04-03-2025, 05:49 PM
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अब आगे भाग...... एक विदेशी मेहमान
मैं आपकी शालिनी , झारखंड से एक बार फिर आपके के लिए एक और रोमांचक किस्से लेकर आई हूँ। ताकि आपको ज़्यादा मज़ा आए, तो मजा लीजिए…
मेरी जिंदगी में किसी भी चीज की कमी नहीं है। पति से मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूँ, कभी-किसी गैर मर्द की तरफ देखने की ज़रूरत नहीं पड़ी, पर दिल में कभी-कभी एक ख़याल आता था कि अगर कोई गैर मर्द मेरे साथ करे तो क्या मैं कर पाऊँगी..!
मैं यह कैसे एड्जस्ट कर पाऊँगी कि मेरा बदन जो सिर्फ़ मेरे पति की अमानत है, उसे कोई और छुए, कोई और उसका मज़ा ले।
खैर.. ना कभी ऐसी ज़रूरत आन पड़ी, ना ही मैंने किसी और को लाइन दी, हालांकि हमारे कई जानने वाले मुझ पर फिदा थे, जो उनके हाव-भाव से पता लग जाता था।
बात करीब दो साल पहले की है, मेरे पति के साथ कोई स्पेन की कंपनी द्वारा भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपनी खोलने के सिलसिले में बातचीत चल रही थी और इसी सिलसिले में वहाँ की कंपनी की मालकिन निकोल और उसका बेटा जॉनसन , भारत आए हुए थे।
निकोल करीब 50-55 साल की लंबी-चौड़ी लेडी थी जबकि जॉनसन दुबला-पतला करीब 23 साल का नौजवान था
उनदोनों की सारी जिम्मेदारी मेरी पति की थी हमने उनके ठहरने का प्रबंध एक बढ़िया होटल में कर दिया था। वो करीब 15-20 दिन के लिए आए थे।
एक दिन मेरे पति ने मुझसे कहा- शालिनी , तुम मेरा एक काम कर दोगी?
शालिनी : ‘क्या काम है?’
अरविंद : ‘अरे , वो जॉनसन हमारी बिजनेस मीटिंग से बोर हो गया है, क्या तुम उसे कहीं घुमाकर ला सकती हो?’
शालिनी : ‘ यह तो मेरा काम थोड़े है, मुझे स्पैनिश नहीं आती और उसे टूटी-फूटी इंग्लिश आती है, मुझसे नहीं होगा, अपने किसी और आदमी से कह दो!’
अरविंद : ‘अरे शालिनी , मैं उन्हें फैमिली मेंबर्स की तरह ट्रीट कर रहा हूँ, एक दिन की तो बात है… प्लीज़ समझा करो, तुम एक दिन बॉस बन सकती है उस कंपनी की , अगर हम उन्हें इंप्रेस कर सके तो..!’
यह कहकर पति ने मुझे मना ही लिया।
अगले दिन हम सब उनकी कंपनी साइट पर सुबह 9 बजे मिले। मैंने एक काली और सफ़ेद मिक्स साड़ी पहनी थी, उसमें एक लो-कट और स्लीव्लैस ब्लाउज ।
जब तैयार होकर मैंने शीशे में देखा तो शीशे ने भी मेरी तारीफ की।
मेरे पति, मैं और जॉनसन इनोवा कार में बैठ गए । और कंपनी साइट के लिए निकल गए ।
मैंने जॉनसन की पसंद को ध्यान में रखते हुए मैं कुछ खाने-पीने का सामान साथ में ही ले आई थी, पति ने गाड़ी स्टार्ट की और हम चल पड़े। करीब दो घंटे का सफ़र था गाड़ी में बातें करते-करते जा रहे थे , मुझे जॉनसन से बात करना अच्छा लगता था ।
थोड़ी देर बात करने के बाद मैं और जॉनसन अच्छे दोस्त बन गए और खूब हँसते- बोलते हमारे कंपनी के फार्म हाउस पर पहुँच गए। गाड़ी अन्दर लगाकर चौकीदार को कुछ ठंडा लाने को कहा।
एक-एक ड्रिंक पीकर हमने अपनी खाने-पीने की बास्केट और बिछावन उठाई और पैदल ही चल पड़े। हमारे फार्म हाउस की बिल्डिंग से काफ़ी दूर हम एक ट्यूबबेल पर पहुँचे। ट्यूबबेल के आस-पास काफ़ी घने छायादार पेड़ लगे थे। मैंने वहाँ ज़मीन पर मैट बिछाई, एक साइड में बास्केट रखी और बैठ गई, जॉनसन भी बैठ गया।
फिर उसने पूछा- क्या यह ट्यूबबेल चलता है?
‘हाँ.. बिल्कुल, चला दूँ क्या?’
‘ओह यस, ट्यूबबेल में नहाने का तो मज़ा ही कुछ और है!’
‘पर तुम तो घर से नहाकर ही आए हो!’
‘तो क्या हुआ, फिर से सही..!’
मैंने ट्यूबबेल ऑन कर दिया, पानी की एक मोटी धार हौद में गिरने लगी, जॉनसन ने झट से कपड़े उतारे और हौद में कूद गया।
मुझे यह देखकर बड़ी हैरानी हुई कि उसने मेरे वहाँ होने की कोई शर्म नहीं की, एकदम से बिल्कुल नंगा होकर हौद में कूद गया।
मैंने सोची कि स्पेन में जहाँ न्यूडिस्ट बीच हैं, वहां नंगे होने की क्या कोई शर्म करता होगा, शायद इसीलिए इसने ये सोचा ही नहीं कि उसके साथ एक औरत भी है।
पर मेरी बड़ी हैरानी यह थी कि सोई हुई हालत में भी उसका लंड इतना बड़ा था, जितना मेरे पति का पूरा तनकर होता था।
मैं यह सोच रही थी कि खड़ा होकर इसका कितना बड़ा होता होगा। पर इन सब बातों से बेखबर वो पानी के हौद में डुबकियाँ लगा-लगा कर नहा रहा था।
तभी उसने आवाज़ लगाई- हे शालिनी … क्या तुम पीने के लिए बियर भी लाई हो?
‘हाँ, चाहिए तुम्हें?’
‘ओह यस, एक देना प्लीज़!’
मैंने बास्केट में से एक बियर का कैन निकाला और लेकर जॉनसन के पास गई, वो गले तक पानी में था, पर साफ़ पानी में से वो पूरा नंगा दिख रहा था। मैंने बियर देते वक़्त एक बार फिर उसके लौड़ा को देखी , जो पानी की वजह से ऊपर उठा हुआ था। सच कहूँ तो मेरा मन बेईमान हो चला था। मैं बियर देकर वहीं रुक गई और हौद की मुंडेर पर कोहनियाँ टिका कर खड़ी हो गई।
इस तरह खड़े होने से मेरे दो चुचियों के बीच गैप ( क्लीवेज ) बन गया, जो बिल्कुल जॉनसन के सामने था और मेरे गैप ( क्लीवेज ) को जॉनसन ने 2-3 बार बड़े गौर से भी देखा, पर उसने घूरा नहीं।
बियर पीते-पीते जॉनसन ने कहा- शालिनी , तुम भी आ जाओ, बड़े मज़े का ठंडा पानी है और ठंडी बियर!
अरे नहीं, मैं बिकिनी लेकर नहीं आई हुं !’
‘तो क्या हुआ, बिकिनी पहनने की ज़रूरत ही क्या है, ऐसे ही चली आओ!’
मैंने मुस्कुरा के टाल दिया और वापिस आकर मैट (बिछावन) पर बैठ गई। बैठते वक़्त मैंने अपने कंधे पर लगा ब्रोच निकाल दिया जिससे मेरी साड़ी का पल्लू जो बँधा हुआ था, अब खुल गया। शायद जॉनसन को मेरा पूरा ( गैप ) क्लीवेज के दर्शन हो गए ।
मैंने मोबाइल पर गाने लगा लिए, पर मेरे मन को मेरे पसन्दीदा गाने भी अच्छे नहीं लग रहे थे क्योंकि मेरे दिमाग़ में तो बस जॉनसन का लौड़ा ही घूम रहा था। 4-5 मिनट बाद जॉनसन बाहर निकल कर आ गया और ऐसे ही बिल्कुल नंगा ही मेरे पास आकर लेट गया।
‘अ..हा..या, मज़ा आ गया, इंडिया इस ग्रेट.. अब थोड़ी देर धूप सेंकी जाए..!’
यह कहकर उसने आँखों पर कपड़ा रखा और टाँगें फैलाकर लेट गया। उसका लौड़ा अब मेरे सामने था और मेरी करीब था, मैं जब चाहे उसे पकड़ सकती थी, चूम सकती थी पर मैंने ऐसा नहीं किया। जब वो लेट गया तो मैं भी लेट गई।
मेरी साड़ी का पल्लू मेरी गोद में था और मेरे चुचियों मेरे लो-कट ब्लाउज से बाहर झाँक रहे थे।
‘शालिनी, क्या तुम यहाँ कभी नहाई हो?’ उसने पूछा।
‘हाँ..बहुत बार..!’
‘अकेली या अपने पति के साथ?’
‘पति के साथ!’
‘फिर तो बिकिनी भी नहीं पहनती होगी?’
‘नहीं, हम तो खुल्लम-खुल्ला नहाते हैं!’
‘उसके बाद?’
‘उसके बाद हम खेतों में घुमने जाते हैं!’
‘खेतों में क्या करते हो?’
‘शट-अप जॉनसन , यह हमारा प्राइवेट मामला है!’
‘अरे मैंने तो वैसे ही पूछ लिया!’
‘खेतों में क्या करेंगे, जो किया जा सकता है वो ही करते हैं!’
‘मतलब सेक्स!’
‘हाँ, पर तुम ये सब क्यों पूछ रहे हो?’
मैं आपकी शालिनी , झारखंड से एक बार फिर आपके के लिए एक और रोमांचक किस्से लेकर आई हूँ। ताकि आपको ज़्यादा मज़ा आए, तो मजा लीजिए…
मेरी जिंदगी में किसी भी चीज की कमी नहीं है। पति से मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूँ, कभी-किसी गैर मर्द की तरफ देखने की ज़रूरत नहीं पड़ी, पर दिल में कभी-कभी एक ख़याल आता था कि अगर कोई गैर मर्द मेरे साथ करे तो क्या मैं कर पाऊँगी..!
मैं यह कैसे एड्जस्ट कर पाऊँगी कि मेरा बदन जो सिर्फ़ मेरे पति की अमानत है, उसे कोई और छुए, कोई और उसका मज़ा ले।
खैर.. ना कभी ऐसी ज़रूरत आन पड़ी, ना ही मैंने किसी और को लाइन दी, हालांकि हमारे कई जानने वाले मुझ पर फिदा थे, जो उनके हाव-भाव से पता लग जाता था।
बात करीब दो साल पहले की है, मेरे पति के साथ कोई स्पेन की कंपनी द्वारा भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपनी खोलने के सिलसिले में बातचीत चल रही थी और इसी सिलसिले में वहाँ की कंपनी की मालकिन निकोल और उसका बेटा जॉनसन , भारत आए हुए थे।
निकोल करीब 50-55 साल की लंबी-चौड़ी लेडी थी जबकि जॉनसन दुबला-पतला करीब 23 साल का नौजवान था
उनदोनों की सारी जिम्मेदारी मेरी पति की थी हमने उनके ठहरने का प्रबंध एक बढ़िया होटल में कर दिया था। वो करीब 15-20 दिन के लिए आए थे।
एक दिन मेरे पति ने मुझसे कहा- शालिनी , तुम मेरा एक काम कर दोगी?
शालिनी : ‘क्या काम है?’
अरविंद : ‘अरे , वो जॉनसन हमारी बिजनेस मीटिंग से बोर हो गया है, क्या तुम उसे कहीं घुमाकर ला सकती हो?’
शालिनी : ‘ यह तो मेरा काम थोड़े है, मुझे स्पैनिश नहीं आती और उसे टूटी-फूटी इंग्लिश आती है, मुझसे नहीं होगा, अपने किसी और आदमी से कह दो!’
अरविंद : ‘अरे शालिनी , मैं उन्हें फैमिली मेंबर्स की तरह ट्रीट कर रहा हूँ, एक दिन की तो बात है… प्लीज़ समझा करो, तुम एक दिन बॉस बन सकती है उस कंपनी की , अगर हम उन्हें इंप्रेस कर सके तो..!’
यह कहकर पति ने मुझे मना ही लिया।
अगले दिन हम सब उनकी कंपनी साइट पर सुबह 9 बजे मिले। मैंने एक काली और सफ़ेद मिक्स साड़ी पहनी थी, उसमें एक लो-कट और स्लीव्लैस ब्लाउज ।
जब तैयार होकर मैंने शीशे में देखा तो शीशे ने भी मेरी तारीफ की।
मेरे पति, मैं और जॉनसन इनोवा कार में बैठ गए । और कंपनी साइट के लिए निकल गए ।
मैंने जॉनसन की पसंद को ध्यान में रखते हुए मैं कुछ खाने-पीने का सामान साथ में ही ले आई थी, पति ने गाड़ी स्टार्ट की और हम चल पड़े। करीब दो घंटे का सफ़र था गाड़ी में बातें करते-करते जा रहे थे , मुझे जॉनसन से बात करना अच्छा लगता था ।
थोड़ी देर बात करने के बाद मैं और जॉनसन अच्छे दोस्त बन गए और खूब हँसते- बोलते हमारे कंपनी के फार्म हाउस पर पहुँच गए। गाड़ी अन्दर लगाकर चौकीदार को कुछ ठंडा लाने को कहा।
एक-एक ड्रिंक पीकर हमने अपनी खाने-पीने की बास्केट और बिछावन उठाई और पैदल ही चल पड़े। हमारे फार्म हाउस की बिल्डिंग से काफ़ी दूर हम एक ट्यूबबेल पर पहुँचे। ट्यूबबेल के आस-पास काफ़ी घने छायादार पेड़ लगे थे। मैंने वहाँ ज़मीन पर मैट बिछाई, एक साइड में बास्केट रखी और बैठ गई, जॉनसन भी बैठ गया।
फिर उसने पूछा- क्या यह ट्यूबबेल चलता है?
‘हाँ.. बिल्कुल, चला दूँ क्या?’
‘ओह यस, ट्यूबबेल में नहाने का तो मज़ा ही कुछ और है!’
‘पर तुम तो घर से नहाकर ही आए हो!’
‘तो क्या हुआ, फिर से सही..!’
मैंने ट्यूबबेल ऑन कर दिया, पानी की एक मोटी धार हौद में गिरने लगी, जॉनसन ने झट से कपड़े उतारे और हौद में कूद गया।
मुझे यह देखकर बड़ी हैरानी हुई कि उसने मेरे वहाँ होने की कोई शर्म नहीं की, एकदम से बिल्कुल नंगा होकर हौद में कूद गया।
मैंने सोची कि स्पेन में जहाँ न्यूडिस्ट बीच हैं, वहां नंगे होने की क्या कोई शर्म करता होगा, शायद इसीलिए इसने ये सोचा ही नहीं कि उसके साथ एक औरत भी है।
पर मेरी बड़ी हैरानी यह थी कि सोई हुई हालत में भी उसका लंड इतना बड़ा था, जितना मेरे पति का पूरा तनकर होता था।
मैं यह सोच रही थी कि खड़ा होकर इसका कितना बड़ा होता होगा। पर इन सब बातों से बेखबर वो पानी के हौद में डुबकियाँ लगा-लगा कर नहा रहा था।
तभी उसने आवाज़ लगाई- हे शालिनी … क्या तुम पीने के लिए बियर भी लाई हो?
‘हाँ, चाहिए तुम्हें?’
‘ओह यस, एक देना प्लीज़!’
मैंने बास्केट में से एक बियर का कैन निकाला और लेकर जॉनसन के पास गई, वो गले तक पानी में था, पर साफ़ पानी में से वो पूरा नंगा दिख रहा था। मैंने बियर देते वक़्त एक बार फिर उसके लौड़ा को देखी , जो पानी की वजह से ऊपर उठा हुआ था। सच कहूँ तो मेरा मन बेईमान हो चला था। मैं बियर देकर वहीं रुक गई और हौद की मुंडेर पर कोहनियाँ टिका कर खड़ी हो गई।
इस तरह खड़े होने से मेरे दो चुचियों के बीच गैप ( क्लीवेज ) बन गया, जो बिल्कुल जॉनसन के सामने था और मेरे गैप ( क्लीवेज ) को जॉनसन ने 2-3 बार बड़े गौर से भी देखा, पर उसने घूरा नहीं।
बियर पीते-पीते जॉनसन ने कहा- शालिनी , तुम भी आ जाओ, बड़े मज़े का ठंडा पानी है और ठंडी बियर!
अरे नहीं, मैं बिकिनी लेकर नहीं आई हुं !’
‘तो क्या हुआ, बिकिनी पहनने की ज़रूरत ही क्या है, ऐसे ही चली आओ!’
मैंने मुस्कुरा के टाल दिया और वापिस आकर मैट (बिछावन) पर बैठ गई। बैठते वक़्त मैंने अपने कंधे पर लगा ब्रोच निकाल दिया जिससे मेरी साड़ी का पल्लू जो बँधा हुआ था, अब खुल गया। शायद जॉनसन को मेरा पूरा ( गैप ) क्लीवेज के दर्शन हो गए ।
मैंने मोबाइल पर गाने लगा लिए, पर मेरे मन को मेरे पसन्दीदा गाने भी अच्छे नहीं लग रहे थे क्योंकि मेरे दिमाग़ में तो बस जॉनसन का लौड़ा ही घूम रहा था। 4-5 मिनट बाद जॉनसन बाहर निकल कर आ गया और ऐसे ही बिल्कुल नंगा ही मेरे पास आकर लेट गया।
‘अ..हा..या, मज़ा आ गया, इंडिया इस ग्रेट.. अब थोड़ी देर धूप सेंकी जाए..!’
यह कहकर उसने आँखों पर कपड़ा रखा और टाँगें फैलाकर लेट गया। उसका लौड़ा अब मेरे सामने था और मेरी करीब था, मैं जब चाहे उसे पकड़ सकती थी, चूम सकती थी पर मैंने ऐसा नहीं किया। जब वो लेट गया तो मैं भी लेट गई।
मेरी साड़ी का पल्लू मेरी गोद में था और मेरे चुचियों मेरे लो-कट ब्लाउज से बाहर झाँक रहे थे।
‘शालिनी, क्या तुम यहाँ कभी नहाई हो?’ उसने पूछा।
‘हाँ..बहुत बार..!’
‘अकेली या अपने पति के साथ?’
‘पति के साथ!’
‘फिर तो बिकिनी भी नहीं पहनती होगी?’
‘नहीं, हम तो खुल्लम-खुल्ला नहाते हैं!’
‘उसके बाद?’
‘उसके बाद हम खेतों में घुमने जाते हैं!’
‘खेतों में क्या करते हो?’
‘शट-अप जॉनसन , यह हमारा प्राइवेट मामला है!’
‘अरे मैंने तो वैसे ही पूछ लिया!’
‘खेतों में क्या करेंगे, जो किया जा सकता है वो ही करते हैं!’
‘मतलब सेक्स!’
‘हाँ, पर तुम ये सब क्यों पूछ रहे हो?’


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