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लंड की लालसा
#10
मैं ऐसे ही कपड़ों में अपनी चूत को उसके लंड पे ऊपर नीचे घिसते हुए उसके होंठों को चूस रही थी।
कमरे में हल्की हल्की साँसों की और चप चप की आवाज आ रही थी।

थोड़ी देर में मुझे अहसास हुआ कि मेरी चूत में और पैंटी में हल्की हल्की नमी सी आने लगी है और अजय का लंड पूरा खड़ा हो चुका है।

जब उसके होंठों को किस कर के मेरा मन भर गया तो मैं उसके ऊपर से उठ गयी।

अब तो मुझसे एक पल भी नहीं रुका जा रहा था, मैंने तुरंत ही अपनी चोली को पीछे हाथ दे कर खोल दिया और आगे को उतार दी और साइड में फेक दी।

मेरी सफ़ेद ब्रा में फसे मेरे बूब्स सख्त हो चुके थे और बाहर निकलने को तड़प रहे थे।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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RE: लंड की लालसा - by neerathemall - 26-03-2025, 01:08 PM



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