28-01-2025, 03:28 PM
खाला मूत कर उठी और सलवार का नाड़ा बांधते बांधते मजदूरों की तरफ चली गई.
खाला ने उनसे कहा- हमें बहुत प्यास लगी है, क्या तुम लोग अपना पानी निकाल दोगे?
एक मजदूर ने पूछा- जी, क्या मतलब?
तो खाला बोली- मेरा मतलब, पानी दे दो पीने को!
एक मजदूर ने लोटे में पानी दिया तो खाला ने जानबूझ कर पानी पीते पीते अपने मम्मों पर पानी गिरा लिया.
खाला के गीले कपड़ों में से उसकी काली ब्रा दिखने लगी थी.
एक मजदूर बोला- अरे, आप तो गीली हो गईं।
खाला बोली- हाँ देखो ना, गीली भी हो गई और प्यास भी नहीं बुझी।
मजदूर मुस्कुराते हुए बोला- पीछे खेतों में बड़ा सा कुआं है, उधर आपकी प्यास बुझ जाएगी।
खाला बोली- ना बाबा, मुझे तो अकेले जाते डर लगता है. तुम सब लोग साथ चलो तो ही जाऊंगी।
मजदूर बोला- अरे मेडम, आपकी प्यास बुझाए बिना थोड़े ही छोड़ देंगे आपको, चलिए हम सब आपके साथ चलते हैं।
मैं भी कार से उतर कर खाला के पास आ गई तो मजदूर बोला- और ज्यादा आदमी बुलाने पड़ेंगे क्या?
खाला बोली- जितने ज्यादा आदमी होंगे उतना काम डर लगेगा, जितने आ सकते हैं बुला लो।
यह सुनकर मजदूर ने मुस्कुराते हुए आवाज लगाईं- अरे भीमा, मुन्ना, गुड्डा, छुट्टन, शादाब, लांड्या, हटेला, कटेला, सब लोग जल्दी से आओ, शहर वाली मैडमों की प्यास बुझानी है कुँए के पास!
आवाज सुनकर आस पास के खेतों से मजदूर दौड़ दौड़ कर कुँए के पास इकठ्ठा होने लगे और उनकी इतनी बड़ी तादाद देखकर मेरी तो गांड ही फट गई.
लेकिन खाला आज बड़ी खुश दिख रही थी.
ख़ुशी से ठुमकती हुई मेरी खाला कुएं की तरफ जाने लगी और पीछे पीछे मैं अपनी फटी गांड को समेटती हुई धीरे धीरे चल रही थी.
खाला कुँए के पास पहुंची तो एक लम्बे चौड़े मर्द ने आगे आकर कहा- मेडम, इस फ़ौज में से अपनी पसंद के लोग चुन लो, आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।
खाला बोली- मुझे भेदभाव पसंद नहीं है, सबको बराबर मौका मिलना चाहिए।
सुन कर उस आदमी की आँखें फटी की फटी रह गईं.
वह बोला- मेडम, आपके तो चीथड़े उड़ जाएंगे. कुछ आदमी कम कर लो।
खाला हंसती हुई बोली- अरे चीथड़े ही तो उड़वाने हैं. लेकिन तुम कहते हो तो चलो, पीछे खड़े वे दो बुड्ढे आदमी मेरे कम करके मेरी भांजी शबनम की तरफ भेज दो!
मैंने कहा- वाह छिनाल, खुद को ढेर साले मूसल और मुझे टूटे चम्मच? वे नहीं मुझे तो ये गबरू और इसका दोस्त चाहिए.
यह कह कर मैंने दो हट्टे कट्टे मर्दों को अपनी तरफ खींच लिया.
उन मर्दों में से एक ने मेरा दूध पकड़ना चाहा तो मैंने उसका हाथ झटकते हुए कहा- पहले खाला को शुरू हो जाने दो. फिर हम लोग शुरू करेंगे।
सारे मर्द दो जवानी के रस से भरी हुई खूबसूरत औरतों को मसल डालने के लिए पूरी तरह तैयार थे.
लेकिन मेरी खाला को कोई जल्दी नहीं थी.
उसने सब मर्दों से कहा- एक लाइन में आ जाओ और अपने कपड़े खोल लो!
सारे मर्द एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह नंगे होकर लाइन में खड़े हो गए.
मैंने देखा कि ज्यादातर के लंड बहुत बड़े और मोटे थे.
अब समझ में आया कि हिन्दुस्तान की आबादी इतनी तेजी से क्यों बढ़ती है.
मेरी खाला पहले आदमी के पास जाकर घुटने पर बैठ गई और उसका लंड चूम लिया … फिर दूसरे का, फिर तीसरे का … इस तरह मेरी खाला ने सभी मर्दों के लंड पर अपनी लिपस्टिक के निशान छोड़ दिए.
फिर पहले मर्द के पास आकर मेरी खाला ने उसका लंड मुंह में लेकर दो-तीन चुस्से मारे, फिर दूसरे का, फिर तीसरे का, इस तरह से मेरी खाला ने हर आदमी के लंड को दो-तीन चुस्से मारे.
खाला ने लंड चूस कर उन लोगों में ऐसी आग लगा दी कि ऐसा करते करते कुछ मर्दों का माल छूट गया और बेचारे लाइन से बाहर हो गए.
खाला ने उनसे कहा- हमें बहुत प्यास लगी है, क्या तुम लोग अपना पानी निकाल दोगे?
एक मजदूर ने पूछा- जी, क्या मतलब?
तो खाला बोली- मेरा मतलब, पानी दे दो पीने को!
एक मजदूर ने लोटे में पानी दिया तो खाला ने जानबूझ कर पानी पीते पीते अपने मम्मों पर पानी गिरा लिया.
खाला के गीले कपड़ों में से उसकी काली ब्रा दिखने लगी थी.
एक मजदूर बोला- अरे, आप तो गीली हो गईं।
खाला बोली- हाँ देखो ना, गीली भी हो गई और प्यास भी नहीं बुझी।
मजदूर मुस्कुराते हुए बोला- पीछे खेतों में बड़ा सा कुआं है, उधर आपकी प्यास बुझ जाएगी।
खाला बोली- ना बाबा, मुझे तो अकेले जाते डर लगता है. तुम सब लोग साथ चलो तो ही जाऊंगी।
मजदूर बोला- अरे मेडम, आपकी प्यास बुझाए बिना थोड़े ही छोड़ देंगे आपको, चलिए हम सब आपके साथ चलते हैं।
मैं भी कार से उतर कर खाला के पास आ गई तो मजदूर बोला- और ज्यादा आदमी बुलाने पड़ेंगे क्या?
खाला बोली- जितने ज्यादा आदमी होंगे उतना काम डर लगेगा, जितने आ सकते हैं बुला लो।
यह सुनकर मजदूर ने मुस्कुराते हुए आवाज लगाईं- अरे भीमा, मुन्ना, गुड्डा, छुट्टन, शादाब, लांड्या, हटेला, कटेला, सब लोग जल्दी से आओ, शहर वाली मैडमों की प्यास बुझानी है कुँए के पास!
आवाज सुनकर आस पास के खेतों से मजदूर दौड़ दौड़ कर कुँए के पास इकठ्ठा होने लगे और उनकी इतनी बड़ी तादाद देखकर मेरी तो गांड ही फट गई.
लेकिन खाला आज बड़ी खुश दिख रही थी.
ख़ुशी से ठुमकती हुई मेरी खाला कुएं की तरफ जाने लगी और पीछे पीछे मैं अपनी फटी गांड को समेटती हुई धीरे धीरे चल रही थी.
खाला कुँए के पास पहुंची तो एक लम्बे चौड़े मर्द ने आगे आकर कहा- मेडम, इस फ़ौज में से अपनी पसंद के लोग चुन लो, आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।
खाला बोली- मुझे भेदभाव पसंद नहीं है, सबको बराबर मौका मिलना चाहिए।
सुन कर उस आदमी की आँखें फटी की फटी रह गईं.
वह बोला- मेडम, आपके तो चीथड़े उड़ जाएंगे. कुछ आदमी कम कर लो।
खाला हंसती हुई बोली- अरे चीथड़े ही तो उड़वाने हैं. लेकिन तुम कहते हो तो चलो, पीछे खड़े वे दो बुड्ढे आदमी मेरे कम करके मेरी भांजी शबनम की तरफ भेज दो!
मैंने कहा- वाह छिनाल, खुद को ढेर साले मूसल और मुझे टूटे चम्मच? वे नहीं मुझे तो ये गबरू और इसका दोस्त चाहिए.
यह कह कर मैंने दो हट्टे कट्टे मर्दों को अपनी तरफ खींच लिया.
उन मर्दों में से एक ने मेरा दूध पकड़ना चाहा तो मैंने उसका हाथ झटकते हुए कहा- पहले खाला को शुरू हो जाने दो. फिर हम लोग शुरू करेंगे।
सारे मर्द दो जवानी के रस से भरी हुई खूबसूरत औरतों को मसल डालने के लिए पूरी तरह तैयार थे.
लेकिन मेरी खाला को कोई जल्दी नहीं थी.
उसने सब मर्दों से कहा- एक लाइन में आ जाओ और अपने कपड़े खोल लो!
सारे मर्द एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह नंगे होकर लाइन में खड़े हो गए.
मैंने देखा कि ज्यादातर के लंड बहुत बड़े और मोटे थे.
अब समझ में आया कि हिन्दुस्तान की आबादी इतनी तेजी से क्यों बढ़ती है.
मेरी खाला पहले आदमी के पास जाकर घुटने पर बैठ गई और उसका लंड चूम लिया … फिर दूसरे का, फिर तीसरे का … इस तरह मेरी खाला ने सभी मर्दों के लंड पर अपनी लिपस्टिक के निशान छोड़ दिए.
फिर पहले मर्द के पास आकर मेरी खाला ने उसका लंड मुंह में लेकर दो-तीन चुस्से मारे, फिर दूसरे का, फिर तीसरे का, इस तरह से मेरी खाला ने हर आदमी के लंड को दो-तीन चुस्से मारे.
खाला ने लंड चूस कर उन लोगों में ऐसी आग लगा दी कि ऐसा करते करते कुछ मर्दों का माल छूट गया और बेचारे लाइन से बाहर हो गए.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
