मेरे ऊपर आ के झुक गया और बोला- तैयार हो, डालूँ फिर?
मैंने उसकी आँखों में देखते हुए हाँ में सिर हिलाया।

अजय ने अब देर न करते हुए अपने सख्त लंड को मेरी चूत के द्वार पे रखा और दबा के ऊपर नीचे घिसने लगा।
मैंने कहा- उम्महह … ये क्या कर रहे हो … आहह … डालो न … प्लीज … यार!

अजय बोला- धीरे धीरे डालता हूँ. वरना दर्द होगा तुम्हें जब सील टूटेगी।
मैंने कहा- तुम्हें जैसे डालना है डालो, पर डालो।

अजय ने अपने लंड की खाल को पीछे खींचा और उसका अंदर वाला चिकना लंड मेरी चूत पे रख के हल्का सा अंदर को दबाने लगा।

चूत चिकनी होने से उसका लंड आसानी से अंदर घुसने लगा।

पर जैसे ही वो थोड़ा सा और अंदर गया मुझे दर्द की एक लहर सी महसूस हुई और मेरे मुंह से सीईईई … निकल गयी।

अजय ने पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं … तुम डालो।

अजय थोड़ा और अंदर डालने लगा तो और तेज़ दर्द सा हुआ और मेरे मुंह से ऊई … निकल गयी और मैं ऊपर को खिसक गयी जिससे उसका लंड बाहर निकल गया।

अजय अब थोड़ा और पास आया और दुबारा लंड डालने लगा.
पर मुझे दर्द होने लगा था तो मैं उसे स्सी … स्सी … करते हुए रोकने लगी।

अजय बोला- यार, थोड़ा दर्द तो बर्दाश्त करना पड़ेगा, वरना आगे का मजा कैसे आयेगा।
मैंने उसकी बात समझते हुए थोड़ा स्थिर रहने का निश्चय किया और कहा- ठीक है, अब नहीं हिलूंगी. पर धीरे धीरे डालना।

अब मैंने अपने घुटने मोड़ रखे थे. अजय ने उन्हें हाथ से पकड़ लिया और लंड को मेरी चूत पे सटाया।
फिर उसने एक हाथ से हल्का सा अंदर सरकाया और फिर से मेरे घुटनों को पकड़ लिया।

अजय
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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RE: लंड की लालसा - by neerathemall - 26-03-2025, 01:10 PM



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