28-01-2025, 03:31 PM
मैं घिसट कर खाला के पास पहुंची तो खाला की आँखें बंद थीं और उनका वीर्य और खून से लिसड़ा शरीर हरकत नहीं कर रहा था.
मुझे लगा कि वे मर गई हैं.
मैं रोने लगी लेकिन तभी उसने अपनी आँखें खोल दीं और मुस्कुराती हुई बोली- देखा, ये होती है असली चुदाई … इस पल को जी भर के जी ले क्यूंकि ये मजा जिंदगी में एक बार ही मिलता है!
तब मैं भी खाला के वीर्य से सने मम्मों पर सर रख कर लेट गई और इन भयंकर चुदाई वाले पलों को सोच सोच कर मजे लेने लगी.
जब भी मैं याद करती थी कि किस तरह उन लोगों ने मेरे मुंह में, चूत में, गांड में वीर्य की गर्म गर्म पिचकारियां मारीं तो मेरा दर्द कुछ कम हो जाता था.
कुछ देर हम ऐसे ही लेटी रही.
अँधेरा होने पर हम उठी और नंगी ही कार में जाकर बैठ गई.
मैंने पूछा- खाला, पानी तो नहीं पीना?
तो खाला बोली- नहीं रे, गले तक वीर्य भरा हुआ है, पानी पीने की बिलकुल जगह नहीं है.
हम दोनों ने हंसते हुए अपने बदन साफ़ किये और नए कपड़े पहन लिए.
मैंने पूछा- क्यों खाला, प्यास बुझी या बस छींटे ही पड़े?
खाला बोली- शबनम, आज तो छींटे नहीं बल्कि सुनामी पड़ी है मेरे ऊपर. यही चुदाई तो मैं चाहती थी हमेशा से. आज जाकर मेरे तन और मन को सच्ची राहत मिली है! यह चुदाई तो मुझे जिंदगी भर याद रहेगी. जाने अगली बार कब ऐसे पेट भर कर वीर्य पीने को मिलेगा।
मैंने कहा- आपके चक्कर में मेरी चूत और गांड भी पत्तागोभी जैसी हो गई, अब सारी जिंदगी आदमियों की जगह हाथियों से चुदवाना पड़ेगा।
खाला बोली- अरे अब तो मुझे लंड की जगह पूरा का पूरा आदमी ही अंदर घुसवाना पड़ेगा।
और हम दोनों हंसने लगी.
कई दिनों तक हमारे मुंह से लंड और वीर्य की महक आती रही और हमको अपनी चूत और गांड का इलाज करवाने के लिए सर्जन के पास भी जाना पड़ा.
कुछ दिन बाद पता चला कि खाला की माहवारी नहीं आई है.
डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि खाला माँ बनने वाली है.
स्कैन में पता चला एक साथ ग्यारह बच्चे पैदा होंगे.
खाला ने बताया कि आखरी बार उनके शौहर ने तो दो महीने पहले चोदा था.
इसके बाद चूत में बस दीनू काका का माल ही उतरा था.
इसका मतलब कि इन सभी बच्चों का बाप वे दीनू काका ही है.
अब समझ में आया कि पुराने समय में हिन्दुस्तान की औरतें सौ बच्चे कैसे पैदा कर लेती थीं.
उसी दिन रात को खाला ने अपने शौहर से अपनी चूत चुदवा ली और उसका माल अपनी चूत में ही गिरवा लिया.
अब सारी दुनिया यही समझती है कि खाला के शौहर ने ग्यारह बच्चे पैदा करवा दिए लेकिन बस मैं और खाला ही जानते हैं
मुझे लगा कि वे मर गई हैं.
मैं रोने लगी लेकिन तभी उसने अपनी आँखें खोल दीं और मुस्कुराती हुई बोली- देखा, ये होती है असली चुदाई … इस पल को जी भर के जी ले क्यूंकि ये मजा जिंदगी में एक बार ही मिलता है!
तब मैं भी खाला के वीर्य से सने मम्मों पर सर रख कर लेट गई और इन भयंकर चुदाई वाले पलों को सोच सोच कर मजे लेने लगी.
जब भी मैं याद करती थी कि किस तरह उन लोगों ने मेरे मुंह में, चूत में, गांड में वीर्य की गर्म गर्म पिचकारियां मारीं तो मेरा दर्द कुछ कम हो जाता था.
कुछ देर हम ऐसे ही लेटी रही.
अँधेरा होने पर हम उठी और नंगी ही कार में जाकर बैठ गई.
मैंने पूछा- खाला, पानी तो नहीं पीना?
तो खाला बोली- नहीं रे, गले तक वीर्य भरा हुआ है, पानी पीने की बिलकुल जगह नहीं है.
हम दोनों ने हंसते हुए अपने बदन साफ़ किये और नए कपड़े पहन लिए.
मैंने पूछा- क्यों खाला, प्यास बुझी या बस छींटे ही पड़े?
खाला बोली- शबनम, आज तो छींटे नहीं बल्कि सुनामी पड़ी है मेरे ऊपर. यही चुदाई तो मैं चाहती थी हमेशा से. आज जाकर मेरे तन और मन को सच्ची राहत मिली है! यह चुदाई तो मुझे जिंदगी भर याद रहेगी. जाने अगली बार कब ऐसे पेट भर कर वीर्य पीने को मिलेगा।
मैंने कहा- आपके चक्कर में मेरी चूत और गांड भी पत्तागोभी जैसी हो गई, अब सारी जिंदगी आदमियों की जगह हाथियों से चुदवाना पड़ेगा।
खाला बोली- अरे अब तो मुझे लंड की जगह पूरा का पूरा आदमी ही अंदर घुसवाना पड़ेगा।
और हम दोनों हंसने लगी.
कई दिनों तक हमारे मुंह से लंड और वीर्य की महक आती रही और हमको अपनी चूत और गांड का इलाज करवाने के लिए सर्जन के पास भी जाना पड़ा.
कुछ दिन बाद पता चला कि खाला की माहवारी नहीं आई है.
डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि खाला माँ बनने वाली है.
स्कैन में पता चला एक साथ ग्यारह बच्चे पैदा होंगे.
खाला ने बताया कि आखरी बार उनके शौहर ने तो दो महीने पहले चोदा था.
इसके बाद चूत में बस दीनू काका का माल ही उतरा था.
इसका मतलब कि इन सभी बच्चों का बाप वे दीनू काका ही है.
अब समझ में आया कि पुराने समय में हिन्दुस्तान की औरतें सौ बच्चे कैसे पैदा कर लेती थीं.
उसी दिन रात को खाला ने अपने शौहर से अपनी चूत चुदवा ली और उसका माल अपनी चूत में ही गिरवा लिया.
अब सारी दुनिया यही समझती है कि खाला के शौहर ने ग्यारह बच्चे पैदा करवा दिए लेकिन बस मैं और खाला ही जानते हैं
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
