23-02-2025, 11:55 AM
(This post was last modified: 10-10-2026, 09:06 PM by Puja3567853. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
मुझे उसकी गालियों की कोई परवाह नहीं थी। जब मैंने यह महसूस किया कि अब वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी है तो मैंने नया पैंतरा आज़माया।
मैं उठकर खड़ा हुआ और बोला- शालिनी चल उठ और बेड के बिल्कुल सेंटर में लेट! ‘क्यों.. क्या.. करोगे.. भी अब मेरे साथ?’
‘नहीं थोड़ा आराम से चाटूँगा, पर अगर तू बोलेगी तो तुझे चोद भी दूँगा, पर अभी तो सिर्फ़ तेरी चूत का पानी पीना है… और वो भी आराम से मज़े ले-ले कर..!’
शालिनी खिसककर पीछे हुई और बिस्तर के बीच में चली गई।
मैंने अपने जूते उतारे और बेड पर शालिनी से उलट डायरेक्शन में लेट गया यानी कि मेरा सर उसकी टाँगों में था और उसका सर मेरी टाँगों के पास था।
इसी पोज़ मैंने उसे अपने ऊपर लेटा लिया और उसकी चूत मेरे मुँह के ऊपर आ गई और उसने अपना सर मेरे लंड पर टिका लिया जो मेरी पैन्ट में क़ैद हुआ फुँफकार रहा था।
खैर.. जब मैंने दोबारा शालिनी की चूत चाटनी शुरू की, तो उसकी चूत से जो भी पानी टपकता वो सीधा मेरे मुँह में आ रहा था।
थोड़ी देर बाद बिना मेरे कहे शालिनी ने मेरी पैन्ट खोली और चड्डी समेत नीचे सरका दी और मेरा तना हुआ लंड आज़ाद हो गया।
शालिनी ने उसे हाथ में पकड़ा और अपने खूबसूरत मरून रंग से रंगे हुए होंठों में पकड़ लिया।
अब मैं उसकी चूत चाट रहा था और वो ज़ोर-ज़ोर से मेरा लंड चूस रही थी। ज़ोर-ज़ोर से सर हिलने से उसके सारे बाल बिखर गए।
वो तो इतनी जोश में आ गई कि मेरा पूरा लंड मुँह में लेकर आगे-पीछे कर रही थी और मुझे लेटे-लेटे उसका मुँह चोदने का मज़ा मिल रहा था।
यह दौर चलता रहा। जब उसने अपने मुँह में साथ अपनी कमर भी ज़ोर-ज़ोर से हिलानी शुरू कर दी।
मैं समझ गया कि अब साली अपने चरम पर आ गई है और वो ही हुआ।
उसने तड़पकर अपनी दोनों जांघों को कस लिया और मेरा मुँह अपनी चूत के साथ भींच लिया।
मेरा सारा लंड उसके मुँह में उसके गले तक उतर चुका था।
मैं भी इस जोश को बर्दाश्त ना कर सका और उसके मुँह में ही झड़ गया। मेरा माल सीधा उसके गले से उसके पेट में उतर गया।
दो मिनट पूरी शान्ति से हम वैसे ही लेटे रहे। फिर वो उठी, मेरा लंड अपने मुँह से निकाला।
मेरा मुँह अपनी जाँघों से आज़ाद किया और अपने कपड़े ठीक किए, फिर बाथरूम में चली गई।
फ्रेश को कर वो सीधी नीचे ब्यूटीशियन के पास चली गई।
मेरा सारा नशा उतर चुका था। मैं भी ठीक-ठाक होकर नीचे चला गया और शादी में मसरूफ़ हो गया।
उसके बाद मैं और शालिनी एक-दूसरे के सामने नहीं आए।
शादी संपन्न हो गई और हम सब अपने-अपने घर आ गए।
उसके बाद मैंने फिर से शालिनी से बात करने की कोशिश की कि चलो दोबारा कुछ करते हैं, पर उसने कोई मौक़ा नहीं दिया।
आज 6 महीने गुज़र चुके हैं और वो अपने घर में खुश है और मैं अपने घर में उसकी याद में कभी-कभी मुट्ठ मार लेता हूँ कि कभी तो शालिनी मेरे नीचे आएगी।
मैं उठकर खड़ा हुआ और बोला- शालिनी चल उठ और बेड के बिल्कुल सेंटर में लेट! ‘क्यों.. क्या.. करोगे.. भी अब मेरे साथ?’
‘नहीं थोड़ा आराम से चाटूँगा, पर अगर तू बोलेगी तो तुझे चोद भी दूँगा, पर अभी तो सिर्फ़ तेरी चूत का पानी पीना है… और वो भी आराम से मज़े ले-ले कर..!’
शालिनी खिसककर पीछे हुई और बिस्तर के बीच में चली गई।
मैंने अपने जूते उतारे और बेड पर शालिनी से उलट डायरेक्शन में लेट गया यानी कि मेरा सर उसकी टाँगों में था और उसका सर मेरी टाँगों के पास था।
इसी पोज़ मैंने उसे अपने ऊपर लेटा लिया और उसकी चूत मेरे मुँह के ऊपर आ गई और उसने अपना सर मेरे लंड पर टिका लिया जो मेरी पैन्ट में क़ैद हुआ फुँफकार रहा था।
खैर.. जब मैंने दोबारा शालिनी की चूत चाटनी शुरू की, तो उसकी चूत से जो भी पानी टपकता वो सीधा मेरे मुँह में आ रहा था।
थोड़ी देर बाद बिना मेरे कहे शालिनी ने मेरी पैन्ट खोली और चड्डी समेत नीचे सरका दी और मेरा तना हुआ लंड आज़ाद हो गया।
शालिनी ने उसे हाथ में पकड़ा और अपने खूबसूरत मरून रंग से रंगे हुए होंठों में पकड़ लिया।
अब मैं उसकी चूत चाट रहा था और वो ज़ोर-ज़ोर से मेरा लंड चूस रही थी। ज़ोर-ज़ोर से सर हिलने से उसके सारे बाल बिखर गए।
वो तो इतनी जोश में आ गई कि मेरा पूरा लंड मुँह में लेकर आगे-पीछे कर रही थी और मुझे लेटे-लेटे उसका मुँह चोदने का मज़ा मिल रहा था।
यह दौर चलता रहा। जब उसने अपने मुँह में साथ अपनी कमर भी ज़ोर-ज़ोर से हिलानी शुरू कर दी।
मैं समझ गया कि अब साली अपने चरम पर आ गई है और वो ही हुआ।
उसने तड़पकर अपनी दोनों जांघों को कस लिया और मेरा मुँह अपनी चूत के साथ भींच लिया।
मेरा सारा लंड उसके मुँह में उसके गले तक उतर चुका था।
मैं भी इस जोश को बर्दाश्त ना कर सका और उसके मुँह में ही झड़ गया। मेरा माल सीधा उसके गले से उसके पेट में उतर गया।
दो मिनट पूरी शान्ति से हम वैसे ही लेटे रहे। फिर वो उठी, मेरा लंड अपने मुँह से निकाला।
मेरा मुँह अपनी जाँघों से आज़ाद किया और अपने कपड़े ठीक किए, फिर बाथरूम में चली गई।
फ्रेश को कर वो सीधी नीचे ब्यूटीशियन के पास चली गई।
मेरा सारा नशा उतर चुका था। मैं भी ठीक-ठाक होकर नीचे चला गया और शादी में मसरूफ़ हो गया।
उसके बाद मैं और शालिनी एक-दूसरे के सामने नहीं आए।
शादी संपन्न हो गई और हम सब अपने-अपने घर आ गए।
उसके बाद मैंने फिर से शालिनी से बात करने की कोशिश की कि चलो दोबारा कुछ करते हैं, पर उसने कोई मौक़ा नहीं दिया।
आज 6 महीने गुज़र चुके हैं और वो अपने घर में खुश है और मैं अपने घर में उसकी याद में कभी-कभी मुट्ठ मार लेता हूँ कि कभी तो शालिनी मेरे नीचे आएगी।


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)