05-12-2024, 09:22 PM
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कुछ ही पलों में वो अपनी गांड उठा कर दोबारा से अमृत धारा छोड़ने लगी.
मैंने चाट चाट कर उसकी चूत के पानी को पीकर साफ कर दिया और उठ कर उसके होंठों को चूसने लगा.
उसके होंठों से होंठ लगाकर मैंने उसे उसकी चूत के अमृत का रस पिलाया.
वो अपनी चूत का रस पीकर मस्त हो गयी.
अब मैंने अपने लंड को उसके सामने कर दिया और उसे लंड चूसने के लिए तैयार किया.
थोड़ी देर तो ना नुकुर करती रही मगर फिर मान गई.
जब उसने मेरे लौड़े को चूसना शुरू किया तो मैं जनन्त में पहुंच गया.
अब मेरा लौड़ा अपने शवाब पर था.
मैंने बिना बताए अपना वीर्य उसके मुँह में भर दिया, जब तक उसके गले में नहीं उतरा, तब तक मैंने लौड़े को उसके मुँह में डाला रखा.
उसने इस बात पर बहुत गुस्सा किया लेकिन मेरे समझाने पर वो मान गयी.
दोनों का एक एक बार झड़ जाने के बाद मैं उसको अपनी बांहों में भर कर लेट गया और उसके होंठों का रसपान करने लगा.
उसकी चुचियों के निप्पलों को मरोड़ने लगा. कुछ ही देर में वो दोबारा से तैयार होने लगी.
मैं एक हाथ से दूध मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूत के दाने को मसलने लगा.
वो और पागल सी होकर अपने हाथों से मेरे लंड को सहलाने लगी, जिससे लंड पहले से और ज्यादा कड़क हो गया.
फिर मैंने देर करना उचित नहीं समझा, उसे बिस्तर में बीच में लाकर उसकी गांड के नीचे तकिया लगाकर चुदाई की पोजीशन बना ली.
मैंने उसकी टांगों को फ़ैलाया और उसके बीच में आ गया. अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर बार बार रगड़ कर उसे बेचैन करने लगा.
वो लंड के स्पर्श से आनन्द में आ गई थी.
तभी मैंने बिना बताए एक करारा धक्का लगाकर पूरा लंड एक बार में उसके भीतर पेल दिया.
लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा गई; उसकी एक तेज कामुक चीख निकल गई.
अगर उस समय घर पर कोई होता तो वो चीख सुनकर पक्का कमरे में आ जाता.
मेरे लंड ने भीतर जाने के बाद उसके दर्द को बहुत बढ़ा दिया था.
उसके दर्द को खत्म करने के लिए मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और उसके चूचियों के निप्पल को मसलने लगा.
कुछ ही देर में उसका दर्द सिसकियों में बदल गया. अब मैं धीरे धीरे चूत में लंड के धक्के लगाने लगा.
जब उसने गांड उठा कर खुद धक्के लगाने का अहसास दिखाया.
फिर मैंने अपने धक्कों की रफ्तार तेज कर दी जिससे लंड के धक्कों से उसकी सिसकारियां चीखों में बदल गयी.
लगातार 20 मिनट तक ताबड़तोड़ चोद कर उसके झड़ने की बेला आई तो उसने मुझे अपनी भुजाओं में एक बहुत मजबूती से जकड़ लिया और अपनी चूत की धारा से मेरे लंड को भिगोती हुई निहाल हो गयी.
उसके कुछ देर बाद मैं भी उसकी चूत में झड़ कर उसके ऊपर लेट गया, उसके होंठों को चूसने लगा.
उसने कहा- आज शादी के इतने साल बाद मुझे चुदाई में मजा आया.
उसके बाद उस रात हमने दो बार और चुदाई की.
कुछ ही पलों में वो अपनी गांड उठा कर दोबारा से अमृत धारा छोड़ने लगी.
मैंने चाट चाट कर उसकी चूत के पानी को पीकर साफ कर दिया और उठ कर उसके होंठों को चूसने लगा.
उसके होंठों से होंठ लगाकर मैंने उसे उसकी चूत के अमृत का रस पिलाया.
वो अपनी चूत का रस पीकर मस्त हो गयी.
अब मैंने अपने लंड को उसके सामने कर दिया और उसे लंड चूसने के लिए तैयार किया.
थोड़ी देर तो ना नुकुर करती रही मगर फिर मान गई.
जब उसने मेरे लौड़े को चूसना शुरू किया तो मैं जनन्त में पहुंच गया.
अब मेरा लौड़ा अपने शवाब पर था.
मैंने बिना बताए अपना वीर्य उसके मुँह में भर दिया, जब तक उसके गले में नहीं उतरा, तब तक मैंने लौड़े को उसके मुँह में डाला रखा.
उसने इस बात पर बहुत गुस्सा किया लेकिन मेरे समझाने पर वो मान गयी.
दोनों का एक एक बार झड़ जाने के बाद मैं उसको अपनी बांहों में भर कर लेट गया और उसके होंठों का रसपान करने लगा.
उसकी चुचियों के निप्पलों को मरोड़ने लगा. कुछ ही देर में वो दोबारा से तैयार होने लगी.
मैं एक हाथ से दूध मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूत के दाने को मसलने लगा.
वो और पागल सी होकर अपने हाथों से मेरे लंड को सहलाने लगी, जिससे लंड पहले से और ज्यादा कड़क हो गया.
फिर मैंने देर करना उचित नहीं समझा, उसे बिस्तर में बीच में लाकर उसकी गांड के नीचे तकिया लगाकर चुदाई की पोजीशन बना ली.
मैंने उसकी टांगों को फ़ैलाया और उसके बीच में आ गया. अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर बार बार रगड़ कर उसे बेचैन करने लगा.
वो लंड के स्पर्श से आनन्द में आ गई थी.
तभी मैंने बिना बताए एक करारा धक्का लगाकर पूरा लंड एक बार में उसके भीतर पेल दिया.
लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा गई; उसकी एक तेज कामुक चीख निकल गई.
अगर उस समय घर पर कोई होता तो वो चीख सुनकर पक्का कमरे में आ जाता.
मेरे लंड ने भीतर जाने के बाद उसके दर्द को बहुत बढ़ा दिया था.
उसके दर्द को खत्म करने के लिए मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया और उसके चूचियों के निप्पल को मसलने लगा.
कुछ ही देर में उसका दर्द सिसकियों में बदल गया. अब मैं धीरे धीरे चूत में लंड के धक्के लगाने लगा.
जब उसने गांड उठा कर खुद धक्के लगाने का अहसास दिखाया.
फिर मैंने अपने धक्कों की रफ्तार तेज कर दी जिससे लंड के धक्कों से उसकी सिसकारियां चीखों में बदल गयी.
लगातार 20 मिनट तक ताबड़तोड़ चोद कर उसके झड़ने की बेला आई तो उसने मुझे अपनी भुजाओं में एक बहुत मजबूती से जकड़ लिया और अपनी चूत की धारा से मेरे लंड को भिगोती हुई निहाल हो गयी.
उसके कुछ देर बाद मैं भी उसकी चूत में झड़ कर उसके ऊपर लेट गया, उसके होंठों को चूसने लगा.
उसने कहा- आज शादी के इतने साल बाद मुझे चुदाई में मजा आया.
उसके बाद उस रात हमने दो बार और चुदाई की.
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
