23-02-2025, 11:33 AM
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यह कहकर उसने अपनी शर्ट और बनियान उतारी, फिर पैंट, बूट्स और ज़ुराबें भी उतार दीं, पर अन्डरवियर नहीं उतारा और कहा- इसका उदघाटन तुम करो।’
मुझे उसके अन्डरवियर में छुपा उसका मूसल जैसा लण्ड दिख रहा था। जब मैंने उसकी अन्डरवियर उतारी तो अन्दर से एक 8 इंच लम्बा मोटा, लोहे जैसा सख्त लण्ड बाहर निकला।
उसने अपने बाल साफ कर रखे थे जिस कारण उसका लण्ड और भी भयानक लग रहा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका लण्ड हाथ में पकड़ कर अपनी ओर खींचा और मुँह में लेकर चूसने लगी। रंजन मेरे बालों में हाथ फिरता रहा और धीरे-धीरे आगे-पीछे होकर मेरा मुँह चोदता रहा।
लण्ड चुसवाते-चुसवाते वह एक ओर झुका और मेरी साड़ी और पेटीकोट खोल कर उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैंने उसका लण्ड पकड़ा और उसे खींच कर अपने बिस्तर पर ले गई। वहाँ हमने 69 की स्थिति ले ली, मैंने उसके लण्ड को चूसा तो उसने भी अपनी पूरी जीभ मेरी चूत में डाल-डाल कर चाटी और 9-10 मिनटर के मुख-मैथुन में हम दोनों झड़ गए।
कुछ देर यूँ ही लेटे रहे फिर दोनों उठकर बाथरूम में गए, बाथ-टब में एक साथ नहाए। नहाकर तौलिये से एक-दूसरे के बदन को पोंछा और रंजन मुझे गोद में उठाकर बिस्तर पर ले आया।
जब उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया तो मैंने देखा कि उसका लण्ड फिर से अकड़ गया था। मैंने कहा- ये क्या कह रहा है?’
वो बोला- नाराज़ होकर अकड़ गया है कि मुझे मेरी सहेली से तो मिलाया ही नहीं, ख़ुद ही सारे मज़े ले लिए, मुझे तो मज़ा दिलाया ही नहीं !’
तो मैंने कहा- अरे भाई किसी को नाराज़ नहीं करना चाहिए, इसकी सहेली भी इससे मिलने को बेताब है, आओ दोनों को मिला दें।’
इतना सुनते ही रंजन छलाँग लगाकर मेरे ऊपर आ गया और फिर से मेरे होठों, गालों और चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। 2-4 मिनट की पूर्व-क्रिया के बाद मेरी चूत फिर से गीली हो गई। मैंने रंजन का कड़क लण्ड हाथ में पकड़ा, अपनी टाँगें चौड़ी कीं और उसका लण्ड अपनी चूत के मुँह पर रखा।
‘देखो, सहेली अपने यार का मुँह चूम रही है।’ मैंने कहा।
तो रंजन बोला- यार कहता है कि मैं तो सहेली के मुँह में ही घुस जाऊँगा,’ इतना कहकर रंजन ने धक्का लगाया और उसके लण्ड का सुपाड़ा मेरी चूत में घप्प से घुस गया और 2-4 शॉट्स में उसने पूरा लण्ड अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया।
मैंने देखा कि रंजन के चोदने में भी स्टाईल थी। सारा समय उसनी चुदाई एक ही गति से और लगातार की। थोड़ी देर के बाद उसने स्थित बदलने को कहा, अब उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा और पीछे से अपने लण्ड को मेरी चूत में डाल कर मुझे चोदा।
कुछ देर इस तरह से चोदने के बाद वह नीचे लेट गया और मुझे ऊपर आने को कहा, पर चोदा फिर भी उसी ने, मैंने ऊपर हवा में अपनी कमर रोक कर रखी और वह नीचे से झटके लगाता रहा। इसी दौरान मेरा जिस्म अकड़ गया और मैं झड़ गई पर वो लगा रहा। कभी दाईं ओर से, कभी बाईं ओर से, कभी मैं ऊपर, कभी वह ऊपर, चूस-चूस कर उसने मेरे होंठ सूजा दिए, पी-पीकर उसने मेरे निप्पल भी दुखा दिए पर वह झड़ने का नाम नहीं ले रहा था।
जब दो बार झड़ने के बाद मेरी चूत दुखने लगी तो मैंने कहा- अब झड़ भी जाओ यार, मेरी तो दुखने भी लगी है !’
वह बोला- बस काम होने ही वाला है बताओ कहा छुडाऊँ, चूत में, चूचियों पर, या मुँह में?’
मैंने कहा ‘जहाँ तुम चाहो !’
तो उसने कहा- तो ठीक है तेरी चूत में झड़ूँगा।
यह कहकर उसने अपनी गति बढ़ा दी और धाड़-धाड़ ज़ोरों से धक्के मार कर मुझे चोदने लगा।
मुझे दर्द तो हुआ पर मैं उसके मज़े को खराब नहीं कर सकती थी इसलिए दर्द सहती रही और 2 मिनट बाद ही उसने मेरे सिर के बाल ज़ोर से पकड़ लिए और मेरे निचले होंठ को ज़ोर से अपने होठों में भींच लिया और ताबड़तोड़ झटके लगता हुआ मेरी चूत में झड़ गया।
मैंने भी उसे कसके अपनी बाहों में जकड़ लिया, उसका बदन पसीने से भींगा हुआ था, साँस धौंकनी की तरह चल रही थी, दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
छूटने के बाद वो कितनी देर मेरे ऊपर ही लेटा रहा। मैं महसूस कर रही थी कि उसका कड़क लण्ड झड़ने के बाद मेरी चूस में ही धीरे-धीरे सिकुड़ रहा था। आखिर रंजन मेरे ऊपर से नीचे उतरा और मेरी बगल में लेट गया।
‘शालिनी , ज़िन्दगी में पहली बार इतना मज़ा आया, शायद नेट पर चैटिंग करते-करते तुम्हें चोदने की जो हसरत दिल में पैदा हो गई थी उसे पूरा होने की खुशी थी, पता नहीं क्या, पर बेहद मज़ा आया।’
मैं भी खुश थी, मैंने उसके होठों को किस किया और उठकर बाथरूम को जाते हुए बोली,’ एक बार और नहाया जाए?’
‘हाँ, पर नहाने के बाद एक दौर और चलाएँगे?’ उसने कहा।
तो मैंने आँखों से ‘हाँ’ का इशारा करके बाथरूम की ओर भागी तो वो भी उठा और मुझे पकड़ने के लिए मेरे पीछे भागा।
मुझे उसके अन्डरवियर में छुपा उसका मूसल जैसा लण्ड दिख रहा था। जब मैंने उसकी अन्डरवियर उतारी तो अन्दर से एक 8 इंच लम्बा मोटा, लोहे जैसा सख्त लण्ड बाहर निकला।
उसने अपने बाल साफ कर रखे थे जिस कारण उसका लण्ड और भी भयानक लग रहा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका लण्ड हाथ में पकड़ कर अपनी ओर खींचा और मुँह में लेकर चूसने लगी। रंजन मेरे बालों में हाथ फिरता रहा और धीरे-धीरे आगे-पीछे होकर मेरा मुँह चोदता रहा।
लण्ड चुसवाते-चुसवाते वह एक ओर झुका और मेरी साड़ी और पेटीकोट खोल कर उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैंने उसका लण्ड पकड़ा और उसे खींच कर अपने बिस्तर पर ले गई। वहाँ हमने 69 की स्थिति ले ली, मैंने उसके लण्ड को चूसा तो उसने भी अपनी पूरी जीभ मेरी चूत में डाल-डाल कर चाटी और 9-10 मिनटर के मुख-मैथुन में हम दोनों झड़ गए।
कुछ देर यूँ ही लेटे रहे फिर दोनों उठकर बाथरूम में गए, बाथ-टब में एक साथ नहाए। नहाकर तौलिये से एक-दूसरे के बदन को पोंछा और रंजन मुझे गोद में उठाकर बिस्तर पर ले आया।
जब उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया तो मैंने देखा कि उसका लण्ड फिर से अकड़ गया था। मैंने कहा- ये क्या कह रहा है?’
वो बोला- नाराज़ होकर अकड़ गया है कि मुझे मेरी सहेली से तो मिलाया ही नहीं, ख़ुद ही सारे मज़े ले लिए, मुझे तो मज़ा दिलाया ही नहीं !’
तो मैंने कहा- अरे भाई किसी को नाराज़ नहीं करना चाहिए, इसकी सहेली भी इससे मिलने को बेताब है, आओ दोनों को मिला दें।’
इतना सुनते ही रंजन छलाँग लगाकर मेरे ऊपर आ गया और फिर से मेरे होठों, गालों और चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। 2-4 मिनट की पूर्व-क्रिया के बाद मेरी चूत फिर से गीली हो गई। मैंने रंजन का कड़क लण्ड हाथ में पकड़ा, अपनी टाँगें चौड़ी कीं और उसका लण्ड अपनी चूत के मुँह पर रखा।
‘देखो, सहेली अपने यार का मुँह चूम रही है।’ मैंने कहा।
तो रंजन बोला- यार कहता है कि मैं तो सहेली के मुँह में ही घुस जाऊँगा,’ इतना कहकर रंजन ने धक्का लगाया और उसके लण्ड का सुपाड़ा मेरी चूत में घप्प से घुस गया और 2-4 शॉट्स में उसने पूरा लण्ड अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया।
मैंने देखा कि रंजन के चोदने में भी स्टाईल थी। सारा समय उसनी चुदाई एक ही गति से और लगातार की। थोड़ी देर के बाद उसने स्थित बदलने को कहा, अब उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा और पीछे से अपने लण्ड को मेरी चूत में डाल कर मुझे चोदा।
कुछ देर इस तरह से चोदने के बाद वह नीचे लेट गया और मुझे ऊपर आने को कहा, पर चोदा फिर भी उसी ने, मैंने ऊपर हवा में अपनी कमर रोक कर रखी और वह नीचे से झटके लगाता रहा। इसी दौरान मेरा जिस्म अकड़ गया और मैं झड़ गई पर वो लगा रहा। कभी दाईं ओर से, कभी बाईं ओर से, कभी मैं ऊपर, कभी वह ऊपर, चूस-चूस कर उसने मेरे होंठ सूजा दिए, पी-पीकर उसने मेरे निप्पल भी दुखा दिए पर वह झड़ने का नाम नहीं ले रहा था।
जब दो बार झड़ने के बाद मेरी चूत दुखने लगी तो मैंने कहा- अब झड़ भी जाओ यार, मेरी तो दुखने भी लगी है !’
वह बोला- बस काम होने ही वाला है बताओ कहा छुडाऊँ, चूत में, चूचियों पर, या मुँह में?’
मैंने कहा ‘जहाँ तुम चाहो !’
तो उसने कहा- तो ठीक है तेरी चूत में झड़ूँगा।
यह कहकर उसने अपनी गति बढ़ा दी और धाड़-धाड़ ज़ोरों से धक्के मार कर मुझे चोदने लगा।
मुझे दर्द तो हुआ पर मैं उसके मज़े को खराब नहीं कर सकती थी इसलिए दर्द सहती रही और 2 मिनट बाद ही उसने मेरे सिर के बाल ज़ोर से पकड़ लिए और मेरे निचले होंठ को ज़ोर से अपने होठों में भींच लिया और ताबड़तोड़ झटके लगता हुआ मेरी चूत में झड़ गया।
मैंने भी उसे कसके अपनी बाहों में जकड़ लिया, उसका बदन पसीने से भींगा हुआ था, साँस धौंकनी की तरह चल रही थी, दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
छूटने के बाद वो कितनी देर मेरे ऊपर ही लेटा रहा। मैं महसूस कर रही थी कि उसका कड़क लण्ड झड़ने के बाद मेरी चूस में ही धीरे-धीरे सिकुड़ रहा था। आखिर रंजन मेरे ऊपर से नीचे उतरा और मेरी बगल में लेट गया।
‘शालिनी , ज़िन्दगी में पहली बार इतना मज़ा आया, शायद नेट पर चैटिंग करते-करते तुम्हें चोदने की जो हसरत दिल में पैदा हो गई थी उसे पूरा होने की खुशी थी, पता नहीं क्या, पर बेहद मज़ा आया।’
मैं भी खुश थी, मैंने उसके होठों को किस किया और उठकर बाथरूम को जाते हुए बोली,’ एक बार और नहाया जाए?’
‘हाँ, पर नहाने के बाद एक दौर और चलाएँगे?’ उसने कहा।
तो मैंने आँखों से ‘हाँ’ का इशारा करके बाथरूम की ओर भागी तो वो भी उठा और मुझे पकड़ने के लिए मेरे पीछे भागा।


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