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कंचन
#14
उस रात जब वो मुझे पढ़ाने आई तो मैने देखा की उन्होनें एक सेक्सी सी नाइटी पहन रखी थी. नाइटी थोड़ी सी पारदर्शी थी. भाभी जब कुच्छ उठाने के लिए नीचे झुकी तो मुझे सॉफ नज़र आ रहा था की भाभी ने नाइटी के नीचे वोही गुलाबी रंग की कछि पहन रखी थी. झुकने की वजह से कछि की रूप रेखा सॉफ नज़र आ रही थी.मेरा अंदाज़ा सही था. कछि इतनी छ्होटी थी कि भाभी के भारी नितंबों के बीच की दरार में घुसी जा रही थी. मेरे लंड ने हरकत करनी शुरू कर दी. मुझसे ना रहा गया और मैं बोल ही पड़ा,

"भाभी अपने तो बताया नहीं लेकिन मुझे पता चल गया कि वो छ्होटी सी कछि किसकी थी."

" तुझे कैसे पता चल गया?" भाभी ने शरमाते हुए पूछा.

" क्योंकि वो कछि आपने इस वक़्त नाइटी के नीचे पहन रखी है."

" हट बदमाश! तू ये सब देखता रहता है?"

" भाभी एक बात पूछु? इतनी छ्होटी सी कछि में आप फिट कैसे होती हैं?" मैने हिम्मत जुटा कर पूच्छ ही लिया.

" क्यों मैं क्या तुझे मोटी लगती हूँ?"

" नहीं भाभी, आप तो बहुत ही सुंदर हैं. लेकिन आपका बदन इतना सुडोल और गाथा हुआ है, आपके नितंब इतने भारी और फैले हुए हैं की इस छ्होटी सी कछि में समा ही नहीं सकते. आप इसे क्यों पहनती हैं? यह तो आपकी जायदाद को च्छूपा ही नहीं सकती और फिर यह तो पारदर्शी है , इसमे से तो आपका सब कुच्छ दिखता होगा."

" चुप नलायक, तू कुच्छ ज़्यादा ही समझदार हो गया है. जब तेरी शादी होगी ना तो सब अपने आप पता लग जाएगा. लगता है तेरी शादी जल्दी ही करनी होगी, शैतान होता जा रहा है."

" जिसकी इतनी सुंदर भाभी हो वो किसी दूसरी लड़की के बारे में क्यों सोचने लगा?"

" ओह हो! अब तुझे कैसे समझाऊ? देख रामू, जिन बातों के बारे में तुझे अपनी बीवी से पता लग सकता है और जो चीज़ तेरी बीवी तुझे दे सकती है वो भाभी तो नहीं दे सकती ना? इसी लिए कह रही हूँ शादी कर ले."

" भाभी ऐसी क्या चीज़ है जो सिर्फ़ बीवी दे सकती है और आप नहीं दे सकती" मैने बहुत अंजान बनते हुए पूछा. अब तो मेरा लंड फंफनाने लगा था.

" मैं सब समझती हूँ चालाक कहीं का! तुझे सूब मालूम है फिर भी अंजान बनता है" भाभी लाजाते हुए बोली. " लगता है तुझे पढ़ना लिखना नहीं है, मैं सोने जा रही हूँ."

" लेकिन भैया ने तो आपको नहीं बुलाया" मैने शरारत भरे स्वर में पूछा. भाभी जबाब में सिर्फ़ मुस्कुराते हुए अपने कमरे की ओर चल दी. उनकी मस्तानी चाल, मटकते हुए भारी नितंब और दोनो चूतरो के बीच में पिस रही बेचारी कछि को देख कर मेरे लंड का बुरा हाल था.

अगले दिन भैया के ऑफीस जाने के बाद भाभी और मैं वरामदे में बैठे चाय पी रहे थे. इतने में सामने सड़क पर एक गाइ गुज़री. उसके पीछे पीछे एक भारी भरकम सांड़ हुंकार भरता हुआ आ रहा था. सांड़ का लंबा मोटा लंड नीचे झूल रहा था. सांड़ के लंड को देख कर भाभी के माथे पर पसीना छलक आया. वो उसके लंबे तगड़े लंड से नज़रें ना हटा सकी. इतने में सांड़ ने ज़ोर से हुंकार भरी और गाइ पर चढ़ कर उसकी योनि में पूरा का पूरा लंड उतार दिया. यह देख कर भाभी के मुँह से सिसकारी निकल गयी. वो सांड़ की रास लीला और ना देख सकी और शर्म के मारे अंडर भाग गयी. मैं भी पीछे पीछे अंडर गया. भाभी किचन में थी. मैने बहुत ही भोले स्वर में पूछा

" भाभी वो सांड़ क्या कर रहा था?"

" तुझे नहीं मालूम?" भाभी ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा.

" तुम्हारी कसम भाभी मुझे कैसे मालूम होगा ? बताइए ना." हालाँकि की भाभी को अच्छी तरह पता था कि मैं जान कर अंजान बन रहा हूँ लेकिन अब उसे भी मेरे साथ ऐसी बातें करने में मज़ा आने लगा था. वो मुझे समझाते हुए बोली

" देख रामू, सांड़ वोही काम कर रहा था जो एक मर्द अपनी बीवी के साथ शादी के बाद करता है."

" आपका मतलब है कि मर्द भी अपनी बीवी पर ऐसे ही चढ़ता है?"

" हाई राम! कैसे कैसे सवाल पूछता है. हां और क्या ऐसे ही चढ़ता है."

" ओह! अब समझा, भैया आपको रात में क्यों बुलाते हैं."

" चुप नालयक, ऐसा तो सभी शादीशुदा लोग करते हैं."

" जिनकी शादी नहीं हुई वो नहीं कर सकते?"

" क्यों नहीं कर सकते? वो भी कर सकते हैं, लेकिन….." मैं तपाक से बीच में ही बोल पड़ा

" वाह भाभी तब तो मैं भी आप पर चढ़…….." भाभी एकदम मेरे मुँह पर हाथ रख कर बोली " चुप, जा यहाँ से और मुझे काम करने दे." और यह कह कर उन्होनें मुझे किचन से बाहर धकेल दिया.

इस घटना के दो दिन के बाद की बात आयी. मैं छत पर पढ़ने जा रहा था. भाभी के कमरे के सामने से गुज़रते समय मैने उनके कमरे में झाँका. भाभी अपने बिस्तर पर लेटी हुई कोई नॉवेल पढ़ रही थी. उसकी नाइटी घुटनों तक उपर चढ़ि हुई थी. नाइटी इस प्रकार से उठी हुई थी कि भाभी की गोरी गोरी टाँगें, मोटी मांसल जंघें और जांघों के बीच में सफेद रंग की कछि सॉफ नज़र आ रही थी.मेरे कदम एकदम रुक गये और इस खूबसूरत नज़ारे को देखने के लिए मैं छुप कर खिरकी से झाँकेने लगा.यह कछि भी उतनी ही छ्होटी थी और बड़ी मुश्किल से भाभी की चूत को धक रही थी. भाभी की घनी काली झांटें दोनो तरफ से कछि के बाहर निकल रही थी. वो बेचारी छ्होटी सी कछि भाभी की फूली हुई चूत के उभार से बस किसी तरह चिपकी हुई थी. चूत की दोनो फांकों के बीच में दबी हुई कछि ऐसे लग रही थी जैसे हंसते वक़्त भाभी के गालों में डिंपल पड़ जातें हैं. अचानक भाभी की नज़र मुझ पर पढ़ गयी . उन्होनें झट से टाँगें नीचे करते हुए पूछा " क्या देख रहा है रामू"
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी  हम अकेले हैं.



thanks
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कंचन - by neerathemall - 30-04-2019, 08:03 AM
RE: कंचन - by neerathemall - 30-04-2019, 08:04 AM
RE: कंचन - by neerathemall - 30-04-2019, 08:10 AM
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RE: कंचन - by neerathemall - 23-01-2025, 01:50 PM
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RE: कंचन - by sri7869 - 25-01-2025, 07:10 PM



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