14-02-2025, 12:37 PM
(This post was last modified: 10-10-2026, 07:19 AM by Puja3567853. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
अब आगे......... कच्चा केला
यह बात तब की है जब मैं अपनी शादी के करीब छः महीने बाद अपनी छोटी मौसी के घर कुछ दिन रहने के लिए गई थी। मेरे पति को काम के सिलसिले में उड़ीसा जाना पड़ गया था और वो करीब दस दिन बाद आने वाले थे। इसलिए मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई और चार दिन बाद ही मेरी छोटी मौसी मुझे लेने आ गई और बोली शालिनी कुछ दिन हमारे साथ भी रह जा ! मैं भी फ्री थी सोची चलो मौसी के घर ही चलते हैं।
जब हम मौसी के घर पहुंचे तो मेरी स्वागत मौसी के बेटे अभिषेक और उसकी छोटी बेटी लुसी ने किया। मैं भी सभी से बड़ी गर्मजोशी से मिली, शाम को मौसा जी आये उन्होंने भी बड़ा प्यार दिया।
3 दिन बाद मौसी कपड़े धो रही थी तो उन्होंने कहा- अरे शालिनी ज़रा यह कपड़े छत पर सुखा आ !
मैं भी खाली बैठी थी, सोचा कि चलो थोड़ा काम ही कर लूं ! मैंने कपड़ों वाली बाल्टी उठाई और सुखाने के लिये छत पर चली गई। छत पर अभिषेक बैठा पढ़ रहा था। मैं बाल्टी से कपड़े निकाल निकाल कर लोहे की तार पर डाल रही थी। अचानक मुझे अहसास हुआ कि जैसे कोई मुझे बहुत घूर घूर के देख रहा हो।
मैंने देखा तो ये अभिषेक ही था। जब भी मैं कपड़े उठाने के लिए झुकती तो अभिषेक मेरे भरे भरे गुन्दाज चूची को बड़े धयान से देखता।
कपड़े सुखाते सुखाते मैंने अभिषेक से इधर उधर की बातें शुरू की तो वो भी पढ़ाई छोड़कर के मुझसे दिलचस्पी लेकर बातें करने लगा। जब कपड़े सूखने के लिए डाल दिए तो मैं जानबूझ कर अभिषेक के पास जा कर बैठ गई। मैंने दुपट्टा नहीं ओढ़ रखी थी इसलिए मेरी वक्ष-रेखा स्पष्ट रूप से दिख रही थी और अभिषेक की आँखें मेरे चूची पे गड़ी हुई थी। मैं भी शर्म न करते हुए उसके सामने ही चटाई पर उलटी लेट गई और उससे बातें करने लगी।
अब मेरे चूची को वो बड़े आराम से देख सकता था और मैं भी देख रही थी कि उसकी आँखें मेरे चूची से नहीं हट रही थी। फिर मैंने एक और शरारत की और बोली,” अभिषेक, तुम्हारा दिल १ मिनट में कितनी बार धड़कता है?”
वो बोला- 72 बार !
“पर मुझे लगता है जैसे मेरा दिल ज्यादा धड़कता है, कहीं मुझे हार्ट-अटैक तो नहीं आ जायेगा !” मैं बोली।
“अरे दीदी पागल हो गई हो क्या? इतनी छोटी सी उम्र में भी कहीं हार्ट-अटैक हो सकता है !” उसने जवाब दिया।
“अच्छा चलो, मुझे अपनी दिल की धड़कन सुनाओ !”
यह कहकर मैं अपना कान उसके सीने पर लगाकर उसके दिल की धड़कन सुनने का नाटक करने लगी।
एक मिनट बाद मैंने सर हटाकर कहा,” बिलकुल ठीक ! पूरे ७२ बार ! अब मेरी सुनो !”
जबकि मुझे उसके दिल की धड़कन बढ़ी हुई लगी थी। मैंने जानबूझ कर उसका सर पकड़कर अपने सीने पर इस तरह से रखा कि उसके होंठ मेरे चूची-रेखा को छूते रहें।
उसने कान मेरे सीने से लगा तो लिया पर मैं जानती थी कि उसकी हालत खराब हो रही थी।
उसके बाद सारा दिन कोई ख़ास बात नहीं हुई, पर अभिषेक बात-बे-बात मेरे आस पास ही मंडराता रहा।
रात को खाना खाने के बाद सोने से पहले दूध लेकर जब मौसी ऊपर अभिषेक के कमरे में जाने लगी तो मैंने उन्हें कहा,”मौसी ! लाइए, दूध मैं ले जाती हूँ और हाँ मेरा गिलास भी इसके साथ ही रख दीजिये, दूध पीकर मैं भी लुसी के साथ ही सो जाउंगी।” “ओ के बेटी ! ये लो, और गुड नाईट !”
“गुड नाईट !” कहकर तीन गिलास दूध लेकर मैं ऊपर चौबारे में अभिषेक और लुसी के कमरे में चली गई। ऊपर कमरे में बैठे दोनों अपने अपने बिस्तर पर बैठे पढ़ रहे थे। मैंने जाकर ऊंची आवाज़ में कहा,”दूध पियो भाई दूध पियो !”
दोनों ने मुस्कुराकर मेरी और देखा फिर हमने इकट्ठे बैठ कर दूध पिया और थोड़ी देर इधर उधर की बातें करके लाईट बंद कर दी और सोने लगे। पर मुझे तो नींद ही नहीं आ रही थी। अभी शादी को सिर्फ छः महीने ही हुए थे और पति दस दिन के लिए बाहर चले गए थे, अभी तो मेरा दिल भी नहीं भरा था।
मैं लेटी लेटी सोच रही थी और मेरे साथ लेटी लुसी तो गहरी नींद में थी। फिर मैंने देखा कि अभिषेक उठकर बाथरूम गया है और खिड़की से अन्दर आ रही चाँद की रौशनी उसके सारे बिस्तर पर पड़ रही थी। मैं चुपके से उठी और जाकर उसके बिस्तर पर लेट गई। जब अभिषेक आया तो मुझे वहां देखकर बोला,” अरे दीदी ! आप यहाँ? लुसी के पास नींद नहीं आई क्या?”
मैं बोली,”नहीं, पर मुझे चांदनी में सोना अच्छा लगता है।”
तो वो बोला,”ठीक है ! आप यहाँ सो जाओ, मैं वहां सो जाता हूँ।”
मैंने तभी पलटकर कहा,”अरे नहीं ! तुम भी यहीं आ जाओ मेरे पास !”
तो अभिषेक भी उसी बेड पर मेरे साथ लेट गया पर कुछ फासला बना कर !
यह बात तब की है जब मैं अपनी शादी के करीब छः महीने बाद अपनी छोटी मौसी के घर कुछ दिन रहने के लिए गई थी। मेरे पति को काम के सिलसिले में उड़ीसा जाना पड़ गया था और वो करीब दस दिन बाद आने वाले थे। इसलिए मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई और चार दिन बाद ही मेरी छोटी मौसी मुझे लेने आ गई और बोली शालिनी कुछ दिन हमारे साथ भी रह जा ! मैं भी फ्री थी सोची चलो मौसी के घर ही चलते हैं।
जब हम मौसी के घर पहुंचे तो मेरी स्वागत मौसी के बेटे अभिषेक और उसकी छोटी बेटी लुसी ने किया। मैं भी सभी से बड़ी गर्मजोशी से मिली, शाम को मौसा जी आये उन्होंने भी बड़ा प्यार दिया।
3 दिन बाद मौसी कपड़े धो रही थी तो उन्होंने कहा- अरे शालिनी ज़रा यह कपड़े छत पर सुखा आ !
मैं भी खाली बैठी थी, सोचा कि चलो थोड़ा काम ही कर लूं ! मैंने कपड़ों वाली बाल्टी उठाई और सुखाने के लिये छत पर चली गई। छत पर अभिषेक बैठा पढ़ रहा था। मैं बाल्टी से कपड़े निकाल निकाल कर लोहे की तार पर डाल रही थी। अचानक मुझे अहसास हुआ कि जैसे कोई मुझे बहुत घूर घूर के देख रहा हो।
मैंने देखा तो ये अभिषेक ही था। जब भी मैं कपड़े उठाने के लिए झुकती तो अभिषेक मेरे भरे भरे गुन्दाज चूची को बड़े धयान से देखता।
कपड़े सुखाते सुखाते मैंने अभिषेक से इधर उधर की बातें शुरू की तो वो भी पढ़ाई छोड़कर के मुझसे दिलचस्पी लेकर बातें करने लगा। जब कपड़े सूखने के लिए डाल दिए तो मैं जानबूझ कर अभिषेक के पास जा कर बैठ गई। मैंने दुपट्टा नहीं ओढ़ रखी थी इसलिए मेरी वक्ष-रेखा स्पष्ट रूप से दिख रही थी और अभिषेक की आँखें मेरे चूची पे गड़ी हुई थी। मैं भी शर्म न करते हुए उसके सामने ही चटाई पर उलटी लेट गई और उससे बातें करने लगी।
अब मेरे चूची को वो बड़े आराम से देख सकता था और मैं भी देख रही थी कि उसकी आँखें मेरे चूची से नहीं हट रही थी। फिर मैंने एक और शरारत की और बोली,” अभिषेक, तुम्हारा दिल १ मिनट में कितनी बार धड़कता है?”
वो बोला- 72 बार !
“पर मुझे लगता है जैसे मेरा दिल ज्यादा धड़कता है, कहीं मुझे हार्ट-अटैक तो नहीं आ जायेगा !” मैं बोली।
“अरे दीदी पागल हो गई हो क्या? इतनी छोटी सी उम्र में भी कहीं हार्ट-अटैक हो सकता है !” उसने जवाब दिया।
“अच्छा चलो, मुझे अपनी दिल की धड़कन सुनाओ !”
यह कहकर मैं अपना कान उसके सीने पर लगाकर उसके दिल की धड़कन सुनने का नाटक करने लगी।
एक मिनट बाद मैंने सर हटाकर कहा,” बिलकुल ठीक ! पूरे ७२ बार ! अब मेरी सुनो !”
जबकि मुझे उसके दिल की धड़कन बढ़ी हुई लगी थी। मैंने जानबूझ कर उसका सर पकड़कर अपने सीने पर इस तरह से रखा कि उसके होंठ मेरे चूची-रेखा को छूते रहें।
उसने कान मेरे सीने से लगा तो लिया पर मैं जानती थी कि उसकी हालत खराब हो रही थी।
उसके बाद सारा दिन कोई ख़ास बात नहीं हुई, पर अभिषेक बात-बे-बात मेरे आस पास ही मंडराता रहा।
रात को खाना खाने के बाद सोने से पहले दूध लेकर जब मौसी ऊपर अभिषेक के कमरे में जाने लगी तो मैंने उन्हें कहा,”मौसी ! लाइए, दूध मैं ले जाती हूँ और हाँ मेरा गिलास भी इसके साथ ही रख दीजिये, दूध पीकर मैं भी लुसी के साथ ही सो जाउंगी।” “ओ के बेटी ! ये लो, और गुड नाईट !”
“गुड नाईट !” कहकर तीन गिलास दूध लेकर मैं ऊपर चौबारे में अभिषेक और लुसी के कमरे में चली गई। ऊपर कमरे में बैठे दोनों अपने अपने बिस्तर पर बैठे पढ़ रहे थे। मैंने जाकर ऊंची आवाज़ में कहा,”दूध पियो भाई दूध पियो !”
दोनों ने मुस्कुराकर मेरी और देखा फिर हमने इकट्ठे बैठ कर दूध पिया और थोड़ी देर इधर उधर की बातें करके लाईट बंद कर दी और सोने लगे। पर मुझे तो नींद ही नहीं आ रही थी। अभी शादी को सिर्फ छः महीने ही हुए थे और पति दस दिन के लिए बाहर चले गए थे, अभी तो मेरा दिल भी नहीं भरा था।
मैं लेटी लेटी सोच रही थी और मेरे साथ लेटी लुसी तो गहरी नींद में थी। फिर मैंने देखा कि अभिषेक उठकर बाथरूम गया है और खिड़की से अन्दर आ रही चाँद की रौशनी उसके सारे बिस्तर पर पड़ रही थी। मैं चुपके से उठी और जाकर उसके बिस्तर पर लेट गई। जब अभिषेक आया तो मुझे वहां देखकर बोला,” अरे दीदी ! आप यहाँ? लुसी के पास नींद नहीं आई क्या?”
मैं बोली,”नहीं, पर मुझे चांदनी में सोना अच्छा लगता है।”
तो वो बोला,”ठीक है ! आप यहाँ सो जाओ, मैं वहां सो जाता हूँ।”
मैंने तभी पलटकर कहा,”अरे नहीं ! तुम भी यहीं आ जाओ मेरे पास !”
तो अभिषेक भी उसी बेड पर मेरे साथ लेट गया पर कुछ फासला बना कर !


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